इस जानकारी को छोड़ दें

सैकेंडरी मैन्यू को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  जनवरी 2015

 पहले पेज का विषय | क्या आप परमेश्वर के दोस्त बन सकते हैं?

क्या आप वह काम करते हैं जिससे परमेश्वर खुश होता है?

क्या आप वह काम करते हैं जिससे परमेश्वर खुश होता है?

“जो भी चाहिए हो मुझे बताना।” ऐसी बात आप एक अजनबी से या जिसे आप बस थोड़ा-बहुत जानते हैं, उससे शायद नहीं कहेंगे। लेकिन एक करीबी दोस्त से ऐसा कहने से आप बिलकुल नहीं झिझकेंगे। करीबी दोस्त एक-दूसरे के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं।

बाइबल से पता चलता है कि यहोवा अच्छी तरह जानता है कि किन कामों से उसके उपासकों को खुशी मिलेगी और वह हमेशा वे काम करता है। मिसाल के लिए, राजा दाविद को लीजिए जिसका परमेश्वर के साथ करीबी रिश्ता था। उसने कहा, “हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है . . . उनकी गिनती नहीं हो सकती।” (भजन 40:5) यही नहीं, जो लोग अभी तक यहोवा को नहीं जानते, उनके लिए भी वह ऐसे काम करता है, जिनसे उन्हें खुशी मिलती है। वह ‘उन्हें जी भर के खाना और ढेरों खुशियाँ देकर उनके दिलों को आनंद से भरता है।’—प्रेषितों 14:17.

जिनके लिए हमारे दिल में प्यार और आदर होता है उनके लिए हम खुशी-खुशी काम करते हैं

जब यहोवा को वे काम करना अच्छा लगता है, जिनसे दूसरों को खुशी मिलती है, तो जो परमेश्वर के दोस्त बनना चाहते हैं, क्या उनसे यह उम्मीद करना सही नहीं कि वे भी वही काम करें जिनसे परमेश्वर का “मन आनन्दित” होता है? (नीतिवचन 27:11) मगर आप कैसे परमेश्वर को खुश कर सकते हैं? बाइबल इसका जवाब देती है, “भलाई करना और अपनी चीज़ों से दूसरों की मदद करना न भूलो, क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से बहुत खुश होता है।” (इब्रानियों 13:16) तो क्या इसका मतलब परमेश्वर को खुश करने के लिए सिर्फ भले काम करना और अपनी चीज़ों से दूसरों की मदद करना काफी है?

परमेश्वर का वचन कहता है, “विश्वास के बिना परमेश्वर को खुश करना नामुमकिन है।” (इब्रानियों 11:6) गौर करनेवाली बात है कि “अब्राहम ने यहोवा पर विश्वास किया” और उसके बाद ही “वह ‘यहोवा का मित्र’ कहलाया।” (याकूब 2:23) यीशु मसीह ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर हम परमेश्वर से आशीषें पाना चाहते हैं, तो हमें “परमेश्वर पर विश्वास” दिखाने की ज़रूरत है। (यूहन्ना 14:1) तो फिर आप वह विश्वास कैसे दिखा सकते हैं, जो परमेश्वर उनमें देखता है जिन्हें वह अपना दोस्त बनाना चाहता है? इसकी शुरूआत आप नियमित तौर पर परमेश्वर का वचन बाइबल पढ़ने और उसे समझने के ज़रिए कर सकते हैं। ऐसा करके आप “उसकी मरज़ी के बारे में सही-सही ज्ञान” ले पाएँगे और यह जान पाएँगे कि आप कैसे “उसे पूरी तरह खुश कर” सकते हैं। जैसे-जैसे आप यहोवा को और करीबी से जानेंगे और उसके स्तरों के मुताबिक जीएँगे, उस पर आपका विश्वास बढ़ेगा और वह आपके और भी करीब आएगा।—कुलुस्सियों 1:9, 10. (w14-E 12/01)