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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अप्रैल 2014

 पहले पेज का विषय | क्या मौत से सबकुछ खत्म हो जाता है?

मौत पर जीत पक्की है!

मौत पर जीत पक्की है!

बैतनिय्याह, यरूशलेम से 3 किलोमीटर दूर एक छोटा-सा गाँव था। (यूहन्ना 11:18) यीशु की मौत के कुछ हफ्ते पहले वहाँ एक घटना घटी। लाज़र जो यीशु का करीबी दोस्त था, अचानक बीमार हुआ और उसकी मौत हो गयी।

जब यीशु ने यह खबर सुनी, तो उसने अपने चेलों से कहा कि लाज़र सो गया है और मैं उसे जगाने जा रहा हूँ। (यूहन्ना 11:11) मगर चेले उसकी बात का मतलब नहीं समझे, इसलिए यीशु ने उन्हें साफ-साफ बताया कि “लाज़र मर चुका है।”—यूहन्ना 11:14.

लाज़र को दफनाए जाने के चार दिन बाद, यीशु बैतनिय्याह पहुँचा और वह लाज़र की बहन, मारथा को दिलासा देने उसके घर गया। मारथा ने यीशु से कहा: “प्रभु, अगर तू यहाँ होता तो मेरा भाई न मरता।” (यूहन्ना 11:17, 21) जवाब में यीशु ने कहा: “मरे हुओं का जी उठना और जीवन मैं ही हूँ। जो मुझमें विश्वास दिखाता है, वह चाहे मर जाए, तो भी जी उठेगा।”—यूहन्ना 11:25.

“लाज़र, बाहर आ जा!”

यीशु के ये शब्द कोई खोखला वादा नहीं हैं, यह दिखाने के लिए वह कब्र के पास गया और उसने ऊँची आवाज़ में पुकारते हुए कहा: “लाज़र, बाहर आ जा!” (यूहन्ना 11:43) आगे जो हुआ उसे देखकर वहाँ खड़े लोगों की आँखें फटी-की-फटी रह गयीं। लाज़र जो मर गया था, वह बाहर निकल आया।

इससे पहले यीशु ने कम-से-कम दो और पुनरुत्थान किए थे, जिसमें से एक थी याईर की बेटी। उस छोटी लड़की का पुनरुत्थान करने से पहले यीशु ने बताया था कि वह सो रही है।—लूका 8:52.

आपने गौर किया होगा कि लाज़र और याईर की बेटी, दोनों की मौत की तुलना यीशु ने गहरी नींद से की। यह तुलना बिलकुल सही है। क्यों? क्योंकि गहरी नींद एक ऐसी दशा है, जिसमें एक व्यक्‍ति को कुछ पता नहीं रहता, न ही उसे दुख-दर्द का एहसास होता है। (सभोपदेशक 9:5; बक्स “मौत गहरी नींद की तरह है”, देखिए।) यीशु के चेलों को समझ आ गया था कि जब एक इंसान मर जाता है, तो वह किस दशा में होता है। किताब इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रिलिजन एण्ड एथिक्स कहती है: ‘यीशु के  चेलों के लिए मौत गहरी नींद की तरह है और कब्र विश्राम की जगह है।’ *

इस बात से कितना दिलासा मिलता है कि मरे हुए तड़प नहीं रहे बल्कि कब्र में सो रहे हैं। जी हाँ, यह बात मौत के रहस्य का खुलासा करती है, इसलिए अब हमें इससे खौफ खाने की ज़रूरत नहीं है।

“यदि मनुष्य मर जाए तो क्या वह फिर जीवित होगा?”

हम सबको रात में चैन की नींद सोना अच्छा लगता है, लेकिन हममें से ऐसा कौन है जो हमेशा के लिए सोए रहना चाहता है? क्या हमारे पास ऐसी कोई आशा है कि जो मर गए हैं, वे लाज़र और याईर की बेटी की तरह दोबारा ज़िंदा होंगे?

कुलपिता अय्यूब को जब लगा कि वह मौत के करीब है तब उसने यह सवाल किया, “यदि मनुष्य मर जाए तो क्या वह फिर जीवित होगा?”—अय्यूब 14:14.

