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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

मत्ती 6:1-34

6  खबरदार रहो कि तुम लोगों को दिखाने के लिए उनके सामने नेकी के काम न करो; नहीं तो तुम अपने पिता से जो स्वर्ग में है, कोई फल न पाओगे।  इसलिए जब तू दान* करे, तो अपने आगे-आगे तुरही न बजवा, जैसे कपटी सभा-घरों और गलियों में बजवाते हैं, ताकि लोग उनकी बड़ाई करें। मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना पूरा फल पा चुके।  मगर जब तू दान करे, तो इस तरह करना कि तेरे बाएँ हाथ को भी न मालूम पड़े कि तेरा दायाँ हाथ क्या कर रहा है,  जिससे तेरा दान गुप्त रहे। तब तेरा पिता जो गुप्त काम को देख रहा है, तुझे इसका बदला देगा।  जब तुम प्रार्थना करो, तो कपटियों की तरह मत करो; क्योंकि उन्हें सभा-घरों और सड़कों के चौराहे पर खड़े होकर प्रार्थना करना अच्छा लगता है ताकि लोग उन्हें देखें। मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना पूरा फल पा चुके।  लेकिन जब तू प्रार्थना करे, तो अपने घर के अंदर के कमरे में जा और दरवाज़ा बंद करने के बाद अपने पिता से जिसे कोई देख नहीं सकता,* प्रार्थना कर, तब तेरा पिता जो तेरा हर काम देख सकता है,* वह तुझे इसका फल देगा।  मगर प्रार्थना करते वक्‍त, दुनिया के लोगों की तरह बार-बार एक ही बात न दोहरा, क्योंकि वे सोचते हैं कि उनके बहुत ज़्यादा बोलने से परमेश्‍वर उनकी सुनेगा।  इसलिए, तुम उनके जैसे न बनना, क्योंकि परमेश्‍वर जो तुम्हारा पिता है तुम्हारे माँगने से पहले जानता है कि तुम्हें किन चीज़ों की ज़रूरत है।  इसलिए, तुम इस तरह प्रार्थना करना: ‘हे हमारे पिता तू जो स्वर्ग में है, तेरा नाम पवित्र किया जाए। 10  तेरा राज आए। तेरी मरज़ी, जैसे स्वर्ग में पूरी हो रही है, वैसे ही धरती पर भी पूरी हो।* 11  आज के इस दिन की रोटी हमें दे; 12  जैसे हमने अपने खिलाफ पाप करनेवालों* को माफ किया है, वैसे ही तू भी हमारे पापों* को माफ कर। 13  जब हम पर परीक्षा आए तो हमें गिरने न दे, मगर हमें उस दुष्ट शैतान से बचा।’ 14  अगर तुम दूसरों के अपराध माफ करोगे, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हें माफ करेगा। 15  लेकिन अगर तुम दूसरों के अपराध माफ नहीं करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध माफ नहीं करेगा। 16  जब तुम उपवास करते हो, तो पाखंडियों की तरह मुँह लटकाए रहना बंद करो, क्योंकि वे अपना चेहरा गंदा रहने देते हैं ताकि लोग उन्हें देखकर जानें कि वे उपवास कर रहे हैं। मैं तुमसे सच कहता हूँ, वे अपना पूरा फल पा चुके। 17  लेकिन जब तू उपवास करे, तो अपने सिर में तेल लगा और मुँह धो, 18  ताकि इंसान नहीं, बल्कि तेरा पिता जिसे इंसान की आँखें देख नहीं सकतीं, उसे मालूम हो कि तू उपवास कर रहा है। तब तेरा पिता जो तेरा हर काम देख सकता है,* वह तुझे इसका फल देगा। 19  अपने लिए पृथ्वी पर धन जमा करना बंद करो, जहाँ कीड़ा और ज़ंग उसे खा जाते हैं और जहाँ चोर सेंध लगाकर चुरा लेते हैं। 20  इसके बजाय, अपने लिए स्वर्ग में धन जमा करो, जहाँ न तो कीड़ा, न ही ज़ंग उसे खाते हैं और जहाँ न तो चोर सेंध लगाकर चुराते हैं। 