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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  सितंबर 2014

क्या आपको यकीन है कि आपके पास सच्चाई है? क्यों?

क्या आपको यकीन है कि आपके पास सच्चाई है? क्यों?

“तुम परखकर खुद के लिए मालूम करते रहो कि परमेश्वर की भली, उसे भानेवाली और उसकी सिद्ध इच्छा क्या है।”—रोमि. 12:2.

1. युद्धों के दौरान, कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धर्म-गुरुओं ने क्या किया है?

क्या यह परमेश्वर की इच्छा है कि सच्चे मसीही युद्ध लड़ें और दूसरे देश के लोगों की जान लें? पिछले 100 सालों में, खुद को मसीही कहनेवाले कई लोगों ने ऐसा ही किया है। उन्होंने युद्ध में एक-दूसरे की जान ली है। कैथोलिक लोगों ने कैथोलिक का खून बहाया है और प्रोटेस्टेंट लोगों ने प्रोटेस्टेंट का। इतना ही नहीं, कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धर्म-गुरुओं ने तो सेनाओं और हथियारों पर भी आशीष दी है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, खुद को मसीही कहनेवाले लोगों ने आपस में ही लड़-मरकर खून की नदियाँ बहा दीं।

2, 3. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद यहोवा के साक्षियों ने क्या किया? और क्यों?

2 मगर उस विश्व युद्ध के दौरान, यहोवा के साक्षियों ने क्या किया? उन्होंने किसी का पक्ष नहीं लिया। वे राष्ट्रों के बीच हुए उस युद्ध में बिलकुल भी शामिल नहीं हुए। क्यों? क्योंकि वे यीशु की शिक्षाओं पर खरे उतरना चाहते थे और यीशु की तरह दूसरों को प्यार दिखाना चाहते थे। यीशु ने कहा था: “अगर तुम्हारे बीच प्यार होगा, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो।” (यूह. 13:35) साक्षियों ने उन सिद्धांतों को भी याद रखा, जो पौलुस ने कुरिंथियों को लिखे अपने खत में कहे थे और उन्हें खुद अपने हालात पर लागू किया।—2 कुरिंथियों 10:3, 4 पढ़िए।

 3 सच्चे मसीही बाइबल के स्तरों पर चलते हैं, इसलिए उनका ज़मीर उन्हें युद्ध में हिस्सा लेने या युद्ध सीखने की इजाज़त नहीं देता। यहोवा के साक्षी सच्चे मसीहियों की तरह जीने की कोशिश करते हैं, इसलिए बीते समय में इनमें से हज़ारों साक्षियों पर ज़ुल्म ढाया गया। जवान-बुज़ुर्ग, स्त्री-पुरुष, सभी को जेलों और यातना शिविरों में डाला गया, जहाँ उनसे कोल्हू के बैल की तरह काम करवाया गया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब जर्मनी में नात्ज़ी सरकार हुकूमत कर रही थी, तब कई साक्षियों का तो कत्ल भी कर दिया गया। यूरोप में ज़ुल्मों के दौरान, यहोवा के साक्षी राज की खुशखबरी का प्रचार करने की अपनी ज़िम्मेदारी कभी नहीं भूले। जहाँ तक उनसे हो सका वे प्रचार करते रहे, तब भी जब उन्हें जेलों और यातना शिविरों में डाला गया और जब उन्हें देशनिकाला दिया गया। * सालों बाद, 1994 में साक्षियों ने रवांडा में हुए कत्लेआम में भी भाग नहीं लिया। इसके अलावा, वे उस युद्ध में भी निष्पक्ष बने रहे, जिसने भूतपूर्व युगोस्लाविया का बँटवारा कर दिया।

4. जब लोग देखते हैं कि यहोवा के साक्षी निष्पक्ष रहते हैं, तो वे अकसर क्या कहते हैं?

4 यहोवा के साक्षी युद्धों के दौरान निष्पक्ष बने रहे, इसलिए दुनिया-भर में कई लोग कहते हैं कि साक्षी सचमुच में परमेश्वर और अपने पड़ोसियों से प्यार करते हैं और वे सच्चे मसीही हैं। लोग और किन वजहों से मानते हैं कि यहोवा के साक्षी सच्चे मसीही हैं?

इतिहास का सबसे बड़ा शिक्षा का काम

5. यीशु के चेलों को कौन-सा बदलाव अपनाना था?

