क्या आपको यीशु के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है?— * कुछ लोगों को यह जानकर बड़ा ताज्जुब होता है कि यीशु ने बाइबल की एक भी किताब नहीं लिखी। लेकिन बाइबल के ऐसे आठ लेखक हैं जिन्होंने यीशु के बारे में बहुत कुछ लिखा है। और ये सभी लेखक उस समय जीए थे जब यीशु धरती पर था। उन्होंने यीशु के कामों और उसकी सिखायी बातों को बाइबल में दर्ज़ किया। क्या आपको उन आठ लेखकों के नाम याद हैं?— उनके नाम हैं, मत्ती, मरकुस, लूका, यूहन्ना, पतरस, याकूब, यहूदा और पौलुस। आप इन लेखकों के बारे में क्या जानते हैं?—

आइए पहले उन तीन लेखकों के बारे में जानें, जो यीशु के 12 प्रेषितों यानी खास चेलों में से थे। क्या आपको उनके नाम पता हैं?— पतरस, यूहन्ना और मत्ती। पतरस ने अपने साथी मसीहियों को दो चिट्ठियाँ लिखी थीं। इन चिट्ठियों में उसने वे सारी बातें लिखीं, जो उसे यीशु के बारे में पता थीं। अब ज़रा अपनी बाइबल में 2 पतरस 1:16-18 खोलकर पढ़िए। वहाँ पतरस उस समय के बारे में लिखता है जब स्वर्ग से यहोवा परमेश्वर ने यीशु से बात की और पतरस ने परमेश्वर की आवाज़ सुनी।—मत्ती 17:5.

दूसरा लेखक है, प्रेषित यूहन्ना। उसने बाइबल की पाँच किताबें लिखीं। जब यीशु ने अपने चेलों के साथ आखिरी दावत खायी तब यूहन्ना उसकी बगल में ही बैठा था। और जब यीशु ने अपना दम तोड़ा तब भी यूहन्ना उसके पास था। (यूहन्ना 13:23-26; 19:26) यीशु की ज़िंदगी पर लिखी चार किताबों में से एक किताब यूहन्ना ने लिखी। इन किताबों को खुशखबरी की किताबें कहते हैं। यूहन्ना ने प्रकाशितवाक्य नाम की किताब भी लिखी। इस किताब में उसने वे सारी बातें लिखीं, जो यीशु ने उस पर प्रकट कीं। इसके अलावा, यूहन्ना ने अपने नाम की तीन चिट्ठियाँ भी लिखीं, जो बाइबल की किताबों में शामिल हैं। (प्रकाशितवाक्य 1:1) तीसरा लेखक, जो यीशु का प्रेषित था। वह था मत्ती, जो कर वसूली का काम करता था।

दो ऐसे लेखक भी हैं, जो यीशु को बहुत ही करीबी से जानते थे। वे यीशु के सौतेले भाई थे और यूसुफ और मरियम के दूसरे बच्चों में से थे। (मत्ती 13:55) जब यीशु ने प्रचार करना शुरू किया तब वे उसके चेले नहीं बने थे। इतना ही नहीं, यीशु के जोशीले प्रचार की वजह से वे उसे पागल समझते थे। (मरकुस 3:21) उसके इन सौतेले भाइयों का क्या नाम था?— एक था याकूब, जिसने बाइबल की याकूब की किताब लिखी। और दूसरा था यहूदा, जिसने यहूदा नाम की किताब लिखी।—यहूदा 1.

दो और लेखक हैं जिन्होंने यीशु की ज़िंदगी के बारे में लिखा। एक था मरकुस और दूसरा था, लूका। मरकुस की माँ मरियम का यरूशलेम में एक बहुत बड़ा घर था। उस ज़माने के मसीही उनके घर में प्रार्थना के लिए इकट्ठा होते थे। इनमें से एक प्रेषित पतरस भी था। (प्रेषितों 12:11, 12) कुछ साल पहले, जब यीशु ने अपने प्रेषितों के साथ आखिरी बार फसह का पर्व मनाया और उसके बाद जब वे रात में गतसमनी के बाग में गए, तो ऐसा मालूम होता है कि मरकुस भी उनके पीछे-पीछे वहाँ गया था। क्योंकि यीशु को गिरफ्तार करने आए सैनिकों ने जब मरकुस को पकड़ने की कोशिश की, तो वह अपना कपड़ा छोड़कर वहाँ से भाग निकला।—मरकुस 14:51, 52.

लूका एक पढ़ा-लिखा इंसान था। वह एक डॉक्टर था जो शायद यीशु की मौत के बाद उसका चेला बना। उसने यीशु की ज़िंदगी का ध्यान से अध्ययन किया और उसके बारे में एकदम सही-सही बातें लिखीं। बाद में लूका, प्रेषित पौलुस  का सफरी साथी बना। उसने प्रेषितों की किताब भी लिखी।—लूका 1:1-3; प्रेषितों 1:1.

पौलुस, वह आठवाँ लेखक था जिसने यीशु के बारे में लिखा। उसने अपने ज़माने के मशहूर वकील गमलीएल से शिक्षा पायी थी। वह फरीसियों के बीच बढ़ा हुआ और उनकी सिखायी बातों पर चलने लगा। पौलुस से पहले वह शाऊल के नाम से जाना जाता था। उसे यीशु के चेलों से सख्त नफरत थी और उनका कत्ल करने में उसका भी हाथ था। (प्रेषितों 7:58–8:3; 22:1-5; 26:4, 5) क्या आपको पता है कि पौलुस ने यीशु के बारे में सच्चाई कैसे सीखी?—

जब पौलुस यीशु के चेलों को गिरफ्तार करने दमिश्क शहर की तरफ जा रहा था तब रास्ते में अचानक आकाश से ज़बरदस्त रौशनी उसके चारों तरफ चमकी और वह अंधा हो गया। फिर उसने एक आवाज़ सुनी जो उससे कह रही थी, “शाऊल, शाऊल, तू क्यों मुझ पर ज़ुल्म कर रहा है?” आवाज़ किसी और की नहीं खुद यीशु की थी। यीशु ने उसे दमिश्क जाने के लिए कहा। फिर यीशु ने दमिश्क में हनन्याह नाम के एक चेले को कहा कि वह पौलुस से मिले और उसे गवाही दे। इसके बाद, पौलुस यीशु का चेला बना। (प्रेषितों 9:1-18) पौलुस ने बाइबल की 14 किताबें लिखीं। रोमियों की किताब से लेकर इब्रानियों तक।

क्या आपने बाइबल की इन किताबों को पढ़ना शुरू किया है जिनमें यीशु के बारे में बताया गया है? या क्या आपने किसी से कहा है कि वे आपको इन्हें पढ़कर सुनाएँ?— आप इस छोटी उम्र से अपनी ज़िंदगी का सबसे बढ़िया काम कर सकते हैं। पता है वह काम क्या है? आप बाइबल से जान सकते हैं कि यह यीशु के बारे में क्या सिखाती है। (w10-E 06/01)

^ पैरा. 3 अगर आप बच्चों को यह लेख पढ़कर सुना रहे हैं तो सवाल के बाद जहाँ डैश है, वहाँ थोड़ी देर रुकिए और उन्हें जवाब देने के लिए कहिए।