इस जानकारी को छोड़ दें

सैकेंडरी मैन्यू को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  अक्टूबर 2014

यहोवा के साथ काम करने के सम्मान को अनमोल समझिए!

यहोवा के साथ काम करने के सम्मान को अनमोल समझिए!

“हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं।”—1 कुरिं. 3:9.

1. (क) यहोवा काम के बारे में कैसा महसूस करता है? (ख) यह बात उसे क्या करने के लिए उभारती है?

यहोवा अपने काम से बहुत खुशी पाता है। (भज. 135:6; यूह. 5:17) और वह चाहता है कि स्वर्गदूत और इंसान भी अपने काम से खुशी पाएँ। इसलिए वह उन्हें ऐसा काम सौंपता है, जिससे उन्हें खुशी और संतुष्टि मिले। मिसाल के लिए, यहोवा ने सृष्टि के काम में अपने पहलौठे बेटे को शामिल किया। (कुलुस्सियों 1:15, 16 पढ़िए।) बाइबल हमें बताती है कि यीशु धरती पर आने से पहले स्वर्ग में परमेश्वर के साथ “कुशल कारीगर” के तौर पर काम करता था।—नीति. 8:30, अ न्यू हिंदी ट्रांस्लेशन।

2. हम कैसे जानते हैं कि स्वर्गदूतों के पास हमेशा से ही संतुष्टि-भरा और ज़रूरी काम रहा है?

2 बाइबल की उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य की किताबों में बताया गया है कि यहोवा ने हमेशा स्वर्गदूतों को काम सौंपा है। जब आदम और हव्वा ने पाप किया और उन्हें फिरदौस से बेदखल कर दिया गया, तब परमेश्वर ने स्वर्गदूतों को एक काम सौंपा। उत्पत्ति की किताब बताती है कि परमेश्वर ने “जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्‍त कर दिया।” (उत्प. 3:24) और प्रकाशितवाक्य की किताब बताती है कि यहोवा ने “अपना स्वर्गदूत भेजा ताकि अपने दासों को दिखाए कि बहुत जल्द क्या-क्या होना है।”—प्रका. 22:6.

 इंसानों को सौंपे गए काम

3. जब यीशु धरती पर था, तब वह अपने पिता की मिसाल पर कैसे चला?

3 जब यीशु धरती पर था, तब उसने खुशी-खुशी यहोवा से मिला काम किया। और अपने पिता की मिसाल पर चलकर यीशु ने भी अपने चेलों को ज़रूरी काम सौंपा। उसने अपने चेलों से इस ज़रूरी काम के बारे में ये शब्द कहकर उनमें जोश भर दिया: “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो मुझ पर विश्वास दिखाता है, वह भी वे काम करेगा जो मैं करता हूँ और वह इनसे भी बड़े-बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जा रहा हूँ।” (यूह. 14:12) और अपने चेलों को यह एहसास दिलाने के लिए कि उनका काम कितना ज़रूरी है, उसने कहा: “जिसने मुझे भेजा है उसके काम हमें दिन रहते ही कर लेने चाहिए। वह रात आ रही है जब कोई आदमी काम न कर सकेगा।”—यूह. 9:4.

4-6. (क) हम क्यों शुक्रगुज़ार हैं कि नूह और मूसा ने वे काम किए, जो यहोवा ने उन्हें सौंपे थे? (ख) परमेश्वर इंसानों को जो भी काम देता है, उसे करने से कौन-सी दो बातें पूरी होती हैं?

4 यीशु के धरती पर आने से बहुत पहले, यहोवा ने इंसानों को ऐसे काम सौंपे, जिनसे उन्हें सच्ची खुशी मिलती। हालाँकि आदम और हव्वा ने यहोवा का दिया काम पूरा नहीं किया, लेकिन इतिहास में ऐसे कई लोग थे, जिन्होंने यहोवा से मिले काम को पूरा किया। (उत्प. 1:28) मिसाल के लिए, यहोवा ने नूह को खास हिदायतें दी थीं कि उसे जहाज़ कैसे बनाना है, ताकि वह और उसका परिवार जलप्रलय से बच सके। नूह ने ठीक वैसा ही किया, जैसा यहोवा ने कहा था। आज हम इसलिए ज़िंदा हैं, क्योंकि नूह ने यहोवा की हिदायतों का बारीकी से पालन किया था।—उत्प. 6:14-16, 22; 2 पत. 2:5.