5 यीशु ने लोगों को यह साफ बताया था कि परमेश्वर के राज की खुशखबरी का प्रचार करना, धरती पर सबसे ज़रूरी काम है। अपनी सेवा शुरू करने के कुछ ही वक्‍त बाद उसने 12 चेलों को चुना, ताकि वे प्रचार का यह काम शुरू कर सकें, जो आगे चलकर पूरी धरती पर किया जाता। इसके बाद, यीशु ने और 70 चेलों को तालीम दी। (लूका 6:13; 10:1) यीशु ने दूसरों तक खुशखबरी पहुँचाने के लिए उन्हें तैयार किया। उसने पहले तो उन्हें हिदायत दी कि वे जाकर दूसरे यहूदियों को सिखाएँ, लेकिन बाद में उसने कहा कि वे गैर-यहूदियों को भी खुशखबरी का प्रचार करना शुरू करें। यहूदी चेलों के लिए गैर-यहूदी लोगों को प्रचार करना एक बहुत बड़ा बदलाव था!—प्रेषि. 1:8.

6. पतरस किस बात से समझ गया कि यहोवा किसी एक जाति को दूसरी जाति से बेहतर नहीं समझता?

6 सबसे पहला खतनारहित गैर-यहूदी जो मसीही बना, वह था कुरनेलियुस। यहोवा ने प्रेषित पतरस को कुरनेलियुस के घर भेजा, ताकि वह जाकर उसे प्रचार करे। इस बात से पतरस समझ गया कि परमेश्वर किसी एक जाति को दूसरी जाति से बेहतर नहीं समझता। यह यहोवा की मरज़ी थी कि सब राष्ट्रों के लोग सच्चाई सुनें और उसे कबूल करें। इसके बाद, कुरनेलियुस और उसके परिवार ने बपतिस्मा ले लिया। (प्रेषि. 10:9-48) उस दिन से पतरस और बाकी चेलों ने पूरी दुनिया को प्रचार करना शुरू कर दिया।

7, 8. लोगों तक खुशखबरी पहुँचाने के लिए यहोवा के साक्षियों ने क्या किया है? (लेख की शुरूआत में दी तसवीर देखिए।)

7 आज यहोवा के संगठन में अगुवाई लेनेवाले भाई जोश के साथ दुनिया-भर में खुशखबरी का प्रचार करने और सिखाने के काम का इंतज़ाम कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। दुनिया-भर में अब तकरीबन 80 लाख यहोवा के साक्षी हैं। वे जोश के साथ 600 से भी ज़्यादा भाषाओं में प्रचार कर रहे हैं, और दिन-ब-दिन यह गिनती बढ़ती ही जा रही है। वे घर-घर जाकर और सड़क पर गवाही देते हैं। गवाही देते वक्‍त आने-जानेवाले लोगों को कई भाषाओं में साहित्य पेश करने के लिए वे कभी-कभी टेबल या कार्ट का भी इस्तेमाल करते हैं। लोग यहोवा के साक्षियों को आसानी से पहचान सकते हैं, क्योंकि सिर्फ वे ही हैं जो इन सभी तरीकों से प्रचार करते हैं।

8 यहोवा के संगठन ने 2,900 से भी ज़्यादा भाई-बहनों को बाइबल और बाइबल साहित्यों का अनुवाद करने की तालीम दी है। ये अनुवादक सिर्फ जानी-मानी भाषाओं में ही नहीं, बल्कि सैकड़ों ऐसी भाषाओं में भी साहित्य का अनुवाद करते हैं, जो इतनी मशहूर नहीं हैं लेकिन जिन्हें लाखों लोग बोलते हैं। मिसाल के लिए, स्पेन में लाखों लोग कैटलोनियाई भाषा बोलते हैं। हाल के कुछ सालों से वेलेंशिया  और आलिकान्टे शहरों में, बैलीआरिक द्वीपों में, यहाँ तक कि अंडोर्रा देश में भी इस भाषा का इस्तेमाल करनेवाले लोगों की गिनती में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसलिए यहोवा के साक्षी अब कैटलोनियाई भाषा में भी बाइबल साहित्य का अनुवाद करते हैं। यहोवा के साक्षियों के अनुवाद काम की वजह से, वहाँ पर ऐसी भाषा में सभाएँ चलायी जाती हैं और साहित्य उपलब्ध हैं, जो कैटलोनियाई भाषा बोलनेवालों के दिल को छू जाती है।

9, 10. कौन-से उदाहरण दिखाते हैं कि यहोवा का संगठन चाहता है कि सब लोग सच्चाई सीखें?

