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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

गिनती 5:1-31

सारांश

  • अशुद्ध लोग छावनी से बाहर (1-4)

  • पाप कबूल करना और मुआवज़ा (5-10)

  • व्यभिचार के शक पर पानी से परखना (11-31)

5  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा,  “इसराएलियों को आज्ञा दे कि वे अपनी छावनी में से ऐसे हर इंसान को बाहर भेज दें, जिसे कोढ़ है+ या जिसे रिसाव होता है+ या जो किसी की लाश को छूने की वजह से अशुद्ध हो गया है।+  चाहे आदमी हो या औरत, ऐसे इंसान को तुम ज़रूर छावनी से बाहर भेज देना। तुम्हें ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि उसकी वजह से छावनी के बाकी लोग दूषित न हो जाएँ,+ जिनके बीच मैं निवास* करता हूँ।”+  तब इसराएलियों ने ऐसा ही किया। उन्होंने ऐसे लोगों को छावनी से बाहर भेज दिया, ठीक जैसे यहोवा ने मूसा को बताया था।  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा,  “इसराएलियों से कहना, ‘अगर कोई आदमी या औरत ऐसा पाप करे जो आम तौर पर इंसान करते हैं और इस तरह यहोवा का विश्‍वासयोग्य रहने से चूक जाए, तो वह दोषी ठहरेगा।+  उसे अपना पाप कबूल करना होगा+ और वह जिस नुकसान के लिए दोषी है उसकी पूरी भरपाई करनी होगी। और उसकी कीमत का पाँचवाँ हिस्सा जोड़कर देना होगा।+ उसे यह सब उस इंसान को देना चाहिए जिसके खिलाफ उसने पाप किया है।  लेकिन अगर वह इंसान मर गया है और उसका कोई करीबी रिश्‍तेदार भी नहीं है जिसे मुआवज़ा दिया जा सके, तो दोषी को यह मुआवज़ा यहोवा को देना चाहिए। उस रकम पर याजक का हक होगा। साथ ही, वह प्रायश्‍चित के लिए जो मेढ़ा अर्पित करेगा, उस पर भी याजक का हक होगा।+  इसराएली जो भी पवित्र चीज़ें दान करते हैं+ और लाकर याजक को देते हैं वे याजक की हो जाएँगी।+ 10  हर इंसान की दी हुई पवित्र चीज़ें याजक की होंगी। जो कुछ याजक को दिया जाता है उस पर याजक का ही हक होगा।’” 11  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, 12  “इसराएलियों से कहना, ‘अगर एक आदमी की पत्नी सही राह से भटक जाती है और अपने पति से बेवफाई करती है, तो ऐसे मामले को निपटाने का तरीका यह है। 13  हो सकता है किसी दूसरे आदमी ने उस औरत के साथ यौन-संबंध रखा हो,+ मगर यह बात पति को नहीं मालूम और यह बात छिपी रहती है। वह औरत वाकई खुद को भ्रष्ट कर चुकी है, मगर पकड़ी नहीं गयी है और उसके अपराध का कोई गवाह भी नहीं है। 14  मान लो ऐसी औरत के पति के मन में जलन पैदा होती है और उसे अपनी पत्नी की वफादारी पर शक होता है। या हो सकता है एक औरत ने खुद को भ्रष्ट नहीं किया है, फिर भी उसके पति के मन में जलन पैदा होती है और उसे अपनी पत्नी की वफादारी पर शक होता है। 15  इन दोनों हालात में पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को याजक के पास ले आए। साथ ही, वह एपा के दसवें भाग* जौ का आटा भी लाए। यह उसकी पत्नी का चढ़ावा होगा। उस आदमी को चढ़ावे पर तेल नहीं डालना चाहिए, न ही उस पर लोबान रखना चाहिए, क्योंकि यह जलन के मामले में दिया जानेवाला अनाज का चढ़ावा है। यह इसलिए दिया जाता है ताकि अगर औरत दोषी है तो उसके पाप पर ध्यान दिया जाए। 16  याजक उस औरत को आगे लाएगा और यहोवा के सामने खड़ा करेगा।