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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  जनवरी 2014

युग-युग के राजा यहोवा की उपासना कीजिए

युग-युग के राजा यहोवा की उपासना कीजिए

“युग-युग के राजा . . . का आदर और उसकी महिमा हमेशा-हमेशा के लिए होती रहे।”—1 तीमु. 1:17.

1, 2. (क) ‘युग-युग का राजा’ कौन है, और यह उपाधि उसके लिए बिलकुल सही क्यों है? (लेख की शुरूआत में दी तसवीर देखिए।) (ख) हम क्यों चाहते हैं कि यहोवा हम पर राज करे?

स्वाज़ीलैंड के राजा सोबुज़ा द्वितीय ने करीब 61 साल तक राज किया। आज के ज़माने में एक ही राजा का इतने सालों तक राज करना वाकई कमाल की बात है। लेकिन एक राजा ऐसा भी है जिसका राज इंसानों की तरह सिर्फ कुछ सालों तक सीमित नहीं है। दरअसल, बाइबल उसे ‘युग-युग का राजा’ कहती है। (1 तीमु. 1:17) भजन के एक रचयिता ने इस परमप्रधान राजा का नाम बताया। उसने ऐलान किया: “यहोवा अनन्तकाल के लिये महाराज है।”—भज. 10:16.

2 बेशक, परमेश्वर जिस तरह इतने लंबे समय से राज कर रहा है, यह बात उसके शासन को किसी भी इंसान के शासन से अलग ठहराती है। लेकिन जो बात हमें उसके करीब ले आती है, वह है उसके राज करने का तरीका। एक राजा, जिसने पुराने ज़माने में इसराएल पर 40 साल राज किया था, उसने कुछ इस तरह परमेश्वर की महिमा की: “यहोवा दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है। यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।” (भज. 103:8, 19) यहोवा सिर्फ हमारा राजा नहीं, बल्कि स्वर्ग में रहनेवाला हमारा पिता भी है, जो हमसे बेहद प्यार करता है। लेकिन यहोवा किस तरह पिता की तरह पेश आया है? अदन में हुई बगावत के बाद से यहोवा ने किस तरह यह ज़ाहिर किया है कि वह अब भी राजा है और दुनिया की बागडोर  उसके हाथ में है? इन सवालों के जवाब जानने से हमें यहोवा के और करीब आने और पूरे दिल से उसकी उपासना करने का बढ़ावा मिलेगा।

युग-युग का राजा एक विश्वव्यापी परिवार की शुरूआत करता है

3. यहोवा के विश्वव्यापी परिवार का पहला सदस्य कौन था? यहोवा ने और किन्हें अपने “पुत्र” के तौर पर रचा?

3 जब यहोवा ने अपने इकलौते बेटे की सृष्टि की, तब उसे कितनी खुशी हुई होगी! परमेश्वर अपने बेटे से इस तरह पेश नहीं आया मानो वह कोई तुच्छ प्राणी हो। इसके बजाए, उसने उससे वैसे ही प्यार किया जैसे एक पिता अपने बेटे से करता है। और यहोवा ने लाखों-करोड़ों सिद्ध स्वर्गदूत बनाने के शानदार काम में उसे हाथ बँटाने का न्यौता भी दिया। (कुलु. 1:15-17) बाइबल बताती है कि स्वर्गदूत खुशी-खुशी यहोवा की ‘इच्छा पूरी करते हैं।’ और यहोवा उन्हें अपने “पुत्र” कहकर उन्हें गरिमा से नवाज़ता है। वे यहोवा के विश्वव्यापी परिवार का हिस्सा हैं।—भज. 103:20-22; अय्यू. 38:7.

4. इंसान परमेश्वर के विश्वव्यापी परिवार का हिस्सा कैसे बना?

4 आकाश और धरती की सृष्टि करने के बाद, यहोवा ने अपने विश्वव्यापी परिवार को बढ़ाया। धरती को एक खूबसूरत घर की तरह तैयार करने के बाद, उसने सबसे पहले इंसान, आदम को अपने स्वरूप में बनाकर अपनी सृष्टि में चार चाँद लगा दिए। (उत्प. 1:26-28) आदम का रचयिता होने के नाते, यहोवा को यह उम्मीद करने का पूरा हक था कि आदम उसकी आज्ञा माने। और एक पिता होने के नाते, यहोवा ने बड़े प्यार और कोमलता से हिदायतें दीं। उसने उसे ऐसा कोई कानून नहीं दिया, जिससे बेवजह उसकी आज़ादी छिन जाए।—उत्पत्ति 2:15-17 पढ़िए।

5. धरती को इंसानों से आबाद करने के लिए परमेश्वर ने क्या इंतज़ाम किया?

