“मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूँगा।”—भज. 77:12.

गीत: 18, 29

1, 2. (क) आपको किस बात से यह यकीन है कि यहोवा अपने लोगों से प्यार करता है? (ख) इंसानों को किस ज़रूरत के साथ बनाया गया है?

आपको किस बात से यकीन है कि यहोवा अपने लोगों से प्यार करता है? इस सवाल का जवाब देने से पहले, ज़रा इन उदाहरणों पर गौर कीजिए। टेलीन नाम की एक बहन का कई सालों तक भाई-बहन हौसला बढ़ाते रहे। वे उससे कहा करते थे कि वह संतुलन बनाए रखे और खुद से हद-से-ज़्यादा की उम्मीद न करे। वह कहती है, ‘अगर यहोवा को मुझ से प्यार न होता, तो वह मुझे लगातार सलाह क्यों देता?’ बहन ब्रिजट के पति की जब मौत हो गयी तो उसे अकेले अपने दो बच्चों का पालन-पोषण करना पड़ा। वह कहती है, “शैतान की दुनिया में बच्चों की परवरिश करना बहुत बड़ी चुनौती है, खासकर ऐसे परिवार में जिसमें माँ या पिता अकेले हों। लेकिन मुझे यकीन है कि यहोवा मुझसे प्यार करता है। क्योंकि जब मैं गम में डूबी थी तब उसने मुझे सहारा दिया और राह दिखायी। उसने मुझे कभी ऐसी तकलीफ से गुज़रने नहीं दिया जो मेरी बरदाश्त से बाहर हो।” (1 कुरिं. 10:13) सैंड्रा नाम की बहन को एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं। एक अधिवेशन में, एक बहन ने सैंड्रा के लिए सच्ची परवाह दिखायी। सैंड्रा का पति कहता है, “हालाँकि हमारी उस बहन से कोई जान-पहचान नहीं थी, लेकिन उसने जिस तरह सच्ची परवाह दिखायी वह देखकर हमें बहुत अच्छा लगा। यहाँ तक कि जब हमारे भाई-बहन छोटी-छोटी बातों से प्यार दिखाते हैं  तो मुझे पता चलता है कि यहोवा हमसे कितना प्यार करता है।”

2 यहोवा ने इंसानों को दूसरों से प्यार करने और प्यार पाने की ज़रूरत के साथ बनाया है। लेकिन बीमारी, आर्थिक तंगी या प्रचार में अच्छे नतीजे न मिलने की वजह से हम बड़ी आसानी से निराश हो सकते हैं। हमें शायद लगने लगे कि यहोवा हमसे प्यार नहीं करता। अगर हमें ऐसा लगता है तो हमें याद रखना चाहिए कि हम उसकी नज़र में अनमोल हैं। वह हमारा दाहिना हाथ थामकर हमारी मदद करने के लिए तैयार है। अगर हम उसके वफादार बने रहें, तो वह हमें कभी नहीं भूलेगा।—यशा. 41:13; 49:15.

3. हमारा यह यकीन कैसे बढ़ सकता है कि यहोवा हमसे प्यार करता है और हमेशा करता रहेगा?

3 अभी हमने जिन साक्षियों का ज़िक्र किया, उन्हें इस बात का यकीन था कि मुश्किल घड़ी में यहोवा उनके साथ था। उसी तरह हम भी यह यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमारी तरफ है। (भज. 118:6, 7) इस लेख में हम ऐसी चार अहम बातों पर गौर करेंगे, जिनसे साबित होता है कि यहोवा हमसे प्यार करता है। (1) उसकी सृष्टि (2) बाइबल (3) प्रार्थना और (4) फिरौती। यहोवा ने जो भले काम किए हैं, उन पर मनन करने से उसके अटूट प्यार के लिए हमारी कदरदानी बढ़ेगी।भजन 77:11, 12 पढ़िए।

यहोवा की सृष्टि पर मनन कीजिए

4. हम यहोवा की सृष्टि से क्या सीखते हैं?

