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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  मई 2015

उन्होंने वादा की गयी बातों को “देखा”

उन्होंने वादा की गयी बातों को “देखा”

“जिन बातों का उनसे वादा किया गया था, वे उनके दिनों में पूरी नहीं हुईं। फिर भी, उन्होंने वादा की गयी बातों को दूर ही से देखा।”—इब्रा. 11:13.

1. अनदेखी चीज़ों की कल्पना करने की काबिलीयत क्यों एक लाजवाब तोहफा है? (लेख की शुरूआत में दी तसवीर देखिए।)

यहोवा ने हमें एक लाजवाब तोहफा दिया है! वह है अनदेखी चीज़ों के बारे में कल्पना करने की काबिलीयत। यह काबिलीयत, भविष्य में होनेवाली अच्छी चीज़ों के बारे में कल्पना करने में हमें मदद देती है। इसकी वजह से हम भविष्य के बारे में पहले से योजना बना पाते हैं और कई समस्याओं में पड़ने से बच पाते हैं। भविष्य में क्या होनेवाला है, यहोवा अच्छी तरह जानता है। उसने हमें कुछ ऐसी बातों के बारे में बताया है, जिनका हम बेसब्री से इंतज़ार कर सकते हैं। हालाँकि आज हम उन्हें देख नहीं सकते, मगर हम उनकी कल्पना ज़रूर कर सकते हैं और भरोसा रख सकते हैं कि वह ज़रूर होंगी।—2 कुरिं. 4:18.

2, 3. (क) कल्पना करने से हमें क्या फायदा हो सकता है? (ख) हम इस लेख में किन सवालों पर गौर करेंगे?

2 कभी-कभी हम उन बातों की कल्पना करने लगते हैं, जो कभी नहीं होंगी। उदाहरण के लिए, एक छोटी बच्ची शायद कल्पना करे कि वह एक तितली पर बैठकर उड़ रही है जो मुमकिन नहीं है। लेकिन शमूएल की माँ हन्ना ने ऐसी बातों की कल्पना की जिनका होना मुमकिन था। वह उस दिन के बारे में सोचती रही, जब वह अपने बेटे को निवासस्थान में ले जाएगी ताकि उसका बेटा याजकों के साथ सेवा कर सके। यह कोई सपना नहीं था। हन्ना दरअसल उस बारे में सोच रही थी जिसे करने का  उसने पक्का इरादा कर लिया था। इसलिए उस दिन की कल्पना करने से हन्ना को यहोवा से किया अपना वादा निभाने की ताकत मिली। (1 शमू. 1:22) जब हम उन बातों की कल्पना करते हैं जिनका यहोवा ने वादा किया है तो हम असल में ऐसी बातों के बारे में सोच रहे होते हैं जो हर हाल में होंगी।—2 पत. 1:19-21.

3 प्राचीन समय में यहोवा के बहुत-से लोगों ने बेशक उन बातों की कल्पना की होगी, जिनका उसने वादा किया था। ऐसा करना उनके लिए क्यों अच्छा था? और हमारे लिए यह कल्पना करना क्यों अच्छा है कि जब परमेश्वर के वादे पूरे होंगे, तब हमारी ज़िंदगी कैसी होगी?

भविष्य की कल्पना करने से उनका विश्वास और मज़बूत हुआ

4. किस वजह से हाबिल एक अच्छे भविष्य की कल्पना कर सका?

4 हाबिल वह पहला वफादार इंसान था, जिसे यहोवा के वादों पर पूरा विश्वास था। वह जानता था कि जब आदम और हव्वा ने पाप किया, तो यहोवा ने साँप से क्या कहा। यहोवा ने कहा था, “मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुँगा; वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।” (उत्प. 3:14, 15) हाबिल यह तो नहीं जानता था कि यह सब कैसे होगा, लेकिन उसने इस बारे में काफी सोचा होगा। उसने सोचा होगा, ‘आखिर वह कौन है जिसे साँप घायल करेगा और जो इंसानों को दोबारा सिद्ध होने में मदद देगा?’ हाबिल ने भविष्य के बारे में चाहे जो भी कल्पना की हो, पर उसे विश्वास था कि यहोवा ने जो वादा किया है, वह ज़रूर पूरा होगा। इसलिए जब उसने बलिदान चढ़ाया तो यहोवा उससे खुश हुआ।—उत्पत्ति 4:3-5; इब्रानियों 11:4 पढ़िए।

5. भविष्य के बारे में कल्पना करने से हनोक को क्या करने में मदद मिली?

