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यहोवा के साक्षी

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 दिलचस्पी लेनेवाले से बातचीत

सन्‌ 1914 क्यों यहोवा के साक्षियों के लिए खास साल है? (भाग 1)

सन्‌ 1914 क्यों यहोवा के साक्षियों के लिए खास साल है? (भाग 1)

एक दिलचस्पी लेनेवाले से किसी विषय पर आम तौर पर यहोवा के साक्षी कुछ इस तरह बातचीत करते हैं। कल्पना कीजिए कि कपिल नाम का यहोवा का साक्षी, जीवन नाम के आदमी से बातचीत कर रहा है।

समझ हासिल करने की ‘खोज में लगे रहिए’

कपिल: और जीवन, कैसे हो? आपके साथ बाइबल पर चर्चा करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। * पिछली बार जब हम बात कर रहे थे, तो आपके मन में एक सवाल था। आप कह रहे थे कि ‘यहोवा के साक्षियों के लिए सन्‌ 1914 बहुत खास साल है। उसी साल परमेश्वर के राज ने शासन करना शुरू किया। लेकिन आप यह कैसे कह सकते हैं?’ यही सवाल था ना आपका?

जीवन: हाँ। मैं दरअसल आपकी एक किताब पढ़ रहा था और उसमें लिखा था कि परमेश्वर का राज सन्‌ 1914 में शुरू हो चुका है। मैं इस बारे में और जानना चाहता हूँ। आप लोग कहते हैं कि यहोवा के साक्षी जो भी मानते हैं उसका आधार बाइबल होता है।

कपिल: हाँ, इसमें तो कोई दो राय नहीं।

जीवन: मैंने भी पूरी बाइबल पढ़ी, मगर मुझे कहीं 1914 का ज़िक्र नहीं मिला। इसलिए मैंने इंटरनेट पर बाइबल में ‘1914’ ढूँढ़ने की कोशिश की। मगर वहाँ भी कुछ नहीं मिला।

कपिल: जीवन, मुझे दो बातें आपमें बहुत अच्छी लगीं। एक तो यह कि आपने पूरी बाइबल पढ़ी। लगता है आपको परमेश्वर के वचन से बहुत लगाव है।

जीवन: वो तो है। इसके जैसी और कोई किताब नहीं।

कपिल: सही कहा आपने। दूसरी बात यह कि आपने अपने सवाल का जवाब बाइबल में ढूँढ़ने की कोशिश की। दरअसल आपने वही किया जिसके बारे में बाइबल हमें बढ़ावा देती है। बाइबल कहती है, समझ हासिल करने की ‘खोज में लगे रहो।’ * आपको इतनी मेहनत करते देख मुझे बहुत अच्छा लगता है।

जीवन: शुक्रिया! मैं और भी बहुत कुछ जानना चाहता हूँ। मैंने इस बारे में और भी खोजबीन की थी। और मुझे इसी किताब में जिससे हम अध्ययन कर रहे हैं, 1914 के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी मिली। इसमें एक राजा के सपने के बारे में बताया गया है। उसने देखा कि एक बड़ा-सा पेड़ है, जिसे काट डाला गया। मगर कुछ समय बाद वह फिर से बढ़ने लगा। ऐसे ही कुछ था . . .

कपिल: बिलकुल सही कहा। दरअसल यह एक भविष्यवाणी है जो बाइबल में दानिय्येल नाम की किताब के अध्याय 4 में दर्ज़ है। इस अध्याय में वह सपना लिखा है जो बैबिलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने देखा था।

जीवन: हाँ, हाँ यही राजा था। मैंने वह भविष्यवाणी कई बार पढ़ी, मगर इसका परमेश्वर के राज से, या सन्‌ 1914 से क्या ताल्लुक है, यह मेरी समझ में नहीं आया।

कपिल: जीवन, दरअसल दानिय्येल भविष्यवक्ता ने परमेश्वर की प्रेरणा से जो बातें लिखीं, उन्हें वह भी पूरी तरह नहीं समझ पाया।

जीवन: सच?

