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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | मसीही यूनानी शास्त्र पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद देखिए

इफिसियों 5:1-33

5  इसलिए, परमेश्‍वर के प्यारे बच्चों की तरह उसकी मिसाल पर चलो,  और प्यार की राह पर चलते रहो, ठीक जैसे मसीह ने भी तुमसे प्यार किया और तुम्हारी खातिर परमेश्‍वर के सामने सुगंध देनेवाली भेंट और बलिदान के तौर पर खुद को सौंप दिया।  जैसा पवित्र लोगों को शोभा देता है, तुम्हारे बीच व्यभिचार और किसी भी तरह की अशुद्धता या लालच का ज़िक्र तक न हो,  न तुम्हारे बीच शर्मनाक बर्ताव, न बेवकूफी की बातें, न ही अश्‍लील मज़ाक हो जो शोभा नहीं देते। इसके बजाय, परमेश्‍वर का धन्यवाद ही सुना जाए।  क्योंकि तुम जानते हो और तुम्हें इस बात का पूरा एहसास है कि कोई भी व्यभिचारी या अशुद्ध काम करनेवाला या लालची, जो मूरतों को पूजनेवाले के बराबर है, मसीह के और परमेश्‍वर के राज में कोई विरासत नहीं पाएगा।  कोई भी इंसान तुम्हें खोखली बातों से धोखा न दे, क्योंकि इन्हीं बुराइयों की वजह से परमेश्‍वर का क्रोध आज्ञा न माननेवालों पर आ रहा है।  इसलिए उनके साथ साझेदार न बनो।  इसलिए कि तुम एक वक्‍त अंधकार में थे, मगर अब तुम प्रभु के साथ एकता में होने की वजह से रौशनी में हो। रौशनी की संतानों के नाते चलते रहो,  क्योंकि रौशनी का नतीजा हर तरह की भलाई, नेकी और सच्चाई है। 10  जाँच कर पक्का करते रहो कि प्रभु को क्या भाता है, 11  और उनके साथ अंधकार के निकम्मे कामों में हिस्सा लेना छोड़ दो। इसके बजाय उनकी निंदा करते रहो, 12  क्योंकि वे गुप्त में जो काम करते हैं, उनके बारे में बताना भी शर्मनाक है। 13  जितनी भी बातों का पर्दाफाश किया जाता है, वे रौशनी से ज़ाहिर की जाती हैं, क्योंकि हर वह बात जो ज़ाहिर की जा रही है, वह रौशनी है। 14  इसलिए वह कहता है: “अरे सोनेवाले, जाग और मरे हुओं में से* जी उठ, तब तू मसीह की तरफ से ज्ञान की रौशनी पाएगा।” 15  इसलिए खुद पर कड़ी नज़र रखो कि तुम्हारा चालचलन कैसा है, मूर्खों की तरह नहीं बल्कि बुद्धिमानों की तरह चलो। 16  तय वक्‍त का पूरा-पूरा इस्तेमाल करो* जिससे तुम्हें फायदा हो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 17  इस वजह से अड़ियल मत बनो, बल्कि यह समझो और मालूम करते रहो कि यहोवा की मरज़ी क्या है। 18  साथ ही, दाख-मदिरा पीकर धुत्त न हो, जो बदचलनी की तरफ ले जाता है, मगर पवित्र शक्‍ति से भरपूर होते जाओ। 19  आपस में भजन गाते और परमेश्‍वर का गुणगान करते और उसकी उपासना के गीत गाते रहो, और अपने दिलों में संगीत के साथ यहोवा के लिए गीत गाते रहो, 20  और हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से हमेशा सब बातों के लिए हमारे परमेश्‍वर और पिता का धन्यवाद करते रहो। 21  मसीह का भय मानते हुए एक-दूसरे के अधीन रहो। 22  पत्नियाँ अपने-अपने पति के ऐसे अधीन रहें जैसे प्रभु के, 23  क्योंकि पति अपनी पत्नी का सिर है, ठीक जैसे मसीह भी अपने शरीर यानी मंडली का सिर है और उसका उद्धारकर्त्ता है। 24  ठीक जैसे मंडली मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियाँ भी हर बात में अपने-अपने पति के अधीन रहें। 25  हे पतियो, अपनी-अपनी पत्नी से प्यार करते रहो, ठीक जैसे मसीह ने भी मंडली से प्यार किया और अपने आपको उसकी खातिर दे दिया, 26  ताकि वह पानी-रूपी वचन के स्नान से स्वच्छ कर उसे पवित्र बनाए। 27  और मंडली को इसके पूरे वैभव के साथ अपने सामने पेश करे जिसमें न कोई दाग हो, न झुर्री हो, न ही ऐसी कोई और खामी हो, बल्कि यह पवित्र और बेदाग हो। 28  इसी तरह पतियों को चाहिए कि वे अपनी-अपनी पत्नी से ऐसे प्यार करते रहें जैसे अपने शरीर से। जो अपनी पत्नी से प्यार करता है, वह खुद से प्यार करता है। 29  इसलिए कि कोई भी इंसान अपने शरीर से कभी नफरत नहीं करता, बल्कि वह उसे खिलाता-पिलाता है और उसे अनमोल समझकर बड़े प्यार से उसकी देखभाल करता है, ठीक जैसे मसीह भी मंडली के साथ करता है, 30  क्योंकि हम उसके शरीर के अंग हैं। 31  “इस वजह से पुरुष अपने पिता और अपनी माँ को छोड़ देगा और अपनी पत्नी से जुड़ा रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।” 32  यह पवित्र रहस्य महान है। मैं मसीह और मंडली के बारे में बात कर रहा हूँ। 33  साथ ही, तुम में से हरेक अपनी पत्नी से वैसा ही प्यार करे जैसा वह अपने आप से करता है। और पत्नी भी अपने पति का गहरा आदर करे।

कई फुटनोट

इफि 5:14 यानी, मुरदा हालत में से।
इफि 5:16 शाब्दिक, “वक्‍त को खरीद लो।”