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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अक्टूबर 2014

 ज़िंदगी सँवार देती है बाइबल

मैं कभी-भी बिना बंदूक के कहीं नहीं जाता था

मैं कभी-भी बिना बंदूक के कहीं नहीं जाता था
  • जन्म: 1958

  • देश: इटली

  • उसका अतीत: खूँखार गिरोह का सदस्य

मेरा बीता कल:

मेरा जन्म रोम शहर के एक ऐसे इलाके में हुआ था जहाँ गरीब मज़दूरों की बस्तियाँ थीं। मैं इन्हीं बस्तियों में पला-बढ़ा। यहाँ ज़िंदगी गुज़ारना बहुत मुश्किल था। माता-पिता की बात करें तो मैं अपनी माँ के बारे में ज़्यादा-कुछ नहीं जानता और पिता के साथ भी मेरा रिश्ता अच्छा नहीं था। बस्तियों के गली-मोहल्लों ने ही मुझे जीना सिखाया।

दस साल का होते-होते मैं चोरी करना सीख गया। बारह साल की उम्र में मैं पहली बार घर से भागा। इसके बाद कई बार पिता जी ने मुझे पुलिस स्टेशन में पाया जहाँ से वे मुझे घर लाए। मैं बहुत गुस्सैल स्वभाव का था, हमेशा लोगों से झगड़ता रहता था। एक-दो से नहीं, पूरी दुनिया से लड़ता रहता था। जब मैं 14 साल का हुआ, तो मैंने हमेशा के लिए घर छोड़ दिया। मैं ड्रग्स लेने लगा और सड़कों पर ज़िंदगी गुज़ारने लगा। मेरे सिर पर छत तो थी नहीं इसलिए रात गुज़ारने के लिए चुपके से किसी कार में घुस जाता और उसी में सो जाता। उजाला होने से पहले मैं कार से निकल जाता और हाथ-मुँह धोने के लिए पानी की तलाश करने लगता।

चाहे पर्स छीनना हो, या बड़े-बड़े अपार्टमेंट या कोठियों में डाका डालना, सब मेरे बायें हाथ का खेल हो गया था। मेरे कारनामों के खूब चर्चे होने लगे थे। कुछ ही समय बाद मुझे एक खूँखार नामी गिरोह में शामिल होने के लिए बुलाया गया। इससे जुड़कर मुझे बड़े-बड़े बैंक लूटने का मौका मिला। मेरे खूँखार स्वभाव की वजह से जल्द ही गिरोह में मेरा बड़ा नाम हो गया। मैं कभी-भी बिना बंदूक के कहीं नहीं जाता था। यहाँ तक कि सोते समय भी तकिए के नीचे बंदूक रखता था। मार-धाड़, ड्रग्स, चोरी, गाली-गलौज, अनैतिक काम बस यही मेरी ज़िंदगी थी। पुलिस हमेशा मेरे पीछे लगी रहती थी। कई बार मैं जेल गया और सालों मैंने जेल की हवा खायी।

बाइबल ने किस तरह मेरी ज़िंदगी बदल दी:

एक बार, जब मैं जेल से छूटा तो मैंने सोचा कि मैं अपनी एक मौसी के घर जाऊँगा। मुझे नहीं पता था कि मेरी मौसी और दो मौसेरे भाई-बहन यहोवा के साक्षी बन गए हैं। उन्होंने मुझसे अपनी सभा में चलने के लिए कहा। मैं बस यह जानने के लिए कि वहाँ क्या होता है, उनके साथ चलने को तैयार हो गया। जब मैं साक्षियों के सभा-घर पहुँचा जिसे वे राज-घर कहते हैं, तो मैंने ज़िद्द की कि मैं दरवाज़े के पास ही बैठूँगा। मैंने सोचा इससे मैं आने-जानेवालों पर नज़र रख सकूँगा। वहाँ भी मैं बंदूक लेकर ही गया था।

 उस सभा ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। उस दिन मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी और ही दुनिया में हूँ। लोगों ने बड़े प्यार से मेरा स्वागत किया, उनके चेहरों पर जो मुसकान थी उसमें मुझे अपनेपन का एहसास हो रहा था। उस दिन की तसवीर आज भी मेरे मन में ताज़ा है, कैसे सबकी आँखों से प्यार और सच्चाई झलक रही थी! यह दुनिया उस दुनिया से कोसों दूर थी जिसमें मैं रहता था!