कपिल: हाँ, देखिए दानिय्येल 12:8 में वह क्या कहता है: “मैं सुनता तो था परन्तु कुछ न समझा।”

जीवन: चलो अच्छा है। इसका मतलब मैं अकेला नहीं जो इसे नहीं समझ पाया।

 कपिल: दरअसल बात यह है कि दानिय्येल को इसलिए समझ में नहीं आया, क्योंकि उस वक्‍त परमेश्वर का तय समय नहीं था कि इंसान, इस किताब में लिखी भविष्यवाणियों का मतलब समझ सके। लेकिन आज हम इनका मतलब समझ सकते हैं।

जीवन: यह आप कैसे कह सकते हैं?

कपिल: अभी हमने जो आयत पढ़ी, देखिए उसकी अगली आयत क्या कहती है। दानिय्येल 12:9 कहता है, “ये बातें अन्तसमय के लिये बन्द हैं और इन पर मुहर दी हुई है।” इसका मतलब ये भविष्यवाणियाँ काफी समय बाद, यानी ‘अंत के समय में’ समझ में आतीं। आज ऐसे बहुत-से सबूत हैं, जो दिखाते हैं कि हम अंत के समय में जी रहे हैं। इस बारे में जल्द ही हम अपने अध्ययन में चर्चा करेंगे। *

जीवन: तो क्या आप मुझे दानिय्येल की किताब में दी भविष्यवाणी समझा सकते हैं?

कपिल: ठीक है, मैं कोशिश करूँगा।

नबूकदनेस्सर का सपना

कपिल: चलिए मैं आपको पहले चंद शब्दों में बताता हूँ कि नबूकदनेस्सर ने सपने में क्या देखा था। फिर हम देखेंगे कि इसका क्या मतलब है।

जीवन: ठीक है।

कपिल: नबूकदनेस्सर ने सपने में एक बहुत ऊँचा और विशाल पेड़ देखा, इतना ऊँचा कि वह आसमान छू रहा था। फिर उसने परमेश्वर के स्वर्गदूत को यह कहते सुना कि यह पेड़ काट डाला जाए। मगर इसके ठूँठ यानी निचले हिस्से को ज़मीन में ही छोड़ दिया जाए। फिर “सात काल” के समय के बाद वह ठूँठ फिर से बढ़ेगा। * यह भविष्यवाणी पहले तो राजा नबूकदनेस्सर के साथ पूरी हुई। वह बहुत जाना-माना राजा था, उस विशाल पेड़ की तरह। मगर “सात काल” के लिए उसे मानो काट डाला गया। याद है आपको उस समय क्या हुआ था?

जीवन: मुझे तो कुछ याद नहीं आ रहा।

कपिल: कोई बात नहीं। बाइबल बताती है, उस समय नबूकदनेस्सर अपनी बुद्धि या सुध-बुध खो बैठा था। वह भी सात काल के लिए। उस दौरान वह राजा के तौर पर शासन करने के काबिल नहीं रहा। मगर सात काल खत्म होने के बाद उसकी बुद्धि लौट आयी, वह ठीक हो गया और फिर से शासन करने लगा। *

जीवन: यह सब तो समझ में आ गया। लेकिन इसका परमेश्वर के राज से और 1914 से क्या ताल्लुक है?

कपिल: ठीक है, मैं आपको समझता हूँ। दरअसल यह भविष्यवाणी दो बार पूरी होनी थी। पहली बार यह भविष्यवाणी तब पूरी हुई जब कुछ समय के लिए राजा नबूकदनेस्सर की हुकूमत रोक दी गयी। और यह दूसरी बार तब पूरी होती जब परमेश्वर की हुकूमत को रोका जाता। तो इसकी जो दूसरी पूर्ति है, वह परमेश्वर के राज से जुड़ी है।

जीवन: लेकिन आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह भविष्यवाणी दूसरी बार भी पूरी होगी और वह परमेश्वर के राज से जुड़ी है?

कपिल: अच्छा सवाल है। दरअसल इसकी एक वजह इस भविष्यवाणी में ही मिलती है। दानिय्येल 4:17 कहता है कि यह भविष्यवाणी इसलिए की गयी थी, ताकि “जो जीवित हैं वे जान लें कि परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता [या, शासन] करता है, और उसको जिसे चाहे उसे दे देता है।” क्या आपने शब्द “मनुष्यों के राज्य” पर ध्यान दिया?