5 हनोक एक और ऐसा इंसान था, जिसे परमेश्वर पर अटूट विश्वास था। वह ऐसे लोगों के बीच रहता था, जो परमेश्वर के खिलाफ ‘घिनौनी बातें’ बोलते थे। लेकिन हनोक ने हिम्मत से काम लिया और उन्हें परमेश्वर का न्यायदंड सुनाया। उसने उन्हें बताया कि यहोवा दुष्ट लोगों का नाश करनेवाला है। (यहू. 14, 15) किस बात ने उसे ऐसा करने में मदद दी? शायद हनोक ने यह कल्पना की होगी कि जब हर इंसान यहोवा की उपासना करेगा, तो यह दुनिया कैसी होगी।—इब्रानियों 11:5, 6 पढ़िए।

6. जलप्रलय के बाद, नूह ने शायद क्या सोचा होगा?

6 नूह को भी यहोवा पर विश्वास था। इसलिए वह जलप्रलय में नाश नहीं हुआ। (इब्रा. 11:7) यहोवा पर विश्वास होने की वजह से ही, नूह ने यहोवा के लिए जानवरों की बलि चढ़ायी। (उत्प. 8:20) जलप्रलय के कुछ समय बाद, दुनिया फिर से दुष्टता के काम करने लगी। निम्रोद नाम का एक आदमी शासन करने लगा। वह चाहता था कि लोग यहोवा से बगावत करें। (उत्प. 10:8-12) लेकिन नूह का विश्वास नहीं डगमगाया। हाबिल की तरह, उसे पूरा यकीन था कि एक दिन परमेश्वर पाप और मौत को मिटा देगा। नूह ने शायद यह भी सोचा होगा कि एक वक्‍त ऐसा आएगा जब कोई बेरहम शासक नहीं होगा। हम भी ऐसे शानदार वक्‍त की कल्पना कर सकते हैं। वह वक्‍त बहुत करीब है!—रोमि. 6:23.

उन्होंने उस वक्‍त की कल्पना की जब परमेश्वर के वादे पूरे होंगे

7. अब्राहम, इसहाक और याकूब ने किस तरह के भविष्य की कल्पना की होगी?

7 अब्राहम, इसहाक और याकूब ने ज़रूर एक शानदार भविष्य की कल्पना की होगी, क्योंकि परमेश्वर ने उनसे वादा किया था कि उनके “वंश” के ज़रिए धरती के सभी राष्ट्र आशीष पाएँगे। (उत्प. 22:18; 26:4; 28:14) परमेश्वर ने यह भी वादा किया था कि उनके वंशज अनगिनत हो जाएँगे और वे एक खूबसूरत वादा किए गए देश में बसेंगे। (उत्प. 15:5-7) अब्राहम, इसहाक और याकूब को पूरा विश्वास था कि यहोवा के वादे ज़रूर पूरे होंगे। इसलिए वे अपने मन की आँखों से यह साफ देख सके होंगे कि उनके वंशज वादा किए हुए देश में बसे हैं। देखा जाए तो जब आदम और हव्वा ने पाप किया था, उसी समय से यहोवा अपने वफादार सेवकों को यह समझने में मदद दे रहा है कि कैसे एक दिन फिर से इंसानों को सिद्ध जीवन मिलेगा।

8. किस वजह से अब्राहम यहोवा पर अटूट विश्वास रख पाया और उसकी आज्ञा मान पाया?

 8 अब्राहम को यहोवा पर अटूट विश्वास था। इसलिए उसने मुश्किल-से-मुश्किल हालात में भी उसकी आज्ञा मानी। अब्राहम और दूसरे वफादार सेवक हालाँकि अपने जीते-जी उन बातों को पूरा होते नहीं देख पाए, जिनका यहोवा ने वादा किया था, फिर भी उन बातों की तसवीर उनके मन में एकदम साफ थी। बाइबल कहती है, “उन्होंने वादा की गयी बातों को दूर ही से देखा और उनसे खुशी पायी।” (इब्रानियों 11:8-13 पढ़िए।) अब्राहम जानता था कि बीते समय में यहोवा ने अपना हर वादा पूरा किया है। इसलिए उसे यकीन था कि भविष्य के लिए उसने जो वादे किए हैं, वे भी ज़रूर पूरे होंगे।

9. परमेश्वर के वादों पर विश्वास होने से अब्राहम को किस तरह मदद मिली?