9 बाइबल साहित्य अनुवाद करने और लोगों को उनकी अपनी भाषा में सिखाने का काम दुनिया-भर में किया जा रहा है। मिसाल के लिए, मैक्सिको में ज़्यादातर लोग स्पैनिश भाषा बोलते हैं। लेकिन बहुत-से लोग ऐसे भी हैं, जो घर में बचपन से ही दूसरी भाषाएँ बोलते आए हैं। इनमें से एक भाषा है, माया। माया भाषा के अनुवादकों को देश के उस इलाके में जाकर बसने के लिए कहा गया, जहाँ माया भाषा बोली जाती है। अब क्योंकि अनुवादक हर दिन माया भाषा बोलते और सुनते हैं, इसलिए इस भाषा में साहित्यों का इस तरह से अनुवाद किया जा रहा है कि लोग अब इसे आसानी से समझ सकते हैं। एक और उदाहरण है नेपाल का। इस देश में करीब 120 अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। नेपाल की जनसंख्या 2 करोड़ 90 लाख से ज़्यादा है। उनमें से 1 करोड़ से ज़्यादा लोग नेपाली भाषा बोलते हैं, जो उनकी मातृभाषा है। कई ऐसे भी हैं जिनकी मातृभाषा नेपाली नहीं है, लेकिन स्कूलों-दफ्तरों में वे नेपाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हमारे अनुवादक नेपाली में भी बाइबल साहित्यों का अनुवाद करते हैं।

10 आज बहुत-सी भाषाओं में अनुवाद का काम किया जा रहा है, जो दिखाता है कि यहोवा का संगठन दुनिया-भर में खुशखबरी का प्रचार करने की अपनी ज़िम्मेदारी को कितनी गंभीरता से लेता है। यहोवा के साक्षियों ने लाखों की तादाद में ट्रैक्ट, ब्रोशर और पत्रिकाएँ बाँटी हैं। वे ये साहित्य बेचते नहीं हैं। इसके बजाय, वे इस काम को अपनी इच्छा से दिए गए दान से चलाते हैं। वे यीशु की इस हिदायत को मानते हैं: “तुमने मुफ्त पाया है, मुफ्त दो।”—मत्ती 10:8.

अनुवाद टीम लो जर्मन भाषा में साहित्य का अनुवाद करते हुए (पैराग्राफ 10 देखिए)

लो जर्मन भाषा के साहित्य परागुए में इस्तेमाल किए जाते हैं (लेख की शुरूआत में दी तसवीर भी देखिए)

11, 12. हमें दुनिया-भर में प्रचार और सिखाने का काम करते देखकर कई लोग क्या कहते हैं?

11 यहोवा के साक्षियों के पास सच्चाई है इस बात पर उन्हें इतना यकीन है कि सब राष्ट्रों और जातियों के लोगों को प्रचार करने के लिए वे निजी तौर पर बहुत-से त्याग करते हैं। जैसे, कई साक्षियों ने अपनी ज़िंदगी को सादा बनाया है, एक नयी भाषा सीखी है और एक नयी संस्कृति के हिसाब से खुद को ढाला है। हमें दुनिया-भर में प्रचार और सिखाने का काम करते देखकर कई लोग कहते हैं कि यहोवा के साक्षी यीशु मसीह के सच्चे चेले हैं।

 12 साक्षी यह सब इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें यकीन है कि उन्हें सच्चाई मिल गयी है। लेकिन हमारे भाई-बहनों को इसके अलावा और किस बात ने यकीन दिलाया है कि उनके पास सच्चाई है?—रोमियों 14:17, 18 पढ़िए।

साक्षी क्यों यकीन करते हैं कि उनके पास सच्चाई है

13. साक्षी किस तरह संगठन को शुद्ध बनाए रखते हैं?

13 हमारे भाई-बहन इस बात की कई अलग-अलग वजह बताते हैं कि क्यों उन्हें यकीन है कि उनके पास सच्चाई है। लंबे समय से यहोवा की सेवा कर रहे एक भाई ने कहा: “यहोवा के संगठन को नैतिक रूप से शुद्ध और बेदाग बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाती है, फिर चाहे इसके लिए किसी को भी सलाह या ताड़ना क्यों न दी जाए।” यहोवा के लोग इतना ऊँचा स्तर कैसे बनाए रख पाते हैं? परमेश्वर बाइबल में जो कहता है, उसे मानने और यीशु और उसके चेलों की मिसाल पर चलने के लिए हरेक साक्षी अपनी तरफ से भरसक कोशिश करता है। बहुत ही कम साक्षी ऐसे हैं, जिन्होंने परमेश्वर के ठहराए सही-गलत के स्तरों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। इसकी वजह से बाइबल की हिदायत मानते हुए उनका बहिष्कार कर दिया गया है, यानी उन्हें मंडली से निकाल दिया गया है। लेकिन ज़्यादातर यहोवा के साक्षी परमेश्वर के स्तरों के मुताबिक शुद्ध ज़िंदगी जीते आए हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो सच्चाई सीखने से पहले ऐसे काम करते थे, जो परमेश्वर को पसंद नहीं थे, लेकिन फिर उन्होंने बदलाव किए और अब वे परमेश्वर के स्तरों के मुताबिक ज़िंदगी जी रहे हैं।—1 कुरिंथियों 6:9-11 पढ़िए।