जीवन: हाँ, आयत कहती है, “परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है।”

कपिल: इसका मतलब है, यह भविष्यवाणी सिर्फ नबूकदनेस्सर के बारे में नहीं थी। इसमें “मनुष्यों का राज्य” यानी इंसानों पर परमेश्वर की हुकूमत भी शामिल है। और अगर हम इस भविष्यवाणी में आगे-पीछे की आयतें देखें तो पता चलता है कि ऐसा कहना सही है।

जीवन: इसका क्या मतलब है?

दानिय्येल की किताब का मुख्य विषय

कपिल: दानिय्येल की किताब में एक खास विषय के बारे में बार-बार बात की गयी है। वह यह कि कैसे परमेश्वर का राज कायम किया जाएगा, जिसकी बागडोर उसके बेटे यीशु मसीह के हाथों में होगी। उदाहरण के लिए, आइए हम दानिय्येल की किताब के कुछ दूसरे अध्यायों पर गौर करें। क्या आप दानिय्येल 2:44 पढ़ेंगे?

जीवन: ठीक है। यहाँ लिखा है, “उन राजाओं के दिनों में स्वर्ग  का परमेश्वर, एक ऐसा राज्य उदय करेगा जो अनन्तकाल तक न टूटेगा, और न वह किसी दूसरी जाति के हाथ में किया जाएगा। वरन वह उन सब राज्यों को चूर चूर करेगा, और उनका अन्त कर डालेगा; और वह सदा स्थिर रहेगा।”

कपिल: शुक्रिया! क्या आपको नहीं लगता यह आयत परमेश्वर के राज के बारे में बताती है?

जीवन: शायद . . .।

कपिल: ध्यान दीजिए, आयत कहती है यह राज “सदा स्थिर रहेगा।” ऐसा हम परमेश्वर के राज के बारे में तो कह सकते हैं। लेकिन क्या किसी इंसानी सरकार के बारे में ऐसा कहा जा सकता है?

जीवन: नहीं।

कपिल: दानिय्येल की किताब में एक और भविष्यवाणी है जो परमेश्वर के राज की तरफ इशारा करती है। यह भविष्यवाणी दानिय्येल 7:13, 14 में दर्ज़ है। यह भविष्यवाणी भविष्य में शासन करनेवाले एक राजा के बारे में बताती है, “उसको ऐसी प्रभुता, महिमा और राज्य दिया गया, कि देश-देश और जाति-जाति के लोग और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवाले सब उसके अधीन हों; उसकी प्रभुता सदा तक अटल, और उसका राज्य अविनाशी ठहरा।” क्या इसमें आपको कोई ऐसी बात नज़र आयी जो दानिय्येल 2:44 में कही बात से मेल खाती है?

जीवन: हाँ, इसमें एक राज का ज़िक्र किया गया है।

कपिल: सही कहा। लेकिन यह कोई ऐसा-वैसा राज नहीं है। ज़रा इस आयत पर फिर से ध्यान दीजिए। यह कहती है, यह राज ‘देश-देश और जाति-जाति और भिन्न-भिन्न भाषा बोलनेवाले सब लोगों’ पर शासन करेगा। दूसरे शब्दों में कहें तो यह राज पूरी दुनिया पर हुकूमत करेगा।

जीवन: मैंने तो ऐसा सोचा ही नहीं। आप सही कह रहे हैं।

कपिल: गौर कीजिए यह आयत और क्या कहती है, “उसकी प्रभुता सदा तक अटल, और उसका राज्य अविनाशी ठहरा।” यह बात बिलकुल वैसी ही नहीं लगती जैसी अभी हमने दानिय्येल 2:44 में पढ़ी थी?

जीवन: बिलकुल।

कपिल: अभी तक हमने जिन बातों पर चर्चा की, आइए उन पर दोबारा गौर करते हैं। दानिय्येल की किताब के अध्याय 4 में जो भविष्यवाणी दर्ज़ है, वह इसलिए दी गयी ताकि लोग जानें कि “परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता [या, शासन] करता है।” इन शब्दों से पता चलता है कि यह भविष्यवाणी सिर्फ नबूकदनेस्सर के बारे में नहीं थी, बल्कि यह एक और भी बड़ी हस्ती के मामले में पूरी होनेवाली थी। और हम देख सकते हैं कि दानिय्येल की पूरी किताब में, परमेश्वर के राज के कायम होने के बारे में भविष्यवाणियाँ दर्ज़ हैं। इस राज की बागडोर परमेश्वर का बेटा सँभालेगा। तो जीवन, क्या आपको नहीं लगता इस नतीजे पर पहुँचना सही होगा कि इस किताब के अध्याय 4 में दर्ज़ भविष्यवाणी परमेश्वर के राज से जुड़ी है?