9 अब्राहम को यहोवा के वादों पर पूरा विश्वास था। इसलिए यहोवा ने उससे जो भी करने को कहा, उसने हमेशा वही किया। उदाहरण के लिए, उसने ऊर शहर में अपना घर-वार छोड़ दिया। और उसने अपनी बाकी ज़िंदगी भी कनान के किसी एक शहर में रहकर नहीं गुज़ारी। वह जानता था कि उसके आस-पास जो शहर हैं वे हमेशा तक नहीं रहेंगे, क्योंकि उनके शासक, यहोवा की उपासना नहीं करते थे। (यहो. 24:2) अब्राहम अपनी बाकी ज़िंदगी “एक ऐसे शहर के इंतज़ार में” रहा, “जो सच्ची बुनियाद पर खड़ा है, जिसका निर्माण करनेवाला और रचनेवाला परमेश्वर है।” (इब्रा. 11:10) एक तरह से अब्राहम ने ऐसी जगह में रहने की कल्पना की, जो हमेशा कायम रहेगी और जिस पर यहोवा की हुकूमत होगी। अब्राहम, हाबिल, हनोक, नूह और दूसरे वफादार सेवकों को विश्वास था कि परमेश्वर मरे हुओं को दोबारा ज़िंदा करेगा। इसलिए वे उस वक्‍त का बेसब्री से इंतज़ार करते रहे जब वे धरती पर, परमेश्वर के राज में हमेशा जीएँगे, यानी उस ‘शहर में जो सच्ची बुनियाद पर खड़ा है।’ इन बातों की कल्पना करने से यहोवा पर उनका विश्वास और भी मज़बूत हुआ।—इब्रानियों 11:15, 16 पढ़िए।

10. यहोवा ने अब्राहम से एक बेटे का जो वादा किया था, उस वजह से सारा ने क्या कल्पना की होगी?

10 अब्राहम की पत्नी सारा को भी यहोवा के वादों पर मज़बूत विश्वास था। वह 90 साल की हो गयी थी और उसके अभी कोई बच्चा नहीं हुआ था, फिर भी वह उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करती रही, जब उसकी गोद में एक बच्चा होगा। सारा ने तो शायद यह भी कल्पना की कि कैसे उसकी संतान से एक बड़ा राष्ट्र बन रहा है। (इब्रा. 11:11, 12) वह इस बात का कैसे इतना यकीन रख पायी? क्योंकि यहोवा ने उसके पति से कहा था, “मैं [सारा को] आशीष दूँगा, और तुझ को उसके द्वारा एक पुत्र दूँगा; और मैं उसको ऐसी आशीष दूँगा कि वह जाति जाति की मूलमाता हो जाएगी; और उसके वंश में राज्य-राज्य के राजा उत्पन्न होंगे।” (उत्प. 17:16) यहोवा के वादे के मुताबिक सारा ने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम इसहाक था। इस चमत्कार से उसका विश्वास और मज़बूत हो गया कि यहोवा के बाकी वादे भी ज़रूर पूरे होंगे। सारा की तरह, हम जब उन शानदार आशीषों की कल्पना करते हैं, जिनका यहोवा ने वादा किया है, तो हमारा भी विश्वास मज़बूत होता है।

वह इनाम के बारे में सोचता रहा

11, 12. किस बात ने मूसा को यहोवा के लिए अपना प्यार बढ़ाने में मदद दी?

11 मूसा को भी यहोवा के वादों पर विश्वास था। उसकी परवरिश मिस्र देश में एक राजकुमार की तरह हुई थी। मगर उसे दुनिया की किसी भी चीज़ से ज़्यादा यहोवा से प्यार था। इसलिए उसके दिल में दौलत और रुतबा पाने की चाहत पैदा नहीं हुई। उसने अपने इब्री माता-पिता से यहोवा के बारे में सीखा था। उन्होंने उसे सिखाया था कि यहोवा ने वादा किया है कि वह इब्रियों को मिस्र की गुलामी से आज़ाद कराएगा और उन्हें वादा किया हुआ देश देगा। (उत्प. 13:14, 15; निर्ग. 2:5-10) मूसा ने इन वादों के बारे में जितना ज़्यादा सोचा, उतना ही यहोवा के लिए उसका प्यार बढ़ता गया।

12 बाइबल हमें बताती है कि मूसा किस बारे में सोचता रहा, “विश्वास ही से मूसा ने, बड़ा होने पर फिरौन की बेटी का बेटा कहलाने से इनकार कर दिया। और पाप का चंद दिनों का सुख भोगने के बजाय, उसने परमेश्वर के लोगों के साथ ज़ुल्म सहने का चुनाव किया। उसने समझा कि परमेश्वर  का अभिषिक्‍त जन होने के नाते निंदा सहना, मिस्र के खज़ानों से कहीं बड़ी दौलत है, क्योंकि वह अपनी नज़र इनाम पाने पर लगाए हुए था।”—इब्रा. 11:24-26.

