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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अप्रैल 2013

 अपने बच्चों को सिखाइए

पतरस और हनन्याह ने झूठ बोला—हम क्या सबक सीख सकते हैं?

पतरस और हनन्याह ने झूठ बोला—हम क्या सबक सीख सकते हैं?

जैसा कि आपको पता है, झूठ बोलने का मतलब है जानबूझकर सच छिपाना। क्या आपने कभी झूठ बोला है? * यहाँ तक कि कुछ बड़े-बुज़ुर्ग जो परमेश्वर से प्यार करते थे, उन्होंने भी झूठ बोला है। क्या आप बाइबल में दर्ज़ किसी ऐसे व्यक्‍ति का नाम जानते हैं जिसने झूठ बोला था? उसका नाम है पतरस, जो यीशु के बारह प्रेषितों में से एक था। आइए देखें कि उसने झूठ क्यों बोला।

यीशु को गिरफ्तार करने के बाद, उसे महायाजक के घर ले जाया गया। वह आधी रात का समय था। पतरस किसी तरह महायाजक के आँगन में पहुँचा, उसे उम्मीद नहीं थी कि कोई उसे पहचानेगा। लेकिन आग की रौशनी में महायाजक की नौकरानी, पतरस को पहचान लेती है और उससे कहती है, ‘तू भी इस यीशु के साथ था!’ पतरस डर गया और उसने इस बात से इनकार किया।

बाइबल बताती है, कुछ समय बाद “एक और लड़की ने उसे” पहचाना और कहा, ‘यह आदमी यीशु के साथ था।’ पतरस ने दोबारा इनकार किया। थोड़ी देर बाद, आस-पास खड़े लोग पतरस से कहने लगे “बेशक तू भी उनमें से एक है।”

पतरस और भी डर गया, इसलिए तीसरी बार उसने इनकार करते हुए झूठ बोला, “मैं इस आदमी को नहीं जानता!” तभी एक मुर्गा बाँग देता है। यीशु, पतरस की तरफ देखता है और उसी घड़ी पतरस को कुछ घंटे पहले कहे यीशु के शब्द याद आते हैं, “मुर्गे के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझे जानने से इनकार करेगा।” पतरस को अपने किए पर बहुत अफसोस होता है, वह पूरी तरह टूट जाता है और रोने लगता है।

क्या आपके साथ ऐसा हो सकता है?—आप यहोवा के एक साक्षी हैं और स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल के दूसरे बच्चे आपके सामने यहोवा के साक्षियों के बारे में बातें करते हैं। एक कहता है, “ये लोग झंडा सलामी नहीं करते,” दूसरा कहता है, “ये लोग सेना में भर्ती नहीं होते।” तीसरा कहता है, “ये लोग मसीही नहीं हैं क्योंकि ये क्रिस्मस नहीं मनाते।” तभी अचानक एक बच्चा आपकी तरफ देखकर कहता है, “तुम भी तो यहोवा के साक्षी हो?” आप क्या जवाब देंगे?

 इसके पहले कि आपके साथ कुछ ऐसा हो, जवाब देने के लिए अच्छी तैयारी कीजिए। पतरस तैयार नहीं था, इसलिए जब उस पर दबाव आया तब उसने झूठ बोला। लेकिन वह अपने किए पर बहुत पछताया और परमेश्वर ने उसे माफ किया।

पहली सदी के यीशु के चेले हनन्याह ने भी झूठ बोला। उसकी पत्नी सफीरा उसके साथ इस झूठ में शामिल थी। परमेश्वर ने उन्हें माफ नहीं किया। आइए देखें कि परमेश्वर ने हनन्याह और सफीरा को क्यों माफ नहीं किया।

अपने चेलों को छोड़कर यीशु जब स्वर्ग लौटा, उसके दस दिन बाद करीब 3,000 लोगों ने बपतिस्मा लिया। उस समय यरूशलेम में पिन्तेकुस्त का त्योहार मनाया जा रहा था और लोग दूर-दूर से आए हुए थे। बपतिस्मा लेने के बाद, यीशु के ये चेले अपने नए विश्वास के बारे में ज़्यादा जानने के लिए वहाँ कुछ और दिन रुकना चाहते थे। इसलिए यीशु के कुछ चेलों ने अपने पैसों से उनकी ज़रूरतों का खयाल रखा।

हनन्याह और उसकी पत्नी भी इन नए चेलों की मदद करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपनी कुछ जायदाद बेच दी। जब हनन्याह पैसे लेकर चेलों के पास आया, तब उसने पैसे देते हुए कहा कि यह जायदाद की पूरी रकम है। लेकिन यह सच नहीं था, क्योंकि उसने पैसों का कुछ हिस्सा अपने पास रख लिया था। परमेश्वर की नज़रों से यह बात छिपी नहीं और इसलिए परमेश्वर ने पतरस पर इस बात का खुलासा किया। पतरस ने हनन्याह से कहा: “तू ने इंसानों से नहीं, बल्कि परमेश्वर से झूठ बोला है।” इसके तुरंत बाद हनन्याह ज़मीन पर गिरकर मर गया। करीब तीन घंटे बाद उसकी पत्नी आयी। वह नहीं जानती थी कि उसके पति के साथ क्या हुआ, उसने भी झूठ बोला और वहीं गिरकर मर गयी।

हमें क्या ही ज़बरदस्त सबक सीखने को मिलता है कि सच बोलना कितना ज़रूरी है! जी हाँ, हम सब पर यह बात लागू होती है। हम सब गलतियाँ करते हैं, खासकर जब हम छोटे होते हैं। क्या आपको यह जानकर खुशी नहीं होती कि यहोवा आपसे प्यार करता है और पतरस की तरह आपको भी माफ करेगा?— याद रखिए हम सभी को सच बोलना चाहिए। अगर हम झूठ बोलने जैसी बड़ी गलती कर देते हैं, तो हमें परमेश्वर से गिड़-गिड़ाकर माफी की भीख माँगनी चाहिए। पतरस ने भी यही किया होगा और इसलिए उसे माफ किया गया। अगर हम भी ठान लें कि आगे से हम झूठ नहीं बोलेंगे, तो परमेश्वर हमें माफ करेगा। ▪ (w13-E 03/01)

अपनी बाइबल में पढ़िए

^ पैरा. 3 अगर आप बच्चों को यह लेख पढ़कर सुना रहे हैं तो सवाल के बाद जहाँ डैश है, वहाँ थोड़ी देर रुकिए और उन्हें जवाब देने के लिए कहिए।