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यहोवा के साक्षी

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ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

मत्ती 22:1-46

22  यीशु ने आगे जवाब में फिर से उन्हें मिसालें देकर कहा:  “स्वर्ग का राज एक ऐसे राजा की तरह है, जिसने अपने बेटे की शादी की दावत दी।  उसने अपने दासों को उन लोगों को बुलाने भेजा, जिन्हें शादी की दावत का न्यौता दिया गया था। मगर वे नहीं आना चाहते थे।  राजा ने दोबारा दूसरे दासों को यह कहकर भेजा: ‘जिन्हें न्यौता दिया गया है उनसे जाकर कहो: “देखो! मैं खाना तैयार कर चुका हूँ, मेरे बैल और मोटे-ताज़े जानवर हलाल किए जा चुके हैं और सारी चीज़ें तैयार हैं। शादी की दावत में आ जाओ।” ’  मगर उन्होंने ज़रा भी परवाह न की और अपने-अपने रास्ते चल दिए, कोई अपने खेत की तरफ, तो कोई अपने कारोबार के लिए।  जबकि बाकियों ने उसके दासों को पकड़ लिया, उनके साथ बुरा सलूक किया और उन्हें मार डाला।  तब राजा का गुस्सा भड़क उठा और उसने अपनी सेनाएँ भेजकर उन हत्यारों को नाश कर दिया और उनके शहर को जलाकर राख कर दिया।  इसके बाद, उसने अपने दासों से कहा, ‘शादी की दावत तो तैयार है, मगर जिन्हें न्यौता दिया गया था वे इसके लायक नहीं थे।  इसलिए शहर से बाहर निकलनेवाली सड़कों पर जाओ और वहाँ जो भी तुम्हें मिले, उसे शादी की दावत के लिए बुला लाओ।’ 10  इस पर वे दास सड़कों पर निकल गए और उन्हें जितने भी मिले, चाहे अच्छे, चाहे बुरे सभी को इकट्ठा किया। और वह भवन जहाँ शादी की रस्में होनी थीं, खाने की मेज़ पर बैठे लोगों से भर गया। 11  जब राजा मेहमानों का मुआयना करने अंदर आया, तो उसकी नज़र एक ऐसे आदमी पर पड़ी जिसने शादी की पोशाक नहीं पहनी थी। 12  तब उसने उससे कहा, ‘अरे भई, तू शादी की पोशाक पहने बिना यहाँ अंदर कैसे आ गया?’ वह कोई जवाब न दे सका। 13  तब राजा ने अपने सेवकों से कहा, ‘इसके हाथ-पैर बाँधकर इसे बाहर अंधेरे में फेंक दो। वहीं इसका रोना और दाँत पीसना होगा।’ 14  इसलिए कि न्यौता पानेवाले तो बहुत हैं, मगर चुने गए थोड़े हैं।” 15  इसके बाद फरीसी चले गए और उन्होंने आपस में सलाह की कि किस तरह यीशु को उसी की बातों से फंसाएँ। 16  इसलिए उन्होंने अपने चेलों को हेरोदियों के दल के लोगों के साथ, उसके पास भेजा। उन्होंने यीशु से कहा: “गुरु, हम जानते हैं कि तू सच्चा है और सच्चाई से परमेश्‍वर का मार्ग सिखाता है और किसी की परवाह नहीं करता, क्योंकि तू इंसान की सूरत देखकर बात नहीं करता। 17  इसलिए हमें बता, तू क्या सोचता है? सम्राट* को कर देना सही है या नहीं?” 18  मगर यीशु ने उनकी दुष्टता जानते हुए कहा: “अरे कपटियो, तुम मेरी परीक्षा क्यों लेते हो? 19  मुझे कर का सिक्का दिखाओ।” तब वे उसके पास एक दीनार लाए। 20  यीशु ने उनसे पूछा: “इस पर किसकी सूरत और किसके नाम की छाप है?” 