14. (क) जिन लोगों का मंडली से बहिष्कार कर दिया गया था, उनमें से ज़्यादातर ने क्या किया है? (ख) इसका क्या नतीजा हुआ है?

14 जिन लोगों का मंडली से बहिष्कार कर दिया गया था, उनके बारे में क्या? खुशी की बात है कि उनमें से हज़ारों लोगों ने सच्चा पश्‍चाताप किया है और वे मंडली में लौट आए हैं। (2 कुरिंथियों 2:6-8 पढ़िए।) नतीजा, बाइबल के ऊँचे नैतिक स्तरों पर चलने की वजह से मंडलियाँ शुद्ध बनी हुई हैं। इससे मसीहियों को यकीन हो गया है कि परमेश्वर की मंज़ूरी उनके संगठन पर है। कई चर्च अपने सदस्यों को जो चाहे करने की इजाज़त देते हैं, लेकिन साक्षी यहोवा के स्तरों के साथ कोई समझौता नहीं करते। इस बात से कई लोगों को यकीन हो गया है कि यहोवा के साक्षियों के पास ही सच्चाई है।

15. किस बात ने एक भाई को यकीन दिलाया है कि उसके पास सच्चाई है?

15 दूसरे साक्षियों को क्यों यकीन है कि उनके पास सच्चाई है? 54 साल का एक भाई कहता है कि जब वह जवान था, तब से वह यह मानता आया है कि उसका विश्वास तीन ज़रूरी शिक्षाओं पर टिका हुआ है: (1) कि परमेश्वर वजूद में है, (2) कि बाइबल उसकी प्रेरणा से लिखी गयी है, और (3) कि वह आज यहोवा के साक्षियों की मसीही मंडली का इस्तेमाल कर रहा है और उस पर आशीष दे रहा है। भाई कहता है कि सालों के दौरान जैसे-जैसे उसने अध्ययन किया है, उसने हमेशा इन तीन शिक्षाओं को परखने की कोशिश की है और खुद से पूछा है कि क्या ये शिक्षाएँ वाकई ठोस बुनियाद पर आधारित हैं। साल-दर-साल, जैसे-जैसे हर शिक्षा के सच होने के सबूत बढ़ते गए हैं, वैसे-वैसे इस भाई का विश्वास मज़बूत होता गया है और इस बात पर उसे और भी यकीन होता गया है कि वाकई उसके पास सच्चाई है।

16. एक बहन को क्यों इस बात का यकीन है कि उसके पास सच्चाई है?

 16 न्यू यॉर्क में यहोवा के साक्षियों के विश्व मुख्यालय में सेवा कर रही एक शादीशुदा बहन बताती है कि किस बात ने उसे यकीन दिलाया है कि उसके पास सच्चाई है। वह कहती है कि सिर्फ यहोवा का संगठन ही यहोवा के नाम का ऐलान करता है, जो बाइबल में करीब 7,000 बार दर्ज़ है। बहन को 2 इतिहास 16:9 में लिखी इस बात से भी हौसला मिलता है: “यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए।” बहन कहती है: “सच्चाई ने मुझे सिखाया है कि कैसे मैं निष्कपट रह सकती हूँ, ताकि यहोवा मेरी सहायता के लिए बेझिझक मुझे अपना सामर्थ दिखा सके। यहोवा के साथ मेरा रिश्ता मेरे लिए सबसे ज़्यादा अनमोल है। साथ ही, परमेश्वर को करीबी से जानने में मदद देने के लिए यीशु ने जो भूमिका अदा की है, उसकी भी मैं कदर करती हूँ, क्योंकि परमेश्वर के बारे में सच्चाई ही है जो मुझे सँभाले रखती है।”

17. नास्तिक रह चुके एक भाई को किस बात का यकीन है? और क्यों?

