आज भ्रष्ट और लालची सरकारों की वजह से पूरी मानवजाति का वजूद खतरे में है। क्या परमेश्वर हमेशा तक उन्हें अपनी मनमानी करने देगा? नहीं, ऐसा नहीं होगा। जैसा कि हमने पिछले लेख में देखा था सदियों से जो दुख-तकलीफें और ज़ुल्म इस दुनिया में होते आ रहे हैं, उन सब को परमेश्वर खत्म कर देगा। परमेश्वर बहुत जल्द कदम उठानेवाला है और वह चाहता है कि हम इस बारे में जानें। उसने हमें यह कैसे बताया है?

मान लीजिए कि आप बस में सफर करनेवाले हैं। सफर शुरू करने से पहले आप शायद लोगों से पूछें कि फलाँ जगह जाने के लिए आपको कौन-सी बस लेनी होगी, वह कहाँ से मिलेगी और उतरने से पहले रास्ते में क्या-क्या निशानियाँ आएँगी, ताकि आप पहचान पाएँ कि आप सही रास्ते पर हैं या नहीं। फिर जैसे-जैसे आप सफर के दौरान रास्ते में आनेवाली उन निशानियों को देखते हैं, आपको यकीन हो जाता है कि आप अपनी मंज़िल के बहुत करीब हैं।

पवित्र शास्त्र में बताया है कि यह दुनिया एक ऐसे मुकाम पर पहुँचेगी, जो उसे अंत की तरफ ले जाएगा। उस वक्‍त पूरी दुनिया में ऐसी घटनाएँ होंगी और ऐसे हालात पैदा होंगे, जैसा मानवजाति के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। आइए पवित्र शास्त्र में दी ऐसी कुछ निशानियों पर गौर करें।

1. दुनिया-भर में उथल-पुथल पवित्र शास्त्र में दी एक भविष्यवाणी में धरती पर होनेवाली घटनाओं के बारे में बताया गया है। ये घटनाएँ “दुनिया की व्यवस्था के आखिरी वक्‍त” की निशानी हैं और उसके बाद “अंत” आएगा। (मत्ती 24:3, 14) इन घटनाओं में बड़े-बड़े युद्ध, अकाल, एक-के-बाद-एक कई जगहों पर भूकंप, बढ़ती दुष्टता, लोगों में प्यार कम हो जाना और धर्म गुरुओं का लोगों को गुमराह करने की कोशिश करना शामिल है। (मत्ती 24:6-26) यह सच है कि कुछ हद तक ये घटनाएँ सदियों से होती आ रही हैं। लेकिन भविष्यवाणी में बताया गया था कि जैसे-जैसे अंत करीब आएगा, ये सभी घटनाएँ हर कहीं होने लगेंगी। इन घटनाओं के अलावा, अंत आने से पहले नीचे बतायी तीन और निशानियाँ दिखायी देंगी।

2. लोगों का रवैया पवित्र शास्त्र में बताया गया है कि “आखिरी दिनों” में, यानी अंत आने से पहले लोगों का रवैया बद-से-बदतर होता जाएगा। शास्त्र में लिखा है, “लोग सिर्फ खुद से प्यार करनेवाले, पैसे से प्यार करनेवाले, डींगें मारनेवाले, मगरूर, निंदा करनेवाले, माता-पिता की न माननेवाले, एहसान न माननेवाले, विश्वासघाती, मोह-ममता न रखनेवाले, किसी भी बात पर राज़ी न होनेवाले, बदनाम करनेवाले, असंयमी, खूँखार, भलाई से प्यार न रखनेवाले, धोखेबाज़, ढीठ, घमंड से फूले हुए, परमेश्वर के बजाय मौज-मस्ती से प्यार करनेवाले होंगे।” (2 तीमुथियुस 3:1-4) लोग पहले भी एक-दूसरे की इज़्ज़त नहीं करते थे, लेकिन “आखिरी दिनों” में लोगों का रवैया इतना खराब हो जाएगा कि इस दौर को “संकटों से भरा ऐसा वक्‍त” कहा गया है, “जिसका सामना करना मुश्किल होगा।” क्या आपने गौर किया है कि आज लोगों का रवैया बद-से-बदतर होता जा रहा है?

