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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अप्रैल 2014

 पहले पेज का विषय | क्या मौत से सबकुछ खत्म हो जाता है?

मौत का डंक

मौत का डंक

मौत, दिलचस्प विषय नहीं है, ज़्यादातर लोग इस पर बात करना पसंद नहीं करते। लेकिन आज नहीं तो कल, हम सबको इसका सामना करना ही पड़ेगा। जी हाँ, मौत का डंक दर्दनाक होता है और इसे सहन करना बहुत मुश्किल है।

हममें से कोई भी इस बात के लिए पहले से तैयार नहीं होता कि हम अपने माता-पिता, जीवन-साथी या फिर अपने बच्चों को कभी-भी मौत में खो सकते हैं। हो सकता है, अचानक हमारे साथ कोई हादसा हो जाए और लंबे समय तक हमें गम के समंदर में डूबो दे। सच तो यह है कि मौत एक हकीकत है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता और न ही इसके अंजामों से बचा जा सकता है।

एंटोनियो, जिसके पिता की मौत एक सड़क दुर्घटना में हुई थी, वह अपनी भावनाएँ ज़ाहिर करता है, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मानो कोई मेरे घर पर ताला लगाकर चाबी अपने साथ ले गया हो। मैं एक मिनट के लिए भी अपने घर नहीं लौट सकता। मेरे पास सिर्फ यादें ही रह गयी हैं। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे हम नकारने की कोशिश करते हैं, हमें लगता है, हमारे साथ नाइंसाफी हुई है लेकिन अफसोस, हम कुछ नहीं कर सकते।’

कुछ इसी तरह के दुख का सामना डॉरथी ने किया। वह 47 साल की एक विधवा है, जो नहीं जानती थी कि मौत के बाद क्या होता है। उसने ठान लिया कि वह इस सवाल का जवाब ढूँढ़कर ही रहेगी। वह संडे स्कूल (चर्च में चलाए जानेवाला स्कूल) की टीचर थी, उसे नहीं लगता था कि मौत से सबकुछ खत्म हो जाता है लेकिन उसके पास इसका साफ-साफ जवाब भी नहीं था। उसने अपने ऐंग्लिकन चर्च के पादरी से पूछा, ‘मरने के बाद इंसान का क्या होता है?’ पादरी ने कहा, “असल में इसका जवाब कोई नहीं जानता, यह तो वक्‍त ही बताएगा, तब तक हमें सब्र करना होगा।”

आप क्या सोचते हैं, क्या हम इंसानों को सिर्फ “वक्‍त” का इंतज़ार करते हुए “सब्र” दिखाना होगा? या फिर यह जानने का कोई रास्ता है कि क्या वाकई मौत से सबकुछ खत्म हो जाता है? (w14-E 01/01)