17 एक भाई, जो पहले नास्तिक था, कहता है: “सृष्टि मुझे इस बात का यकीन दिलाती है कि परमेश्वर चाहता है कि इंसान ज़िंदगी का लुत्फ उठाए और इसलिए वह दुख-तकलीफों को हमेशा तक नहीं रहने देगा। इसके अलावा, जैसे-जैसे यह दुनिया बद-से-बदतर होती जा रही है, यहोवा के लोग और भी बढ़-चढ़कर विश्वास, जोश और प्यार दिखा रहे हैं। आज के ज़माने का यह चमत्कार सिर्फ यहोवा की पवित्र शक्‍ति की बदौलत ही मुमकिन है।”—1 पतरस 4:1-4 पढ़िए।

18. (क) दो भाइयों को क्यों यकीन है कि उनके पास सच्चाई है? (ख) आप उनकी कही बात के बारे में कैसा महसूस करते हैं?

18 एक और भाई, जो लंबे समय से सच्चाई में है, कुछ वजह बताता है कि क्यों वह यकीन करता है कि उसके पास सच्चाई है: “सालों से अध्ययन करने की वजह से मुझे यकीन हो गया है कि साक्षियों ने पहली सदी के मसीहियों के रखे नमूने पर फिर से चलने के लिए कड़ी मेहनत की है। अलग-अलग देशों का दौरा करते वक्‍त मैंने खुद देखा है कि दुनिया-भर में यहोवा के साक्षियों के बीच कितनी एकता है। बाइबल की सच्चाई ने मुझे संतुष्टि और खुशी दी है।” जब 60 से ज़्यादा साल के एक और भाई से पूछा गया कि क्यों उन्हें यकीन है कि उनके पास सच्चाई है, तो उन्होंने अपने जवाब में यीशु मसीह पर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा: “हमने बड़े ध्यान से यीशु की ज़िंदगी और प्रचार से जुड़ी उसकी सेवा के बारे में अध्ययन किया है, जिससे हमें उसकी मिसाल की कदर करने में मदद मिली है। मसीह यीशु के ज़रिए परमेश्वर के करीब आने के लिए हमने अपने जीने के तरीके में बदलाव किए हैं। हमने इस बात को समझा है कि मसीह के फिरौती बलिदान के ज़रिए ही हमें उद्धार मिल सकता है। और हम जानते हैं कि उसे दोबारा जी उठाया गया था। हमारे पास इस बात के चश्मदीद गवाहों के भरोसेमंद बयान मौजूद हैं।”—1 कुरिंथियों 15:3-8 पढ़िए।

दूसरों को सच्चाई के बारे में बताइए

19, 20. (क) रोम की मंडली को लिखी अपनी चिट्ठी में पौलुस ने किस ज़िम्मेदारी का ज़िक्र किया? (ख) यहोवा के सभी सेवकों का क्या लक्ष्य होना चाहिए?

19 सच्चे मसीही वाकई लोगों से प्यार करते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम दूसरों को उस सच्चाई के बारे में बताएँ, जो हमने सीखी है। पौलुस ने रोम की मंडली से कहा कि यीशु के सच्चे चेलों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे प्रचार करें। उसने लिखा: “अगर तू सब लोगों के सामने ‘अपने मुँह के इस संदेश’ का ऐलान करे कि यीशु ही प्रभु है और अपने दिल में यह विश्वास रखे कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जी उठाया है, तो तू उद्धार पाएगा। इसलिए कि एक इंसान परमेश्वर की नज़र में नेक ठहरने के लिए दिल से विश्वास करता है, मगर उद्धार पाने के लिए सब लोगों के सामने मुँह से अपने विश्वास का ऐलान करता है।”—रोमि. 10:9, 10.

20 यहोवा के साक्षियों को पूरा यकीन है कि उनके पास सच्चाई है। वे यह भी जानते हैं कि दूसरों को परमेश्वर के राज की खुशखबरी के बारे में सिखाना एक सम्मान की बात है। इसलिए अपना लक्ष्य बना लीजिए कि आप दूसरों को न सिर्फ बाइबल से सिखाएँगे, बल्कि उन्हें अपने जीने के तरीके से भी दिखाएँगे कि आपको पूरा यकीन है कि आपके पास सच्चाई है।

^ पैरा. 3 जेहोवाज़ विटनेसेज़—प्रोक्लेमर्स ऑफ गॉड्स किंगडम किताब के पेज 191-198, 448-454 देखिए।