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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

गिनती 16:1-50

सारांश

  • कोरह, दातान और अबीराम की बगावत (1-19)

  • बागियों को सज़ा दी गयी (20-50)

16  इसके बाद कोरह+ और दातान, अबीराम और ओन साथ इकट्ठा हुए। कोरह यिसहार का बेटा था,+ यिसहार कहात का+ और कहात लेवी का बेटा था।+ दातान और अबीराम, रूबेन के बेटे एलिआब के बेटे थे+ और ओन, रूबेन+ के बेटे पीलेत का बेटा था।  कोरह, दातान, अबीराम और ओन मिलकर मूसा के खिलाफ उठ खड़े हुए। इसराएलियों में से 250 और आदमी उनके साथ हो लिए। ये मंडली के खास-खास आदमी थे जो प्रधान और चुने हुए अधिकारी थे।  वे सब एक टोली बनाकर मूसा और हारून के खिलाफ खड़े हुए+ और उनसे कहने लगे, “बहुत हो चुकी तुम्हारी नेतागिरी! तुम क्या समझते हो, तुम ही अकेले पवित्र हो? इस मंडली का हर इंसान पवित्र है+ और यहोवा उनके बीच है।+ फिर तुम क्यों यहोवा की मंडली से खुद को ऊँचा उठा रहे हो? तुम क्यों उसके अधिकारी बन बैठे हो?”  जब मूसा ने यह सुना तो वह फौरन मुँह के बल गिरा।  फिर उसने कोरह और उसका साथ देनेवाले सब लोगों से कहा, “कल सुबह यहोवा यह साफ ज़ाहिर कर देगा कि कौन उसका अपना है+ और कौन पवित्र है और किसे उसके पास जाने का अधिकार है।+ परमेश्‍वर जिस किसी को चुनेगा+ वही उसके पास जाएगा।  कोरह और उसके साथियो,+ तुम सब आग के करछे ले आना+ और  कल सुबह यहोवा के सामने उन करछों में कोयला रखना और उसके ऊपर धूप डालना। तब यहोवा जिस आदमी को चुनेगा+ वही पवित्र ठहरेगा। लेवी के बेटो,+ तुमने हद कर दी है!”  फिर मूसा ने कोरह से कहा, “लेवी के बेटो, मेहरबानी करके मेरी बात सुनो।  इसराएल के परमेश्‍वर ने तुम्हें जो सम्मान दिया है, क्या तुम उसे मामूली समझने लगे हो? यहोवा ने इसराएल की मंडली में से तुम लोगों को अलग किया है+ और तुम्हें अपने पास आने की इजाज़त दी है ताकि तुम उसके डेरे में काम करो और पूरी मंडली के सामने खड़े होकर उसकी सेवा करो।+ 10  उसने तुझे और तेरे सभी भाइयों को, लेवी के बेटों को अपने करीब आने दिया है। क्या यह काफी नहीं जो अब तुम याजकपद भी हथियाना चाहते हो?+ 11  तू और तेरे सभी साथी जो आज एकजुट हो गए हैं, तुम सबने दरअसल यहोवा के खिलाफ अपना सिर उठाया है। और हारून क्या है जो तुम उसके खिलाफ कुड़कुड़ा रहे हो?”+ 12  बाद में मूसा ने एलीआब के बेटे दातान और अबीराम+ के पास संदेश भेजा कि वे उसके पास आएँ। मगर उन्होंने कहा, “नहीं, हम नहीं आएँगे! 13  तूने अब तक हम पर जो ज़ुल्म किए हैं क्या वे कम हैं? तू हमें उस देश से, जहाँ दूध और शहद की धाराएँ बहती हैं, इसलिए निकाल लाया कि हमें वीराने में मार डाले।+ और अब क्या तू हम सब पर अकेला राज करना चाहता है?* 14  कहाँ है वह देश जिसके बारे में तू कहता है कि वहाँ दूध और शहद की धाराएँ बहती हैं+ और जहाँ तू हमें विरासत में खेत और अंगूरों का बाग देगा? क्या तू चाहता है कि लोग आँख मूँदकर तेरे पीछे-पीछे चलते रहें?