4 जब हम उन चीज़ों को निहारते हैं जिनकी यहोवा ने सृष्टि की है तो क्या हम यह देख पाते हैं कि वह हमसे कितना प्यार करता है? बेशक! क्योंकि उसकी हर रचना से उसका प्यार झलकता है। (रोमि. 1:20) उदाहरण के लिए, यहोवा ने धरती को इस तरह बनाया है कि हम न सिर्फ इस पर ज़िंदा रह सकते हैं बल्कि और भी बहुत कुछ कर सकते हैं। उसने हमें हर वह चीज़ दी है जो ज़िंदगी का मज़ा लेने के लिए ज़रूरी है। खाने की बात लीजिए। हालाँकि ज़िंदा रहने के लिए हमें खाने की ज़रूरत है, लेकिन यहोवा ने सिर्फ ज़रूरत पूरी नहीं की। उसने हमें तरह-तरह का खाना दिया है, जिस वजह से हमें खाना खाने में बड़ा मज़ा आता है! (सभो. 9:7) कैथरीन नाम की एक बहन जब सृष्टि की चीज़ें देखती है खास तौर से कनाडा में वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) के नज़ारे, तो वह उमंग से भर जाती है। वह कहती है, ‘यह देखकर सच में हैरानी होती है कि कैसे हर चीज़ दमक उठती है। फूल ऐसे खिल जाते हैं मानो उन्हें इसके लिए पहले से तैयार किया गया हो। और प्रवासी पंछी अपने बसेरे की ओर लौट आते हैं, यहाँ तक कि छोटी-सी हमिंगबर्ड हमारी रसोई-घर की खिड़की के बाहर दाना चुगने आ जाती है। यह सब कितना अच्छा लगता है। जब यहोवा हमें इतनी खुशी देता है तो ज़ाहिर है वह हमसे बेहद प्यार करता होगा।’ हमारा पिता अपनी बनायी रचना से प्यार करता है और चाहता है कि हम भी उसका मज़ा लें।—प्रेषि. 14:16, 17.

5. इंसानों को जिस तरह बनाया गया है उससे यहोवा का प्यार कैसे झलकता है?

5 यहोवा ने हमें इस काबिलीयत के साथ बनाया है कि हम ऐसे बढ़िया काम कर सकते हैं जिनसे हमें खुशी और संतोष मिलता है। (सभो. 2:24) उसका मकसद था कि इंसान धरती को आबाद करे और उसकी जुताई-खुदाई करे। साथ ही, मछलियों, पंछियों और दूसरे जीव-जन्तुओं की देखभाल करे। (उत्प. 1:26-28) यहोवा ने हमारे अंदर ऐसे बढ़िया गुण भी डाले हैं जिनकी मदद से हम उसकी मिसाल पर चल सकते हैं।—इफि. 5:1.

परमेश्वर का वचन—एक अनमोल तोहफा

6. हमारे अंदर परमेश्वर के वचन के लिए कदरदानी क्यों होनी चाहिए?

6 यहोवा ने हमें बाइबल दी है क्योंकि वह हमसे बेहद प्यार करता है। हमें यहोवा के बारे में जो जानना चाहिए, साथ ही वह इंसानों के बारे में कैसा महसूस करता है इस बारे में हमें जो जानने की ज़रूरत है, वह सब बाइबल हमें बताती है। मिसाल के लिए, बाइबल बताती है कि यहोवा इसराएलियों के बारे में कैसा महसूस करता था, जो अकसर उसकी आज्ञा तोड़ देते थे। भजन 78:38 कहता है, “वह जो दयालु है, वह उनके अधर्म को ढाँपता, और उन्हें नष्ट नहीं करता; वह  बारबार अपने क्रोध को ठण्डा करता है, और अपनी जलजलाहट को पूरी रीति से भड़कने नहीं देता।” इस वचन पर गौर करने से आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि यहोवा आपसे कितना प्यार करता है और उसे आपका कितना खयाल है। आप यकीन रख सकते हैं कि उसे सच में आपकी बहुत परवाह है।—1 पतरस 5:6, 7 पढ़िए।

7. बाइबल को हमें क्यों अनमोल समझना चाहिए?