5 यहोवा ने मूसा को बारीकी से हिदायतें दी थीं कि उसे निवासस्थान कैसे बनाना है और याजकपद का इंतज़ाम कैसे करना है। मूसा ने ठीक वैसा ही किया, जैसा यहोवा ने उससे कहा था। (निर्ग. 39:32; 40:12-16) जिस तरह मूसा ने वफादारी से इस काम को पूरा किया, उससे आज भी हमें बहुत फायदा होता है। वह कैसे? जैसा कि प्रेषित पौलुस ने समझाया, निवासस्थान और याजकपद का इंतज़ाम “आनेवाली अच्छी बातों” को दर्शाते थे।—इब्रा. 9:1-5, 9; 10:1.

6 जैसे-जैसे यहोवा का मकसद पूरा होता है, वह अपने सेवकों को अलग-अलग काम सौंपता है। भले ही उसके सेवकों को सौंपा गया काम बदलता रहे, लेकिन उन्हें जो भी काम दिए गए हैं, उनसे हमेशा यहोवा की महिमा हुई है और इंसानों को फायदा हुआ है। यही बात यीशु को सौंपे गए उन कामों के बारे में भी सच है, जो उसने धरती पर आने से पहले और धरती पर रहते वक्‍त किए थे। (यूह. 4:34; 17:4) आज जब हम यहोवा से मिला काम करते हैं, तो उससे उसकी महिमा होती है। (मत्ती 5:16; 1 कुरिंथियों 15:58 पढ़िए।) हम ऐसा क्यों कह सकते हैं?

यहोवा की सेवा में मिली ज़िम्मेदारियों की तरफ सही नज़रिया बनाए रखिए

7, 8. (क) वे कौन-कौन से काम हैं, जिन्हें करने का सम्मान आज मसीहियों को मिला है? (ख) हमें यहोवा के निर्देशों की तरफ कैसा रवैया दिखाना चाहिए?

7 यह एक सम्मान की बात है कि यहोवा ने असिद्ध इंसानों को उसके सहकर्मी के नाते सेवा करने का न्यौता दिया है। (1 कुरिं. 3:9) नूह और मूसा की तरह, कुछ मसीहियों को निर्माण काम करने का सम्मान मिला है। कुछ मसीही सम्मेलन भवन, राज-घर और शाखा दफ्तर बनाने के काम में हिस्सा लेते हैं। आप चाहे अपने इलाके का राज-घर दोबारा बनाने में हिस्सा ले रहे हों या न्यू यॉर्क के वॉरविक में विश्व मुख्यालय बनाने में, अपनी ज़िम्मेदारी को एक सम्मान समझिए! (लेख की शुरूआत में कंप्यूटर की मदद से बनायी गयी तसवीर देखिए।) यह एक पवित्र सेवा है। इस निर्माण काम में भले ही सिर्फ कुछ मसीही हिस्सा ले रहे हों, लेकिन सभी मसीही एक आध्यात्मिक निर्माण काम में हिस्सा ले रहे हैं, और वह है प्रचार काम। इस काम से यहोवा की महिमा होती है और इंसानों को फायदा होता है। (प्रेषि. 13:47-49) परमेश्वर का संगठन इस काम को अच्छी तरह पूरा करने के लिए ज़रूरी निर्देश देता है। इसका मतलब है कि कभी-कभी हमें परमेश्वर की सेवा में शायद नयी ज़िम्मेदारी मिले।

8 यहोवा के वफादार सेवक हमेशा से उसके दिए निर्देश  मानने के लिए तैयार रहे हैं। (इब्रानियों 13:7, 17 पढ़िए।) हमें एक नयी ज़िम्मेदारी क्यों मिली है, इसके पीछे हो सकता है हमें सारी वजह समझ में न आएँ। मगर हम जानते हैं कि हमें जो भी ज़िम्मेदारियाँ मिलती हैं या संगठन में जो भी बदलाव किए जाते हैं, वे यहोवा की तरफ से होते हैं और इन्हें मानने से हमेशा अच्छे नतीजे निकलते हैं। इसलिए हम इस बदलाव या ज़िम्मेदारी को खुशी-खुशी कबूल करते हैं।

9. प्राचीन मंडली के लिए क्या अच्छी मिसाल रखते हैं?

