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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  जनवरी 2014

 पहले पेज का विषय | हमें परमेश्वर की ज़रूरत क्यों है?

हमें परमेश्वर की ज़रूरत क्यों है

हमें परमेश्वर की ज़रूरत क्यों है

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सच्ची खुशी पाने के लिए ज़रूरी है कि लोग शारीरिक ज़रूरतों के अलावा अपनी आध्यात्मिक ज़रूरतें भी पूरी करें। यह सच भी है, क्योंकि लोग जो भी काम करते हैं उसमें वे संतोष पाना चाहते हैं। वे अपनी हर दिन की चिंताओं से हटकर कुछ करना चाहते हैं, जिसमें एक मकसद हो या फिर समाज में सुधार आ सके। कई लोग अपनी इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए फुरसत के पलों में संगीत सुनते हैं, कलाकृतियाँ बनाते हैं या फिर कुदरत की खूबसूरती निहारते हैं। इतना सबकुछ करने के बाद भी बहुतों को लगता है कि सच्ची खुशी उनसे कोसों दूर है।

परमेश्वर चाहता है कि इंसान आज और हमेशा-हमेशा तक खुश रहे

जो लोग बाइबल पढ़ते हैं, उन्हें यह बात हैरान नहीं करती कि इंसानों में पैदाइश से ही अपनी आध्यात्मिक ज़रूरतें पूरी करने की ललक होती है। उत्पत्ति का पहला अध्याय बताता है कि पहले इंसानी जोड़े की सृष्टि करने के बाद, परमेश्वर उनसे लगभग हर दिन बात करता था, ताकि वे परमेश्वर के साथ एक करीबी रिश्ता कायम कर सकें। (उत्पत्ति 3:8-10) परमेश्वर ने इंसानों की रचना इस तरह नहीं की कि वे उसके बिना जी सकें, बल्कि यह उनकी ज़रूरत है कि वे अपने सृष्टिकर्ता से बात करें। बाइबल कई बार हमारी इस ज़रूरत का ज़िक्र करती है।

मिसाल के लिए यीशु ने कहा: “सुखी हैं वे जिनमें परमेश्वर से मार्गदर्शन पाने की भूख है।” (मत्ती 5:3) इन शब्दों से पता चलता है कि एक खुशहाल और संतोष-भरा जीवन पाने के लिए ज़रूरी है कि हम अपनी इस भूख को मिटाएँ। हम यह कैसे कर सकते हैं? इसका जवाब देते हुए यीशु ने कहा: “इंसान सिर्फ रोटी से ज़िंदा नहीं रह सकता, बल्कि उसे यहोवा के मुँह से निकलनेवाले हर वचन से ज़िंदा रहना है।” (मत्ती 4:4) * किन तरीकों से हम परमेश्वर के कहे वचन, यानी बाइबल में पायी जानेवाली परमेश्वर की सोच और हिदायतें मानने से, एक खुशहाल और मकसद-भरी ज़िंदगी जी सकते हैं? आइए हम तीन बेहद ज़रूरी बातों पर गौर करें।

हमें सही मार्गदर्शन की ज़रूरत है

आज दुनिया में ऐसे सैकड़ों विशेषज्ञ और जानकार मौजूद हैं, जो इंसानी रिश्ते, प्यार, पारिवारिक जीवन, आपसी झगड़े सुलझाने, खुशी पाने और जीवन का उद्देश्य जानने में लोगों की मदद करते हैं। लेकिन सबसे कारगर और बढ़िया सलाह कौन दे सकता है? इसमें कोई शक नहीं कि इंसानों की सृष्टि करनेवाला परमेश्वर यहोवा ही हमें इन सभी मामलों में सही दिशा दिखा सकता है।