7 हमें बाइबल को बहुत अनमोल समझना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा खास तौर से इसी के ज़रिए हमसे बात करता है। जब माता-पिता और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत होती है, तो उनका एक-दूसरे के लिए प्यार और भरोसा बढ़ता है। यहोवा हमारा प्यारा पिता है। हालाँकि हमने उसे कभी देखा नहीं है न ही उसकी आवाज़ सुनी है, लेकिन बाइबल के ज़रिए मानो वह हमसे बात करता है। हमें उसकी बातें लगातार सुननी चाहिए! (यशा. 30:20, 21) जब हम परमेश्वर का वचन पढ़ते हैं तो हम उसे जान पाते हैं और उस पर हमारा भरोसा बढ़ता है। वह हमें राह दिखाता है और हमारी हिफाज़त करता है।—भजन 19:7-11; नीतिवचन 1:33 पढ़िए।

हालाँकि येहू को यहोशापात को ताड़ना देनी पड़ी, मगर यहोवा ने उस राजा में “अच्छी बातें” भी देखीं (पैराग्राफ 8, 9 देखिए)

8, 9. यहोवा हमें क्या बताना चाहता है? बाइबल से एक उदाहरण दीजिए।

8 यहोवा हमें बताना चाहता है कि वह हमसे प्यार करता है और वह सिर्फ हमारी खामियाँ नहीं देखता बल्कि वह हममें अच्छाइयाँ ढूँढ़ता है। (2 इति. 16:9) आइए गौर करें कि कैसे उसने यहूदा के राजा यहोशापात की अच्छाइयों पर ध्यान दिया। यहोशापात इसराएल के राजा अहाब से मिल गया और उसने गिलाद के रामोत में अरामियों (सीरिया के लोगों) से युद्ध किया जो कि गलत फैसला था। हालाँकि 400 झूठे भविष्यवक्ताओं ने दुष्ट राजा अहाब से कहा कि वह युद्ध में जीत जाएगा, मगर यहोवा के सच्चे भविष्यवक्ता मीकायाह  ने यहोशापात से कहा कि अगर वह युद्ध करेगा तो हार जाएगा। ठीक वैसा ही हुआ। राजा अहाब युद्ध में मारा गया और यहोशापात की जान बड़ी मुश्किल से बची। युद्ध के बाद यहोवा ने येहू के ज़रिए यहोशापात को उसकी गलती के लिए ताड़ना दी। मगर येहू ने राजा को यह भी बताया, “तुझ में कुछ अच्छी बातें पाई जाती हैं।”—2 इति. 18:4, 5, 18-22, 33, 34; 19:1-3.

9 कुछ साल पहले, यहोशापात ने हाकिमों, लेवियों और याजकों को हुक्म दिया था कि वे यहूदा के सभी शहरों में जाएँ और लोगों को यहोवा का कानून सिखाएँ। इस अभियान का इतना ज़बरदस्त असर हुआ कि आस-पास के देशों के लोग भी यहोवा से डरने लगे थे। (2 इति. 17:3-10) जी हाँ, यहोशापात ने अहाब का साथ देकर हालाँकि गलत फैसला लिया था, मगर यहोवा ने उसके वे अच्छे काम नज़रअंदाज़ नहीं किए जो उसने पहले किए थे। यह उदाहरण वाकई हमें बहुत दिलासा देता है क्योंकि कभी-कभी हम भी गलतियाँ करते हैं। लेकिन अगर हम दिलो-जान से यहोवा की सेवा करते रहें, तो वह हमेशा हमसे प्यार करता रहेगा और उन अच्छे कामों को नहीं भूलेगा जो हमने किए हैं।

प्रार्थना करने के सम्मान की कदर कीजिए

10, 11. (क) प्रार्थना यहोवा से मिला एक खास सम्मान क्यों है? (ख) यहोवा कैसे हमारी प्रार्थनाओं का जवाब दे सकता है? (लेख की शुरूआत में दी तसवीर देखिए।)

10 जब बच्चे अपने पिता से बात करना चाहते हैं तो प्यार करनेवाला पिता वक्‍त निकालकर उनकी ध्यान से सुनता है। वह उनकी चिंता-परेशानी जानना चाहता है, क्योंकि उसे इस बात की फिक्र है कि उनके दिल में क्या है। हमारा प्यारा पिता यहोवा ऐसा ही है। जब हम उससे प्रार्थना करते हैं तो वह हमारी ध्यान से सुनता है। पिता यहोवा से बात करना क्या ही बड़ा सम्मान है!