9 प्राचीन जिस तरह से मंडली की अगुवाई करते हैं, उससे वे दिखाते हैं कि उनमें यहोवा की मरज़ी पूरी करने की ज़बरदस्त इच्छा है। (2 कुरिं. 1:24; 1 थिस्स. 5:12, 13) प्राचीन कड़ी मेहनत करने और हिदायतें मानने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वे प्रचार के नए-नए तरीके जल्द-से-जल्द सीखने के लिए भी मेहनत करते हैं। हालाँकि कुछ प्राचीन शायद शुरू-शुरू में टेलीफोन गवाही, बंदरगाह गवाही या सरेआम गवाही जैसे नए तरीकों का इंतज़ाम करने से हिचकिचाए हों, मगर जब उन्होंने हिदायतें मानीं, तो उन्हें इसके अच्छे नतीजे मिले। मिसाल के लिए, जर्मनी में चार पायनियरों ने एक ऐसे बिज़नेस इलाके में प्रचार किया, जहाँ काफी समय से प्रचार नहीं किया गया था। उनमें से मिखाएल नाम के एक पायनियर ने कहा कि उन्हें शुरू-शुरू में बहुत डर लग रहा था, क्योंकि उन्होंने काफी सालों से प्रचार का यह तरीका नहीं आज़माया था। वह कहता है: “यहोवा ने हमारी हालत ज़रूर देखी होगी। हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि उसकी आशीष से उस सुबह हमारा प्रचार काम इतना बढ़िया रहा कि मैं बता नहीं सकता। हम कितने शुक्रगुज़ार थे कि हमने हमारी राज-सेवा में दिए निर्देशों को माना और हम सहारे के लिए यहोवा पर निर्भर रहे!” क्या आप अपने इलाके में प्रचार के नए तरीकों को आज़माने के लिए बेताब रहते हैं?

10. हाल के सालों में संगठन में क्या बदलाव किए गए हैं?

10 कभी-कभी बेथेल में कुछ बदलाव किए जाते हैं। मिसाल के लिए, हाल के सालों में, कुछ छोटे शाखा दफ्तरों को बंद कर दिया गया है और अब उनका काम बड़े शाखा दफ्तर सँभालते हैं। इसका असर उन भाई-बहनों पर पड़ा है, जो इन छोटे शाखा दफ्तरों में सेवा करते थे। हालाँकि इन बदलावों की वजह से उन्हें कुछ फेरबदल करने पड़े, लेकिन आगे चलकर उन्हें इसके फायदे पता चले। (सभो. 7:8) इन बदलावों का साथ देनेवाले भाई-बहनों को इस बात की खुशी है कि वे यहोवा के लोगों के आधुनिक इतिहास का एक हिस्सा हैं!

11-13. संगठन में हुए बदलावों की वजह से कुछ भाई-बहनों ने किन चुनौतियों का सामना किया है?

11 इन भाई-बहनों से हम कुछ ज़रूरी सबक सीख सकते हैं। इनमें से कई भाई-बहनों ने इन शाखा दफ्तरों में सदियों से सेवा की थी। मिसाल के लिए, कोस्टारिका के छोटे-से बेथेल परिवार में सेवा कर रहे रोखाल्यो और उसकी पत्नी को मैक्सिको के बहुत बड़े बेथेल परिवार में जाकर सेवा करने के लिए कहा गया। रोखाल्यो कहता है: “परिवार और दोस्तों को अलविदा कहना बहुत ही मुश्किल था।” ख्वान नाम का एक और भाई, जिसे मैक्सिको जाकर सेवा करने के लिए कहा गया, कहता है कि यह बिलकुल ऐसा है मानो एक नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करना। वह बताता है: “आपको नए दोस्त बनाने होंगे, नए रीति-रिवाज़ों को अपनाना होगा और अलग तरीके से सोचना होगा।”

