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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  जून 2014

तलाकशुदा भाई-बहनों की मदद कीजिए—कैसे?

तलाकशुदा भाई-बहनों की मदद कीजिए—कैसे?

हो सकता है आप ऐसे किसी व्यक्‍ति को या शायद ऐसे कई लोगों को जानते हों, जिनका तलाक हो चुका है। इसकी वजह यह है कि आज तलाक बहुत ही आम हो गया है। मिसाल के लिए, पोलैंड में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, उन 30 साल की उम्र के लोगों के तलाक लेने की गुंजाइश ज़्यादा होती है, जिनकी शादी को 3 से 6 साल हो चुके हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि तलाक सिर्फ 30 साल की उम्र के लोग ही लेते हैं।

दरअसल, स्पेन का ‘इंस्टीट्यूट फॉर फैमिली पॉलिसी’ बताता है कि “आँकड़े दिखाते हैं कि [यूरोप में] जितने लोग शादी करते हैं, उनमें से आधे जोड़ों का तलाक तय है।” दूसरे विकसित देशों में भी यही हाल है।

जब निराश करनेवाली भावनाएँ आ घेरती हैं

इतने आम होते जा रहे इस हालात के पीछे आखिर वजह क्या है? पूर्वी यूरोप के एक विवाह सलाहकार ने कहा: “तलाक उस हालात पर बस कानूनी मुहर लगाता है, जो जोड़ों के बीच पहले ही उठ चुके थे, जैसे रिश्तों का टूटना, और फिर एक-दूसरे से अलग होना। ऐसे हालात से जूझना जज़बाती तौर पर बहुत ही मुश्किल होता है।” उसने यह भी कहा कि अकसर इसके बाद लोग, “अफसोस, निराशा, दुख, शर्मिंदगी और गुस्से जैसी ज़बरदस्त भावनाओं” का सामना करते हैं। कभी-कभी लोगों के मन में खुदकुशी करने का खयाल तक आने लगता है। “अदालत में तलाक हो जाने के बाद, तलाकशुदा व्यक्‍ति की ज़िंदगी की जैसे अगली कड़ी शुरू हो जाती है। उसे अकेलेपन और खालीपन की भावनाएँ आ घेरती हैं। वह सोचने लग सकता है: ‘तलाक हो जाने के बाद अब मेरी पहचान क्या रह गयी है? अब मेरी ज़िंदगी का मकसद क्या है?’”

एवा याद करती है कि उसे कुछ साल पहले कैसा महसूस हुआ था: “तलाक हो जाने के बाद जब मेरे पड़ोसी और साथ काम करनेवाले मेरे बारे में इस तरह कहते, ‘इनका तो तलाक हो चुका है,’ तो  मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती थी। मेरे दिल में नफरत भरी हुई थी। मेरे साथ मेरे दो बच्चे थे। अब मैं ही उनकी माँ और पिता थी।” * ऐडम, जो 12 साल से एक प्राचीन के तौर पर सेवा कर रहा था और जिसका सब उसका बहुत आदर करते थे, कहता है: “मैं अपनी ही नज़र में इस हद तक गिर गया हूँ कि कभी-कभी मैं गुस्से से भर जाता हूँ, और दिल करता है कि मैं किसी से कोई नाता न रखूँ।”

डाँवाडोल ज़िंदगी पर दोबारा संतुलन पाने के लिए संघर्ष

कुछ लोग अपने भविष्य को लेकर इस हद तक चिंता में डूबे हुए हैं कि वे अपनी डाँवाडोल ज़िंदगी पर दोबारा संतुलन पाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। कुछ तो तलाक के सालों बाद भी इस संघर्ष में जुटे हैं। नतीजा, वे सोचने लग सकते हैं कि दूसरों को उनमें कोई दिलचस्पी नहीं है। और-तो-और, एक अखबार की लेखिका कहती है कि अब उन्हें “अपनी आदतें बदलनी पड़ती हैं और अपनी समस्याओं से खुद ही जूझना सीखना पड़ता है।”