+ 17  याजक मिट्टी के एक बरतन में ताज़ा पानी* लेगा और पवित्र डेरे की ज़मीन से थोड़ी मिट्टी लेकर उस पानी में डालेगा। 18  याजक जब उस औरत को यहोवा के सामने खड़ा करेगा, तो उसके बाल खुलवा देगा और उसकी हथेलियों पर यादगार का चढ़ावा यानी जलन के मामले में दिया जानेवाला अनाज का चढ़ावा रखेगा।+ याजक के हाथ में वह कड़वा पानी होगा जो शाप लाता है।+ 19  फिर याजक उस औरत से यह कहकर शपथ खिलाएगा: “अगर तू, जिस पर तेरे पति का अधिकार है,+ सही राह से नहीं भटकी और तूने खुद को भ्रष्ट नहीं किया है और किसी पराए आदमी ने तेरे साथ यौन-संबंध नहीं रखा है तो तू शाप लानेवाले इस कड़वे पानी के असर से बच जाए। 20  लेकिन अगर तूने, जिस पर तेरे पति का अधिकार है, सही राह से भटककर खुद को भ्रष्ट किया है और किसी दूसरे आदमी के साथ यौन-संबंध रखा है—”+ 21  फिर याजक उस औरत को शपथ दिलाएगा कि अगर उसने यह पाप किया है तो उस पर शाप पड़े। याजक उससे कहेगा, “यहोवा तेरी जाँघ* सड़ा दे* और तेरा पेट फुला दे। यहोवा ऐसा करे कि लोग शपथ लेते वक्‍त और शाप देते वक्‍त तेरी मिसाल दें। 22  और यह पानी जो शाप लाता है, तेरी अंतड़ियों में जाएगा जिससे तेरा पेट फूल जाएगा और तेरी जाँघ* सड़ जाएगी।”* तब औरत को कहना चाहिए: “आमीन! आमीन!”* 23  फिर याजक को चाहिए कि वह शाप के ये शब्द किताब में लिखे और कड़वे पानी से धो डाले। 24  फिर याजक औरत को यह कड़वा पानी पिलाएगा जो शाप लाता है और पानी उसके अंदर जाएगा और उसका अंजाम बहुत कड़वा होगा। 25  इसके बाद याजक औरत के हाथ से जलन के मामले में दिया गया अनाज का चढ़ावा+ लेगा और उसे यहोवा के सामने आगे-पीछे हिलाकर वेदी के पास लाएगा। 26  फिर याजक अनाज के चढ़ावे में से मुट्ठी-भर आटा प्रतीक के तौर पर लेगा और उसे वेदी पर जलाएगा ताकि उसका धुआँ उठे।+ इसके बाद वह औरत को पानी पिलाएगा। 27  अगर उस औरत ने वाकई खुद को भ्रष्ट कर लिया है और अपने पति के साथ बेवफाई की है, तो जब याजक उस औरत को शाप लानेवाला पानी पिलाएगा तब वह पानी उसके अंदर जाकर कड़वाहट पैदा करेगा, उसका पेट फूल जाएगा और उसकी जाँघ* सड़ जाएगी।* और लोग शाप देते वक्‍त उस औरत की मिसाल देंगे। 28  लेकिन अगर उस औरत ने खुद को भ्रष्ट नहीं किया और वह बेदाग है, तो उसे यह सज़ा नहीं मिलेगी। वह गर्भवती होकर संतान पैदा कर पाएगी। 29  यह जलन के बारे में नियम है+ जो ऐसे मामलों में लागू होता है जब एक औरत, जिस पर उसके पति का अधिकार है, सही राह से भटक जाती है और खुद को भ्रष्ट कर लेती है, 30  या अगर एक आदमी को जलन होती है और उसे अपनी पत्नी की वफादारी पर शक होता है। ऐसे मामलों में पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को यहोवा के सामने लाकर खड़ा करे और याजक उस औरत पर इस नियम में लिखी बातें लागू करे। 31  ऐसे मामलों में पति निर्दोष होगा, लेकिन अगर पत्नी दोषी साबित होती है तो उसे सज़ा भुगतनी होगी।’”

कई फुटनोट

या “डेरा।”
एपा का दसवाँ भाग 2.2 ली. के बराबर था। अति. ख14 देखें।
शा., “पवित्र जल।”
ज़ाहिर है कि यहाँ प्रजनक अंगों की बात की गयी है।
इसका मतलब शायद बच्चे पैदा करने की शक्‍ति खो बैठना है।
ज़ाहिर है कि यहाँ प्रजनक अंगों की बात की गयी है।
इसका मतलब शायद बच्चे पैदा करने की शक्‍ति खो बैठना है।
या “ऐसा ही हो! ऐसा ही हो!”
ज़ाहिर है कि यहाँ प्रजनक अंगों की बात की गयी है।
इसका मतलब शायद बच्चे पैदा करने की शक्‍ति खो बैठना है।