11 हम यहोवा से किसी भी वक्‍त प्रार्थना कर सकते हैं। वह हमारा दोस्त है और हमारी प्रार्थनाएँ सुनने के लिए हमेशा तैयार रहता है। लेख की शुरूआत में ज़िक्र की गयी बहन टेलीन कहती है, “आप यहोवा को अपने दिल की हर बात बता सकते हैं।” जब हम अपने दिल की गहराइयों में छिपी बातें यहोवा को बताते हैं तो वह किसी भी तरीके से हमारी प्रार्थनाओं का जवाब दे सकता है। बाइबल की किसी आयत के ज़रिए, पत्रिकाओं के किसी लेख के ज़रिए या हमारे भाई-बहनों के ज़रिए हौसला बढ़ानेवाली बातें कहकर वह ऐसा कर सकता है। यहोवा सच्चे दिल से की गयी हमारी बिनतियाँ ज़रूर सुनता है और हमें समझता भी है, फिर चाहे कोई और न समझ सके। जब वह हमारी प्रार्थनाओं का जवाब देता है तो यह साबित होता है कि वह हमसे प्यार करता है और हमेशा करता रहेगा।

12. हमें बाइबल में दर्ज़ प्रार्थनाओं का क्यों अध्ययन करना चाहिए? एक उदाहरण दीजिए।

12 बाइबल में दर्ज़ प्रार्थनाओं से हम ज़रूरी सबक सीख सकते हैं। समय-समय पर इनमें से कुछ प्रार्थनाओं का पारिवारिक उपासना में अध्ययन करना फायदेमंद हो सकता है। बीते समय के, परमेश्वर के सेवकों की दिल से की गयी प्रार्थनाओं पर मनन करने से हम और अच्छे से प्रार्थना कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, योना की उस नम्र बिनती का अध्ययन कीजिए जो उसने एक बड़ी मछली के पेट में की थी। (योना 1:17–2:10) सच्चे दिल से की गयी सुलैमान की उस प्रार्थना पर चर्चा कीजिए जो उसने मंदिर के समर्पण के वक्‍त की थी। (1 राजा 8:22-53) और यीशु की आदर्श प्रार्थना पर मनन कीजिए। (मत्ती 6:9-13) सबसे ज़रूरी बात यह है कि लगातार “अपनी बिनतियाँ परमेश्वर को बताते” रहिए। नतीजा, “परमेश्वर की वह शांति जो हमारी समझने की शक्‍ति से कहीं ऊपर है, . . . तुम्हारे दिल के साथ-साथ तुम्हारे दिमाग की सोचने-समझने की ताकत की हिफाज़त करेगी।” साथ ही, यहोवा के प्यार के लिए हमारे दिल में कदरदानी बढ़ती जाएगी।—फिलि. 4:6, 7.

फिरौती के लिए अपनी कदरदानी ज़ाहिर कीजिए

13. फिरौती बलिदान की वजह से हमें क्या मौका मिला है?

13 यहोवा ने हमारे लिए फिरौती बलिदान का इंतज़ाम किया है जो एक अनमोल तोहफा है। इसकी बदौलत ‘हम जीवन पा सकते हैं।’ (1 यूह. 4:9) यह परमेश्वर के प्यार का ज़बरदस्त  सबूत है। इसका ज़िक्र करते हुए प्रेषित पौलुस ने कहा, “मसीह, तय किए गए वक्‍त पर भक्‍तिहीन इंसानों के लिए मरा। क्योंकि शायद ही कोई किसी धर्मी इंसान के लिए अपनी जान देगा। हाँ, हो सकता है कि एक अच्छे इंसान के लिए कोई अपनी जान देने की हिम्मत करे। मगर परमेश्वर ने अपने प्यार की अच्छाई हम पर इस तरह ज़ाहिर की है कि जब हम पापी ही थे, तब मसीह हमारे लिए मरा।” (रोमि. 5:6-8) जी हाँ, फिरौती बलिदान परमेश्वर के प्यार का सबसे बढ़िया उदाहरण है। इसकी वजह से इंसानों को परमेश्वर के साथ एक करीबी रिश्ता बनाने का मौका मिलता है।

14, 15. (क) फिरौती बलिदान अभिषिक्‍त मसीहियों के लिए क्या मायने रखता है? (ख) यह धरती पर जीने की आशा रखनेवालों के लिए क्या मायने रखता है?

