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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

जकरयाह 7:1-14

सारांश

  • उपवास के ढोंग के लिए यहोवा धिक्कारता है (1-14)

    • ‘क्या उपवास सचमुच मेरे लिए था?’ (5)

    • ‘न्याय करो, दया करो और अटल प्यार रखो’ (9)

7  राजा दारा के राज के चौथे साल में, किसलेव* नाम के नौवें महीने के चौथे दिन, यहोवा का संदेश जकरयाह के पास पहुँचा।+  बेतेल के लोगों ने शरेसेर, रेगेम-मेलेक और उसके आदमियों को भेजा कि वे यहोवा से दया की भीख माँगें।  उन्होंने सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा के भवन* के याजकों और उसके भविष्यवक्‍ताओं से पूछा, “क्या हम* पाँचवें महीने में विलाप+ और उपवास करें, जैसा हम इतने सालों से करते आए हैं?”  सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा का संदेश एक बार फिर मेरे पास पहुँचा:  “देश के सब लोगों और याजकों से कह, ‘तुमने 70 सालों+ में हर पाँचवें और सातवें महीने शोक मनाकर जो उपवास किया,+ क्या वह सचमुच मेरे लिए था?  जब तुम खा रहे थे और पी रहे थे, तो क्या अपने लिए नहीं खा-पी रहे थे?  जब यरूशलेम और उसके आस-पास के शहर चैन से बसे थे, जब नेगेब और शफेलाह आबाद थे, तब तुम्हें यहोवा की बात माननी चाहिए थी जो उसने पहले के भविष्यवक्‍ताओं से कहलवायी थी।’”+  यहोवा का संदेश एक बार फिर जकरयाह के पास पहुँचा:  “सेनाओं का परमेश्‍वर यहोवा कहता है, ‘सच्चाई से न्याय करो,+ एक-दूसरे पर दया करो और अटल प्यार रखो।+ 10  विधवाओं और अनाथों* को मत ठगो,+ परदेसियों और गरीबों को मत लूटो।+ अपने दिलों में एक-दूसरे के खिलाफ साज़िश मत रचो।’+ 11  मगर लोगों ने ध्यान देने से इनकार कर दिया।+ ढीठ होकर उन्होंने उससे मुँह फेर लिया+ और अपने कान बंद कर लिए कि उसकी न सुनें।+ 12  उन्होंने अपना दिल हीरे* जैसा सख्त कर लिया।+ उन्होंने सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा की उन बातों और आज्ञाओं* को नहीं माना, जिन्हें सुनाने के लिए उसने पहले के भविष्यवक्‍ताओं को पवित्र शक्‍ति दी थी।+ इसलिए सेनाओं के परमेश्‍वर यहोवा का क्रोध उन पर भड़क उठा।”+ 13  “सेनाओं का परमेश्‍वर यहोवा कहता है, ‘मेरे* बुलाने पर उन्होंने मेरी नहीं सुनी,+ इसलिए उनके बुलाने पर मैं भी उनकी नहीं सुनूँगा।+ 14  मैंने आँधी लाकर उन्हें सब अनजान राष्ट्रों में बिखेर दिया।+ उनके चले जाने के बाद उनका देश उजाड़ पड़ा रहा, वहाँ कोई लौटकर नहीं आया, कोई उसमें से होकर नहीं गुज़रा।+ क्योंकि दुश्‍मनों ने उस खूबसूरत देश का वह हाल कर दिया कि देखनेवालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’”

कई फुटनोट

अति. ख15 देखें।
या “मंदिर।”
शा., “मैं।”
या “जिनके पिता की मौत हो गयी है।”
या शायद, “कोई और सख्त पत्थर।”
या “शिक्षाओं।”
शा., “उसके।”