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यहोवा के साक्षी

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निर्गमन 34:1-35

सारांश

  • पत्थर की नयी पटियाएँ (1-4)

  • मूसा ने यहोवा की महिमा देखी (5-9)

  • करार की बातें दोहरायी गयीं (10-28)

  • मूसा के चेहरे से तेज निकल रहा था (29-35)

34  फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “तू पत्थर काटकर अपने लिए दो पटियाएँ बनाना जो पहली पटियाओं जैसी हों।+ उन पर मैं वे शब्द लिखूँगा जो मैंने पहली पटियाओं पर लिखे थे,+ जिन्हें तूने चूर-चूर कर डाला था।+  तू कल सुबह के लिए तैयार हो जाना क्योंकि तू कल सुबह सीनै पहाड़ पर आएगा और पहाड़ की चोटी पर मेरे सामने हाज़िर होगा।+  मगर तेरे साथ कोई और नहीं आएगा, पहाड़ पर कहीं भी तेरे सिवा कोई और नज़र न आए। यहाँ तक कि पहाड़ के सामने भेड़-बकरी या गाय-बैल भी चरते हुए दिखायी न दें।”+  मूसा ने पत्थर काटकर पहली पटियाओं जैसी दो पटियाएँ तैयार कीं। और जैसे यहोवा ने आज्ञा दी थी, वह सुबह जल्दी उठा और अपने हाथ में पत्थर की दोनों पटियाएँ लिए सीनै पहाड़ पर गया।  फिर यहोवा बादल में उतरा+ और आकर पहाड़ पर मूसा के साथ खड़ा हो गया और यहोवा के नाम का ऐलान किया।+  यहोवा ने मूसा के सामने से गुज़रते हुए यह ऐलान किया, “यहोवा, यहोवा परमेश्‍वर दयालु+ और करुणा से भरा है,+ क्रोध करने में धीमा+ और अटल प्यार+ और सच्चाई+ से भरपूर है,*  हज़ारों पीढ़ियों से प्यार* करता है,+ वह गुनाहों, अपराधों और पापों को माफ करता है।+ मगर जो दोषी है उसे सज़ा दिए बगैर हरगिज़ नहीं छोड़ेगा+ और पिता के अपराध की सज़ा उसके बेटों, पोतों और परपोतों तक को देता है।”+  मूसा ने फौरन घुटनों के बल ज़मीन पर गिरकर परमेश्‍वर को दंडवत किया।  फिर उसने कहा, “हे यहोवा, अगर तेरी कृपा मुझ पर है, तो हमारे साथ चल और हमारे बीच रह।+ हम ढीठ किस्म के लोग हैं,+ फिर भी हे यहोवा, हमारे गुनाह और पाप माफ कर दे+ और हमें अपनी जागीर मानकर अपना ले।” 10  तब परमेश्‍वर ने उससे कहा, “देखो, मैं तुम लोगों के साथ यह करार करता हूँ: मैं तुम सबके सामने ऐसे आश्‍चर्य के काम करूँगा, जैसे आज तक न पूरी धरती पर और न ही किसी राष्ट्र में किए गए हैं।*+ तुम जहाँ रहोगे वहाँ आस-पास की सभी जातियाँ यहोवा के काम देखेंगी क्योंकि मैं तुम्हारी खातिर विस्मयकारी काम करनेवाला हूँ।+ 11  मैं आज तुम लोगों को जो आज्ञाएँ दे रहा हूँ उन पर ध्यान दो।+ मैं तुम्हारे सामने से एमोरियों, कनानियों, हित्तियों, परिज्जियों, हिव्वियों और यबूसियों को खदेड़नेवाला हूँ।+ 12  तुम इस बात का ध्यान रखना कि तुम जिस देश में जा रहे हो, वहाँ के निवासियों के साथ कोई भी करार नहीं करोगे,+ वरना यह तुम्हारे लिए एक फंदा साबित होगा।+ 13  तुम उनकी वेदियाँ ढा देना, उनके पूजा-स्तंभ चूर-चूर कर देना और उनकी पूजा-लाठें* काट डालना।+ 14  तुम किसी और देवता के आगे झुककर उसे दंडवत मत करना,+ क्योंकि यहोवा यह माँग करने के लिए जाना जाता है* कि सिर्फ उसी की भक्‍ति की जाए।* हाँ, वह ऐसा परमेश्‍वर है जो माँग करता है कि सिर्फ उसी की भक्‍ति की जाए, किसी और की नहीं।+ 15  तुम इस बात का ध्यान रखना कि तुम उस देश के निवासियों के साथ कोई करार नहीं करोगे, क्योंकि जब वे अपने देवताओं को पूजते हैं* और उनके आगे बलिदान चढ़ाते हैं+ तो उनमें से कोई तुम्हें ज़रूर बुलाएगा और तुम जाकर उसके बलिदान में से खाने लगोगे।+ 16  फिर तुम ज़रूर अपने बेटों का रिश्‍ता उनकी बेटियों से कराओगे+ और उनकी बेटियाँ अपने देवताओं को पूजेंगी और तुम्हारे बेटों से भी उनकी पूजा करवाएँगी।+ 17  तुम धातु ढालकर देवताओं की मूरतें न बनाना।+ 18  तुम बिन-खमीर की रोटी का त्योहार मनाना।