बाइबल, यूज़र मैनुअल की तरह जीवन में हमारा मार्गदर्शन करती है

 इसे समझने के लिए एक उदाहरण लीजिए: जब आप कोई नया उपकरण खरीदते हैं जैसे कैमरा या कंप्यूटर, तो आपको पता होता है कि उसके साथ आपको एक ओनर्स मैनुअल या हैंडबुक भी मिलेगी। इस किताब में ऐसी हिदायतें दी होती हैं कि किस तरह आप इस उपकरण का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि आप इसका पूरा फायदा उठा सकें। बाइबल की तुलना भी एक हैंडबुक या मैनुअल से की जा सकती है। इंसानों के निर्माणकर्ता या बनानेवाले परमेश्वर ने इंसानों को यानी उपभोक्ताओं को एक मैनुअल, बाइबल दी है। उपभोक्ताओं के लिए तैयार किया गया “मैनुअल” बताता है कि उपकरण को कैसे इस्तेमाल करना है, जिससे बेहतरीन नतीजे मिल सकें।

एक बढ़िया मैनुअल हमें साफ-साफ हिदायतें देता है। उसी तरह, बाइबल में भी साफ-साफ हिदायतें दी गयी हैं। यह किताब बताती है कि किस तरह के कामों से हमें दूर रहना चाहिए या फिर ऐसी बातें जिसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसमें दी हिदायतें ठुकराना हमारे लिए जानलेवा साबित हो सकता है। शायद कई बार, दूसरे हमें झट-पट काम करने की सलाह दें या कोई शॉर्टकट बताएँ जो हमें बहुत आसान लग सकता है। लेकिन ऐसा करना समझदारी नहीं होगी। क्योंकि सृष्टिकर्ता के दिए निर्देशनों और हिदायतों को मानने से ही हमें बेहतर नतीजे मिलेंगे और मुसीबतों से छुटकारा भी।

“मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिये शिक्षा देता हूं, और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग पर तुझे ले चलता हूं। भला होता कि तू ने मेरी आज्ञाओं को ध्यान से सुना होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरा धर्म समुद्र की लहरों के नाईं होता।”—यशायाह 48:17, 18

बाइबल में हमें ज़रूरी निर्देशन और मदद मिलती है

हालाँकि यहोवा हमें निर्देशन और हिदायतें देता है, लेकिन उसे मानने के लिए हम पर ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं करता। इसके बजाय, एक प्यार करनेवाले मददगार की तरह वह हमसे गुज़ारिश करता है: “मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिये शिक्षा देता हूं, और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग पर तुझे ले चलता हूं। भला होता कि तू ने मेरी आज्ञाओं को ध्यान से सुना होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरा धर्म समुद्र की लहरों के नाईं होता।” (यशायाह 48:17, 18) दूसरे शब्दों में कहें, तो इसका मतलब है जब हम परमेश्वर के बताए रास्ते पर चलेंगे, तभी हमें बढ़िया जीवन मिलेगा। एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी परमेश्वर के बिना जीना नामुमकिन है।

हमें ज़िंदगी की परेशानियों का हल चाहिए

कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें परमेश्वर की ज़रूरत नहीं। क्योंकि उनकी ज़िंदगी में कभी न सुलझनेवाली कुछ बातें हैं, जिससे एक प्यार करनेवाले परमेश्वर पर विश्वास करना उन्हें मुश्किल लगता है। उदाहरण के लिए: वे पूछते हैं ‘क्यों नेक लोग दुख-तकलीफ झेलते हैं?’ ‘क्यों कुछ मासूम बच्चे अपंग पैदा होते हैं?’ ‘क्यों जिंदगी में इतना अन्याय है?’ वाकई ये हमारी ज़िंदगी से जुड़े कुछ गंभीर सवाल हैं, जिनका हमें तसल्ली-भरा जवाब चाहिए। इन परेशानियों के लिए फौरन परमेश्वर पर इलज़ाम लगाने के बजाय, आइए देखें कि बाइबल यानी परमेश्वर का वचन इस बारे में क्या कहता है!

बाइबल की पहली किताब उत्पत्ति के तीसरे अध्याय में, हम शैतान के बारे में पढ़ते हैं, जो साँप की आड़ में पहले इंसानी जोड़े आदम और हव्वा को परमेश्वर के खिलाफ ले गया। परमेश्वर ने आदम और हव्वा को, भले और बुरे का ज्ञान रखनेवाले पेड़ का फल खाने के लिए मना किया था। लेकिन शैतान ने पहले इंसानी जोड़े को यहोवा की आज्ञा तोड़ने के लिए बहकाया। शैतान ने हव्वा से कहा “तुम निश्चय न मरोगे” “वरन परमेश्वर आप जानता है कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।”—उत्पत्ति 2:16, 17; 3:4, 5.

