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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  जुलाई 2015

क्या यह मायने रखता है कि आपके काम पर कौन ध्यान देता है?

क्या यह मायने रखता है कि आपके काम पर कौन ध्यान देता है?

बसलेल और ओहोलीआब के लिए निर्माण काम नयी बात नहीं थी। जब वे मिस्र की गुलामी में थे, तो उन्होंने ईंटें बनायी थीं, शायद इतनी ईंटें, जितनी अब उन्हें याद भी नहीं होंगी। लेकिन अब वे दिन उनके लिए बीती बातें बनकर रह गए थे। अब वे ऊँचे दर्जे के कारीगर बननेवाले थे, क्योंकि उन्हें निवासस्थान बनाने के काम में अगुवाई लेने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी। (निर्ग. 31:1-11) लेकिन उनकी लाजवाब कारीगरी की कुछ चीज़ें बस कुछ ही लोग देख पाते। तो क्या वे इस वजह से निराश हो जाते? क्या यह बात वाकई मायने रखती थी कि उनके काम पर कौन गौर करता है? और क्या यह मायने रखता है कि आपके काम पर कौन ध्यान देता है?

लाजवाब काम सिर्फ कुछ लोग देख पाए

निवासस्थान का कुछ साज़ो-सामान बहुत ही उम्दा था। उदाहरण के लिए, करार के संदूक पर बने सोने के करूबों पर गौर कीजिए। प्रेषित पौलुस ने बताया कि वे “शानदार” हैं। (इब्रा. 9:5) ज़रा सोचिए, सोना गढ़कर बनाए गए वे करूब कितने खूबसूरत होंगे!—निर्ग. 37:7-9.

अगर बसलेल और ओहोलीआब की बनायी वे चीज़ें आज भी होतीं, तो वे ज़रूर किसी बढ़िया म्यूज़ियम में रखी जातीं। और मुमकिन है लोगों की भीड़ उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाती। लेकिन जिस समय वे बनायी गयी थीं, तब उनकी लाजवाब खूबसूरती कितने लोगों ने देखी होगी? ध्यान दीजिए, करूब मंदिर के परम-पवित्र स्थान में रखे थे। इसलिए उन्हें सिर्फ महायाजक देख सकता था और वह भी साल में सिर्फ एक बार, यानी प्रायश्‍चित दिन में जब वह परम-पवित्र स्थान में दाखिल होता था। (इब्रा. 9:6, 7) इसी वजह से, बहुत कम लोग उनको देख पाए।

तारीफ भले न हो, फिर भी संतुष्ट

अगर आप बसलेल या ओहोलीआब होते और आपने कड़ी मेहनत करके इतना बढ़िया कारीगरी का काम किया होता, तब आपको यह जानकर कैसा लगता कि उसे बहुत कम लोगों ने देखा? आज दुनिया में जब लोगों के साथी उनके काम की तारीफ और सराहना करते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि उन्होंने कुछ हासिल किया है। इसी से वे आँकते हैं कि उनकी मेहनत कितनी मायने रखती है। लेकिन यहोवा के सेवक उनसे अलग हैं। बसलेल और ओहोलीआब की तरह, हमें यहोवा की सेवा करने और उसकी मंज़ूरी पाने से संतोष मिलता है।

यीशु के दिनों में यह आम बात थी कि धर्म-गुरु ऐसी प्रार्थनाएँ करते थे जो लोगों के दिल पर छाप छोड़ जाए। मगर यीशु  ने प्रार्थना करने का कुछ अलग ही तरीका बताया। उसने कहा कि इस इरादे से प्रार्थना मत करो कि सुननेवाले तुम्हारी वाह-वाही करें, बल्कि सच्चे दिल से प्रार्थना करो। इसका नतीजा क्या होगा? “तेरा पिता जो तेरा हर काम देख सकता है, वह तुझे इसका फल देगा।” (मत्ती 6:5, 6) जी हाँ, ज़रूरी बात यह नहीं कि लोग हमारी प्रार्थनाओं के बारे में क्या सोचते हैं बल्कि ज़रूरी यह है कि इस बारे में यहोवा क्या सोचता है। इसी से हमारी प्रार्थनाओं का मोल बढ़ता है। यही बात हमारी पवित्र सेवा पर लागू होती है। हम जो पवित्र सेवा करते हैं, वह इसलिए मायने नहीं रखती कि लोग हमारी तारीफ करते हैं, बल्कि इसलिए कि इससे यहोवा का दिल खुश होता है, ‘जो हर काम देख सकता है।’

जब निवासस्थान का काम पूरा हुआ, तब “बादल मिलापवाले तम्बू पर छा गया, और यहोवा का तेज निवासस्थान में भर गया।” (निर्ग. 40:34) यहोवा की मंज़ूरी का क्या ही बेहतरीन सबूत! उस वक्‍त बसलेल और ओहोलीआब को कैसा लगा होगा? हालाँकि उनकी बनायी चीज़ों पर उनके नाम नहीं खुदे थे, लेकिन उन्हें यह जानकर ज़रूर संतोष हुआ होगा कि उनकी मेहनत पर यहोवा की आशीष है। (नीति. 10:22) आगे चलकर, यह देखकर भी उनका दिल खुश हुआ होगा कि उनकी बनायी चीज़ें अब भी यहोवा की सेवा में इस्तेमाल की जा रही हैं। जब बसलेल और ओहोलीआब को नयी दुनिया में ज़िंदा किया जाएगा, तो बेशक उन्हें यह जानकर बहुत खुशी होगी कि निवासस्थान, सच्ची उपासना के लिए लगभग 500 सालों तक इस्तेमाल किया गया था!

आप नम्रता दिखाते हुए खुशी-खुशी जो सेवा करते हैं, उसे भले ही कोई इंसान न देखे पर यहोवा देखता है!

आज यहोवा के संगठन में चित्रकार, संगीतकार, फोटोग्राफर, अनुवादक, लेखक और कार्टून वीडियो बनानेवाले सभी इस तरह काम करते हैं कि उनके काम से उनका नाम नहीं जोड़ा जाता। इस मायने में, वे जो करते हैं उसे कोई नहीं ‘देखता।’ यही बात दुनिया-भर की 1,10,000 से ज़्यादा मंडलियों में हो रहे काम के बारे में कही जा सकती है। जैसे, कौन यह देखता है कि कैसे हर महीने के आखिर में लेखा सेवक (अकाउंट्स सर्वेंट) कागज़ी काम करता है? कौन यह देखता है कि कैसे सचिव मंडली की प्रचार सेवा रिपोर्ट तैयार करता है? और उस भाई या बहन को कौन देखता है जो राज-घर में मरम्मत का काम करता है?

अपनी ज़िंदगी के आखिर में, बसलेल और ओहोलीआब के पास कोई ट्रॉफी, खिताब या कोई पुरस्कार नहीं था, जिससे पता चलता कि उन्होंने कितने शानदार डिज़ाइन बनाए और कितना बढ़िया निर्माण काम किया। लेकिन उन्हें यहोवा की मंज़ूरी मिली थी जिसका मोल किसी भी खिताब से कहीं ज़्यादा है। हम पूरा यकीन रख सकते हैं कि यहोवा ने उनके काम पर ध्यान दिया। आइए उनकी मिसाल पर चलते हुए हम भी नम्रता दिखाएँ और खुशी-खुशी परमेश्वर की सेवा करते रहें।