12 यूरोप के कुछ शाखा दफ्तरों में सेवा करनेवाले जिन बेथेल सदस्यों को जर्मनी में जाकर सेवा करने के लिए कहा गया, उन्हें भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहाड़ों और वादियों के बीच रहनेवाले लोगों से अगर इन खूबसूरत नज़ारों को पीछे छोड़ने के लिए कहा जाए, तो यह उनके लिए आसान नहीं होता। स्विट्ज़रलैंड के भाई-बहनों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब उन्हें विशाल ऐल्प्स पहाड़ों से भरे खूबसूरत नज़ारों को पीछे छोड़ने के लिए कहा गया। और जो ऑस्ट्रिया छोड़कर जर्मनी गए, उन्हें अपने छोटे-से बेथेल परिवार की बहुत याद आती है।

13 ये भाई-बहन जो दूसरे देश के शाखा दफ्तर में सेवा करने गए, उन्हें कई बदलाव करने पड़े। उनके लिए सब कुछ नया था, जैसे नया घर, नयी जगह, नया काम और नए भाई-बहन, जिनके साथ उन्हें काम करना था। उनके लिए मंडली और प्रचार का इलाका भी बिलकुल नया था। यहाँ तक कि कुछ भाइयों को नयी भाषा भी सीखनी पड़ी। एक-साथ इतने सारे बदलाव करना आसान नहीं होता, लेकिन बेथेल में सेवा करनेवाले कई भाई-बहनों ने खुशी-खुशी ऐसा  किया है। क्यों? आइए उनमें से कुछ भाई-बहनों से ही इस सवाल का जवाब जानें।

14, 15. (क) कई भाई-बहनों ने कैसे दिखाया है कि वे यहोवा के साथ काम करना एक सम्मान की बात समझते हैं, फिर चाहे वह कोई भी काम हो? (ख) वे हमारे लिए कैसे एक बढ़िया मिसाल हैं?

14 ग्रेटल कहती है: “मैंने यह न्यौता कबूल किया, क्योंकि ऐसा करके मैं यहोवा को दिखा सकती थी कि उसके लिए मेरा प्यार किसी एक देश, इमारत या ज़िम्मेदारी तक सीमित नहीं है।” डाईस्का कहती है: “जब मुझे एहसास हुआ कि यह न्यौता यहोवा की तरफ से है, तो मैंने इसे खुशी-खुशी कबूल किया।” आंड्रे और गाब्रीयेला भी इस बात से सहमत हैं। वे कहते हैं: “यह हमारे लिए अपनी ख्वाहिशों को दरकिनार कर यहोवा की सेवा करने का एक और मौका था।” उनका मानना है कि जब यहोवा का संगठन कुछ बदलाव करता है, तो उन बदलावों का विरोध करने के बजाय, बेहतर होगा कि हम उन्हें खुशी-खुशी कबूल करें।

यहोवा के साथ काम करना हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है!

15 जब कुछ शाखा दफ्तरों का काम दूसरे शाखा-दफ्तरों को सौंपा जाता है, तो कुछ बेथेल सदस्यों को पायनियरों के तौर पर सेवा करने के लिए भेजा जाता है। जब डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन के शाखा दफ्तरों को मिलाकर स्कैन्डिनेविया शाखा दफ्तर बना दिया गया, तो कई बेथेल सदस्यों के साथ ऐसा ही हुआ। उनमें से एक जोड़ा था, फ्लॉरीयन और आन्या। वे कहते हैं: “हम इस नयी ज़िम्मेदारी को एक दिलचस्प चुनौती मानते हैं। यहोवा हमें उसकी सेवा में इस्तेमाल कर रहा है, वही हमारे लिए सबसे बड़े सम्मान की बात है, फिर चाहे हम कहीं पर भी सेवा करें। हम सच में कह सकते हैं कि हमें ढेरों आशीषें मिली हैं!” हालाँकि हममें से ज़्यादातर लोगों को अपनी ज़िंदगी में शायद कभी इस तरह के फेरबदल न करने पड़ें, लेकिन क्या हम खुशी-खुशी त्याग की भावना दिखानेवाले इन भाई-बहनों की तरह राज को अपनी ज़िंदगी में पहली जगह दे सकते हैं? (यशा. 6:8) हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा उन लोगों को आशीष ज़रूर देगा, जो उसके साथ काम करना एक सम्मान की बात समझते हैं, फिर चाहे वे कहीं पर भी उसकी सेवा करें।

यहोवा के साथ काम करने के अपने सम्मान को बनाए रखिए!