ऐसा कहकर शैतान ने दावा किया कि परमेश्वर झूठा है और उसका हुकूमत करने का तरीका सही नहीं है। शैतान ने यह भी कहा कि अगर मानवजाति उसका कहा मानेगी, तो उन्हें बहुत फायदा  होगा। लेकिन ये सभी मसले कैसे सुलझाए जाते? यहोवा ने ये सारे मसले सुलझाने के लिए कुछ वक्‍त देने का फैसला किया, ताकि लोग देख सकें कि जो इलज़ाम उस पर लगाए गए हैं वे सच हैं या नहीं। दरअसल, परमेश्वर ने शैतान और उसका साथ देनेवालों को यह साबित करने का मौका दिया कि इंसान परमेश्वर के बिना अपनी ज़िंदगी में खुश रह सकता है या नहीं।

शैतान के किए दावों के बारे में आपकी क्या राय है? क्या इंसान परमेश्वर के बिना खुशी से जी सकता है और बढ़िया तरीके से हुकूमत कर सकता है? सदियों से मानवजाति दुख-तकलीफ, नाइंसाफी, बीमारी और मौत, साथ ही अपराध, नैतिक उसूलों में गिरावट, युद्ध, जनसंहार और खौफनाक वारदातें झेलती आ रही है। यह सब इस बात का सबूत है कि परमेश्वर की मदद के बिना हुकूमत करने की इंसान की कोशिशें नाकाम रही हैं। मानवजाति की सारी मुसीबतों के लिए परमेश्वर को कसूरवार ठहराने के बजाय, बाइबल इसकी असली वजह बताती है, “एक मनुष्य दूसरे मनुष्य पर अधिकारी होकर अपने ऊपर हानि लाता है।”—सभोपदेशक 8:9.

इन सब बातों का ध्यान रखते हुए, क्या आपको नहीं लगता कि ज़िंदगी की मुश्किलों का हल जानने और मानवजाति को परेशान करनेवाले सवालों के जवाब जानने के लिए, हमें परमेश्वर से मदद माँगने की ज़रूरत है? परमेश्वर क्या करनेवाला है?

हमें परमेश्वर की मदद की ज़रूरत है

लोग सालों से बीमारी, बुढ़ापा और मौत से छुटकारा पाने के लिए तरस रहे हैं। इसे पाने की चाहत में उन्होंने बेइंतिहा समय, ताकत और साधन लगाया है। अफसोस उनकी सारी कोशिशें नाकाम रही हैं। कुछ ने तो इन परेशानियों से निजात पाने के लिए दवाइयाँ, कसरत और भूतविद्या की भी मदद ली, मगर उनके हाथ कुछ नहीं लगा।

परमेश्वर चाहता है कि इंसान एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी जीए। जब परमेश्वर ने इंसान की सृष्टि की, तब उसका यही मकसद था और वह उसे भूला नहीं है। (उत्पत्ति 1:27, 28; यशायाह 45:18) यह यहोवा का वादा है और उसका हर वादा ज़रूर पूरा होगा। (यशायाह 55:10, 11) बाइबल बताती है कि परमेश्वर फिर से धरती को फिरदौस में बदल देगा, जिसे पहले इंसानी जोड़े ने खो दिया था। इस वादे के बारे में बाइबल की आखिरी किताब में बताया गया है: “वह [यहोवा] उनकी आँखों से हर आँसू पोंछ देगा, और न मौत रहेगी, न मातम, न रोना-बिलखना, न ही दर्द रहेगा। पिछली बातें खत्म हो चुकी हैं।” (प्रकाशितवाक्य 21:4) परमेश्वर किस तरह धरती के हालात बदलेगा और हम कैसे इससे फायदा पा सकते हैं?

