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यहोवा के साक्षी

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गिनती 1:1-54

सारांश

  • सेना के लिए नाम-लिखाई (1-46)

  • लेवियों को सेना से छूट (47-51)

  • छावनी डालने का कायदा (52-54)

1  और इसराएलियों के मिस्र से निकलने के दूसरे साल के दूसरे महीने के पहले दिन,+ यहोवा ने सीनै वीराने में मूसा से बात की।+ उसने भेंट के तंबू में मूसा से कहा,+  “तू हारून को साथ लेकर इसराएलियों* की पूरी मंडली की गिनती लेना+ और हरेक आदमी का नाम उसके घराने और उसके पिता के कुल के मुताबिक लिखना।  तुम उन सभी आदमियों का नाम लिखना जिनकी उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा है+ और जो इसराएल की सेना में काम करने के योग्य हैं। तुम उनके नाम उनके अपने-अपने दल के मुताबिक लिखना।  तू अपने साथ हर गोत्र में से एक आदमी को लेना, जो अपने पिता के कुल का मुखिया हो।+  वे तेरी मदद करेंगे। उनके नाम ये हैं: रूबेन गोत्र से एलीसूर+ जो शदेऊर का बेटा है,  शिमोन गोत्र से शलूमीएल+ जो सूरीशद्दै का बेटा है,  यहूदा गोत्र से नहशोन+ जो अम्मीनादाब का बेटा है,  इस्साकार गोत्र से नतनेल+ जो ज़ुआर का बेटा है,  जबूलून गोत्र से एलीआब+ जो हेलोन का बेटा है, 10  यूसुफ के बेटे एप्रैम के गोत्र से+ एलीशामा जो अम्मीहूद का बेटा है और यूसुफ के दूसरे बेटे मनश्‍शे के गोत्र से गमलीएल जो पदासूर का बेटा है, 11  बिन्यामीन गोत्र से अबीदान+ जो गिदोनी का बेटा है, 12  दान गोत्र से अहीएजेर+ जो अम्मीशद्दै का बेटा है, 13  आशेर गोत्र से पगीएल+ जो ओकरान का बेटा है, 14  गाद गोत्र से एल्यासाप+ जो दूएल का बेटा है 15  और नप्ताली गोत्र से अहीरा+ जो एनान का बेटा है। 16  इसराएल की मंडली में से इन सभी आदमियों को चुना गया है। ये अपने-अपने पिता के गोत्र के प्रधान+ और हज़ारों इसराएलियों से बने अलग-अलग दल के मुखिया हैं।”+ 17  तब मूसा और हारून ने उन आदमियों को अपने साथ लिया जिन्हें नाम लेकर चुना गया था। 18  उन्होंने दूसरे महीने के पहले दिन, इसराएल की पूरी मंडली को इकट्ठा किया ताकि उसका हर आदमी, जिसकी उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा है, अपने घराने और अपने पिता के कुल के मुताबिक अपना नाम लिखवा सके,+ 19  ठीक जैसे यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी। इस तरह मूसा ने सीनै वीराने में उन सबका नाम लिखा।+ 20  इसराएल के पहलौठे रूबेन के बेटों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी एक-एक करके गिनती ली गयी। 21  रूबेन गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 46,500 थी। 22  शिमोन के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी एक-एक करके गिनती ली गयी। 23  शिमोन गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 59,300 थी। 24  गाद के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 25  गाद गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 45,650 थी। 26  यहूदा के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 27  यहूदा गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 74,600 थी। 28  इस्साकार के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 29  इस्साकार गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 54,400 थी। 30  जबूलून के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 31  जबूलून गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 57,400 थी। 32  यूसुफ के जो वंशज एप्रैम से निकले,+ उनके नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 33  एप्रैम गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 40,500 थी। 34  मनश्‍शे के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 35  मनश्‍शे गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 32,200 थी। 36  बिन्यामीन के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 37  बिन्यामीन गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 35,400 थी। 38  दान के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 39  दान गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 62,700 थी। 40  आशेर के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 41  आशेर गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 41,500 थी। 42  नप्ताली के वंशजों+ के नाम उनके अपने-अपने घराने और पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। जितने आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबकी गिनती ली गयी। 43  नप्ताली गोत्र से जिनके नाम लिखे गए, उनकी गिनती 53,400 थी। 44  मूसा ने हारून और इसराएल के 12 प्रधानों के साथ मिलकर, जो अपने-अपने पिता के कुल के प्रधान थे, इन सभी आदमियों के नाम लिखे। 45  जितने इसराएली आदमियों की उम्र 20 साल या उससे ज़्यादा थी और जो इसराएल की सेना में काम करने के योग्य थे, उन सबके नाम उनके अपने-अपने पिता के कुल के मुताबिक लिखे गए। 46  जितने आदमियों के नाम लिखे गए उनकी कुल गिनती 6,03,550 थी।+ 47  मगर लेवियों+ के नाम उनके अपने-अपने पिता के कुल के मुताबिक नहीं लिखे गए।+ 48  यहोवा ने मूसा से कहा था, 49  “सिर्फ लेवी गोत्र के आदमियों के नाम न लिखना और न ही उनकी गिनती बाकी इसराएलियों की गिनती में शामिल करना।+ 50  तू लेवियों को पवित्र डेरे की, जिसमें गवाही का संदूक रखा है+ और उसकी सारी चीज़ों की ज़िम्मेदारी सौंपना।+ वे पवित्र डेरे और उसकी सारी चीज़ों को उठाया करेंगे।+ वे डेरे में सेवा करेंगे+ और डेरे के चारों तरफ अपने तंबू लगाएँगे।+ 51  जब भी पवित्र डेरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना होगा, तो लेवी उसके अलग-अलग हिस्से खोलेंगे+ और जब डेरा खड़ा करना होगा, तो वे ही उन्हें दोबारा जोड़कर उसे खड़ा करेंगे। लेवियों के अलावा अगर कोई ऐसा इंसान डेरे के पास आता है, जिसे अधिकार नहीं* तो उसे मार डाला जाए।+ 52  इसराएलियों के तीन-तीन गोत्रों से बने हर दल के लिए जो जगह ठहरायी गयी है,*+ ठीक उसी के मुताबिक हर आदमी को अपने दल में अपना तंबू डालना चाहिए। 53  और लेवियों को अपना तंबू पवित्र डेरे के चारों तरफ डालना चाहिए जिसमें गवाही का संदूक रखा है, ताकि इसराएलियों की मंडली पर मेरा क्रोध भड़क न उठे।+ मेरे पवित्र डेरे की, जिसमें गवाही का संदूक रखा है, देखभाल करने की* ज़िम्मेदारी लेवियों की है।”+ 54  इसराएल के लोगों ने इन सारी आज्ञाओं का पालन किया जो यहोवा ने मूसा को दी थीं। उन्होंने ठीक वैसा ही किया।

कई फुटनोट

शा., “इसराएल के बेटों।”
शा., “जो पराया हो,” यानी जो लेवी न हो।
या “अपने-अपने झंडे के पास।”
या “रक्षा करने की; में सेवा करने की।”