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यहोवा के साक्षी

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दानियेल 3:1-30

सारांश

  • राजा नबूकदनेस्सर की सोने की मूरत (1-7)

    • मूरत की उपासना करने की माँग (4-6)

  • 3 इब्रियों पर आज्ञा तोड़ने का दोष (8-18)

    • ‘हम तेरे देवताओं की सेवा नहीं करेंगे’ (18)

  • आग की भट्ठी में फेंका गया (19-23)

  • चमत्कारी तरीके से बचाया गया (24-27)

  • राजा ने उनके परमेश्‍वर की बड़ाई की (28-30)

3  राजा नबूकदनेस्सर ने सोने की एक मूरत बनवायी जिसकी ऊँचाई 60 हाथ* और चौड़ाई 6 हाथ* थी। उसने यह मूरत बैबिलोन के प्रांत* में दूरा नाम के मैदान में खड़ी करायी।  फिर राजा नबूकदनेस्सर ने सूबेदारों, प्रशासकों, राज्यपालों, सलाहकारों, खज़ानचियों, न्यायियों, नगर-अधिकारियों और अलग-अलग प्रांतों* के सभी अधिकारियों को खबर भेजी कि वे उसकी खड़ी करायी मूरत के उद्‌घाटन पर आएँ।  इसलिए सूबेदार, प्रशासक, राज्यपाल, सलाहकार, खज़ानची, न्यायी, नगर-अधिकारी और अलग-अलग प्रांतों* के सभी अधिकारी राजा नबूकदनेस्सर की खड़ी करायी मूरत के उद्‌घाटन पर हाज़िर हुए। वे सभी उस मूरत के सामने खड़े हो गए।  तब संदेश ऐलान करनेवाले ने ज़ोर-ज़ोर से ऐलान किया, “अलग-अलग राष्ट्रों और भाषाओं के लोगो, सुनो। तुम सबको यह हुक्म दिया जाता है  कि जब तुम नरसिंगे, बाँसुरी, सुरमंडल, छोटे सुरमंडल, तारोंवाले बाजे, मशकबीन और बाकी सभी साज़ों की आवाज़ सुनोगे, तो तुम सब गिरकर सोने की उस मूरत की पूजा करोगे जो राजा नबूकदनेस्सर ने खड़ी करायी है।  जो कोई गिरकर उसकी पूजा नहीं करेगा, उसे फौरन धधकते भट्ठे में फेंक दिया जाएगा।”+  इसलिए जब नरसिंगे, बाँसुरी, सुरमंडल, छोटे सुरमंडल, तारोंवाले बाजे और बाकी सभी साज़ों की आवाज़ सुनायी पड़ी, तो सब राष्ट्रों और भाषाओं के लोगों ने गिरकर सोने की उस मूरत की पूजा की जो राजा नबूकदनेस्सर ने खड़ी करायी थी।  उस समय कुछ कसदी लोग राजा के पास आए और यहूदियों पर इलज़ाम लगाने लगे।*  वे राजा नबूकदनेस्सर से कहने लगे, “हे राजा, तू युग-युग जीए। 10  हे राजा, तूने हुक्म दिया था कि हर वह इंसान जो नरसिंगे, बाँसुरी, सुरमंडल, छोटे सुरमंडल, तारोंवाले बाजे, मशकबीन और बाकी सभी साज़ों की आवाज़ सुनता है वह गिरकर सोने की मूरत की पूजा करे 11  और जो कोई ऐसा नहीं करेगा उसे धधकते भट्ठे में फेंक दिया जाएगा।+ 12  फिर भी हे राजा, तीन यहूदी आदमियों ने तेरी बिलकुल इज़्ज़त नहीं की। वे शदरक, मेशक, अबेदनगो हैं जिन्हें तूने बैबिलोन के प्रांत* के प्रशासन का ज़िम्मा सौंपा है।+ वे तेरे देवताओं की सेवा नहीं करते और उन्होंने तेरी खड़ी करायी सोने की मूरत को पूजने से इनकार कर दिया है।” 13  यह सुनकर नबूकदनेस्सर क्रोध और जलजलाहट से भर गया और उसने हुक्म दिया कि शदरक, मेशक और अबेदनगो को उसके सामने पेश किया जाए। तब उन आदमियों को राजा के सामने लाया गया। 14  नबूकदनेस्सर ने उनसे कहा, “शदरक, मेशक और अबेदनगो, क्या यह सच है कि तुम लोग मेरे देवताओं की सेवा नहीं करते+ और तुमने मेरी खड़ी करायी सोने की मूरत को पूजने से इनकार कर दिया है? 15  अब सुनो, जब तुम्हें नरसिंगे, बाँसुरी, सुरमंडल, छोटे सुरमंडल, तारोंवाले बाजे, मशकबीन और बाकी सभी साज़ों की आवाज़ सुनायी पड़े, तब तुम अगर गिरकर मेरी बनायी मूरत को पूजने के लिए तैयार हो जाओगे तो बेहतर होगा। लेकिन अगर तुम उसे पूजने से इनकार करोगे तो तुम्हें फौरन धधकते भट्ठे में फेंक दिया जाएगा। ऐसा कौन-सा देवता है जो तुम्हें मेरे हाथ से छुड़ा सकता है?”