21  उन्होंने कहा: “सम्राट की।” तब उसने उनसे कहा: “इसलिए जो सम्राट का है वह सम्राट को चुकाओ, मगर जो परमेश्‍वर का है वह परमेश्‍वर को।” 22  जब उन्होंने यह सुना, तो वे बहुत ताज्जुब करने लगे और उसे छोड़कर चले गए। 23  उसी दिन सदूकी, जो कहते हैं कि मरे हुओं के फिर से जी उठने* की शिक्षा सच नहीं है, उसके पास आए और उससे कहा: 24  “गुरु, मूसा ने कहा था, ‘अगर कोई आदमी बेऔलाद मर जाए, तो उसका भाई उसकी पत्नी से शादी करे और अपने मरे हुए भाई के लिए औलाद पैदा करे।’ 25  हमारे यहाँ सात भाई थे। पहले ने शादी की और बेऔलाद मर गया। और अपने भाई के लिए अपनी पत्नी छोड़ गया। 26  ऐसा ही दूसरे और तीसरे के साथ हुआ, यहाँ तक कि सातों के साथ यही हुआ। 27  आखिर में वह स्त्री भी मर गयी। 28  तो मरे हुओं के जी उठने के वक्‍त, वह उन सातों में से किसकी पत्नी होगी? क्योंकि वे सभी उसके पति हो चुके थे।” 29  यीशु ने उन्हें जवाब दिया: “तुम बड़ी गलतफहमी में हो, क्योंकि तुम न तो शास्त्र को जानते हो, न ही परमेश्‍वर की शक्‍ति को। 30  क्योंकि मरे हुओं के जी उठने पर उनमें न तो पुरुष शादी करेंगे न स्त्रियाँ ब्याही जाएँगी, मगर वे स्वर्गदूतों की तरह होंगे। 31  जहाँ तक मरे हुओं के जी उठने की बात है, क्या तुमने वह नहीं पढ़ा जो परमेश्‍वर ने तुमसे कहा था, 32  ‘मैं अब्राहम का परमेश्‍वर और इसहाक का परमेश्‍वर और याकूब का परमेश्‍वर हूँ’? वह मरे हुओं का नहीं, बल्कि जीवितों का परमेश्‍वर है।” 33  यह सुनकर भीड़ उसकी शिक्षा से हैरान रह गयी। 34  जब फरीसियों ने सुना कि उसने सदूकियों का मुँह बंद कर दिया है, तो वे एक झुंड बनाकर उसके पास आए। 35  उनमें से एक ने, जो मूसा के कानून का अच्छा जानकार था, यीशु को परखने के लिए पूछा: 36  “गुरु, परमेश्‍वर के कानून में सबसे बड़ी आज्ञा कौन-सी है?” 37  उसने कहा: “ ‘तुझे अपने परमेश्‍वर यहोवा से अपने पूरे दिल, अपनी पूरी जान और अपने पूरे दिमाग से प्यार करना है।’ 38  यही सबसे बड़ी और पहली आज्ञा है। 39  और इसी की तरह यह दूसरी है, ‘तुझे अपने पड़ोसी से वैसे ही प्यार करना है जैसे तू खुद से करता है।’ 40  इन्हीं दो आज्ञाओं पर पूरा कानून और भविष्यवक्‍ताओं की शिक्षाएँ आधारित हैं।” 41  जिस दौरान फरीसी वहाँ जमा थे, तब यीशु ने उनसे पूछा: 42  “तुम मसीह के बारे में क्या सोचते हो? वह किसका वंशज है?” उन्होंने कहा: “दाविद का।” 43  उसने उनसे कहा: “तो फिर, क्यों दाविद पवित्र शक्‍ति से उभारे जाने पर उसे ‘प्रभु’ पुकारता है और कहता है, 44  ‘यहोवा ने मेरे प्रभु से कहा: “मेरी दायीं तरफ बैठ जब तक कि मैं तेरे दुश्‍मनों को तेरे पैरों तले न कर दूँ” ’? 45  इसलिए अगर दाविद उसे ‘प्रभु’ कहकर पुकारता है, तो वह उसका वंशज कैसे हुआ?” 46  और कोई भी जवाब में उससे एक शब्द तक न कह सका, न ही उस दिन से फिर किसी ने उससे कोई और सवाल पूछने की हिम्मत की।

कई फुटनोट

मत्ती 22:17 यूनानी में “कैसर।”
मत्ती 22:23 या, “पुनरुत्थान।”