21  क्योंकि जहाँ तेरा धन होगा, वहीं तेरा दिल भी होगा। 22  आँख, शरीर का दीपक है। इसलिए अगर तेरी आँख एक ही चीज़ पर टिकी है, तो तेरा सारा शरीर रौशन रहेगा। 23  लेकिन अगर तेरी आँख बुरी बातों पर लगी है, तो तेरा सारा शरीर अंधियारा होगा। इसलिए अगर तेरी आँख ही जिसे शरीर को रौशन करना था असल में अंधियारी हो गयी है, तो तू* कितने गहरे अंधकार में है! 24  कोई भी दो मालिकों का दास बनकर सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि या तो वह एक से नफरत करेगा और दूसरे से प्यार या वह एक से जुड़ा रहेगा और दूसरे को तुच्छ समझेगा। तुम परमेश्‍वर के दास होने के साथ-साथ धन-दौलत की गुलामी नहीं कर सकते। 25  इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ: अपनी जान के लिए चिंता करना बंद करो कि तुम क्या खाओगे या क्या पीओगे, न ही अपने शरीर के लिए चिंता करो कि तुम क्या पहनोगे। क्या जीवन, भोजन से और शरीर कपड़े से बढ़कर नहीं? 26  आकाश में उड़नेवाले पंछियों को ध्यान से देखो, क्योंकि वे न तो बीज बोते, न कटाई करते, न ही गोदामों में भरकर रखते हैं, फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन्हें खिलाता है। क्या तुम्हारा मोल उनसे बढ़कर नहीं? 27  तुममें ऐसा कौन है जो चिंता कर एक पल के लिए भी अपनी ज़िंदगी बढ़ा सके?* 28  तुम यह चिंता क्यों करते हो कि तुम्हारे पास पहनने के लिए कपड़े कहाँ से आएँगे? मैदान में उगनेवाले सोसन के फूलों से सबक सीखो, वे कैसे बढ़ते हैं; वे न तो कड़ी मज़दूरी करते हैं, न ही सूत कातते हैं। 29  मगर मैं तुमसे कहता हूँ कि राजा सुलैमान भी अपने पूरे वैभव में इन फूलों की तरह सज-धज न सका। 30  इसलिए, अगर परमेश्‍वर मैदान में उगनेवाले घास-फूस को, जो आज है और कल आग* में झोंक दिया जाएगा, ऐसे शानदार कपड़े पहनाता है, तो अरे, कम विश्‍वास रखनेवालो, क्या वह तुम्हें न पहनाएगा? 31  इसलिए कभी-भी चिंता न करना, न ही यह कहना, ‘हम क्या खाएँगे?’ या, ‘हम क्या पीएँगे?’ या, ‘हम क्या पहनेंगे?’ 32  क्योंकि इन्हीं सब चीज़ों के पीछे दुनिया के लोग दिन-रात भाग रहे हैं। मगर तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है कि तुम्हें इन सब चीज़ों की ज़रूरत है। 33  इसलिए, तुम पहले उसके राज और उसके स्तरों के मुताबिक जो सही* है उसकी खोज में लगे रहो और ये बाकी सारी चीज़ें भी तुम्हें दे दी जाएँगी। 34  इसलिए, अगले दिन की चिंता कभी न करना, क्योंकि अगले दिन की अपनी ही चिंताएँ होंगी। आज के लिए आज की मुसीबत काफी है।

कई फुटनोट

मत्ती 6:2 शाब्दिक, “दया के दान।”
मत्ती 6:6 या, “जो गुप्त में है।”
मत्ती 6:6 या, “गुप्त में देखता है।”
मत्ती 6:10 या, “तेरी मरज़ी स्वर्ग और धरती दोनों में पूरी हो।”
मत्ती 6:12 शाब्दिक, “हमारे कर्ज़दारों।”
मत्ती 6:12 शाब्दिक, “हमारे कर्ज़।”
मत्ती 6:18 या, “जो गुप्त में देखता है।”
मत्ती 6:23 शाब्दिक, “तेरा शरीर।”
मत्ती 6:27 या, “अपनी आयु की लंबाई को हाथ-भर भी बढ़ा सके।”
मत्ती 6:30 या “तंदूर की आग।”
मत्ती 6:33 “इसमें परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करना और उसकी आज्ञाएँ मानना शामिल है।”