मैं साक्षियों के साथ बाइबल पढ़ने लगा। जैसे-जैसे मैं बाइबल की शिक्षाएँ सीखता गया, मैं अच्छी तरह समझने लगा कि मुझे अपने जीने का तरीका पूरी तरह बदलना होगा। मैंने बाइबल में नीतिवचन 13:20 में दी सलाह पर गहराई से सोचा, जो कहती है: “बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा।” इससे मुझे एहसास हुआ कि मुझे गिरोह से नाता तोड़ने की ज़रूरत है। ऐसा करना आसान नहीं था, पर परमेश्वर यहोवा की मदद से मैं ऐसा कर पाया।

पहली बार मेरी ज़िंदगी में ऐसा मुकाम आया जब मैं सबकुछ सोच-समझकर कर रहा था

मैंने खुद को शारीरिक तौर पर भी शुद्ध किया। काफी कोशिशों के बाद मैंने सिगरेट पीना और ड्रग्स लेना छोड़ दिया। अपने लंबे बाल कटवा दिए, कानों की बालियाँ निकालकर फेंक दी और गंदी भाषा बोलना छोड़ दिया। पहली बार मेरी ज़िंदगी में ऐसा मुकाम आया जब मैं सबकुछ सोच-समझकर कर रहा था।

मुझे पढ़ना-लिखना और अध्ययन करना बिलकुल पसंद नहीं था। इसलिए जब मैं बाइबल अध्ययन करने बैठता, तो उसमें मन लगाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। इसके बावजूद, जैसे-जैसे मैं मेहनत करता रहा यहोवा के लिए मेरा प्यार बढ़ने लगा। मगर मेरे अंदर एक अजीब-सी उलझन होने लगी, मेरा विवेक मुझे कचोटने लगा। मेरे मन में अकसर खुद के बारे में बुरे-बुरे खयाल आते थे। मैं सोचता था, पता नहीं यहोवा मुझे माफ करेगा या नहीं। ऐसे में, मैं बाइबल से पढ़ता था कि कैसे यहोवा ने राजा दाविद को उसके गंभीर पापों के लिए माफ कर दिया और इससे मुझे बहुत दिलासा मिलता था।—2 शमूएल 11:1–12:13.

मेरे सामने एक और चुनौती थी, घर-घर जाकर लोगों को अपने विश्वास के बारे में बताना। (मत्ती 28:19, 20) मुझे डर लगा रहता था कि कहीं मेरी मुलाकात ऐसे व्यक्‍ति से न हो जाए जिसे मैंने चोट पहुँचायी थी या जिसके साथ कुछ बुरा किया था! मगर धीरे-धीरे मैं अपना यह डर दूर कर पाया और खुशी-खुशी दूसरों को परमेश्वर के बारे में बताने लगा, एक ऐसे प्यारे और दयालु पिता के बारे में जो दिल खोलकर माफ करता है।

मुझे क्या फायदा हुआ:

यहोवा के बारे में सीखने से मेरी जान बच गयी! मेरे पुराने दोस्तों में से ज़्यादातर की मौत हो चुकी है या वे जेल की चारदीवारी में घुट-घुटकर जी रहे हैं। मगर मैं आज ऐसी ज़िंदगी जी रहा हूँ जिसमें सच्ची खुशी और संतोष है। मेरे सामने एक सुनहरे भविष्य की आशा है। मैंने नम्र और आज्ञाकारी होकर जीना सीखा है। और यह भी सीखा है कि मैं अपना ज्वालामुखी जैसा क्रोध कैसे शांत कर सकता हूँ। आज लोगों के साथ मेरा एक अच्छा रिश्ता है। और मैं अपनी खूबसूरत पत्नी कॉरमेन के साथ एक खुशहाल ज़िंदगी जी रहा हूँ। आज हम दोनों दूसरों को बाइबल की शिक्षाएँ सिखाते हैं। इससे हमें बेहद खुशी मिलती है।

एक और बात, आज मैं ईमानदारी से काम करता हूँ और कभी-कभी बैंक में भी जाता हूँ, पर लूटने नहीं बल्कि साफ-सफाई करने! ▪ (w14-E 07/01)