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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

अय्यूब 33:1-33

सारांश

  • अय्यूब ने खुद को सही ठहराया; एलीहू ने उसे सुधारा (1-33)

    • फिरौती मिल गयी (24)

    • जवानी का दमखम लौटेगा (25)

33  हे अय्यूब! तुझसे बिनती है कि ध्यान से मेरी सुन,मेरी एक-एक बात पर कान लगा।   देख! अब मैं चुप नहीं रह सकता,मेरी ज़बान बोलने के लिए बेचैन है।   मेरी बातें मेरे मन की सीधाई ज़ाहिर करेंगी+और जो मुझे मालूम है वह मैं सच-सच बताऊँगा।   परमेश्‍वर ने अपनी पवित्र शक्‍ति से मुझे रचा है,+सर्वशक्‍तिमान की फूँक से मुझे जीवन मिला है।+   अगर तू मेरी बातों का जवाब दे सकता है, तो ज़रूर देना,मेरे सामने अपनी दलीलें पेश करना,अपनी पैरवी करने के लिए तैयार हो जा।   देख, सच्चे परमेश्‍वर के सामने मैं तेरे जैसा हूँ,मैं भी मिट्टी का बना हूँ।+   इसलिए तू मुझसे मत डर,मेरी बातें इतनी भारी न होंगी कि तुझे कुचल दें।   तूने अपने बारे में जो कहा,वह सब मैंने सुना। तूने कहा,   ‘मैं बिलकुल शुद्ध हूँ, मैंने कोई अपराध नहीं किया,+मैं बेदाग हूँ, मुझमें कोई दोष नहीं।+ 10  फिर भी परमेश्‍वर बेवजह मेरे खिलाफ हो गया है,मुझे अपना दुश्‍मन समझ रहा है।+ 11  उसने मेरे पैर काठ में कस दिए हैं,वह मेरी हर हरकत पर नज़र रखता है।’+ 12  मगर तेरी यह बात गलत है,मैं बताता हूँ कि सच क्या है: परमेश्‍वर महान है, अदना इंसान से बहुत महान।+ 13  तू क्यों उसकी शिकायत कर रहा है?+ क्या इसलिए कि उसने तेरी बातों का जवाब नहीं दिया?+ 14  परमेश्‍वर एक बार कहता है, दूसरी बार कहता है,मगर कोई उस पर ध्यान नहीं देता। 15  वह सपने में, हाँ, दर्शन में अपनी बातें बताता है,+रात के उस पहर जब लोग गहरी नींद में,अपने बिस्तर पर सोए होते हैं, 16  तब वह अपनी बातें उन पर ज़ाहिर करता है,+उनके अंदर अपनी हिदायतें बिठाता है,* 17  ताकि इंसान बुरे काम करना छोड़ दे+और घमंड से दूर रहे।+ 18  इस तरह परमेश्‍वर उसे कब्र* में जाने से बचाता है,+तलवार* को उसकी जान नहीं लेने देता। 19  जब एक इंसान तकलीफों से गुज़रता है,बिस्तर पर पड़े-पड़े हड्डियों के दर्द से कराहता है, तब वह सबक सीखता है। 20  उसका जी रोटी से घिन करने लगता है,लज़ीज़ खाने से भी वह मुँह फेर लेता है।+ 21  उसका शरीर घुलता जाता है,उसकी हड्डियाँ तक नज़र आने लगती हैं। 22  वह धीरे-धीरे कब्र* की तरफ बढ़ रहा है,लोग उसकी जान के प्यासे हैं। 23  अगर उसे एक दूत* मिल जाए,हज़ार में से कोई एक मिल जाए जो उसकी वकालत करे,जो उसे बताए कि वह सीधा-सच्चा इंसान कैसे बने, 24  तो परमेश्‍वर उस पर दया करेगा और हुक्म देगा,‘उसे कब्र*+ में जाने से बचा, उसके लिए मुझे फिरौती मिल गयी है।+ 25  उसकी त्वचा बच्चे की त्वचा से भी कोमल* हो जाएगी,+उसकी जवानी का दमखम फिर लौट आएगा।’+ 26  वह परमेश्‍वर से मिन्‍नत करेगा+ जो उससे खुश होगा,वह जयजयकार करते हुए परमेश्‍वर के सामने आएगाऔर परमेश्‍वर उस अदना इंसान को फिर से अपनी नज़र में नेक करार देगा। 27  वह इंसान सबसे कहेगा,*‘मैंने पाप किया है,+ जो सही है उसे करने से मैं चूक गया हूँ,पर मुझे वह सज़ा नहीं दी गयी जिसके मैं लायक था।* 28  परमेश्‍वर ने मुझे कब्र* में जाने से बचा लिया,+मैं उजाला देख पाऊँगा।’ 29  परमेश्‍वर इंसान की खातिरदो बार क्या, तीन बार ऐसा करता है, 30  ताकि उसे कब्र* से वापस ला सकेऔर उसके जीवन की लौ जलती रहे।+ 31  हे अय्यूब! मेरी बात पर कान लगा, खामोश रह और मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दे। 32  अगर तुझे कुछ कहना है तो बता, बेझिझक बोल क्योंकि मैं तुझे निर्दोष ठहराना चाहता हूँ। 33  लेकिन अगर तेरे पास कहने को कुछ नहीं, तो खामोश रह और मेरी सुन,मैं तुझे बुद्धि की बातें सिखाऊँगा।”

कई फुटनोट

शा., “हिदायतों पर मुहर लगाता है।”
या “गड्‌ढे।”
या “भाले।”
या “गड्‌ढे।”
या “स्वर्गदूत।”
या “गड्‌ढे।”
या “स्वस्थ।”
शा., “सबके सामने गाएगा।”
या शायद, “और इससे मुझे फायदा नहीं हुआ।”
या “गड्‌ढे।”
या “गड्‌ढे।”