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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

मत्ती 8:1-34

8  जब यीशु उस पहाड़ से नीचे उतर आया, तो भीड़-की-भीड़ उसके पीछे हो ली।  और देखो! एक कोढ़ी उसके पास आया और झुककर उसे प्रणाम करने और यह कहने लगा: “प्रभु, बस अगर तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”  इस पर, यीशु ने अपना हाथ बढ़ाकर उसे यह कहते हुए छूआ: “हाँ, मैं चाहता हूँ। शुद्ध हो जा।” उसी पल उसका कोढ़ दूर हो गया और वह शुद्ध हो गया।  तब यीशु ने उससे कहा: “देख किसी को मत बताना। मगर, जाकर खुद को याजक को दिखा और मूसा ने जो भेंट ठहरायी है वह चढ़ा, ताकि वे खुद इस बात के गवाह हों।”  जब यीशु कफरनहूम में आया, तो एक सेना-अफसर* उसके पास आकर उससे बिनती करने  और यह कहने लगा: “साहब, मेरा नौकर लकवे का मारा घर में पड़ा है और बड़ी पीड़ा में तड़प रहा है।”  यीशु ने उससे कहा: “जब मैं वहाँ आऊँगा, तो उसे चंगा करूँगा।”  जवाब में उस सेना-अफसर ने कहा: “प्रभु, मैं इस लायक नहीं कि तू मेरी छत तले आए, मगर बस तू अपने मुँह से कह दे और मेरा नौकर ठीक हो जाएगा।  क्योंकि मैं भी किसी और के अधिकार के अधीन हूँ और मेरे नीचे भी सिपाही हैं और जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा!’ तो वह जाता है और दूसरे से कहता हूँ ‘आ!’ तो वह आता है और अपने दास से कहता हूँ ‘यह कर!’ और वह करता है।” 10  यह सुनकर यीशु ने ताज्जुब किया और अपने पीछे आनेवालों से कहा: “मैं तुमसे सच कहता हूँ, मैंने इस्राएल में किसी एक में भी ऐसा ज़बरदस्त विश्‍वास नहीं पाया। 11  मगर मैं तुमसे कहता हूँ कि पूरब से और पश्‍चिम से बहुत-से लोग आएँगे और स्वर्ग के राज में अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ खाने की मेज़ से टेक लगाकर बैठेंगे, 12  जबकि राज के बेटे बाहर अंधेरे में फेंक दिए जाएँगे। वहाँ उनका रोना और दाँत पीसना होगा।” 13  तब यीशु ने उस सेना-अफसर से कहा: “जा। जैसा तू ने विश्‍वास किया है, वैसा ही तेरे लिए हो।” और उसी पल उस अफसर का नौकर चंगा हो गया। 14  और यीशु पतरस के घर आया और देखा कि पतरस की सास बुखार में पड़ी है। 15  तब यीशु ने उसका हाथ छूआ और उसका बुखार उतर गया, तब वह उठी और उसकी सेवा में लग गयी। 16  मगर जब शाम हो गयी, तब लोग उसके पास ऐसे बहुत-से लोगों को लाने लगे जिनमें दुष्ट स्वर्गदूत* समाए थे। यीशु ने इन दुष्ट स्वर्गदूतों को सिर्फ बोलकर ही निकाल दिया और उन सभी लोगों को चंगा किया जो तकलीफ के मारे थे। 17  ताकि वह वचन पूरा हो सके जो यशायाह भविष्यवक्‍ता के ज़रिए कहा गया था: “उसने हमारी बीमारियाँ खुद ले लीं और हमारे रोग उठा ले गया।” 18  जब यीशु ने अपने चारों तरफ लोगों की भीड़ देखी, तो उसने चेलों को हुक्म दिया कि नाव को उस पार ले जाएँ। 19  तब एक शास्त्री ने आकर उससे कहा: “गुरु, तू जहाँ कहीं जाएगा, मैं तेरे पीछे चलूँगा।” 20  मगर यीशु ने उससे कहा: “लोमड़ियों की माँदें और आकाश के पंछियों के बसेरे होते हैं, मगर इंसान के बेटे के पास कहीं सिर टिकाने की भी जगह नहीं है।” 21  तब एक और चेले ने यीशु से कहा: “प्रभु, मुझे इजाज़त दे कि मैं चला जाऊँ और पहले अपने पिता को दफना दूँ।” 22  यीशु ने उससे कहा: “मेरे पीछे चलता रह और मुरदों को अपने मुरदे दफन करने दे।” 23  जब यीशु एक नाव पर चढ़ गया, तो चेले भी उसके साथ हो लिए। 24  तब अचानक झील में ऐसी ज़ोरदार आँधी उठी कि लहरें नाव को ढकने लगीं; मगर यीशु सो रहा था। 25  और चेले उसके पास आए और यह कहते हुए उसे जगाने लगे: “प्रभु, हमें बचा, हम नाश होनेवाले हैं!” 26  मगर यीशु ने उनसे कहा: “अरे, कम विश्‍वास रखनेवालो, तुम्हारे दिल क्यों काँप रहे हैं?” फिर उसने उठकर उस आँधी और लहरों को डाँटा और बड़ा सन्‍नाटा छा गया। 27  यह देखकर चेले हैरत में पड़ गए और कहने लगे: “यह कैसा शख्स है कि आँधी और समुद्र भी इसका हुक्म मानते हैं?” 28  इसके बाद, यीशु उस पार गदरेनियों के इलाके में पहुँचा। वहाँ दो आदमी थे जिनमें दुष्ट स्वर्गदूत समाए थे। वे कब्रों के बीच से निकलकर यीशु के सामने आए। वे इतने खूँखार थे कि कोई भी उस रास्ते से गुज़रने की हिम्मत नहीं करता था। 29  और देखो! वे चिल्लाकर कहने लगे: “हे परमेश्‍वर के बेटे, हमारा तुझसे क्या लेना-देना? क्या तू ठहराए हुए वक्‍त से पहले हमें तड़पाने आया है?” 30  उनसे काफी दूरी पर सुअरों का एक बड़ा झुंड चर रहा था। 31  इसलिए दुष्ट स्वर्गदूत यह कहकर यीशु से बिनती करने लगे: “अगर तू हमें निकाल रहा है, तो हमें सुअरों के उस झुंड में भेज दे।” 32  तब यीशु ने उनसे कहा: “जाओ!” और वे निकलकर सुअरों में समा गए। तब अचानक सुअरों का पूरा झुंड बड़ी तेज़ी से टीले की तरफ दौड़ा और वहाँ से गिरकर झील में डूब मरा। 33  मगर सूअर चरानेवाले भाग खड़े हुए और शहर में जाकर सारा किस्सा कह सुनाया और उन आदमियों के बारे में भी बताया, जिनमें दुष्ट स्वर्गदूत समाए थे। 34  तब देखो! सारा शहर निकलकर यीशु को देखने आया। जब उन्होंने यीशु को देखा, तो उससे बहुत बिनती करने लगे कि वह उनके इलाके से चला जाए।

कई फुटनोट

मत्ती 8:5 या, “शतपति,” जिसकी कमान के नीचे सौ सैनिक होते थे।
मत्ती 8:16 यूनानी नफ्मा। अतिरिक्‍त लेख 7 देखें।