3. पृथ्वी को तबाह किया जा रहा है पवित्र शास्त्र में लिखा है कि परमेश्वर “पृथ्वी को तबाह-बरबाद करनेवालों को खत्म” कर देगा। (प्रकाशितवाक्य 11:18) लोग किस तरह पृथ्वी को तबाह-बरबाद करते? नूह के ज़माने के बारे में भी पवित्र शास्त्र में कुछ ऐसा ही बताया गया था, “पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव [या हिंसा] से भर गई थी। और परमेश्वर ने पृथ्वी पर जो दृष्टि की तो क्या देखा कि वह बिगड़ी हुई है।” इसलिए परमेश्वर ने उन दुष्ट लोगों से कहा, “मैं उनको पृथ्वी समेत नष्ट कर डालूँगा।” (उत्पत्ति 6:11-13) क्या आपने गौर किया है कि पृथ्वी पर हिंसा कितनी बढ़ गयी है? और-तो-और, आज इंसान के पास तरह-तरह के हथियार हैं जिससे वह धरती पर से इंसानों का नामो-निशान मिटा सकता है और इस तरह पृथ्वी को तबाह-बरबाद कर सकता है। इंसानों के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। एक और तरीके से पृथ्वी को तबाह-बरबाद किया जा रहा है। इंसान धरती पर जीवन कायम रखनेवाली हर चीज़ को तबाह कर रहा है। धीरे-धीरे जानवरों की जातियाँ लुप्त हो रही हैं, पेड़-पौधों को काटा जा रहा है, और समुद्र और हवा को दूषित किया जा रहा है।

 ज़रा सोचिए कि ‘आज से 100 साल पहले क्या इंसानों के पास इतने हथियार थे कि वे धरती पर से सभी इंसानों का नामो-निशान मिटा देते?’ लेकिन आज उनके पास इतने खतरनाक हथियार हैं और उन्होंने वातावरण को इस कदर दूषित कर दिया है कि वे धरती पर से सभी इंसानों का नामो-निशान मिटा सकते हैं। इस दुनिया में इतनी तेज़ी से नयी-नयी चीज़ें बनायी जा रही हैं, लेकिन इंसान यह नहीं समझ पा रहा है कि इनसे क्या-क्या परेशानियाँ खड़ी हो सकती हैं और इनका सामना कैसे किया जा सकता है। लेकिन खुशी की बात तो यह है कि पृथ्वी का भविष्य इंसानों के हाथ में नहीं है। परमेश्वर धरती को तबाह-बरबाद करनेवाले इंसानों को खत्म कर देगा, इससे पहले कि वे धरती पर से सभी इंसानों का नामो-निशान मिटा दें। परमेश्वर ने वादा किया है कि वह ऐसा ज़रूर करेगा!

4. पूरी दुनिया में प्रचार काम हो रहा है अंत के बारे में बतायी निशानी में यह भविष्यवाणी भी शामिल है कि उस समय एक ऐसा काम किया जाएगा, जो पहले कभी नहीं किया गया। “राज की इस खुशखबरी का सारे जगत में प्रचार किया जाएगा ताकि सब राष्ट्रों पर गवाही हो; और इसके बाद अंत आ जाएगा।” (मत्ती 24:14) यहाँ जिस प्रचार अभियान की बात की गयी है, वह सदियों से चले आ रहे अलग-अलग धर्मों के प्रचार अभियान से बहुत अलग है। आखिरी दिनों में एक खास संदेश का प्रचार किया जाता, यानी ‘राज की खुशखबरी’ का प्रचार। क्या आप किसी ऐसे धार्मिक समूह को जानते हैं, जो खुशखबरी का प्रचार करता है? और अगर ऐसा कोई समूह है, तो क्या वे सिर्फ एक ही इलाके में प्रचार करते हैं, या उन्होंने इस खुशखबरी का “सारे जगत में प्रचार किया” है, “ताकि सब राष्ट्रों पर गवाही हो”?

