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यहोवा के साक्षी

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नीतिवचन 6:1-35

सारांश

  • दूसरों का ज़ामिन बनने से बच (1-5)

  • “हे आलसी, चींटी के पास जा” (6-11)

  • निकम्मा और दुष्ट इंसान (12-15)

  • यहोवा को सात चीज़ों से नफरत है (16-19)

  • बुरी औरत से बच (20-35)

6  हे मेरे बेटे, अगर तूने किसी का कर्ज़ चुकाने का ज़िम्मा लिया है,*+अगर तूने किसी पराए से हाथ मिलाया है,*+   अगर तू वचन देकर फँस गया है,ज़बान देकर बँध गया है,+   तो हे मेरे बेटे, खुद को छुड़ाने के लिए ऐसा कर: नम्र होकर उस आदमी के पास जा और उसके आगे गिड़गिड़ा,क्योंकि तू उसके हाथ में पड़ चुका है।+   अपनी आँखों में नींद न आने दे,अपनी पलकों को झपकी न लेने दे,   खुद को छुड़ा ले, जैसे चिकारा खुद को शिकारी की पकड़ सेऔर पंछी खुद को बहेलिए के हाथ से छुड़ाता है।   हे आलसी,+ चींटी के पास जा,उसके तौर-तरीके देख और बुद्धिमान बन।   उसका न तो सेनापति होता है,न कोई अधिकारी, न ही शासक,   फिर भी वह गरमियों में अपने खाने का इंतज़ाम करती है,+कटनी के समय खाने की चीज़ें बटोरती है।   हे आलसी, तू कब तक पड़ा रहेगा? नींद से कब जागेगा? 10  थोड़ी देर और सो ले, एक और झपकी ले ले,हाथ बाँधकर थोड़ा सुस्ता ले,+ 11  तब गरीबी, लुटेरे की तरह तुझ पर टूट पड़ेगी,तंगी, हथियारबंद आदमी की तरह हमला बोल देगी।+ 12  निकम्मा और दुष्ट इंसान टेढ़ी-मेढ़ी बातें करता है,+ 13  बुरे इरादे से आँख मारता है,+पैरों और उँगलियों से इशारे करता है। 14  उसका मन कपट से भरा है,वह हमेशा बुरा करने की तरकीबें बुनता है+ और जहाँ जाता है झगड़े लगाता है।+ 15  इसलिए उस पर अचानक विपत्ति आ पड़ेगी,पल-भर में उसका ऐसा नाश होगा कि बचने की उम्मीद न होगी।+ 16  छ: चीज़ें हैं जिनसे यहोवा नफरत करता है,हाँ, सात चीज़ें हैं जिनसे वह घिन करता है: 17  घमंड से चढ़ी आँखें,+झूठ बोलनेवाली जीभ,+बेगुनाहों का खून करनेवाले हाथ,+ 18  साज़िश रचनेवाला दिल,+बुराई की तरफ दौड़नेवाले पैर, 19  बात-बात पर झूठ बोलनेवाला गवाह+और भाइयों में फूट डालनेवाला आदमी।+ 20  हे मेरे बेटे, अपने पिता की आज्ञाओं को मान,अपनी माँ से मिलनेवाली सीख को मत ठुकरा।+ 21  इन्हें अपने दिल में बिठा,अपने गले में बाँध। 22  जब तू चलेगा तो ये तेरी अगुवाई करेंगी,जब तू लेटेगा तो तुझ पर पहरा देंगी,जब तू जागेगा तो तुझसे बातें करेंगी।* 23  ये आज्ञाएँ तेरे लिए दीपक हैं,+ये कानून तेरे लिए रौशनी हैं+और तुझे सुधारने* के लिए दी गयी डाँट जीवन की ओर ले जाएगी।+ 24  ये बुरी औरत से तेरी हिफाज़त करेंगी,+बदचलन* औरत की चिकनी-चुपड़ी बातों से तुझे बचाएँगी।+ 25  उसकी खूबसूरती देखकर दिल में उसकी लालसा न करना+या जब वह सुंदर आँखों से लुभाए तो बहक न जाना, 26  क्योंकि वेश्‍या के पीछे जाकर इंसान रोटी का मोहताज हो जाता है,+मगर दूसरे की पत्नी के पीछे जाकर वह अपना अनमोल जीवन ही गँवा बैठता है। 27  क्या ऐसा हो सकता है कि एक आदमी अपने सीने पर आग रखे और उसके कपड़े न जलें?+ 28  या एक आदमी जलते अंगारों पर चले और उसके पैर न झुलसें? 29  दूसरे की पत्नी के साथ संबंध रखनेवाले का भी यही हाल होता है,उस औरत को छूनेवाला सज़ा से नहीं बचेगा।+ 30  लोग उस चोर को नहीं धिक्कारते,जो अपनी भूख मिटाने के लिए चोरी करता है, 31  फिर भी पकड़े जाने पर उसे सात गुना मुआवज़ा भरना पड़ता है,जो कुछ उसके घर में है, उसे देना पड़ता है।+ 32  व्यभिचार करनेवाले में समझ ही नहीं होती,*वह खुद पर बरबादी लाता है,+ 33  दर्द और अपमान के सिवा उसे कुछ नहीं मिलता,+उसकी बदनामी दूर नहीं होगी।+ 34  क्योंकि जलन एक पति का क्रोध भड़काती है,जब वह बदला लेगा तो कोई रहम नहीं करेगा,+ 35  कोई मुआवज़ा* कबूल नहीं करेगा,तू उसे कितना ही बड़ा तोहफा दे, उसका गुस्सा शांत नहीं होगा।

कई फुटनोट

शा., “तू किसी का ज़ामिन बना है।”
यानी उसकी मदद करने का वादा किया है।
या “तुझे सिखाएँगी।”
या “शिक्षा देने।”
शा., “परदेसी।”
शा., “में दिल नहीं होता।”
या “फिरौती।”