13. यहोवा के वादों के बारे में सोचना क्यों मूसा के लिए अच्छा था?

13 यहोवा ने इब्रियों को गुलामी से आज़ाद कराने का जो वादा किया था, उसके बारे में मूसा ने ज़रूर बहुत गहराई से सोचा होगा। यहोवा के दूसरे सेवकों की तरह, मूसा यह भी जानता था कि यहोवा सभी इंसानों को मौत की गुलामी से आज़ाद कराएगा। (अय्यू. 14:14, 15; इब्रा. 11:17-19) इससे मूसा समझ गया कि यहोवा इंसानों से कितना प्यार करता है। नतीजा, मूसा यहोवा से और ज़्यादा प्यार करने लगा और उस पर उसका विश्वास और मज़बूत हो गया। इस प्यार और विश्वास की वजह से वह ज़िंदगी-भर यहोवा की सेवा कर पाया। (व्यव. 6:4, 5) यहाँ तक कि जब फिरौन ने उसे मार डालने की धमकी दी, तब भी वह डरा नहीं। वह जानता था कि यहोवा उसे भविष्य में इनाम देगा।—निर्ग. 10:28, 29.

उन आशीषों की कल्पना करते रहिए जो परमेश्वर की सरकार देगी

14. कुछ लोग भविष्य के बारे में क्या सोचते हैं?

14 भविष्य के बारे में बहुत-से लोग सोचते हैं, मगर वे ऐसी बातों के बारे में सोचते या कल्पना करते हैं जो कभी नहीं होंगी। उदाहरण के लिए, जो लोग बहुत गरीब हैं उनमें से कई यह सपना देखते हैं कि एक दिन वे बहुत मालामाल हो जाएँगे और उन्हें किसी बात की चिंता नहीं होगी। मगर बाइबल कहती है कि शैतान की इस दुनिया में, ज़िंदगी में हमेशा “कष्ट और शोक ही शोक” होगा। (भज. 90:10) कुछ लोग सोचते हैं कि इंसानी सरकारें दुनिया की समस्याएँ खत्म कर देंगी। मगर बाइबल कहती है कि सिर्फ परमेश्वर की सरकार ऐसा कर सकती है। (दानि. 2:44) बहुत-से लोग सोचते हैं कि यह दुनिया हमेशा ऐसे ही चलती रहेगी। मगर बाइबल कहती है कि परमेश्वर इस दुष्ट दुनिया का नाश करेगा। (सप. 1:18; 1 यूह. 2:15-17) जो लोग ऐसी बातों की कल्पना करते हैं जो यहोवा की कही बातों के बिलकुल उलट हैं, उन्हें आगे चलकर निराशा ही हाथ लगेगी।

क्या आप खुद को नयी दुनिया में देख सकते हैं? (पैराग्राफ 15 देखिए)

15. (क) जिस शानदार भविष्य का परमेश्वर ने वादा किया है, उसकी कल्पना करना हमारे लिए क्यों अच्छा है? (ख) आप कौन-सी आशीष पाने के लिए बेताब हैं?

15 यहोवा ने हमें एक शानदार भविष्य देने का वादा किया है। उस भविष्य की कल्पना करने से हमारी खुशी बढ़ जाती है और हमें परमेश्वर की सेवा करते रहने की हिम्मत मिलती है, फिर चाहे हमारी आशा स्वर्ग जाने की हो या धरती पर जीने की। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप वह काम कर रहे हैं, जिसके बारे में यहोवा ने आपसे वादा किया है? अगर आप धरती पर हमेशा जीने का बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं, तो कल्पना कीजिए कि आप अपने दोस्तों के साथ इस धरती को खूबसूरत बाग बनाने में मेहनत कर रहे हैं। आपके इस काम की जो निगरानी कर रहे हैं, उन्हें आपकी बहुत परवाह है। इसलिए आप ज़िंदगी का खूब मज़ा ले रहे हैं। और आपके आस-पास रहनेवाला हर कोई आपकी तरह यहोवा से प्यार करता है। आप पूरी तरह सेहतमंद हैं और आपमें खूब दमखम है। आपका चेहरा खुशी से चमक रहा है। आपको किसी बात की चिंता नहीं है। आप इस बात से बहुत खुश हैं कि आपमें जो हुनर और काबिलीयतें हैं, उसकी वजह से आप दूसरों की मदद और यहोवा की महिमा कर पा रहे हैं। आप शायद उनकी भी मदद कर रहे हैं, जिन्हें यहोवा के बारे में सीखने के लिए दोबारा ज़िंदा किया गया है। (यूह. 17:3; प्रेषि. 24:15) इन आशीषों की कल्पना करना कोई सपना नहीं है। ये आशीषें ज़रूर मिलेंगी, क्योंकि बाइबल ऐसे ही भविष्य का वादा करती है।—यशा. 11:9; 25:8; 33:24; 35:5-7; 65:22.