दुनिया-भर में परमेश्वर के राज के बारे में सैकड़ों भाषाओं में ऐलान किया जा रहा है

यहोवा के साक्षियों की वेबसाइट www.jw.org में खास तौर पर “राज की इस खुशखबरी” के बारे में बताया गया है। इस वेबसाइट में 700 से भी ज़्यादा भाषाओं में किताबें-पत्रिकाएँ और वीडियो उपलब्ध हैं, जो यह खुशखबरी बताते हैं। क्या आपको किसी और संगठन के बारे में पता है, जो इस तरह राज की खुशखबरी पूरी दुनिया में फैला रहा है? इंटरनेट के उपलब्ध होने से बहुत पहले यहोवा के साक्षी परमेश्वर के राज की खुशखबरी फैलाने के लिए जाने जाते थे। सन्‌ 1939 से प्रहरीदुर्ग पत्रिका के हर अंक के पहले पन्ने पर ये शब्द लिखे होते हैं, “यहोवा के राज्य की घोषणा करता है।” (बाइबल के मुताबिक परमेश्वर का नाम यहोवा है।) धर्मों पर लिखी गयी एक किताब में यहोवा के साक्षियों के प्रचार काम के बारे में कहा गया था कि वे जिस जोश से और जितने बड़े पैमाने पर प्रचार काम करते हैं, वैसा दुनिया में और कोई नहीं करता। यहोवा के साक्षी इस खुशखबरी का प्रचार करते हैं कि परमेश्वर के राज के ज़रिए बहुत जल्द “अंत आ जाएगा।”

दुनिया के इतिहास में एक अहम घड़ी

क्या आपको नहीं लगता कि अंत के बारे में पवित्र शास्त्र में बतायी गयी ये चारों बातें आपके ज़माने में हो रही हैं? पिछले 100 से भी ज़्यादा सालों से यह पत्रिका दुनिया में हो रही  घटनाओं के बारे में लोगों को बता रही है, ताकि लोग खुद इस नतीजे पर पहुँच सकें कि हम अंत के बहुत करीब हैं। लेकिन कुछ लोग इस बात से सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि आँकड़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इन्हें तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और सबकी अपनी-अपनी राय होती है। वे यह भी दावा करते हैं कि दुनिया-भर में संचार में तरक्की हुई है जिस वजह से हमें पहले से कहीं ज़्यादा बुरी खबरें सुनने को मिलती हैं और ऐसा लगता है कि हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि इस बात के ढेरों सबूत हैं कि हम इंसानों के इतिहास के एक ऐसे अनोखे दौर में जी रहे हैं, जिसका अंत बहुत करीब है।

कुछ जानकारों का मानना है कि बहुत जल्द इस धरती पर ज़बरदस्त बदलाव होनेवाले हैं। मिसाल के लिए, सन्‌ 2014 में कुछ वैज्ञानिकों ने एक रिपोर्ट में बताया कि आज ऐसी कई घटनाएँ हो रही हैं, जिस वजह से मानवजाति के वजूद के खत्म होने का बहुत बड़ा खतरा है। बहुत-से लोगों को इस बात का यकीन हो गया है कि हम इंसानों के इतिहास की एक अहम घड़ी में आ पहुँचे हैं। इस पत्रिका को तैयार करनेवाले और इसे पढ़नेवाले बहुत-से लोगों को इस बात का पूरा यकीन हो गया है कि हम इस दौर के आखिरी दिनों में जी रहे हैं और अंत बहुत करीब है। लेकिन आनेवाले कल से डरने के बजाय, आप उसके बारे में सोचकर खुश हो सकते हैं। क्यों? क्योंकि आप अंत से बच सकते हैं! (w15-E 05/01)