* हम तेरे पास हरगिज़ नहीं आएँगे!” 15  तब मूसा को बहुत गुस्सा आया और उसने यहोवा से कहा, “तू उनका दिया हुआ अनाज का चढ़ावा बिलकुल स्वीकार न करना। मैंने कभी उनसे कुछ नहीं लिया, एक जानवर तक नहीं और न ही उनमें से किसी का कुछ बुरा किया है।”+ 16  फिर मूसा ने कोरह से कहा, “कल तू और तेरा साथ देनेवाले सब आदमी यहोवा के सामने हाज़िर हो जाएँ। और हारून भी वहाँ आएगा। 17  तुममें से हर कोई अपना-अपना आग का करछा ले और उसमें धूप डाले। और 250 करछे तुम यहोवा के सामने रखना। इसके अलावा, तेरा और हारून का भी एक-एक करछा होगा।” 18  तब उनमें से हर कोई अपना-अपना आग का करछा लेकर आया और उन्होंने उसमें जलता कोयला और धूप डाला। फिर वे सब जाकर मूसा और हारून के साथ भेंट के तंबू के द्वार पर खड़े हुए। 19  जब कोरह अपने साथियों+ को इकट्ठा करके मूसा और हारून के खिलाफ भेंट के तंबू के द्वार पर खड़ा हुआ, तो यहोवा की महिमा पूरी मंडली पर प्रकट हुई।+ 20  अब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, 21  “तुम दोनों इन लोगों की टोली से हटकर दूर चले जाओ। मैं इन सबको एक ही पल में नाश करने जा रहा हूँ।”+ 22  यह सुनते ही मूसा और हारून ने मुँह के बल ज़मीन पर गिरकर परमेश्‍वर से बिनती की, “हे परमेश्‍वर, तू जो हर किसी को जीवन देता है,+ क्या तू एक आदमी के पाप की वजह से पूरी मंडली पर भड़क उठेगा?”+ 23  तब यहोवा ने मूसा से कहा, 24  “ठीक है, तू लोगों की मंडली से कहना, ‘तुम लोग कोरह, दातान और अबीराम+ के तंबुओं से दूर चले जाओ!’” 25  फिर मूसा उठा और दातान और अबीराम के पास गया। उसके साथ इसराएल के मुखिया+ भी गए। 26  उसने लोगों की मंडली से बिनती की, “तुम सब इन दुष्टों के तंबुओं से दूर चले जाओ, इनकी किसी भी चीज़ को हाथ मत लगाना। कहीं ऐसा न हो कि उनके पाप की वजह से तुम्हें भी मिटा दिया जाए।” 27  तब वे सभी लोग, जो कोरह, दातान और अबीराम के तंबुओं के आस-पास थे, वहाँ से फौरन भागकर दूर चले गए। फिर दातान और अबीराम अपने-अपने तंबू से बाहर निकले और अपनी पत्नियों, बेटों और छोटे-छोटे बच्चों के साथ द्वार पर खड़े हुए। 28  तब मूसा ने कहा, “आज तुम सब पर यह साफ ज़ाहिर हो जाएगा कि यह सब मैं अपनी मरज़ी से नहीं कर रहा बल्कि यहोवा ने ही मुझे ऐसा करने के लिए भेजा है। यह तुम इस तरह जान सकोगे: 29  अगर इन सब पर वैसी ही मौत आए जैसी सब इंसानों पर आती है या उनका वैसा ही अंत हो जैसा सब इंसानों का होता है, तो समझ लेना कि यहोवा ने मुझे नहीं भेजा है।+ 30  लेकिन अगर यहोवा इन्हें ऐसी सज़ा देता है जो आज तक किसी ने नहीं सुनी है, अगर ज़मीन मुँह खोले और इन्हें और जो कुछ इनका है वह सब निगल जाए और ये सभी ज़िंदा कब्र में समा जाएँ, तो तुम बेशक जान जाओगे कि इन लोगों ने यहोवा की बेइज़्ज़ती की है।” 31  जैसे ही मूसा ने अपनी यह बात पूरी की, उन लोगों के पैरों के नीचे की ज़मीन फट गयी+ 32  और ज़मीन ने मुँह खोलकर उन्हें और उनके घरानों को, साथ ही कोरह के घराने के सभी लोगों+ और उनकी सभी चीज़ों को निगल लिया। 