यीशु मसीह जो परमेश्वर का बेटा था, उसने अपने चेलों को परमेश्वर की मरज़ी पूरी करने के लिए प्रार्थना करना सिखाया। कई लोग इस प्रार्थना से अच्छी तरह वाकिफ हैं या कभी-कभी इसे दोहराते भी हैं और कई लोग इसे प्रभु की प्रार्थना कहते हैं। प्रार्थना में इस तरह कह गया है: “हे हमारे पिता तू जो स्वर्ग में है, तेरा नाम पवित्र किया जाए। तेरा राज आए। तेरी मरज़ी, जैसे स्वर्ग में पूरी हो रही है, वैसे ही धरती पर भी पूरी हो।” (मत्ती 6:9, 10) वाकई, परमेश्वर का राज ही वह ज़रिया है, जिसकी मदद से यहोवा धरती के हालात बदलेगा। उसका राज इंसानी शासन से हुए दर्दनाक अंजामों को मिटा देगा और एक नयी दुनिया लाएगा, जिसमें सिर्फ नेक लोग रहेंगे। * (दानिय्येल 2:44; 2 पतरस 3:13) परमेश्वर के इस वादे से फायदा पाने के लिए हमें क्या करना होगा?

यीशु मसीह ने एक आसान कदम उठाने के लिए कहा। वह है:  “हमेशा की ज़िंदगी पाने के लिए ज़रूरी है कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर का और यीशु मसीह का, जिसे तू ने भेजा है, ज्ञान लेते रहें।” (यूहन्ना 17:3) जी हाँ, परमेश्वर की मदद से ही हमारे लिए वादा की गयी नयी दुनिया में जीना मुमकिन होगा। यह आशा हमें एक और वजह देती है कि क्यों हम इंसानों को परमेश्वर की ज़रूरत है।

अब वक्‍त है, परमेश्वर से मदद माँगने का

दो हज़ार साल पहले एथेन्स की अरियुपगुस पहाड़ी (या मार्स पहाड़) पर पौलुस एथेन्स के लोगों से परमेश्वर के बारे में कुछ कहता है। एथेन्स के लोगों की एक खासियत थी, वे खुलकर सोचते थे। इसलिए पौलुस ने उनसे कहा, “[परमेश्वर] खुद सबको जीवन और साँसें और सबकुछ देता है। क्योंकि उसी से हमारी ज़िंदगी है और हम चलते-फिरते हैं और वजूद में हैं, जैसा तुम्हारे कुछ कवियों ने भी कहा है, ‘हम तो उसी की संतान हैं।’”—प्रेषितों 17:25, 28.

पौलुस ने जो बातें एथेन्स के लोगों से कहीं, वे आज भी सच हैं। हमारा सृष्टिकर्ता यहोवा, हमें साँस लेने के लिए हवा, खाने के लिए खाना और पीने के लिए पानी देता है। हम इन ज़रूरी चीज़ों के बिना ज़िंदा नहीं रहे सकते। दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग हैं जो परमेश्वर के बारे में सोचते तक नहीं, इसके बावजूद क्यों परमेश्वर सभी को इन इंतज़ामों से फायदा उठाने दे रहा है? पौलुस इसका जवाब देते हुए कहता है कि लोग “परमेश्वर को ढूँढ़ें और उसकी खोज करें और वाकई उसे पा भी लें, क्योंकि सच तो यह है कि वह हममें से किसी से भी दूर नहीं है।”—प्रेषितों 17:27.

क्या आप परमेश्वर को और भी करीबी से जानना चाहेंगे? क्या आप जानना चाहेंगे कि धरती के लिए उसका मकसद क्या है? साथ ही, आज और हमेशा-हमेशा तक खुशी से जीने के लिए परमेश्वर हमें क्या सलाह देता है? अगर हाँ, तो आपसे गुज़ारिश है कि आप उस व्यक्‍ति से बात कीजिए जिसने आपको यह पत्रिका दी है या फिर आप इस पत्रिका के प्रकाशकों से संपर्क कर सकते हैं। आपकी मदद करने में उन्हें खुशी होगी। ▪ (w13-E 12/01)

^ पैरा. 5 बाइबल बताती है परमेश्वर का नाम यहोवा है।

^ पैरा. 20 इस बारे में ज़्यादा जानने के लिए कि परमेश्वर का राज किस तरह उसकी मरज़ी को धरती पर पूरी करेगा, बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब का अध्याय 8 देखिए, जिसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है। यह किताब हमारी वेबसाइट www.jw.org पर ऑनलाइन उपलब्ध है और इसे डाउनलोड भी किया जा सकता है।