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यहोवा के साक्षी

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भजन 120:1-7

सारांश

  • एक परदेसी शांति के लिए तरसता है

    • ‘मुझे छली ज़बान से बचा ले’ (2)

    • “मैं शांति चाहता हूँ” (7)

चढ़ाई का गीत।* 120  मुसीबत में मैंने यहोवा को पुकारा+और उसने मुझे जवाब दिया।+   हे यहोवा, मुझे झूठ बोलनेवाले होंठों सेऔर छली ज़बान से बचा ले।   हे छली ज़बान, तू जानती है कि परमेश्‍वर तेरे साथ क्या करेगा?तुझे क्या सज़ा देगा?+   वह तुझ पर एक योद्धा के नुकीले तीरों+ से,झाड़ियों के जलते अंगारों+ से वार करेगा।   हाय मुझ पर,मुझे मेशेक+ में परदेसी बनकर रहना पड़ा है! केदार के डेरों+ में बसना पड़ा है!   शांति के दुश्‍मनों के बीच रहते हुए+मुझे एक ज़माना हो गया है।   मैं शांति चाहता हूँ, मगर जब मैं बोलता हूँतो वे लड़ाई के लिए उतारू हो जाते हैं।

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