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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

1 पतरस 4:1-19

4  जबकि मसीह ने शरीर में दुःख झेला, तो जैसा उसका मन का रुझान था, तुम भी उसी रुझान से खुद को लैस कर लो। क्योंकि जिस इंसान ने शारीरिक दुःख झेला है वह पाप करने से बाज़ आता है,  ताकि वह अपनी बाकी की ज़िंदगी, इंसानों की अभिलाषाएँ पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने के लिए जीए।  क्योंकि दुनियावी लोगों की मरज़ी पूरी करने में तुम अब तक जो वक्‍त बिता चुके हो वही काफी है, जब तुम बदचलनी के कामों में, वासनाओं में, हद-से-ज़्यादा शराब पीने में, रंगरलियाँ मनाने में, शराब पीने की होड़ लगाने में और घिनौनी मूर्तिपूजा करने में लगे हुए थे।  अब क्योंकि तुमने उनके साथ बदचलनी की कीचड़ में लोटना छोड़ दिया है, इसलिए वे ताज्जुब करते हैं और तुम्हारे बारे में बुरा-भला कहते हैं।  मगर इन लोगों को उसे हिसाब देना होगा जो जीवितों और मरे हुओं का न्याय करने के लिए तैयार है।  दरअसल, इसी मकसद से मरे हुओं* को भी खुशखबरी सुनायी गयी थी, ताकि चाहे इंसान उनका बाहरी रूप देखकर उन्हें आँकें, मगर वे परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति के मार्गदर्शन में जीएँ।  मगर सब बातों का अंत पास आ गया है। इसलिए, स्वस्थ मन रखो और प्रार्थना करने के लिए चौकस रहो।  सबसे बढ़कर, एक-दूसरे के लिए गहरा प्यार रखो, क्योंकि प्यार ढेर सारे पापों को ढक देता है।  बिना कुड़कुड़ाए एक-दूसरे को मेहमान-नवाज़ी दिखाते रहो। 10  परमेश्‍वर की जो महा-कृपा अलग-अलग तरीके से दिखायी गयी है उसके मुताबिक तुममें से हरेक ने देन पायी है। इसलिए तुम परमेश्‍वर के ठहराए बढ़िया प्रबंधकों के नाते अपनी इस देन को एक-दूसरे की सेवा करने में इस्तेमाल करो। 11  अगर कोई बोलता है, तो परमेश्‍वर के पवित्र वचन बोले। अगर कोई सेवा करता है, तो उस शक्‍ति पर निर्भर होकर सेवा करे जो परमेश्‍वर देता है, ताकि सब बातों में यीशु मसीह के ज़रिए परमेश्‍वर की महिमा हो। महिमा और शक्‍ति हमेशा-हमेशा के लिए उसी की है। आमीन। 12  मेरे प्यारो, परीक्षाओं की जो आग तुम्हारे बीच जल रही है उस पर हैरान मत हो, मानो तुम्हारे साथ कोई अनोखी घटना घट रही है। यह इसलिए हो रहा है कि तुम्हारी परख हो। 13  इसके बजाय, तुम यह जानकर खुशियाँ मनाओ कि तुम मसीह की दुःख-तकलीफों में साझेदार बन रहे हो, ताकि तुम उसकी महिमा के प्रकट होने के दौरान खुशियाँ मनाओ और आनंद से भर जाओ। 14  अगर मसीह के नाम की खातिर तुम्हें बदनाम किया जाता है, तो तुम सुखी हो, क्योंकि परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति और इसकी महिमा तुम्हारे ऊपर रहती है। 15  मगर तुममें से कोई खूनी, चोर या बुरे काम करनेवाला या दूसरों के निजी मामलों में दखल देनेवाला होने की वजह से दुःख न उठाए। 16  लेकिन अगर कोई मसीही होने की वजह से दुःख उठाता है तो वह शर्मिंदा महसूस न करे, बल्कि इस नाम को धारण किए हुए परमेश्‍वर की महिमा करता रहे। 17  इसलिए कि वह तय किया हुआ वक्‍त आ पहुँचा है जब न्याय हो, और इस न्याय की शुरूआत परमेश्‍वर के घर से होगी। अगर इसकी शुरूआत हम ही से होगी, तो उनका क्या हश्र होगा जो परमेश्‍वर से मिली खुशखबरी का वचन मानने से इनकार करते हैं? 18  “और अगर नेक इंसान का बड़ी मुश्‍किल से उद्धार होगा, तो उनका क्या हश्र होगा जो परमेश्‍वर की भक्‍ति नहीं करते और पापी हैं?” 19  इसलिए जो परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने की वजह से दुःख उठाते हैं, वे भी अच्छे काम करते हुए खुद को विश्‍वासयोग्य सिरजनहार के हवाले सौंपते रहें।

कई फुटनोट

1पत 4:6 ज़ाहिर है, ये वे लोग हैं जो अपने पापों की वजह से मरे हुओं जैसे थे। इफि 2:1 देखें।