+ तुम सात दिन तक बिन-खमीर की रोटी खाना, जैसे मैंने तुम्हें आज्ञा दी है। तुम यह त्योहार आबीब* महीने में तय वक्‍त पर मनाना+ क्योंकि तुम आबीब महीने में ही मिस्र से बाहर आए थे। 19  तुम्हारा हरेक पहलौठा मेरा है,+ यहाँ तक कि तुम्हारे जानवरों के सभी पहलौठे भी, फिर चाहे वह पहलौठा बैल हो या मेढ़ा।+ 20  तुम्हें अपने गधों में से हर पहलौठे को छुड़ाने के लिए एक भेड़ देनी होगी। अगर तुम गधे के पहलौठे को नहीं छुड़ाते तो उसका गला काटकर उसे मार डालना। तुम्हें अपने सभी पहलौठे बेटों को छुड़ाना होगा।+ तुममें से कोई भी मेरे सामने खाली हाथ न आए। 21  तुम छ: दिन तक अपना काम-काज करना, मगर सातवें दिन विश्राम करना।*+ यहाँ तक कि जुताई और कटाई के मौसम में भी तुम सातवें दिन विश्राम करना। 22  तुम गेहूँ की कटाई के वक्‍त कटाई का त्योहार मनाओगे और फसल से मिलनेवाले पहले अनाज का चढ़ावा चढ़ाओगे। और साल के आखिर में बटोरने का त्योहार* मनाओगे।+ 23  साल में तीन बार सभी आदमी इसराएल के परमेश्‍वर और सच्चे प्रभु यहोवा के सामने हाज़िर हों।+ 24  साल में ये तीनों बार जब तुम अपने परमेश्‍वर यहोवा के सामने जाओगे तो कोई भी तुम्हारी ज़मीन का लालच नहीं करेगा, क्योंकि मैं दूसरी जातियों को तुम्हारे यहाँ से खदेड़ दूँगा+ और तुम्हारी सरहदें बढ़ा दूँगा। 25  तुम मेरे बलि-पशु के खून के साथ कोई खमीरी चीज़ मत चढ़ाना।+ फसह के त्योहार में बलि किए जानेवाले जानवर का गोश्‍त अगली सुबह तक मत रखना।+ 26  तुम अपनी ज़मीन की पहली उपज में से सबसे बढ़िया फल अपने परमेश्‍वर यहोवा के भवन में लाकर देना।+ तुम बकरी के बच्चे को उसकी माँ के दूध में मत उबालना।”+ 27  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, “तू ये सारी आज्ञाएँ लिख लेना,+ क्योंकि इन्हीं के मुताबिक मैं तेरे साथ और इसराएल के साथ एक करार कर रहा हूँ।”+ 28  मूसा 40 दिन और 40 रात वहीं पहाड़ पर यहोवा के पास रहा। इतने दिन तक उसने न रोटी खायी और न पानी पीया।+ परमेश्‍वर ने दोनों पटियाओं पर अपने करार की बातें यानी दस आज्ञाएँ* लिखकर उसे दीं।+ 29  फिर मूसा सीनै पहाड़ से नीचे उतरा और उसके हाथ में गवाही की दोनों पटियाएँ थीं।+ जब वह पहाड़ से उतरा तो उसके चेहरे से तेज चमक रहा था क्योंकि इतने दिन उसने परमेश्‍वर से बात की थी। मगर वह नहीं जानता था कि उसके चेहरे से तेज निकल रहा है। 30  जब हारून और सभी इसराएलियों ने मूसा को देखा तो उन्होंने गौर किया कि उसके चेहरे से तेज निकल रहा है और वे उसके नज़दीक जाने से डरने लगे।+ 31  मगर मूसा ने उन्हें अपने पास बुलाया। तब हारून और मंडली के सभी प्रधान उसके पास आए और उसने उनसे बात की। 32  इसके बाद सभी इसराएली मूसा के पास आए। मूसा ने उन्हें वे सारी आज्ञाएँ सुनायीं जो यहोवा ने उसे सीनै पहाड़ पर दी थीं।+ 33  जब भी मूसा उनसे बात करता तो अपनी बात पूरी करने के बाद अपना चेहरा परदे से ढक लेता था।+ 34  लेकिन जब वह यहोवा से बात करने के लिए तंबू के अंदर जाता, तो चेहरे से परदा हटा लेता+ और फिर तंबू से बाहर आकर परमेश्‍वर की बतायी सारी आज्ञाएँ इसराएलियों को सुनाता।+ 35  जब मूसा इसराएलियों को आज्ञाएँ सुना रहा होता, तो वे देख सकते थे कि उसके चेहरे से कैसा तेज चमक रहा है। इसके बाद मूसा फिर से अपना चेहरा परदे से ढक लेता और तब तक ढके रहता जब तक कि वह परमेश्‍वर से* बात करने के लिए तंबू के अंदर नहीं जाता।+

कई फुटनोट

या “पूरी तरह विश्‍वासयोग्य है।”
या “अटल प्यार।”
या “सिरजे गए हैं।”
शब्दावली देखें।
शा., “यहोवा, उसका नाम है।”
या “वह उसका मुकाबला करनेवालों को बरदाश्‍त नहीं करता।”
या “के साथ वेश्‍याओं जैसी बदचलनी करते हैं।”
अति. ख15 देखें।
या “सब्त मनाना।”
यह छप्परों (या डेरों) का त्योहार भी कहलाता है।
शा., “दस वचन।”
शा., “उससे।”