उन आशीषों के बारे में बात कीजिए जिनके लिए आप बेताब हैं

16, 17. उस शानदार भविष्य के बारे में दूसरों से बात करना क्यों अच्छा है, जिसका यहोवा ने हमसे वादा किया है?

16 हम नयी दुनिया में जो करना चाहते हैं, उसके बारे में हम अपने भाई-बहनों को बता सकते हैं। ऐसा करके हम उस सुनहरे भविष्य की साफ तसवीर देखने में एक-दूसरे की मदद  करते हैं। बेशक, हम यह तो ठीक-ठीक नहीं जानते कि नयी दुनिया में कौन-क्या करेगा। लेकिन जब हम उन बातों के बारे में दूसरों को बताते हैं जिनके लिए हम बेताब हैं, तो असल में हम यहोवा के वादों पर अपना विश्वास दिखा रहे होते हैं। इस तरह हम मुश्किल दौर में यहोवा की सेवा करते रहने के लिए एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं। ठीक ऐसा ही प्रेषित पौलुस और रोम के भाई-बहनों ने किया था।—रोमि. 1:11, 12.

17 जब आप उस भविष्य की कल्पना करेंगे जिसका यहोवा ने वादा किया है, तो आप अपनी परेशानियों के बारे में ज़्यादा नहीं सोचेंगे। एक बार पतरस को शायद कुछ इसी तरह की चिंता थी। इसलिए उसने यीशु से पूछा, “देख! हम तो सब कुछ छोड़कर तेरे पीछे हो लिए हैं; फिर हमारे लिए इसमें क्या होगा?” यीशु चाहता था कि पतरस और बाकी चेले उस शानदार भविष्य की कल्पना करें, जो उन्हें मिलनेवाला था। इसलिए उसने जवाब दिया, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब सबकुछ नया किया जाएगा और इंसान का बेटा अपनी महिमा की राजगद्दी पर बैठेगा, तब तुम भी जो मेरे पीछे हो लिए हो, बारह राजगद्दियों पर बैठकर इसराएल के बारह गोत्रों का न्याय करोगे। और जिस किसी ने मेरे नाम की खातिर घरों या भाइयों या बहनों या पिता या माँ या बच्चों को छोड़ा हो या ज़मीनें छोड़ी हों, वह इसका कई गुना पाएगा और हमेशा की ज़िंदगी का वारिस होगा।” (मत्ती 19:27-29) इसलिए पतरस और दूसरे चेले कल्पना कर सके कि वे स्वर्ग में यीशु के साथ राज कर रहे हैं और धरती पर आज्ञा माननेवाले इंसानों को सिद्ध बनने में मदद दे रहे हैं।

18. उस समय की कल्पना करना क्यों अच्छा है, जब यहोवा के वादे पूरे होंगे?

18 हमने देखा कि यहोवा के सेवकों को अपना विश्वास मज़बूत करने में किस बात से मदद मिली। हाबिल ने उस सुनहरे भविष्य की कल्पना की जिसका यहोवा ने वादा किया था। इस वादे पर विश्वास होने की वजह से वह यहोवा को खुश कर पाया। अब्राहम ने उस वक्‍त की कल्पना की जब यहोवा के वे वादे पूरे होंगे जो उसने “वंश” के बारे में किए थे। इस वजह से उसने यहोवा की वह आज्ञा भी मानी, जिसे मानना उसके लिए बहुत मुश्किल था। (उत्प. 3:15) मूसा अपनी नज़र उस इनाम पर लगाए रहा, जिसका यहोवा ने उससे वादा किया था। इससे उसे यहोवा से प्यार करने और उसके वफादार रहने में मदद मिली। (इब्रा. 11:26) जब हम उस समय की कल्पना करते हैं, जब यहोवा के वादे पूरे होंगे, तो हमारा भी विश्वास मज़बूत होता है और उसके लिए हमारा प्यार बढ़ता है। कल्पना करने की हम अपनी काबिलीयत का और कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं? यह हम अगले लेख में देखेंगे।