33  वे और उनके घराने के सब लोग ज़िंदा कब्र में समा गए और फिर ज़मीन का मुँह बंद हो गया। इस तरह मंडली में से उन सब लोगों का नामो-निशान मिट गया।+ 34  उनका चीखना-चिल्लाना सुनकर आस-पास खड़े सभी इसराएली दूर भागने लगे। वे कहने लगे, “कहीं यह ज़मीन हमें भी न निगल जाए!” 35  इसके बाद यहोवा की तरफ से आग बरसी+ और उन 250 आदमियों को भस्म कर गयी जो धूप चढ़ा रहे थे।+ 36  अब यहोवा ने मूसा से कहा, 37  “हारून याजक के बेटे एलिआज़र से कहना कि वह आग में से करछे उठाए,+ क्योंकि ये पवित्र हैं और फिर आग दूर तक इधर-उधर फैला दे। 38  जो आदमी पाप करके अपनी जान गँवा बैठे हैं, उनके आग के करछों को पीटकर उनसे पत्तर बनाए जाएँ और उनसे वेदी+ मढ़ दी जाए। उन्होंने ये करछे यहोवा के सामने पेश किए थे, इसलिए ये करछे पवित्र हैं। और ये इसराएलियों के लिए एक निशानी ठहरेंगे।”+ 39  तब एलिआज़र याजक ने उन आदमियों के लाए हुए ताँबे के करछे लिए जो भस्म हो गए थे और उन करछों को पीटकर उनसे वेदी मढ़ दी, 40  ठीक जैसे यहोवा ने मूसा के ज़रिए उसे बताया था। यह इसराएलियों के लिए एक यादगार था कि धूप जलाने का अधिकार सिर्फ हारून के वंशजों को है और ऐसा कोई भी इंसान जिसे अधिकार नहीं है,* यहोवा के सामने धूप जलाने की जुर्रत न करे+ और कोरह और उसके साथियों की तरह न बने।+ 41  इस घटना के अगले ही दिन इसराएलियों की पूरी मंडली मूसा और हारून के खिलाफ यह कहकर कुड़कुड़ाने लगी,+ “तुम दोनों ने यहोवा के लोगों को मार डाला है।” 42  जब लोगों की मंडली मूसा और हारून के खिलाफ इकट्ठा हुई, तो वे सब भेंट के तंबू की तरफ मुड़े। और देखो! बादल तंबू पर छा गया और यहोवा की महिमा प्रकट होने लगी।+ 43  मूसा और हारून भेंट के तंबू के सामने गए+ 44  और यहोवा ने मूसा से कहा, 45  “तुम दोनों इस मंडली के बीच से हटकर दूर चले जाओ। मैं इन सबको एक ही पल में नाश करने जा रहा हूँ।”+ तब वे दोनों मुँह के बल ज़मीन पर गिरे।+ 46  फिर मूसा ने हारून से कहा, “तू आग का करछा ले और वेदी में से जलता हुआ कोयला लेकर+ उसमें डाल और फिर उसमें धूप रख और फौरन मंडली के पास जा और उनके लिए प्रायश्‍चित कर,+ क्योंकि यहोवा का क्रोध उन पर भड़क उठा है। लोगों पर कहर बरसना शुरू हो चुका है!” 47  तब हारून ने मूसा के कहे मुताबिक फौरन आग और धूप लिया और भागकर मंडली के बीच गया और देखो! तब तक लोगों पर कहर बरसना शुरू हो चुका था। इसलिए उसने आग के करछे में धूप डाला और वह लोगों के लिए प्रायश्‍चित करने लगा। 48  हारून लोगों के बीच ही खड़ा रहा। उसके एक तरफ ज़िंदा लोग थे और दूसरी तरफ मरे हुए। फिर कुछ समय बाद कहर थम गया। 49  कोरह की वजह से पहले जो मारे गए थे, उनके अलावा इस कहर से 14,700 लोग मर गए। 50  कहर थम जाने के बाद हारून वापस मूसा के पास भेंट के तंबू के द्वार पर गया।

कई फुटनोट

या “हम पर अधिकार जताना चाहता है?”
शा., “क्या तू इन लोगों की आँखें फोड़ डालेगा?”
शा., “और कोई भी पराया इंसान।”