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यहोवा के साक्षी

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निर्गमन 36:1-38

सारांश

  • ज़रूरत से ज़्यादा दान (1-7)

  • पवित्र डेरा बनाया गया (8-38)

36  “बसलेल, ओहोलीआब और उन सभी कुशल कारीगरों* के साथ मिलकर काम करेगा जिन्हें यहोवा ने बुद्धि और समझ दी है ताकि वे पवित्र जगह के सभी काम ठीक उसी तरह करें, जैसे यहोवा ने आज्ञा दी है।”+  फिर मूसा ने बसलेल, ओहोलीआब और सभी हुनरमंद आदमियों को बुलाया जिन्हें यहोवा ने इस काम के लिए बुद्धि दी थी।+ उनमें से हरेक के दिल ने उसे उभारा कि वह आगे बढ़कर इस काम में हाथ बँटाए।+  फिर उन्होंने मूसा के पास आकर वह सारी चीज़ें लीं जो इसराएलियों ने पवित्र जगह के काम के लिए दान में दी थीं।+ इसके बाद भी लोग हर सुबह अपनी खुशी से चीज़ें ला-लाकर दान करते रहे।  फिर सभी हुनरमंद कारीगरों ने पवित्र काम शुरू कर दिया। और वे एक-एक करके मूसा के पास आने लगे और  उससे कहने लगे, “लोग दान में चीज़ें लाते ही जा रहे हैं। यहोवा ने जिस काम की आज्ञा दी है, उसके लिए अब ज़रूरत से ज़्यादा सामान इकट्ठा हो गया है।”  तब मूसा ने आज्ञा दी कि पूरी छावनी में ऐलान किया जाए कि अब से कोई भी आदमी या औरत पवित्र डेरे के लिए और दान न लाए। इस तरह लोगों को और चीज़ें लाने से मना किया गया।  पवित्र डेरे से जुड़े सभी कामों के लिए काफी सामान इकट्ठा हो गया, यहाँ तक कि ज़रूरत से ज़्यादा हो गया था।  सब हुनरमंद कारीगरों+ ने बटे हुए बढ़िया मलमल, नीले धागे, बैंजनी ऊन और सुर्ख लाल धागे से डेरे+ के लिए दस कपड़े बनाए। उसने* इन कपड़ों पर कढ़ाई करके करूब बनाए।+  हर कपड़ा 28 हाथ* लंबा और 4 हाथ चौड़ा था। दसों कपड़े एक ही नाप के थे। 10  फिर उसने इनमें से पाँच कपड़ों को एक-दूसरे से जोड़ दिया और बाकी पाँच को भी एक-दूसरे से जोड़ दिया। 11  इसके बाद उसने पाँच कपड़ों के एक भाग के उस छोर पर नीले धागे के फंदे बनाए, जहाँ दूसरा भाग उससे जोड़ा जाता। उसने दूसरे भाग के उस छोर पर भी फंदे बनाए, जहाँ वह पहले भाग से जोड़ा जाता। 12  उसने दोनों भागों के छोर पर पचास-पचास फंदे बनाए ताकि ये फंदे एक-दूसरे के आमने-सामने हों और दोनों भागों को जोड़ सकें। 13  आखिर में उसने सोने की 50 चिमटियाँ बनायीं और उनसे दोनों भागों को जोड़ दिया। इस तरह एक बड़ा कपड़ा तैयार हो गया। 14  फिर उसने पवित्र डेरे को ढकने के लिए बकरी के बालों से बुनकर कपड़े बनाए। उसने इस तरह के 11 कपड़े बनाए।+ 15  हर कपड़ा 30 हाथ लंबा और 4 हाथ चौड़ा था। ये 11 कपड़े एक ही नाप के थे। 16  उसने इनमें से पाँच कपड़ों को एक-दूसरे से जोड़ दिया और बाकी छ: को भी एक-दूसरे से जोड़ दिया। 17  उसने पाँच कपड़ों से बने भाग के छोर पर 50 फंदे बनाए और उसी तरह छ: कपड़ों से बने भाग के छोर पर भी 50 फंदे बनाए ताकि दोनों भाग एक-दूसरे से जुड़ जाएँ। 18  उसने ताँबे की 50 चिमटियाँ बनायीं ताकि उनसे दोनों भागों को जोड़कर एक बड़ा कपड़ा तैयार हो जाए। 