सर्वशक्‍तिमान परमेश्वर से बात करते वक्‍त अय्यूब ने खुद अपने सवाल का जवाब दिया। “तू मुझे बुलाता, और मैं बोलता; तुझे अपने हाथ के बनाए हुए काम की अभिलाषा होती।” (अय्यूब 14:15) अय्यूब को पक्का यकीन था कि यहोवा उस दिन के लिए तरस रहा है, जब वह अपने वफादार सेवकों को दोबारा ज़िंदा करेगा। क्या यह अय्यूब की सिर्फ एक कल्पना थी? बिलकुल नहीं।

यीशु ने जो पुनरुत्थान किए थे, वे इस बात का साफ सबूत हैं कि परमेश्वर ने यीशु को मौत पर जीत हासिल करने की ताकत दी है। दरअसल, बाइबल कहती है कि आज यीशु के पास “मौत . . . की चाबियाँ हैं।” (प्रकाशितवाक्य 1:18) इसलिए हम कह सकते हैं कि यीशु कब्र के दरवाज़े खोल देगा, ठीक जैसे उसने लाज़र की कब्र से पत्थर हटाने का हुक्म दिया था।

बाइबल बार-बार पुनरुत्थान के वादे का ज़िक्र करती है। एक स्वर्गदूत ने भविष्यवक्ता दानिय्येल से कहा, “तू विश्राम करता रहेगा; और उन दिनों के अन्त में तू अपने निज भाग पर खड़ा होगा।” (दानिय्येल 12:13) सदूकी, जो यीशु के ज़माने के यहूदी धर्म-गुरू थे, वे पुनरुत्थान के वादे पर विश्वास नहीं करते थे। यीशु ने उनसे कहा, “तुम बड़ी गलतफहमी में हो, क्योंकि तुम न तो शास्त्र को जानते हो, न ही परमेश्वर की शक्‍ति को।” (मत्ती 22:23, 29) प्रेषित पौलुस ने कहा, “मैं परमेश्वर से आशा रखता हूँ, . . . अच्छे और बुरे, दोनों तरह के लोग मरे हुओं में से जी उठेंगे।”—प्रेषितों 24:15.

मरे हुए कब जी उठेंगे?

अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोगों का पुनरुत्थान कब होगा? स्वर्गदूत ने वफादार दानिय्येल से कहा कि वह “उन दिनों के अन्त में” खड़ा होगा। उसी तरह मारथा को यकीन था कि उसका भाई लाज़र, “आखिरी दिन मरे हुओं में से जी उठेगा।”—यूहन्ना 11:24.

“आखिरी दिन” को बाइबल, मसीह के राज के शासन से जोड़ती है। पौलुस ने लिखा: “उसका [यीशु का] तब तक राजा बनकर राज करना ज़रूरी है जब तक कि परमेश्वर सारे दुश्मनों को उसके पाँव तले नहीं कर देता। सब से आखिरी दुश्मन जो मिटा दिया जाएगा, वह मौत है।” (1 कुरिंथियों 15:25, 26) इससे हमें ज़बरदस्त वजह मिलती है कि हम परमेश्वर के राज के आने और उसकी मरज़ी, इस धरती पर पूरी होने के लिए प्रार्थना करें। *

अय्यूब अच्छी तरह जानता था कि परमेश्वर की मरज़ी है कि मरे हुओं को दोबारा ज़िंदा किया जाए। जब वह दिन आएगा तब मौत पूरी तरह मिटा दी जाएगी। फिर कभी किसी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा कि ‘क्या मौत से सबकुछ खत्म हो जाता है?’ ▪ (w14-E 01/01)

^ पैरा. 8 “कब्रिस्तान” के लिए जो अँग्रेज़ी शब्द इस्तेमाल किया गया है, वह यूनानी भाषा के एक ऐसे शब्द से निकलता है जिसका मतलब है, “सोने की जगह।”

^ पैरा. 18 परमेश्वर के राज के बारे में ज़्यादा जानने के लिए बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब का अध्याय 8 देखिए, जिसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है। यह किताब www.jw.org पर भी उपलब्ध है।