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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

यहेजकेल 46:1-24

सारांश

  • अलग-अलग मौकों पर चढ़ावे (1-15)

  • जब प्रधान विरासत में ज़मीन देगा (16-18)

  • बलिदान की चीज़ें पकाने की जगह (19-24)

46  “सारे जहान का मालिक यहोवा कहता है, ‘भीतरी आँगन के पूरब का दरवाज़ा+ काम-काज के छ: दिन+ बंद रखा जाए।+ मगर सब्त के दिन और नए चाँद के दिन उसे खोला जाए।  प्रधान दरवाज़े के बरामदे से होकर आएगा+ और दरवाज़े के खंभे के पास खड़ा होगा। याजक उसकी दी हुई पूरी होम-बलि और शांति-बलियाँ अर्पित करेंगे और प्रधान दरवाज़े की दहलीज़ पर झुककर दंडवत करेगा और फिर बाहर चला जाएगा। मगर इस दरवाज़े को शाम से पहले बंद नहीं करना चाहिए।  सब्त और नए चाँद के दिन उस दरवाज़े के प्रवेश के पास देश के लोग भी यहोवा के सामने झुककर दंडवत करेंगे।+  सब्त के दिन प्रधान, यहोवा को जो पूरी होम-बलि अर्पित करेगा, वह छ: नर मेम्नों और एक मेढ़े की होनी चाहिए जिनमें कोई दोष न हो।+  वह मेढ़े के साथ एपा-भर* अनाज का चढ़ावा देगा और नर मेम्नों के साथ अनाज का उतना चढ़ावा देगा जितना वह दे सकता है। और वह हर एपा चढ़ावे के साथ एक हीन* तेल देगा।+  नए चाँद के दिन वह झुंड में से एक बैल, छ: नर मेम्ने और एक मेढ़ा अर्पित करेगा। इन जानवरों में कोई दोष नहीं होना चाहिए।+  उसे बैल और मेढ़े के साथ एक-एक एपा अनाज का चढ़ावा देना होगा और नर मेम्नों के साथ वह अनाज का उतना चढ़ावा देगा जितना वह दे सकता है। उसे हर एपा चढ़ावे के साथ एक हीन तेल देना होगा।  जब-जब प्रधान को आना होता है, उसे दरवाज़े के बरामदे से होकर आना चाहिए और उसी रास्ते से वापस बाहर जाना चाहिए।+  और जब देश के लोग त्योहारों के दौरान यहोवा की उपासना करने उसके सामने आते हैं,+ तो उत्तरी दरवाज़े+ से अंदर आनेवालों को दक्षिणी दरवाज़े से बाहर जाना चाहिए+ और दक्षिणी दरवाज़े से आनेवालों को उत्तरी दरवाज़े से बाहर जाना चाहिए। किसी को भी उस दरवाज़े से वापस नहीं जाना चाहिए जिससे वह अंदर आता है। लोग जिस दरवाज़े से अंदर आते हैं, उसके सामनेवाले दरवाज़े से उन्हें बाहर जाना चाहिए। 10  और लोगों के बीच जो प्रधान है, उसे तब अंदर आना चाहिए जब लोग अंदर आते हैं और तब बाहर जाना चाहिए जब वे बाहर जाते हैं। 11  त्योहारों और ठहराए गए खास दिनों पर उसे बैल और मेढ़े के साथ एक-एक एपा अनाज का चढ़ावा देना चाहिए और नर मेम्नों के साथ अनाज का उतना चढ़ावा देना चाहिए जितना वह दे सकता है। और उसे हर एपा चढ़ावे के साथ एक हीन तेल देना चाहिए।