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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अक्टूबर 2014

 आपके सवाल . . .

परमेश्वर को किसने बनाया?

परमेश्वर को किसने बनाया?

कल्पना कीजिए, एक पिता अपने 7 साल के बेटे से बात कर रहा है। वह बच्चे से कहता है, “बहुत साल पहले परमेश्वर ने धरती और उसकी हर चीज़ बनायी। सूरज, चाँद, तारे सबकुछ बनाया।” बेटा कुछ पल इस बारे में सोचता है, फिर बड़ी मासूमियत से पिता से पूछता है, “पापा, परमेश्वर को किसने बनाया?”

पिताजी जवाब देते हैं, “परमेश्वर को किसी ने नहीं बनाया। वह तो हमेशा से है।” यह सीधा-सा जवाब सुनकर फिलहाल बच्चा खुश हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होने लगता है, यही सवाल फिर से उसके मन में बार-बार आने लगता है। वह सोचता है, अगर परमेश्वर की कोई शुरूआत नहीं, तो वह वजूद में कैसे हो सकता है। विश्वमंडल को देखें तो उसमें जो कुछ है, हर चीज़ की एक शुरूआत है, उसे परमेश्वर ने बनाया है। तो फिर परमेश्वर को किसने बनाया?

बाइबल इस सवाल का क्या जवाब देती है? दरअसल बाइबल इस सवाल का वैसा ही जवाब देती है जैसा हमारे उदाहरण में पिता ने दिया था। परमेश्वर के एक वफादार सेवक मूसा ने परमेश्वर के बारे में लिखा, “हे [यहोवा] . . . इस से पहिले कि पहाड़ उत्पन्न हुए, वा तू ने पृथ्वी और जगत की रचना की, वरन अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू ही ईश्वर है।” (भजन 90:1, 2) उसी तरह प्राचीन इसराएल के एक भविष्यवक्ता यशायाह ने ऐलान किया, “क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा . . . सनातन [या सदाकाल का] परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है।” (यशायाह 40:28) बाइबल की एक किताब यहूदा में परमेश्वर के बारे में कहा गया है कि वह “बीते युगों” से है।—यहूदा 25.

शास्त्र की इन आयतों से पता चलता है कि परमेश्वर ‘युग-युग का राजा’ है, जैसा कि यीशु के एक चेले प्रेषित पौलुस ने कहा। (1 तीमुथियुस 1:17) इसका मतलब हम चाहें समय की धारा में जितना भी पीछे चले जाएँ, हम पाएँगे कि परमेश्वर हमेशा से है और हमेशा तक रहेगा। (प्रकाशितवाक्य 1:8) जी हाँ, हमेशा-हमेशा तक वजूद में रहना, सर्वशक्‍तिमान परमेश्वर की सबसे बड़ी खासियत है।

परमेश्वर की इस खासियत को समझना हमें इतना मुश्किल क्यों लगता है? वह इसलिए कि हमारी ज़िंदगी बहुत छोटी है और इस वजह से समय के बार में हमारी समझ यहोवा की समझ से एकदम अलग है। अब क्योंकि परमेश्वर हमेशा से है और हमेशा तक रहेगा, इसलिए एक हज़ार साल उसकी नज़र में एक दिन के बराबर हैं। (2 पतरस 3:8) ज़रा टिड्डी की मिसाल पर गौर कीजिए। आम तौर पर पूरी तरह विकसित टिड्डी करीब 50 दिन जीती है। तो क्या टिड्डी समझ पाएगी कि हमारी 70-80 साल की ज़िंदगी कितनी लंबी होती है? बाइबल हमारी तुलना टिड्डी से करती है। हमारे सृष्टिकर्ता की तुलना में हमारी उम्र टिड्डियों जैसी है और हमारी सोचने-समझने की काबिलीयत तो मानो न के बराबर है। (यशायाह 40:22; 55:8, 9) इसलिए यह कोई ताज्जुब की बात नहीं कि परमेश्वर यहोवा के बारे में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें हम पूरी तरह नहीं समझ सकते।

हालाँकि हमारे लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि परमेश्वर यहोवा हमेशा से वजूद में है और हमेशा रहेगा, पर हम देख सकते हैं कि इस बात में तुक है। कैसे? सोचिए अगर किसी और ने परमेश्वर को बनाया होता, तो वह सृष्टिकर्ता कहलाता। जबकि बाइबल साफ-साफ समझाती है कि “सारी चीज़ें” परमेश्वर यहोवा ने बनायी हैं। (प्रकाशितवाक्य 4:11) और जैसा कि हम जानते हैं कि एक समय पर विश्वमंडल वजूद में नहीं था। (उत्पत्ति 1:1, 2) तो फिर यह कहाँ से आया? ज़रूर इसको किसी ने बनाया है और जिसने इसे बनाया उसका पहले से वजूद में होना ज़रूरी है। यहाँ तक कि बाइबल कहती है कि सृष्टिकर्ता, किसी भी बुद्धिमान प्राणी के वजूद में आने से पहले वजूद में था, यानी स्वर्ग में अपने इकलौते बेटे और स्वर्गदूतों को बनाने से पहले। (अय्यूब 38:4, 7; कुलुस्सियों 1:15) इससे साफ ज़ाहिर है कि उसे किसी ने नहीं बनाया, क्योंकि उससे पहले कोई और वजूद में था ही नहीं।

हम इंसानों का वजूद और पूरे विश्वमंडल का वजूद में आना यह साबित करता है कि परमेश्वर का वजूद हमेशा से रहा है। जी हाँ, यह ज़रूरी है कि जो इस पूरे विश्वमंडल को चलाता है और जिसने इसके लिए नियम बनाए हैं, वह हमेशा से वजूद में हो और हमेशा वजूद में रहे। क्योंकि सिर्फ वही हर प्राणी को जीवन और साँसें दे सकता है।—अय्यूब 33:4. ▪ (w14-E 08/01)