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यहोवा के साक्षी

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नीतिवचन 3:1-35

सारांश

  • बुद्धिमान बन, यहोवा पर भरोसा रख (1-12)

    • अनमोल चीज़ों से यहोवा का सम्मान कर (9)

  • बुद्धि खुशी देती है (13-18)

  • बुद्धि सुरक्षा देती है (19-26)

  • दूसरों के साथ सही व्यवहार (27-35)

    • भला कर सकता है, तो कर (27)

3  हे मेरे बेटे, मेरी सिखायी बातों को मत भूलनाऔर मेरी आज्ञाओं को पूरे दिल से मानना।   तब तेरी ज़िंदगी में बहुत-से दिन जुड़ जाएँगेऔर सालों तक तू चैन से जीएगा।+   अटल प्यार और सच्चाई को अपने से दूर मत करना,+ उन्हें अपने गले का हार बनानाऔर अपने दिल की पटिया पर लिखना,+   तब परमेश्‍वर और इंसान तुझसे खुश होंगेऔर कबूल करेंगे कि तुझमें अंदरूनी समझ है।+   तू अपनी समझ का सहारा न लेना,+बल्कि पूरे दिल से यहोवा पर भरोसा रखना,+   उसी को ध्यान में रखकर सब काम करना,+तब वह तुझे सही राह दिखाएगा।*+   खुद को बड़ा बुद्धिमान न समझना,+ यहोवा का डर मानना और बुराई से दूर रहना।   ऐसा करने से तेरा शरीर भला-चंगा रहेगाऔर तेरी हड्डियों को ताज़गी मिलेगी।   अपनी अनमोल चीज़ें देकर यहोवा का सम्मान करना,+अपनी उपज* का पहला फल* चढ़ाकर उसका आदर करना,+ 10  तब तेरे भंडार खूब भरे रहेंगे+और तेरे हौद नयी दाख-मदिरा से उमड़ते रहेंगे। 11  हे मेरे बेटे, यहोवा की शिक्षा मत ठुकराना,+उसकी डाँट से नफरत न करना,+ 12  क्योंकि यहोवा जिससे प्यार करता है उसको डाँटता भी है,+जैसे पिता उस बेटे को डाँटता है जिसे वह बेहद चाहता है।+ 13  सुखी है वह इंसान जो बुद्धि हासिल करता है,+सुखी है वह जो पैनी समझ को ढूँढ़ लेता है। 14  बुद्धि पाना चाँदी पाने से बेहतर है,इसे हासिल करना,* सोना हासिल करने से बढ़कर है।+ 15  यह मूंगों* से भी कीमती है,इसके सामने हर वह चीज़ फीकी है,जिसे पाने की तू चाहत रखता है। 16  यह अपने दाएँ हाथ से लंबी ज़िंदगी देती हैऔर बाएँ हाथ से धन-दौलत और सम्मान। 17  इसकी राह पर चलने से खुशियाँ मिलती हैं,इसके सभी रास्ते शांति की ओर ले जाते हैं।+ 18  जो बुद्धि को थामते हैं, उनके लिए यह जीवन का पेड़ है,जो इसे थामे रहते हैं, वे सुखी माने जाएँगे।+ 19  यहोवा ने बुद्धि से पृथ्वी की नींव डाली,+ पैनी समझ से आकाश को मज़बूती से ताना।+ 20  उसके ज्ञान से गहरा पानी फट पड़ाऔर आसमान से हलकी फुहार होने लगी।+ 21  हे मेरे बेटे, इन्हें* भूल न जाना, जो बुद्धि तुझे फायदा पहुँचाती है उसे सँभालकर रखनाऔर अपनी सोचने-परखने की शक्‍ति गँवा न देना। 22  ये तुझे ज़िंदगी देंगी,तेरे गले का खूबसूरत हार बनेंगी, 23  तू अपनी डगर पर महफूज़ रहेगाऔर तेरे पैर कभी ठोकर नहीं खाएँगे।+ 24  जब तू लेटेगा तो तुझे कोई डर न सताएगा,+अपने बिस्तर पर तुझे मीठी नींद आएगी।+ 25  अचानक आनेवाली आफत से तू न डरेगा,+न दुष्टों पर आनेवाले तूफान से खौफ खाएगा,+ 26  क्योंकि तेरा भरोसा यहोवा पर होगा,+वह तेरे पैरों को किसी फंदे में नहीं फँसने देगा।+ 27  जिनका भला करना चाहिए,*अगर उनका भला करना तेरे बस में हो तो पीछे मत हटना।+ 28  अगर तू अपने पड़ोसी को अभी कुछ दे सकता है, तो उससे यह मत कहना, “कल आना, कल मैं तुझे दूँगा।” 29  अगर तेरा पड़ोसी तुझ पर भरोसा करता है,तो उसके खिलाफ साज़िश मत रचना।+ 30  अगर किसी आदमी ने तेरा कुछ नहीं बिगाड़ा,तो उससे बेवजह मत उलझना।+ 31  खूँखार इंसान से ईर्ष्या मत करना,+न उसकी राह पर चलना, 32  क्योंकि यहोवा कपटी लोगों से नफरत करता है,+मगर सीधे-सच्चे लोगों से गहरी दोस्ती रखता है।+ 33  दुष्ट के घर पर यहोवा का शाप पड़ता है,+लेकिन नेक इंसान के घर पर वह आशीषें देता है।+ 34  खिल्ली उड़ानेवालों की वह खिल्ली उड़ाता है,+लेकिन दीन लोगों पर वह मेहरबान होता है।+ 35  बुद्धिमान को इज़्ज़त मिलती है,लेकिन मूर्ख ऐसी बातों पर घमंड करता है,जिनसे उसका अपमान होता है।+

कई फुटनोट

शा., “तेरा रास्ता सीधा करेगा।”
या “कमाई।”
या “का सबसे बढ़िया हिस्सा।”
या “इसे मुनाफे में हासिल करना।”
शब्दावली देखें।
ज़ाहिर है कि यहाँ परमेश्‍वर के उन गुणों की बात की गयी है, जो पिछली आयतों में बताए गए हैं।
या “जिनका भला करना तेरा फर्ज़ है।”