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यहोवा के साक्षी

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प्रहरीदुर्ग  |  अक्टूबर 2014

 पहले पेज का विषय | अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है?

दुख-तकलीफों और मुसीबतों का अंबार!

दुख-तकलीफों और मुसीबतों का अंबार!

पैंतीस साल की जवान स्मिता * बड़ी प्यार और परवाह दिखानेवाली स्त्री थी। वह बाँग्लादेश के ढाका में रहती थी। स्मिता का स्वभाव लोगों को बहुत पसंद था। उसका नाम लेते ही लोगों के मन में एक मेहनती और खुशहाल पत्नी की तसवीर उभर आती थी। वह परमेश्वर के बारे में सीखी हुई बातें लोगों को बताने के लिए हरदम तैयार रहती थी। लेकिन एक दिन स्मिता के परिवारवालों और दोस्तों को बहुत बड़ा धक्का लगा। अचानक स्मिता को ऐसी बीमारी लगी जिसने हफ्ते-भर में ही उसकी जान ले ली!

जय और उसकी पत्नी अभी कोई 30-35 साल के थे। स्मिता की तरह उनका भी बड़ा अच्छा स्वभाव था और लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे। एक बार वे वसंत के मौसम में अमरीका के पश्‍चिमी तट पर अपने दोस्तों से मिलने गए। वहाँ से वे अपने घर न्यू यॉर्क कभी वापस नहीं लौटे। रास्ते में एक टैक्सी में हुई दुर्घटना ने उन दोनों की जान ले ली और उनके अज़ीज़ों और साथ काम करनेवालों की दुनिया वीरान कर दी।

आज दुनिया में दुख-तकलीफों और मुसीबतों का अंबार लगा है। यह देखने के लिए आपको कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है। आए दिन जो युद्ध होते हैं, उनमें न सिर्फ सैनिक, बल्कि आम जनता भी मारी जाती है। सीधे-सादे लोग जुर्म और हिंसा के शिकार होते हैं। जानलेवा दुर्घटनाएँ और बीमारियाँ किसी को नहीं छोड़तीं, फिर चाहे इंसान की उम्र या हैसियत जो भी हो। कुदरती आफतें पूरे-के-पूरे समाज को बरबाद कर देती हैं। भेदभाव और नाइंसाफी आज चारों तरफ फैली हुई है। शायद आप भी ऐसी किसी मुसीबत के शिकार हुए हों।

ऐसे में इस तरह के सवाल पूछना लाज़िमी है:

  • अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है?

  • क्या ऐसी मुसीबतों के लिए परमेश्वर ज़िम्मेदार है?

  • क्या ये मुसीबतें बस एक इत्तफाक हैं या इनके लिए इंसान ज़िम्मेदार है?

  • क्या यह सब कर्मों का फल है, यानी इंसान आज जो मुसीबतें झेल रहा है, वह सब उसके पिछले जन्म के बुरे कामों का अंजाम है?

  • अगर एक सर्वशक्‍तिमान परमेश्वर है, तो वह अच्छे लोगों को मुसीबतों से क्यों नहीं बचाता?

  • क्या कभी इंसान की ज़िंदगी दुख-तकलीफों और बुराइयों से आज़ाद होगी?

इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमें दो अहम सवालों के जवाब जानने की ज़रूरत है। वह हैं: आखिर दुख-तकलीफें आती क्यों हैं? परमेश्वर क्या कदम उठाएगा? (w14-E 07/01)

^ पैरा. 3 नाम बदल दिए गए हैं।