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यहोवा के साक्षी

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ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

लूका 22:1-71

22  बिन-खमीर की रोटियों का त्योहार, जो फसह कहलाता है, नज़दीक आ रहा था।  और प्रधान याजक और शास्त्री यीशु को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे मगर उन्हें लोगों का डर था, इसलिए वे कोई बढ़िया तरकीब ढूँढ़ रहे थे।  मगर शैतान, यहूदा में समा गया, जो इस्करियोती कहलाता था और जिसकी गिनती उन बारहों में होती थी।  वह निकलकर प्रधान याजकों और मंदिर के सरदारों से यह बात करने गया कि यीशु को धोखे से उनके हवाले करने की बढ़िया तरकीब क्या होगी।  इस पर, वे बड़े खुश हुए और उसे चाँदी के सिक्के देने के लिए राज़ी हो गए।  यहूदा मान गया और तब से उसे पकड़वाने के लिए किसी ऐसे बढ़िया मौके की ताक में रहने लगा जब उसके आस-पास भीड़ न हो।  अब बिन-खमीर की रोटियों के त्योहार का दिन आया, जब फसह का पशु बलि किया जाना ज़रूरी था।  यीशु ने पतरस और यूहन्‍ना को यह कहकर भेजा: “जाओ और हमारे लिए फसह के खाने की तैयारी करो।”  उन्होंने पूछा: “तू कहाँ चाहता है कि हम इसकी तैयारी करें?” 10  उसने कहा: “देखो! जब तुम शहर में जाओगे तो तुम्हें एक आदमी पानी का घड़ा उठाए हुए मिलेगा। उसके पीछे-पीछे उस घर में जाना जिसमें वह दाखिल होगा। 11  तुम उस घर के मालिक से कहना, ‘गुरु तुझसे पूछता है: “मेहमानों का वह कमरा कहाँ है, जहाँ मैं अपने चेलों के साथ फसह का खाना खाऊँ?” ’ 12  फिर वह तुम्हें एक बड़ा और सजा हुआ ऊपर का कमरा दिखाएगा। वहाँ इसकी तैयारी करना।” 13  इसलिए वे निकल पड़े और जैसा उसने बताया था ठीक वैसा ही पाया, और उन्होंने फसह की तैयारी की। 14  कुछ वक्‍त के बाद जब वह घड़ी आयी, तो वह खाने की मेज़ से टेक लगाकर बैठा और उसके प्रेषित भी उसके साथ खाने बैठे। 15  यीशु ने उनसे कहा: “मेरी बड़ी तमन्‍ना थी कि मैं दुःख झेलने से पहले तुम्हारे साथ फसह का यह भोज खाऊँ। 16  क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि जब तक कि यह परमेश्‍वर के राज में पूरा न हो, तब तक मैं इसे फिर न खाऊँगा।” 17  फिर एक प्याला लेकर उसने प्रार्थना में धन्यवाद दिया और कहा: “इसे लो और तुम एक-एक कर इसमें से पीओ। 18  इसलिए कि मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं यह दाख-मदिरा* तब तक फिर न पीऊँगा जब तक परमेश्‍वर का राज नहीं आता।” 19  साथ ही, उसने एक रोटी ली और प्रार्थना में धन्यवाद दिया और उसे तोड़कर उन्हें यह कहते हुए दी: “यह मेरे शरीर का प्रतीक है, जो तुम्हारी खातिर दिया जाना है। मेरी याद में ऐसा ही किया करना।” 20  जब वे शाम का खाना खा चुके, तो उसने इसी तरह प्याला भी लिया और कहा: “यह प्याला उस नए करार का प्रतीक है जो मेरे लहू के आधार पर बाँधा गया है, जो तुम्हारी खातिर बहाया जाना है। 21  मगर देखो! मेरे पकड़वानेवाले का हाथ मेरे साथ मेज़ पर है। 22  क्योंकि इंसान का बेटा तो जा ही रहा है, ठीक जैसे उसके लिए ठहराया गया है। लेकिन धिक्कार है उस आदमी पर जिसके हाथों वह पकड़वाया जाएगा!” 23  इसलिए वे आपस में चर्चा करने लगे कि आखिर उनमें से वह कौन है जो ऐसा करनेवाला है। 