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यहोवा के साक्षी

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एस्तेर 3:1-15

सारांश

  • राजा, हामान को ऊँचा उठाता है (1-4)

  • यहूदियों को मिटाने की हामान की साज़िश (5-15)

3  कुछ समय बाद, राजा अहश-वेरोश ने अगागी+ हम्मदाता के बेटे हामान को उसके साथी हाकिमों से ऊँचा पद दिया।+  महल के फाटक पर राजा के जितने भी सेवक थे, वे हामान के आगे झुकते थे और गिरकर उसे प्रणाम करते थे क्योंकि राजा का यही हुक्म था। लेकिन मोर्दकै ने हामान के आगे झुकने या गिरकर उसे प्रणाम करने से साफ इनकार कर दिया।  फाटक पर बैठनेवाले राजा के सेवकों ने मोर्दकै से पूछा, “तू राजा का हुक्म क्यों नहीं मानता?”  वे हर दिन उससे यही कहते रहे लेकिन मोर्दकै ने उनकी नहीं मानी। तब उन्होंने इस बारे में हामान को बताया। वे देखना चाहते थे कि मोर्दकै के इस व्यवहार को बरदाश्‍त किया जाएगा या नहीं+ क्योंकि मोर्दकै ने उन्हें बताया था कि वह एक यहूदी है।+  जब हामान ने देखा कि मोर्दकै उसके आगे झुकने और गिरकर उसे प्रणाम करने से इनकार कर रहा है, तो वह गुस्से से भर गया।+  मगर उसे सिर्फ मोर्दकै को मारकर* चैन नहीं मिलता, क्योंकि उसे मोर्दकै के लोगों यानी यहूदियों के बारे में भी बताया गया था। इसलिए हामान कोई ऐसा रास्ता ढूँढ़ने लगा जिससे वह अहश-वेरोश के राज्य के सब इलाकों से यहूदियों को मिटा दे।  राजा अहश-वेरोश के राज के 12वें साल के नीसान* नाम के पहले महीने में,+ हामान के आगे पूर (यानी चिट्ठी) डाली गयी+ ताकि यह पता किया जा सके कि किस महीने और किस दिन उनका नाश किया जाए। चिट्ठी अदार* नाम के 12वें महीने की निकली।+  फिर हामान ने राजा अहश-वेरोश के पास जाकर कहा, “हुज़ूर के राज्य के सभी ज़िलों में+ एक ऐसी जाति के लोग फैले हुए हैं,+ जिनके कायदे-कानून बाकी लोगों से बिलकुल अलग हैं और जो राजा का कानून भी नहीं मानते। अगर उनका कुछ न किया गया तो राजा को भारी नुकसान हो सकता है।  राजा को अगर यह मंज़ूर हो तो उन्हें खत्म करने के लिए एक फरमान निकाला जाए। इसके लिए मैं अधिकारियों को 10,000 तोड़े* चाँदी दूँगा कि वे इन्हें शाही खज़ाने में जमा करें।”* 10  यह बात सुनकर राजा ने अपनी मुहरवाली अँगूठी उतारकर+ अगागी+ हम्मदाता के बेटे और यहूदियों के दुश्‍मन, हामान को दे दी।+ 11  राजा ने उससे कहा, “मैं उन लोगों को तेरे हवाले करता हूँ और उनकी चाँदी भी तुझे देता हूँ। तुझे जैसा ठीक लगे उनके साथ वैसा कर।” 12  तब पहले महीने के 13वें दिन राजा के शास्त्रियों*+ को बुलाया गया। उन्होंने राजा के सूबेदारों, अलग-अलग ज़िलों के राज्यपालों और सभी लोगों के हाकिमों के लिए हामान के सारे आदेश लिखे।+ इसे हर ज़िले में रहनेवाले लोगों की भाषा और लिपि में लिखा गया। इसे राजा अहश-वेरोश के नाम से जारी किया गया और इस पर राजा की अँगूठी से मुहर लगायी गयी।+ 13  यह फरमान राजा के दूतों के हाथ सभी ज़िलों में भेजा गया। उसमें हुक्म दिया गया था कि 12वें महीने यानी अदार महीने के 13वें दिन, सभी यहूदियों को जान से मार डाला जाए।+ उनके जितने भी जवान, बूढ़े, बच्चे, औरतें हैं, सबका नाश किया जाए, उनका वजूद मिटा दिया जाए और उनका सबकुछ लूट लिया जाए।+ 14  फरमान में लिखी इन बातों को हर ज़िले में कानून समझकर लागू किया जाना था। और लोगों में इसका ऐलान किया जाना था ताकि वे इस दिन के लिए तैयार हो जाएँ। 15  राजा के हुक्म पर उसके दूत तुरंत इस कानून को अलग-अलग ज़िलों में ले गए+ और शूशन*+ नाम के किले* में रहनेवालों के लिए भी यही कानून जारी हुआ। इससे शूशन* शहर में हाहाकार मच गया, मगर राजा और हामान बैठकर दाख-मदिरा पी रहे थे।

कई फुटनोट

शा., “पर हाथ चलाकर।”
अति. ख15 देखें।
अति. ख15 देखें।
एक तोड़ा 34.2 किलो के बराबर था। अति. ख14 देखें।
या शायद, “यह काम करनेवालों के लिए मैं शाही खज़ाने में 10,000 तोड़े जमा करवाऊँगा।”
या “सचिवों।”
या “सूसा।”
या “महल।”
या “सूसा।”