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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  जनवरी 2014

 परमेश्वर के करीब आइए

“देख! मैं सबकुछ नया बना रहा हूँ”

“देख! मैं सबकुछ नया बना रहा हूँ”

क्या आपने कभी ऐसा चाहा है, काश मैं और मेरा पूरा परिवार हमेशा सेहतमंद रहे और लंबी उम्र तक जीए? या फिर, काश मुझे ऐसी दुनिया में जीने का मौका मिले, जहाँ दुख-तकलीफ, दर्द और मौत का सामना कभी न करना पड़े? ये कोई कोरी कल्पना नहीं है। क्यों? क्योंकि बहुत जल्द यहोवा परमेश्वर अपना मकसद पूरा करनेवाला है, वह एक ऐसी नयी दुनिया लानेवाला है, जहाँ न्याय का बसेरा होगा। आइए, देखें कि प्रकाशितवाक्य 21:3-5 में दर्ज़ परमेश्वर का यह मकसद कैसे पूरा होगा।—पढ़िए।

“[परमेश्वर] उनकी आँखों से हर आँसू पोंछ देगा।” (प्रकाशितवाक्य 21:4) परमेश्वर किस तरह के आँसुओं को पोंछ देगा? परमेश्वर खुशी के आँसू और उन आँसुओं को नहीं पोंछेगा जो हमारी आँखों की हिफाज़त करते हैं, बल्कि उन आँसुओं को पोंछ देगा जो हमें तकलीफ पहुँचाते हैं। परमेश्वर आँसुओं को सुखाएगा नहीं, इसके बजाय वह आँसू आने की हर वजह मिटा देगा। इस तरह हम कह सकते हैं कि परमेश्वर आँसुओं को पूरी तरह पोंछ डालेगा।

‘मौत नहीं रहेगी।’ (प्रकाशितवाक्य 21:4) मौत हमारी दुश्मन है, क्योंकि इसने हमें बेइंतिहा रुलाया है। यहोवा आज्ञा माननेवाले इंसानों को मौत की गिरफ्त से आज़ाद करेगा। कैसे? वह मौत की असल वजह, यानी आदम से विरासत में मिले पाप को पूरी तरह मिटा देगा। (रोमियों 5:12) यहोवा, यीशु के छुड़ौती बलिदान की बिनाह पर आज्ञा माननेवाले इंसानों को सिद्धता देगा। * इसके बाद, आखिरी दुश्मन मौत को “मिटा दिया जाएगा।” (1 कुरिंथियों 15:26) वफादार इंसान, परमेश्वर के मकसद के मुताबिक हमेशा के लिए अच्छी सेहत के साथ जी पाएँगे।

‘दर्द नहीं रहेगा।’ (प्रकाशितवाक्य 21:4) किस तरह का दर्द नहीं रहेगा? हर तरह का दर्द, चाहे वह मानसिक हो, जज़बाती या शारीरिक। बेशक यह दर्द हमें पाप और असिद्धता की वजह से मिला है और उसने लाखों लोगों की ज़िंदगी लाचार बना दी है। लेकिन परमेश्वर ऐसे हर दर्द को मिटा देगा।

बहुत जल्द हम सब एक ऐसी ज़िंदगी जी पाएँगे जिसमें आँसू, मौत और दर्द नहीं रहेगा। शायद आप पूछें ‘ऐसी ज़िंदगी कहाँ मिलेगी?’ ‘क्या परमेश्वर स्वर्ग में ऐसी ज़िंदगी देने का वादा करता है?’ नहीं। गौर कीजिए क्यों नहीं। पहली वजह, इस वादे की शुरूआत इन शब्दों से होती है, “परमेश्वर का डेरा इंसानों के बीच है” और इंसान तो धरती पर रहते हैं। (प्रकाशितवाक्य 21:3) दूसरी वजह, यह वादा एक ऐसी दुनिया के बारे में बताता है, जहाँ ‘मौत नहीं रहेगी’ यानी एक ऐसी जगह जहाँ मौत पहले थी, मगर अब उसका नामों-निशान नहीं रहेगा। स्वर्ग में मौत कभी थी ही नहीं, लेकिन धरती पर यह लंबे समय से राज करती आयी है। इससे पता चलता है कि परमेश्वर ने एक बेहतर ज़िंदगी देने का जो वादा किया है, वह इसी धरती पर पूरा होगा।

परमेश्वर आँसुओं की उन धाराओं को सुखा देगा, जो दुख-तकलीफों की वजह से बहती हैं

यहोवा ने एक नयी दुनिया, जहाँ न्याय का बसेरा होगा देने का वादा किया है। वह चाहता है कि हम उस वादे पर यकीन करें। भविष्य में मिलनेवाली आशीषों का ज़िक्र करने के तुरंत बाद वह यह गारंटी देता है, “देख! मैं सबकुछ नया बना रहा हूँ।” आगे वह कहता है, “ये बातें . . . विश्वास के योग्य और सच्ची हैं।” (प्रकाशितवाक्य 21:5) परमेश्वर के उपासक इस बात का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि ये वादे कब हकीकत बनेंगे। क्या आप इस बारे में और ज़्यादा नहीं जानना चाहेंगे कि किस तरह आप और आपके अज़ीज़ इन आशीषों का लुत्फ उठा सकते हैं! ▪ (w13-E 12/01)

जनवरी – मार्च की बाइबल पढ़ाई

उत्पत्ति 1-50

^ पैरा. 5 यीशु के छुड़ौती बलिदान के बारे में और जानने के लिए बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब का अध्याय 5 देखिए। इसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है।