24  मगर साथ ही उनके बीच इस बात पर गरमा-गरम बहस छिड़ गयी कि उनमें सबसे बड़ा किसे समझा जाए। 25  मगर उसने उनसे कहा: “दुनिया के राजा लोगों पर हुक्म चलाते हैं, और जो अधिकार रखते हैं, वे दाता कहलाते हैं। 26  मगर तुम्हें ऐसा नहीं होना है। इसके बजाय, जो तुम्हारे बीच सबसे बड़ा है वह सबसे छोटा बने, और जो प्रधान जैसा है, वह सेवक जैसा बने। 27  इसलिए कि कौन ज़्यादा बड़ा है, जो खाने के लिए मेज़ से टेक लगाए हुए है या जो सेवा कर रहा है? क्या वही नहीं जो मेज़ से टेक लगाए हुए है? मगर मैं तुम्हारे बीच सेवक जैसा हूँ। 28  मगर तुम वे हो जो मेरी परीक्षाओं के दौरान लगातार मेरे साथ रहे। 29  ठीक जैसे मेरे पिता ने मेरे साथ एक राज के लिए करार किया है, वैसे ही मैं भी तुम्हारे साथ एक राज के लिए करार करता हूँ, 30  कि तुम मेरे राज में मेरी मेज़ पर खाओ-पीओ, और राजगद्दियों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करो। 31  शमौन, शमौन, देख! शैतान ने तुम लोगों को गेहूँ की तरह फटकने और छानने की माँग की है। 32  मगर मैंने तेरे लिए मिन्‍नत की है कि तू अपना विश्‍वास खो न दे। जब तू पश्‍चाताप कर लौट आए, तो अपने भाइयों को मज़बूत करना।” 33  तब पतरस ने उससे कहा: “प्रभु, मैं तो तेरे साथ जेल जाने और मरने के लिए भी तैयार हूँ।” 34  मगर उसने कहा: “पतरस, मैं तुझसे कहता हूँ, आज जब तक तू मुझे जानने से तीन बार इनकार न करेगा, मुर्गा बाँग न देगा।” 35  उसने चेलों से यह भी कहा: “जब मैंने तुम्हें बटुए और खाने की पोटली और जूतियों के बगैर भेजा था, तो क्या तुम्हें किसी चीज़ की कमी हुई थी?” उन्होंने कहा: “नहीं!” 36  फिर उसने उनसे कहा: “मगर अब जिसके पास बटुआ है वह उसे ले ले और खाने की पोटली भी ले। जिसके पास कोई तलवार न हो वह अपना बागा बेचकर एक खरीद ले। 37  इसलिए कि मैं तुमसे कहता हूँ कि यह जो बात लिखी है, ज़रूरी है कि यह मुझमें पूरी हो, ‘और उसकी गिनती दुराचारियों में हुई।’ इसलिए कि मेरे बारे में जो लिखा है, वह पूरा हो रहा है।” 38  तब उन्होंने कहा: “प्रभु, देख! यहाँ दो तलवारें हैं।” उसने उनसे कहा: “ये काफी हैं।” 39  फिर वह बाहर निकलकर अपने दस्तूर के मुताबिक जैतून पहाड़ पर गया। उसके चेले भी उसके पीछे-पीछे गए। 40  उस जगह पहुँचकर उसने उनसे कहा: “प्रार्थना में लगे रहो ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।” 41  वह उनसे कुछ दूर* आगे गया और घुटने टेककर प्रार्थना करने 42  और यह कहने लगा: “हे पिता, अगर तेरी मरज़ी हो, तो यह प्याला* मेरे सामने से हटा दे। मगर जो मेरी मरज़ी है, वह नहीं बल्कि वही हो जो तेरी मरज़ी है।” 43  तब स्वर्ग से एक दूत उसके सामने प्रकट हुआ और उसकी हिम्मत बँधायी। 44  मगर वह असहनीय वेदना से गुज़रते हुए और भी गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करता रहा। उसका पसीना खून की बूँदें बनकर ज़मीन पर गिर रहा था। 45  वह प्रार्थना कर उठा और अपने चेलों के पास गया और देखा कि वे सो रहे थे, क्योंकि वे बेहद दुःख की वजह से पस्त हो चुके थे। 46  उसने उनसे कहा: “तुम सो क्यों रहे हो? उठो और प्रार्थना में लगे रहो, ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।” 47  जब वह बोल ही रहा था, तो देखो! एक भीड़ वहाँ आयी और उसके आगे-आगे यहूदा नाम का आदमी चल रहा था, जो उन बारहों में से एक था। वह यीशु को चूमने के लिए उसके पास आया। 