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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

2 कुरिंथियों 7:1-16

7  इसलिए, मेरे प्यारो, जबकि हमसे ये वादे किए गए हैं, तो आओ हम तन और मन की हर गंदगी को दूर कर खुद को शुद्ध करें और परमेश्‍वर का भय मानते हुए पूरी हद तक पवित्रता हासिल करें।  हमें अपने दिलों में जगह दो। हमने किसी का बुरा नहीं किया, किसी को भ्रष्ट नहीं किया, न ही किसी का फायदा उठाया।  मैं तुम्हें दोषी ठहराने के लिए यह नहीं कहता। इसलिए कि मैंने पहले तुमसे कहा था कि हम चाहे जीएँ, चाहे मरें तुम हर हाल में हमारे दिल में रहते हो।  मैं तुमसे बेझिझक खुलकर बात कर सकता हूँ। मैं तुम्हारे बारे में बहुत शेखी मारता हूँ। मुझे पूरा दिलासा मिला है, सारे दुःख-दर्द में भी मेरा दिल खुशी से उमड़ रहा है।  दरअसल, जब हम मकिदुनिया पहुँचे, तो हमें बिलकुल भी चैन नहीं मिला, मगर हम हर तरह का दुःख-दर्द झेलते रहे—बाहर झगड़े थे और अंदर डर था।  फिर भी, परमेश्‍वर जो मुसीबत के मारे हुओं को दिलासा देता है, उसने हमें तीतुस की मौजूदगी से दिलासा दिया।  मगर सिर्फ उसकी मौजूदगी से ही नहीं बल्कि तीतुस ने तुम्हारी वजह से जो तसल्ली पायी उससे भी हमें दिलासा मिला, क्योंकि उसने वापस आकर हमें तुम्हारी दिली तमन्‍ना, तुम्हारे शोक और मेरे लिए तुम्हारे जोश की खबर दी, इसलिए मैं और भी खुश हुआ।  इसलिए, चाहे मैंने तुम्हें अपनी चिट्ठी से उदास किया हो, तो भी अब मुझे इसका अफसोस नहीं। हाँ, शुरू में मुझे इसका अफसोस हुआ था, (मैं देखता हूँ कि उस चिट्ठी ने तुम्हें उदास किया, मगर थोड़ी ही देर के लिए)  मगर अब मैं खुशी मनाता हूँ, इसलिए नहीं कि तुम सिर्फ उदास हुए थे, बल्कि इस कदर उदास हुए कि तुमने पश्‍चाताप किया। क्योंकि तुम परमेश्‍वर की मरज़ी के मुताबिक उदास हुए ताकि तुम हमारी वजह से कोई नुकसान न उठाओ। 10  इसलिए कि परमेश्‍वर की मरज़ी के मुताबिक उदास होने से पश्‍चाताप पैदा होता है जिसका नतीजा उद्धार है और इसमें पछताने की कोई बात नहीं, मगर दुनियावी उदासी मौत ले आती है। 11  देखो! इसी बात से, हाँ, परमेश्‍वर की मरज़ी के मुताबिक तुम्हारे उदास होने से तुममें कितनी ज़्यादा तत्परता, हाँ, खुद पर से लांछन दूर करने का कैसा जज़्बा, कितना आक्रोश, कितना भय पैदा हुआ, हाँ, तुम्हारे अंदर कैसी हसरत, कैसा जोश पैदा हुआ और तुमने गलती को सुधारा! तुमने हर तरह से ज़ाहिर किया है कि तुम इस मामले में बेदाग हो। 12  असल में, मैंने तुम्हें लिखा तो सही, मगर मैंने न तो उसकी वजह से लिखा जिसने यह बुराई की थी, न ही उसकी वजह से जिसके खिलाफ यह बुराई हुई थी, बल्कि इसलिए लिखा ताकि तुम अपने बीच और परमेश्‍वर के सामने यह ज़ाहिर कर सको कि तुम हमारी बात मानने के लिए कितने तत्पर हो। 13  इसलिए हमें दिलासा मिला है। लेकिन, खुद दिलासा पाने के अलावा हम तीतुस की खुशी की वजह से और भी ज़्यादा खुश थे, क्योंकि तुम सबने उसके दिल* को ताज़गी दी है। 14  इसलिए कि अगर मैंने उसके सामने तुम्हारे बारे में कोई शेखी मारी थी, तो मुझे अपनी बातों पर शर्मिंदा नहीं होना पड़ा। मगर जिस तरह हमने तुमसे जो कुछ कहा वह सच था, उसी तरह हमने तीतुस के सामने तुम्हारे बारे में जो शेखी मारी थी वह भी सच साबित हुई। 15  और जब वह याद करता है कि तुम सबने किस तरह आज्ञा मानी और डरते और काँपते हुए उसका स्वागत किया तो तुम्हारे लिए उसका कोमल स्नेह और भी बढ़ता जाता है। 16  मैं खुशी मनाता हूँ, क्योंकि तुम्हारी वजह से मुझे बड़ी हिम्मत मिलती है।

कई फुटनोट

2कुरिं 7:13 यूनानी नफ्मा। अतिरिक्‍त लेख 7 देखें।