जीवन: हाँ, सही तो लग रहा है। लेकिन मुझे अब भी यह समझ में नहीं आया कि इसका 1914 से क्या ताल्लुक है?

“सात काल बीतें”

कपिल: आइए फिर से राजा नबूकदनेस्सर पर ध्यान देते हैं। याद है, भविष्यवाणी में बताया पेड़ राजा नबूकदनेस्सर को दर्शाता है। और पेड़ का काटा जाना और उसे सात काल के लिए यूँ ही छोड़ा जाना, इस बात को दर्शाता है कि उतने समय तक उसकी हुकूमत नहीं रहेगी। यही वह समय था जब राजा अपनी बुद्धि या सुध-बुध खो बैठा। भविष्यवाणी में बताया सात काल का समय तब खत्म होता है, जब राजा नबूकदनेस्सर की बुद्धि लौट आती है और वह फिर से शासन करने लगता है। यह भविष्यवाणी दूसरी बार तब पूरी होती है, जब कुछ समय के लिए परमेश्वर की हुकूमत को रोका जाता है। मगर वह इसलिए नहीं कि परमेश्वर हुकूमत करने के काबिल नहीं रहा।

जीवन: कैसे?

कपिल: प्राचीन समय में, यरूशलेम में जो इसराएली राजा हुकूमत करते थे उनके बारे में बाइबल कहती है कि वे “यहोवा  के सिंहासन” या उसकी राजगद्दी पर बैठते थे। * वे परमेश्वर की तरफ से उसके लोगों पर हुकूमत करते थे। इसलिए उन राजाओं की हुकूमत असल में परमेश्वर की हुकूमत थी। मगर कुछ समय बाद, उनमें से ज़्यादातर राजाओं ने परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानी और उनकी ज़्यादातर प्रजा ने भी वैसा ही किया। इसी वजह से ईसा पूर्व 607 में परमेश्वर ने इसराएलियों को बैबिलोन की गुलामी में जाने दिया। इसके बाद से यरूशलेम में कोई ऐसा राजा नहीं हुआ, जो यहोवा की तरफ से हुकूमत कर रहा हो। इस तरह हम कह सकते हैं कि कुछ समय के लिए परमेश्वर की हुकूमत रोक दी गयी। आप समझ रहे हैं ना?

जीवन: हाँ, हाँ।

कपिल: इस तरह ईसा पूर्व 607 से सात काल का समय शुरू हुआ, या कहें कि वह दौर शुरू हुआ जब परमेश्वर की हुकूमत रोक दी गयी। सात काल के आखिर में परमेश्वर एक नए शासक को नियुक्‍त करता है, जो उसकी तरफ से स्वर्ग से हुकूमत करता है। उस वक्‍त दानिय्येल की किताब में दर्ज़ दूसरी भविष्यवाणियाँ भी पूरी होती हैं। लेकिन सवाल है, ये सात काल कब खत्म होते हैं? अगर हम इस सवाल का जवाब जान लें, तो हमें पता चल जाएगा कि परमेश्वर के राज ने कब शासन करना शुरू किया।

जीवन: हं. . . अब कुछ समझ में आया। मेरे खयाल से वह सात काल 1914 में खत्म होते हैं। है ना?

कपिल: बिलकुल सही!

जीवन: लेकिन हम यह पक्के तौर पर कैसे कह सकते हैं?