+ 16  शदरक, मेशक और अबेदनगो ने राजा से कहा, “हे राजा नबूकदनेस्सर, हमें इस बारे में कुछ और नहीं कहना। 17  अगर हमें आग के भट्ठे में फेंक दिया जाना है, तो यही सही। हमारा परमेश्‍वर, जिसकी हम सेवा करते हैं, हमें उस भट्ठे से और तेरे हाथ से छुड़ाने की ताकत रखता है।+ 18  लेकिन अगर वह हमें नहीं छुड़ाता, तो भी हे राजा, हम न तेरे देवताओं की सेवा करेंगे, न ही तेरी खड़ी करायी मूरत की पूजा करेंगे।”+ 19  तब नबूकदनेस्सर शदरक, मेशक और अबेदनगो पर भड़क उठा और उसके चेहरे का भाव बदल गया।* उसने हुक्म दिया कि भट्ठे को सात गुना और तेज़ किया जाए। 20  उसने अपनी सेना के कुछ ताकतवर आदमियों को हुक्म दिया कि वे शदरक, मेशक और अबेदनगो को बाँधकर धधकते भट्ठे में फेंक दें। 21  तब उन तीनों आदमियों को उनके चोगों, टोपियों और दूसरे कपड़ों समेत बाँधा गया और धधकते भट्ठे में फेंक दिया गया। 22  राजा का हुक्म इतना सख्त था और भट्ठे को इतना ज़्यादा तेज़ किया गया था कि जो आदमी शदरक, मेशक और अबेदनगो को भट्ठे की तरफ लेकर गए वे आग की लपटों से झुलसकर मर गए। 23  मगर शदरक, मेशक और अबेदनगो, जो बँधे हुए थे, धधकते भट्ठे में गिर गए। 24  फिर राजा नबूकदनेस्सर बहुत डर गया और फौरन उठकर अपने बड़े-बड़े अधिकारियों से कहने लगा, “क्या हमने तीन आदमियों को बाँधकर आग में नहीं फेंका था?” उन्होंने कहा, “हाँ राजा।” 25  उसने कहा, “मगर देखो! मुझे तो चार आदमी आग में खुले घूमते नज़र आ रहे हैं और उन्हें कुछ भी नहीं हुआ है! और चौथा आदमी कोई देवता लग रहा है।” 26  नबूकदनेस्सर धधकते भट्ठे के द्वार पर गया और उसने कहा, “शदरक, मेशक और अबेदनगो, परम-प्रधान परमेश्‍वर के सेवको,+ बाहर निकलो, इधर आओ!” शदरक, मेशक और अबेदनगो आग में से बाहर निकल आए। 27  वहाँ जमा हुए सूबेदारों, प्रशासकों, राज्यपालों और राजा के बड़े-बड़े अधिकारियों+ ने देखा कि उन तीनों आदमियों को आग से कुछ नहीं हुआ है,+ उनका एक भी बाल नहीं झुलसा है और न ही उनके कपड़े जले हैं। उनसे जलने की बू तक नहीं आ रही। 28  तब नबूकदनेस्सर ने ऐलान किया, “शदरक, मेशक और अबेदनगो के परमेश्‍वर की तारीफ हो,+ जिसने अपने स्वर्गदूत को भेजकर अपने सेवकों को बचाया। इन्होंने उस पर भरोसा किया और राजा का हुक्म नहीं माना। अपने परमेश्‍वर को छोड़ किसी और देवता की सेवा करने और उसे पूजने के बजाय उन्हें मरना मंज़ूर था।*+ 29  इसलिए मैं आदेश देता हूँ कि अगर किसी राष्ट्र या भाषा के लोगों ने शदरक, मेशक और अबेदनगो के परमेश्‍वर के खिलाफ कुछ कहा, तो उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएँ और उनके घर आम लोगों के लिए शौचालय* बना दिए जाएँ, क्योंकि ऐसा कोई देवता नहीं जो इस परमेश्‍वर की तरह छुड़ाने की ताकत रखता हो।”+ 30  फिर राजा ने बैबिलोन के प्रांत* में शदरक, मेशक और अबेदनगो को ऊँचा ओहदा दिया।+

कई फुटनोट

करीब 27 मी. (88 फुट)। अति. ख14 देखें।
करीब 2.7 मी. (8.8 फुट)। अति. ख14 देखें।
या “ज़िला अधिकार-क्षेत्र।”
या “ज़िला अधिकार-क्षेत्रों।”
या “ज़िला अधिकार-क्षेत्रों।”
या “को बदनाम करने लगे।”
या “ज़िला अधिकार-क्षेत्र।”
या “उसका रवैया पूरी तरह बदल गया।”
या “उन्होंने अपना शरीर अर्पित कर दिया।”
या शायद, “कूड़े की जगह; गू-गोबर का ढेर।”
या “ज़िला अधिकार-क्षेत्र।”