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यहोवा के साक्षी

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निर्गमन 15:1-27

सारांश

  • मूसा और इसराएल का विजय गीत (1-19)

  • जवाब में मिरयम ने गीत गाया (20, 21)

  • कड़वा पानी मीठे में बदला (22-27)

15  फिर मूसा और इसराएलियों ने यहोवा के लिए यह गीत गाया:+ “मैं यहोवा के लिए गीत गाऊँगा क्योंकि उसने शानदार जीत हासिल की है।+ घोड़े के साथ घुड़सवार को उसने गहरे समुंदर में फेंक दिया है।+   याह* मेरी ताकत है, मेरा बल है क्योंकि वह मेरा उद्धार करता है।+ वही मेरा परमेश्‍वर है, मैं उसकी तारीफ करूँगा,+ वह मेरे पिता का परमेश्‍वर है,+ मैं उसकी बड़ाई करूँगा।+   यहोवा एक शक्‍तिशाली योद्धा है।+ यहोवा उसका नाम है।+   फिरौन के रथों और उसकी फौज को उसने समुंदर में झटक दिया,+उसके बड़े-बड़े सूरमा लाल सागर में डूब गए।+   उफनती लहरों ने उन्हें ढाँप लिया, वे गहराई में ऐसे डूब गए मानो पत्थर हों।+   हे यहोवा, तेरे दाएँ हाथ में असीम ताकत है,+हे यहोवा, तेरा दायाँ हाथ दुश्‍मन को चकनाचूर कर सकता है।   महानता में तेरा कोई सानी नहीं, तेरे खिलाफ उठनेवालों को तू उठाकर पटक सकता है।+तू अपने क्रोध की आग बरसाता है और वे घास-फूस की तरह भस्म हो जाते हैं।   तेरे नथनों की एक साँस से पानी इकट्ठा हो गया,तेज़ धाराएँ थमकर रह गयीं,सागर के बीचों-बीच उफनती लहरें जम गयीं।   दुश्‍मन ने कहा, ‘मैं उनका पीछा करूँगा! उन्हें पकड़ लूँगा! मैं लूट का माल बाँट लूँगा जब तक कि मेरा जी न भर जाए! मैं अपनी तलवार खींचूँगा! अपने हाथ से उन्हें अधीन करूँगा!’+ 10  तूने एक फूँक मारी और समुंदर ने उन्हें ढाँप लिया,+महासागर में वे ऐसे डूब गए जैसे सीसा हों। 11  हे यहोवा, देवताओं में कौन है जो तेरी बराबरी कर सके?+ कौन है जो तुझ जैसा परम-पवित्र हो?+ तू ऐसा परमेश्‍वर है जिसका डर माना जाए, जिसकी तारीफ में गीत गाए जाएँ, तू ही बड़े-बड़े अजूबे करता है।+ 12  तूने अपना दायाँ हाथ बढ़ाया और धरती उन सबको निगल गयी।+ 13  अपने अटल प्यार की वजह से तूने अपने छुड़ाए हुए लोगों को राह दिखायी है,+तू अपनी शक्‍ति से उन्हें अपने पवित्र निवास तक ले चलेगा। 14  देशों के लोग यह खबर सुनेंगे+ और थरथराएँगे,पलिश्‍त के रहनेवालों को डर और चिंता जकड़ लेगी। 15  उस वक्‍त एदोम के शेख* डर जाएँगे,मोआब के ताकतवर शासक* थर-थर काँपेंगे।+ कनान के सभी निवासियों का दिल बैठ जाएगा।+ 16  उन सब पर डर और खौफ छा जाएगा।+ तेरे बाज़ुओं की ताकत देखकर वे पत्थर की तरह सुन्‍न रह जाएँगे,जब तक कि हे यहोवा, तेरे लोग पार न निकल जाएँ,वे लोग, जिन्हें तू वजूद में लाया है,+ पार न निकल जाएँ।+ 17  तू उन्हें लाकर अपनी विरासत के पहाड़ पर लगाएगा,+हे यहोवा, उस जगह पर जो तूने अपने निवास के लिए तैयार की है,हे यहोवा, उस पवित्र-स्थान पर जिसे तूने अपने हाथों से बनाया है। 18  यहोवा राजा है, वह युग-युग तक राज करता रहेगा।+ 19  जब फिरौन के घोड़े, युद्ध-रथ और घुड़सवार समुंदर में उतरे,+तो यहोवा ने समुंदर का पानी उन पर पलट दिया,+मगर इसराएली समुंदर के बीच सूखी ज़मीन पर चलकर पार हो गए।”+ 20  फिर हारून की बहन मिरयम, जो एक भविष्यवक्‍तिन थी, हाथ में डफली लिए सामने आयी। और बाकी सभी औरतें डफली बजाती और नाचती हुई मिरयम के पीछे निकल पड़ीं। 21  आदमियों के गाने के जवाब में मिरयम यह गाती थी: “यहोवा के लिए गीत गाओ क्योंकि उसने शानदार जीत हासिल की है।+ घोड़े के साथ घुड़सवार को उसने गहरे समुंदर में फेंक दिया है।”+ 22  बाद में मूसा इसराएलियों को लाल सागर से आगे ले गया। वे शूर वीराने में पहुँचे और वहाँ तीन दिन तक चलते रहे। अब तक उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला था। 23  जब वे मारा* नाम की जगह पहुँचे+ तो वहाँ उन्हें पानी मिला, मगर पानी इतना कड़वा था कि वे पी न सके। इसीलिए उसने उस जगह का नाम मारा रखा। 24  तब लोग मूसा के खिलाफ यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे,+ “अब हम क्या पीएँगे?” 25  फिर मूसा ने यहोवा को पुकारा+ और यहोवा ने उसे एक छोटा पेड़ दिखाया। मूसा ने जब वह पेड़ उठाकर पानी में फेंका तो पानी मीठा हो गया। वहाँ परमेश्‍वर ने लोगों को एक नियम और न्याय-सिद्धांत दिया और उन्हें परखा।+ 26  उसने कहा, “तुम अपने परमेश्‍वर यहोवा की बात सख्ती से मानना और वही करना जो उसकी नज़रों में सही है, उसकी आज्ञाओं पर ध्यान देना और उसके सभी नियमों का पालन करना।+ अगर तुम ऐसा करोगे तो मैं तुम पर ऐसी कोई बीमारी नहीं लाऊँगा जो मैं मिस्रियों पर लाया था।+ मैं यहोवा तुम्हें स्वस्थ करता हूँ।”+ 27  इसके बाद वे एलीम आए जहाँ पानी के 12 सोते और 70 खजूर के पेड़ थे। उन्होंने वहीं पानी के पास डेरा डाला।

कई फुटनोट

“याह” यहोवा नाम का छोटा रूप है।
शेख, गोत्र का प्रधान था।
या “तानाशाह।”
मतलब “कड़वाहट।”