48  मगर यीशु ने उससे कहा: “यहूदा, क्या तू इंसान के बेटे को चूमकर धोखे से पकड़वाता है?” 49  जो उसके साथ थे, जब उन्होंने देखा कि क्या होनेवाला है, तो उन्होंने कहा: “प्रभु, क्या हम तलवार चलाएँ?” 50  यहाँ तक कि उनमें से एक ने महायाजक के दास पर तलवार चलाकर उसका दायाँ कान उड़ा दिया। 51  मगर जवाब में यीशु ने कहा: “बहुत हो चुका।” और यीशु ने उस दास का कान छूकर उसे ठीक किया। 52  तब यीशु ने प्रधान याजकों और मंदिर के सरदारों और बुज़ुर्गों से जो उसे पकड़ने के लिए वहाँ आए थे, कहा: “क्या तुम मुझे तलवारें और सोंटे लेकर पकड़ने आए हो, मानो मैं कोई लुटेरा हूँ? 53  जब मैं हर दिन तुम्हारे बीच मंदिर में था, तब तुमने मुझ पर हाथ न डाले। मगर यह वक्‍त तुम्हारा है और अंधकार का अधिकार है।” 54  तब वे उसे गिरफ्तार कर ले गए और महायाजक के घर में ले आए। मगर पतरस कुछ दूरी पर रहते हुए उनका पीछा करता रहा। 55  जब वे आँगन के बीच आग जलाकर एक-साथ बैठ गए, तो पतरस भी उनके बीच बैठा हुआ था। 56  मगर एक नौकरानी ने उसे आग के सामने बैठा देखा और उस पर ऊपर-नीचे निगाह डाली और कहा: “यह आदमी भी उसके साथ था।” 57  मगर उसने यह कहते हुए इनकार कर दिया: “मैं उसे नहीं जानता।” 58  थोड़ी ही देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा: “तू भी उनमें से एक है।” मगर पतरस ने कहा: “नहीं भई, मैं नहीं हूँ।” 59  फिर करीब एक घंटा गुज़रने के बाद, एक और आदमी ज़ोर देकर यह कहने लगा: “बेशक, यह आदमी भी उसके साथ था। क्योंकि यकीनन, यह एक गलीली है!” 60  मगर पतरस ने कहा: “मैं नहीं जानता कि तू क्या कह रहा है।” वह बोल ही रहा था कि उसी घड़ी एक मुर्गे ने बाँग दी। 61  और प्रभु ने मुड़कर पतरस को देखा और पतरस को प्रभु की कही यह बात याद आयी: “आज मुर्गे के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझे जानने से इनकार करेगा।” 62  और वह बाहर जाकर फूट-फूटकर रोने लगा। 63  जिन आदमियों ने यीशु को हिरासत में ले लिया था, वे उसका मज़ाक उड़ाने और उसे मारने लगे। 64  वे उसका मुँह ढककर उससे पूछते थे: “भविष्यवाणी कर। तुझे किसने मारा?” 65  वे उसकी निंदा करते हुए उसके खिलाफ बहुत-सी बातें कहते रहे। 66  जब दिन निकल आया तो लोगों के बुज़ुर्गों की सभा इकट्ठी हुई, जिसमें प्रधान याजक और शास्त्री भी थे, और वे उसे अपनी महासभा* के भवन में ले गए और उससे पूछा: 67  “अगर तू मसीह है, तो हमें बता दे।” मगर उसने कहा: “अगर मैं तुम्हें बताऊँ तो भी तुम हरगिज़ यकीन न करोगे। 68  इतना ही नहीं, अगर मैं तुमसे सवाल करूँ, तो तुम मुझे हरगिज़ जवाब न दोगे। 69  मगर अब से इंसान का बेटा परमेश्‍वर के शक्‍तिशाली दाएँ हाथ की तरफ बैठा हुआ होगा।” 70  इस पर उन सभी ने कहा: “तो क्या तू परमेश्‍वर का बेटा है?” उसने उनसे कहा: “तुम खुद कह रहे हो कि मैं हूँ।” 71  उन्होंने कहा: “अब हमें और गवाही की क्या ज़रूरत है? इसलिए कि हमने खुद इसके मुँह से सुन लिया है।”

कई फुटनोट

लूका 22:18 शाब्दिक, “अंगूर की बेल की उपज से बनी यह चीज़।”
लूका 22:41 या, “पत्थर को जितनी दूर फेंका जा सकता है, करीब उतनी दूर।”
लूका 22:42 मत्ती 26:39 फुटनोट देखें।
लूका 22:66 मत्ती 26:59 फुटनोट देखें।