स्टेनीस्वाफ याद करके कहता है: “जब हमारा तलाक हुआ, तो मेरी पत्नी ने मुझे मेरी दो छोटी बेटियों से मिलने नहीं दिया। नतीजा, मुझे लगने लगा कि अब किसी को मेरी कोई परवाह नहीं, यहाँ तक कि यहोवा ने भी मुझे छोड़ दिया होगा। मुझमें जीने की इच्छा ही खत्म हो गयी। कुछ समय बाद, मुझे एहसास हुआ कि मेरी सोच कितनी गलत थी।” वांडा नाम की एक तलाकशुदा बहन भी अपने  भविष्य को लेकर चिंता में थी। वह कहती है: “मुझे पूरा यकीन था कि कुछ वक्‍त बाद लोग, यहाँ तक कि मंडली के भाई-बहन भी, मुझमें और मेरे बच्चों में कोई दिलचस्पी नहीं लेंगे। लेकिन अब मैं देख सकती हूँ कि उस वक्‍त भाइयों ने हमारा कितना साथ दिया और मेरी कितनी मदद की, जब मैं अपने बच्चों की परवरिश कर रही थी और उन्हें यहोवा के उपासक बनना सिखा रही थी।”

इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि तलाक के बाद कुछ लोगों को किस कदर निराश कर देनेवाली भावनाएँ आ घेरती हैं। शायद वे अपनी ही नज़र में गिर जाएँ और सोचने लगें कि उनका कोई मोल नहीं, कि वे दूसरों से प्यार पाने के लायक नहीं। इसके अलावा, हो सकता है वे दूसरों में नुक्स निकालने लगें। नतीजा, वे शायद सोचने लगें कि मंडली के भाई-बहन भी उनसे प्यार नहीं करते और उनके हालात को समझ नहीं सकते। लेकिन, स्टेनीस्वाफ और वांडा जैसे भाई-बहनों के अनुभव दिखाते हैं कि तलाकशुदा लोगों को आगे चलकर एहसास हो सकता है कि उनके भाई-बहन दिल से उनकी परवाह करते हैं। दरअसल, बहुत-से भाई-बहनों ने परवाह दिखाने में उम्दा मिसाल कायम की है, तब भी जब शुरू-शुरू में उनकी यह मदद लोगों को नज़र नहीं आयी।

जब अकेलेपन और ठुकराए जाने की भावनाएँ उठने लगती हैं

याद रखिए कि हमारी लाख कोशिशों के बावजूद, समय-समय पर तलाकशुदा भाई-बहनों को अकेलापन महसूस हो सकता है। खासकर तलाकशुदा बहनों को ऐसा लग सकता है कि ज़्यादातर लोगों को उनमें कोई दिलचस्पी नहीं। एलीट्स्या नाम की एक बहन कबूल करती है: “हमारा तलाक हुए आठ साल हो चुके हैं। लेकिन आज भी मैं कभी-कभी खुद को कमतर महसूस करती हूँ। जब ऐसा होता है, तो मैं अकेले रहना पसंद करती हूँ और खुद पर तरस खाकर रोने लगती हूँ।”

हालाँकि एक तलाकशुदा व्यक्‍ति में इस तरह की भावनाएँ उठना लाज़िमी है, लेकिन बाइबल हमें आगाह करती है कि हमें कभी भी दूसरों से अलग रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इस सलाह को ठुकराने से एक इंसान “सब प्रकार की खरी बुद्धि” के खिलाफ जा सकता है। (नीति. 18:1) इसके साथ-साथ जो भाई या बहन अकेलापन महसूस कर रहा है, उसे इस बात को समझना चाहिए कि अगर वह सलाह लेने या दिलासा पाने के लिए लगातार किसी विपरीत लिंग के सदस्य से बात करने की कोशिश करता रहे, तो वह खरी बुद्धि से काम नहीं ले रहा होगा। क्योंकि विपरीत लिंग के सदस्य से बात करते रहने से उसके दिल में उस व्यक्‍ति के लिए नाजायज़ रोमानी भावनाएँ पैदा हो सकती हैं।

हमारे तलाकशुदा भाई-बहनों को एक-के-बाद-एक कई भावनाओं से जूझना पड़ सकता है, जैसे भविष्य को लेकर चिंता, अकेलापन, यहाँ तक कि ठुकराए जाने की भावना भी। हम इस बात को मानते हैं कि उनका इस तरह महसूस करना आम बात है, और उनके लिए ऐसी भावनाओं पर काबू पाना बहुत मुश्किल है, इसलिए हमें यहोवा की मिसाल पर चलते हुए ऐसे भाई-बहनों का वफादारी से साथ देना चाहिए। (भज. 55:22; 1 पत. 5:6, 7) हम पूरा यकीन रख सकते हैं कि हम उन्हें जो भी मदद दें, वे उसकी बहुत कदर करेंगे। वाकई, वे पाएँगे कि मंडली में ही उनके सच्चे दोस्त हैं, जो उनकी मदद करने के लिए हरदम तैयार हैं।—नीति. 17:17; 18:24.

^ पैरा. 6 कुछ नाम बदल दिए गए हैं।