19  उसने डेरे को ढकने के लिए लाल रंग से रंगी हुई मेढ़े की खाल से एक चादर बनायी और उसके ऊपर डालने के लिए दूसरी चादर सील मछली की खाल से बनायी।+ 20  फिर उसने बबूल की लकड़ी+ से डेरे के लिए ऐसी चौखटें बनायीं जो सीधी खड़ी की जा सकती थीं।+ 21  हर चौखट की ऊँचाई दस हाथ और चौड़ाई डेढ़ हाथ थी। 22  हर चौखट के नीचे दो चूलें बनायी गयीं* जो एक सीध में थीं। उसने डेरे की सभी चौखटें इसी तरह बनायीं। 23  उसने डेरे के दक्षिणी हिस्से के लिए 20 चौखटें बनायीं। यह हिस्सा दक्षिण की तरफ था। 24  फिर उसने इन 20 चौखटों को खड़ा करने के लिए चाँदी की 40 खाँचेदार चौकियाँ बनायीं जिनमें चूलों को बिठाया जाना था। हर चौखट की दो चूलों के लिए दो चौकियाँ।+ 25  डेरे के दूसरी तरफ यानी उत्तरी हिस्से के लिए उसने 20 चौखटें बनायीं 26  और उन्हें खड़ा करने के लिए चाँदी की 40 खाँचेदार चौकियाँ बनायीं। हर चौखट के नीचे दो चौकियाँ। 27  डेरे के पीछे के हिस्से यानी पश्‍चिमी हिस्से के लिए उसने छ: चौखटें बनायीं।+ 28  उसी हिस्से में उसने तिकोने आकार में दो चौखटें बनायीं जो डेरे के लिए कोने के खंभों का काम करतीं। 29  कोने की हर चौखट के दोनों भाग नीचे से जाकर ऊपरी सिरे पर एक-दूसरे से मिल गए और वहाँ पहले कड़े पर जुड़ गए। उसने दोनों कोनों के लिए ऐसी ही चौखटें बनायीं। 30  इस तरह कुल आठ चौखटें और उन्हें खड़ा करने के लिए चाँदी की 16 खाँचेदार चौकियाँ बनायीं। हर चौखट के नीचे दो चौकियाँ। 31  फिर उसने डेरे की चौखटों को जोड़ने के लिए बबूल की लकड़ी के डंडे बनाए। डेरे के एक तरफ की चौखटों को जोड़ने के लिए पाँच डंडे,+ 32  दूसरी तरफ की चौखटों को जोड़ने के लिए पाँच डंडे और पीछे यानी पश्‍चिमी हिस्से की चौखटों को जोड़ने के लिए पाँच डंडे। 33  उसने बीचवाला डंडा इतना लंबा बनाया कि वह चौखटों के बीच में से होकर उन्हें एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़े। 34  उसने चौखटों को और उन्हें जोड़नेवाले डंडों को सोने से मढ़ा। फिर उसने सोने के कड़े बनाए ताकि उनके अंदर डंडे डालकर चौखटों को जोड़ा जाए।+ 35  फिर उसने नीले धागे, बैंजनी ऊन, सुर्ख लाल धागे और बटे हुए बढ़िया मलमल से एक परदा+ बनाया और उस पर कढ़ाई करके करूब बनाए।+ 36  फिर उसने यह परदा लटकाने के लिए बबूल की लकड़ी से चार खंभे बनाए और उन पर सोना मढ़ा। उसने खंभों के लिए सोने के अंकड़े और चाँदी की चार खाँचेदार चौकियाँ ढालकर बनायीं। 37  फिर उसने तंबू के द्वार के लिए भी एक परदा बनाया। यह परदा उसने नीले धागे, बैंजनी ऊन, सुर्ख लाल धागे और बटे हुए बढ़िया मलमल से बुनकर तैयार किया।+ 38  उसने तंबू के द्वार के लिए पाँच खंभे और उनके अंकड़े बनाए। उसने खंभों के ऊपरी सिरों और उनके छल्लों पर सोना मढ़ा, मगर उनकी पाँच खाँचेदार चौकियाँ ताँबे की बनायीं।

कई फुटनोट

शा., “दिल से बुद्धिमान सभी लोगों।”
ज़ाहिर है कि यहाँ बसलेल की बात की गयी है।
एक हाथ 44.5 सें.मी. (17.5 इंच) के बराबर था। अति. ख14 देखें।
या “में दो सीधे खड़े खंभे बनाए गए।”