कपिल: जब यीशु मसीह धरती पर सेवा कर रहा था, तो उसने यह ज़ाहिर किया कि अभी सात काल खत्म नहीं हुए हैं। * इसका मतलब यह दौर बहुत लंबा है। यीशु जब धरती पर आया तो उससे सैकड़ों साल पहले ही सात काल का दौर शुरू हो चुका था। और जब वह स्वर्ग वापस गया उसके काफी समय बाद तक यह दौर चलता रहा। और यह भी याद रखिए, दानिय्येल की किताब में दर्ज़ भविष्यवाणियों का मतलब तब तक समझ में नहीं आता, जब तक ‘अंत का समय’ शुरू नहीं होता। * दिलचस्पी की बात है कि सन्‌ 1800 के आखिरी सालों में कुछ अच्छे दिल के बाइबल विद्यार्थियों में इन भविष्यवाणियों को जानने की इच्छा हुई। इसलिए वे इन भविष्यवाणियों की गहराई से जाँच-परख करने लगे। उन्हें यह समझ में आने लगा कि सात काल का दौर 1914 में खत्म होगा। उस वक्‍त से पूरी दुनिया में जो बड़ी-बड़ी घटनाएँ घट रही हैं, वे साबित करती हैं कि 1914 ही वह साल है, जब परमेश्वर के राज ने स्वर्ग में शासन करना शुरू किया। यही वह साल था जब इस दुनिया ने आखिरी दिनों में कदम रखा, या अंत का समय शुरू हुआ। लेकिन जीवन, मैं समझ सकता हूँ कि एक साथ इन सारी बातों को समझना शायद आपके लिए मुश्किल हो।

जीवन: हाँ यह तो है। मैं इसे फिर से पढूँगा, ताकि इसे अच्छी तरह समझ सकूँ।

कपिल: कोई बात नहीं जीवन। इन भविष्यवाणियों को समझने में मुझे भी काफी वक्‍त लगा। उम्मीद है कि हमारी इस चर्चा से आपको यह समझने में मदद मिली होगी कि यहोवा के साक्षी परमेश्वर के राज के बारे में जो भी मानते हैं वह बाइबल पर आधारित है।

जीवन: हाँ बिलकुल। आप लोगों की यह बात मुझे बहुत अच्छी लगती है कि आप जो भी मानते हैं वह बाइबल से होता है।

कपिल: मैं भी देख सकता हूँ कि आप अपने सवालों के जवाब बाइबल से पाना चाहते हैं। लेकिन जैसे मैंने पहले कहा, एक बार में इन सारी बातों को समझना थोड़ा मुश्किल है। हमने यह तो देख लिया कि सात काल का दौर परमेश्वर के राज से जुड़ा है और इसकी शुरूआत ईसा पूर्व 607 में हुई। पर शायद आपके मन में और भी कई सवाल होंगे। जैसे, हम यह पक्के तौर पर कैसे कह सकते हैं कि सात काल 1914 में खत्म होते हैं? *

जीवन: हाँ, आपने मेरे मुँह की बात छीन ली।

कपिल: बाइबल ही हमें बताती है कि ये सात काल ठीक कितने लंबे हैं। क्यों न हम अगली बार इस विषय पर चर्चा करें? *

जीवन: ठीक है। ▪ (w14-E 10/01)

क्या आपके मन में बाइबल से जुड़ा कोई सवाल है, जो आप जानना चाहते हैं? क्या आपके मन में यहोवा के साक्षियों के बारे में कोई सवाल है? अगर हाँ, तो किसी भी यहोवा के साक्षी से बेझिझक पूछिए। उसे आपके साथ ऐसे विषय पर चर्चा करने में खुशी होगी।

^ पैरा. 5 यहोवा के साक्षी मुफ्त में बाइबल अध्ययन का जो कार्यक्रम चलाते हैं, उसमें वे दिलचस्पी लेनेवालों से बाइबल से जुड़े विषयों पर कुछ इसी तरह चर्चा करते हैं।

^ पैरा. 21 बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब का अध्याय 9 देखिए। इसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है।

^ पैरा. 61 यीशु ने जब आखिरी दिनों के बारे में भविष्यवाणी की तो उसने कहा, “जब तक इन राष्ट्रों के लिए तय किया हुआ वक्‍त पूरा न हो जाए, तब तक यरूशलेम [जो परमेश्वर की हुकूमत को दर्शाता था] इन राष्ट्रों के पैरों तले रौंदा जाएगा।” (लूका 21:24) इसका मतलब जब यीशु धरती पर था तब तक परमेश्वर की हुकूमत दोबारा शुरू नहीं हुई थी और यह तब तक शुरू नहीं होती जब तक कि आखिरी दिन शुरू नहीं होते।

^ पैरा. 65 बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब के अतिरिक्त लेख “सन्‌ 1914—बाइबल की भविष्यवाणी का अहम साल” देखिए।

^ पैरा. 67 इस श्रृंखला के अगले लेख में बाइबल की उन आयतों पर चर्चा की जाएगी, जिनसे पता चलता है कि सात काल का दौर कितना लंबा है।