+ 12  अगर प्रधान यहोवा को पूरी होम-बलि+ या शांति-बलियों की स्वेच्छा-बलि देना चाहता है, तो उसके लिए पूरब का दरवाज़ा खोला जाएगा। वह पूरी होम-बलि और शांति-बलियाँ उसी तरह लाकर देगा जैसे वह सब्त के दिन बलियाँ लाकर देता है।+ जब वह बाहर चला जाएगा तो दरवाज़ा बंद कर दिया जाए।+ 13  तू हर दिन यहोवा को पूरी होम-बलि चढ़ाने के लिए ऐसा नर मेम्ना देना, जो एक साल का हो और जिसमें कोई दोष न हो।+ ऐसा तू हर सुबह करना। 14  हर सुबह इस होम-बलि के साथ तू अनाज के चढ़ावे के लिए एपा का छठा हिस्सा मैदा और मैदे पर छिड़कने के लिए एक-तिहाई हीन तेल देना। यह नियमित तौर पर यहोवा को दिया जानेवाला अनाज का चढ़ावा है। यह नियम सदा तक लागू रहेगा। 15  इस तरह उन्हें हर सुबह नियमित तौर पर पूरी होम-बलि के लिए नर मेम्ना, अनाज का चढ़ावा और तेल देना चाहिए।’ 16  सारे जहान का मालिक यहोवा कहता है, ‘अगर प्रधान अपने बेटों में से हरेक को तोहफे में ज़मीन देता है कि वह उनकी विरासत बन जाए, तो वह ज़मीन उसके बेटों की हो जाएगी। वह ज़मीन उनकी जागीर बन जाएगी जो उन्हें विरासत में मिलती है। 17  लेकिन अगर वह अपने किसी दास को अपनी विरासत में से कुछ ज़मीन तोहफे में देता है, तो वह ज़मीन छुटकारे के साल तक दास की रहेगी।+ इसके बाद वह ज़मीन वापस प्रधान की हो जाएगी। सिर्फ उसके बेटों को दी गयी विरासत की ज़मीन हमेशा के लिए उनकी हो जाएगी। 18  प्रधान लोगों को उनकी विरासत की किसी ज़मीन से ज़बरदस्ती न निकाले और उनकी ज़मीन न हड़पे। उसे सिर्फ अपनी ज़मीन में से अपने बेटों को विरासत देनी चाहिए ताकि मेरे लोगों में से किसी को ज़बरदस्ती उसकी ज़मीन से न निकाला जाए।’” 19  इसके बाद वह मुझे उस दरवाज़े के पासवाले प्रवेश से ले आया+ जो उत्तर में याजकों के भोजन के पवित्र कमरों* की तरफ जाता है।+ वहाँ मैंने पीछे पश्‍चिम की तरफ एक जगह देखी। 20  उसने मुझे बताया, “यह वह जगह है जहाँ याजक दोष-बलि और पाप-बलि का गोश्‍त उबालेंगे और अनाज के चढ़ावे की रोटियाँ सेंकेंगे।+ वे इसी जगह पर यह सब पकाएँगे ताकि उन्हें कोई भी चीज़ बाहरी आँगन में न ले जानी पड़े और वे लोगों को पवित्र न करें।”+ 21  फिर वह मुझे बाहरी आँगन में ले गया और उसने मुझे आँगन के चारों कोनों में घुमाया। मैंने हर कोने में एक छोटा आँगन देखा। 22  चारों कोनों में चार छोटे आँगन थे। ये आँगन 40 हाथ* लंबे और 30 हाथ चौड़े थे। चारों आँगन एक ही नाप के थे। 23  इन आँगनों में चारों तरफ कगार बने थे* और कगारों के नीचे चढ़ावे की चीज़ें पकाने की जगह बनी थीं। 24  फिर उसने मुझे बताया, “इन जगहों में मंदिर के सेवक लोगों की दी हुई बलिदान की चीज़ें पकाते हैं।”+

कई फुटनोट

अति. ख14 देखें।
अति. ख14 देखें।
या “खानों।”
यह लंबे हाथ का माप है। अति. ख14 देखें।
या “कतारें बनी थीं।”