16. (क) गलातियों 6:4 हमें क्या करने का बढ़ावा देता है? (ख) हमें कौन-सा सबसे बड़ा सम्मान मिला है?

16 असिद्ध होने की वजह से हम अकसर खुद की तुलना दूसरों से करते हैं। लेकिन ऐसा करने के बजाय, परमेश्वर का वचन हमें बढ़ावा देता है कि हम इस बात पर ध्यान दें  कि हम खुद क्या कर सकते हैं। (गलातियों 6:4 पढ़िए।) हममें से हर कोई प्राचीन, पायनियर, मिशनरी या बेथेल का सदस्य नहीं बन सकता। बेशक, ये यहोवा की सेवा में मिलनेवाले बढ़िया सम्मान हैं, लेकिन एक सबसे बड़ा सम्मान जो हम सभी को मिला है, वह है, यहोवा के सहकर्मी के नाते खुशखबरी के प्रचारक होना। आइए हम इस सम्मान की कदर करें!

17. (क) इस दुनिया में हम शायद क्या न कर पाएँ? (ख) हमें क्यों निराश नहीं होना चाहिए?

17 इस दुनिया में हो सकता है हम यहोवा की सेवा उस तरह से न कर पाएँ, जैसा हम चाहते हैं। शायद हमारे हालात ऐसे हों, जिन्हें बदलना हमारे बस में नहीं है, जैसे परिवार की ज़िम्मेदारियाँ या खराब सेहत। लेकिन हमें निराश नहीं होना चाहिए। हमें चाहे कोई भी परेशानी क्यों न हो, हम यहोवा के नाम और उसके राज के बारे में हमेशा प्रचार कर सकते हैं। जो बात सबसे ज़्यादा मायने रखती है, वह यह है कि हम यहोवा के लिए जितना कर सकते हैं, उतना करें और उन भाई-बहनों के लिए प्रार्थना करें, जो सेवा में हमसे ज़्यादा कर पा रहे हैं। याद रखिए, हर व्यक्‍ति जो यहोवा के नाम की महिमा करता है, वह उसकी नज़रों में अनमोल है!

18. (क) हम भविष्य में मिलनेवाली किस आशीष की आस लगाए हुए हैं? (ख) लेकिन आज भी हमारे पास कौन-सा बढ़िया सम्मान है?

18 हालाँकि हम असिद्ध और कमज़ोर हैं, फिर भी यहोवा को हमें उसके सहकर्मी के तौर पर इस्तेमाल करने में खुशी होती है। इन आखिरी दिनों में हमारे परमेश्वर के साथ काम करना क्या ही बढ़िया सम्मान है! हम भविष्य में मिलनेवाली “असली ज़िंदगी” की ओर आस लगाए हुए हैं, जहाँ हम उन तरीकों से ज़िंदगी का लुत्फ उठा पाएँगे, जिन तरीकों से आज लुत्फ उठा पाना मुमकिन नहीं है। जल्द ही, यहोवा अपनी नयी दुनिया में हमें खुशी और शांति के माहौल में हमेशा की ज़िंदगी देगा।—1 तीमु. 6:18, 19.

क्या आप यहोवा की सेवा करने के सम्मान को अनमोल समझते हैं? (पैराग्राफ 16-18 देखिए)

19. यहोवा हमसे किस शानदार भविष्य का वादा करता है?

19 परमेश्वर की वादा की गयी नयी दुनिया जल्द आनेवाली है। ज़रा उन शब्दों के बारे में सोचिए, जो मूसा ने इसराएलियों से उनके वादा-ए-मुल्क में कदम रखने से ठीक पहले कहे थे: “यहोवा तेरी भलाई के लिये तेरे सब कामों में . . . तेरी बढ़ती करेगा।” (व्यव. 30:9) हर-मगिदोन के बाद, अपने वादे के मुताबिक यहोवा उन्हें यह धरती देगा, जो उसके साथ काम करते आए हैं। उसके बाद हमारा नया काम होगा, इस धरती को एक खूबसूरत फिरदौस बनाना!