14 फिरौती की वजह से मसीहियों का एक छोटा झुंड खास मायने में, यहोवा का अटूट प्यार महसूस करता है। (यूह. 1:12, 13; 3:5-7) परमेश्वर ने इन मसीहियों का पवित्र शक्‍ति से अभिषेक किया है। इसलिए अब वे “परमेश्वर के बच्चे हैं।” (रोमि. 8:15, 16) इनमें से कुछ अब भी धरती पर हैं। तो फिर पौलुस ने ऐसा क्यों कहा कि वे ‘मसीह यीशु के साथ एकता में हैं और उसके साथ स्वर्गीय स्थानों में बैठे हैं’? (इफि. 2:6) वह इसलिए कि उन पर ‘उस पवित्र शक्‍ति की मुहर लगायी गयी जिसका वादा किया गया था। यह पवित्र शक्‍ति उन्हें अपनी विरासत मिलने से पहले एक बयाने के तौर पर दी गयी है।’ यानी यहोवा ने उन्हें स्वर्ग में हमेशा की ज़िंदगी जीने की आशा दी है।—इफि. 1:13, 14; कुलु. 1:5.

15 जो मसीही अभिषिक्‍त नहीं हैं वे भी यहोवा के दोस्त बन सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि वे फिरौती बलिदान पर विश्वास करें। उनके पास यह आशा है कि उन्हें परमेश्वर के बच्चों के तौर पर गोद लिया जाएगा और फिरदौस बनी धरती पर हमेशा की ज़िंदगी मिलेगी। सच में, फिरौती का इंतज़ाम ज़ाहिर करता है कि यहोवा को सभी इंसानों से प्यार है। (यूह. 3:16) अगर हम वफादारी से परमेश्वर की सेवा करते रहें तो नयी दुनिया में वह हमें बेहतरीन ज़िंदगी जीने का मौका देगा। यह जानकर हमें कितनी खुशी होती है! तो आइए हम यह ज़ाहिर करते रहें कि हम फिरौती बलिदान की कदर करते हैं, जो यहोवा के प्यार का ज़बरदस्त सबूत है।

यहोवा के लिए अपना प्यार दिखाइए

16. यहोवा के प्यार पर मनन करने से हमारा दिल हमें क्या करने के लिए उभारेगा?

16 यहोवा ने अनगिनत तरीकों से हमारे लिए प्यार दिखाया है। राजा दाविद ने कहा, “मेरे लिये तो हे परमेश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है! यदि मैं उनको गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते।” (भज. 139:17, 18) यहोवा ने हमारे लिए जिन तरीकों से प्यार दिखाया है उन पर मनन करने से हमारा दिल हमें उभारेगा कि हम यहोवा से प्यार करें और उसकी सेवा में अच्छे-से-अच्छा करें।

17, 18. परमेश्वर के लिए अपना प्यार ज़ाहिर करने के कुछ तरीके क्या हैं?

17 हम कई तरीकों से यहोवा के लिए अपना प्यार दिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, हम जोश के साथ राज की खुशखबरी दूसरों को बताकर उसके लिए अपना प्यार ज़ाहिर कर सकते हैं। (मत्ती 24:14; 28:19, 20) जब मुसीबतें आने पर हमारे विश्वास की परख होती है, तब हम धीरज धरकर और परमेश्वर के वफादार रहकर उसके लिए अपना प्यार दिखा सकते हैं। (भजन 84:11; याकूब 1:2-5 पढ़िए।) जब हम पर बड़ी-से-बड़ी मुसीबतें आती हैं उस वक्‍त हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमारा दर्द समझता है और वह हमारी मदद करेगा क्योंकि उसकी नज़र में हमारा बड़ा मोल है।—भज. 56:8.

18 यहोवा के लिए हमारा प्यार हमें उकसाता है कि हम उन सभी शानदार रचनाओं पर मनन करें जिनकी उसने सृष्टि की है। जब हम बाइबल का गहराई से अध्ययन करते हैं तो हम दिखाते हैं कि हमें यहोवा और उसके वचन से प्यार है। जब हम लगातार यहोवा से प्रार्थना करते हैं तब भी हम दिखाते हैं कि हमें यहोवा से प्यार है और उसके साथ हम अपना रिश्ता मज़बूत करना चाहते हैं। और जब हम फिरौती बलिदान पर मनन करते हैं तो परमेश्वर के लिए हमारा प्यार और गहरा होता है। (1 यूह. 2:1, 2) ये कुछ ऐसे तरीके हैं जिनके ज़रिए हम इस बात के लिए अपनी कदरदानी ज़ाहिर करते हैं कि यहोवा हमसे प्यार करता है और हमेशा करता रहेगा।