5 ज़्यादातर इंसानी राजाओं के बिलकुल उलट, यहोवा अपनी प्रजा के साथ परिवार के सदस्यों की तरह पेश आता है। वह उन पर इतना भरोसा करता है कि उसे उन्हें बहुत-सी ज़िम्मेदारियाँ और अधिकार सौंपने में खुशी होती है। मिसाल के लिए, उसने आदम को धरती पर दूसरे सभी जीवित प्राणियों पर अधिकार सौंपा, यहाँ तक कि उसे जानवरों के नाम रखने का मज़ेदार और चुनौती-भरा काम भी दिया। (उत्प. 1:26; 2:19, 20) परमेश्वर ने धरती को आबाद करने के लिए खुद अपने हाथों से लाखों सिद्ध इंसानों को नहीं बनाया। इसके बजाय उसने एक सिद्ध स्त्री, हव्वा को बनाया, जो आदम की पत्नी बनी। (उत्प. 2:21, 22) फिर उसने इस जोड़े को यह मौका दिया कि वे पूरी धरती को अपने बच्चों से आबाद कर दें। अगर सबकुछ परमेश्वर की मरज़ी के मुताबिक होता, तो समय के चलते वे खूबसूरत बगीचे की सरहदें बढ़ाते हुए पूरी धरती को फिरदौस बना देते। फिर सभी इंसान स्वर्गदूतों के साथ मिलकर, एक ही परिवार के सदस्यों के तौर पर हमेशा तक यहोवा की उपासना कर पाते। आदम और हव्वा के आगे क्या ही सुनहरा मौका था! बेशक, यह यहोवा के पिता-समान प्यार का एक बेहतरीन सबूत था।

बगावती बेटे परमेश्वर की हुकूमत को ठुकराते हैं

6. (क) परमेश्वर के परिवार में बगावत कैसे शुरू हुई? (ख) हम कैसे कह सकते हैं कि बगावत के बाद भी दुनिया की बागडोर परमेश्वर के हाथ में थी?

6 दुख की बात है कि आदम और हव्वा ने यहोवा को अपना राजा मानने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, उन्होंने परमेश्वर के एक ऐसे आत्मिक बेटे, शैतान के पीछे हो लेने का चुनाव किया, जिसने परमेश्वर के खिलाफ बगावत की। (उत्प. 3:1-6) परमेश्वर की हुकूमत ठुकराने का यह नतीजा हुआ कि आदम और हव्वा खुद पर और अपने बच्चों पर भी तकलीफें, दर्द और मौत ले आए। (उत्प. 3:16-19; रोमि. 5:12) अब धरती पर परमेश्वर का एक भी आज्ञाकारी सेवक नहीं था। क्या इसका यह मतलब था कि अब दुनिया की बागडोर परमेश्वर के हाथ में नहीं रही? क्या उसने धरती और उस पर रहनेवालों पर हुकूमत करने के अपने अधिकार को त्याग दिया था? बिलकुल नहीं! यहोवा ने आदम और हव्वा को अदन के बाग से निकालकर ज़ाहिर किया कि दुनिया अब भी उसके काबू में है। यहाँ तक कि उसने करूबों को बाग के द्वार पर पहरा देने के लिए तैनात कर दिया, ताकि आदम और हव्वा वापस अंदर न आ सकें।  (उत्प. 3:23, 24) लेकिन इसके साथ-साथ उसने पिता जैसा प्यार भी दिखाया। उसने ज़ाहिर किया कि वफादार स्वर्गदूतों और इंसानों से मिलकर बने विश्वव्यापी परिवार को बसाने का अपना मकसद वह ज़रूर पूरा करेगा। कैसे? उसने वादा किया कि आदम का एक “वंश” शैतान का नाश करेगा और आदम के पाप से हुए नुकसान को हमेशा के लिए मिटा देगा।—उत्पत्ति 3:15 पढ़िए।

7, 8. (क) नूह के समय तक, इस दुनिया में बुराई किस हद तक बढ़ गयी थी? (ख) इस धरती पर से बुराई का सफाया करने और वफादार इंसानों को बचाए रखने के लिए यहोवा ने क्या इंतज़ाम किए?

7 इसके सैकड़ों साल बाद, हाबिल और हनोक जैसे कुछ लोगों ने यहोवा के वफादार बने रहने का चुनाव किया। लेकिन ज़्यादातर इंसानों ने यहोवा को अपना पिता और राजा मानने से इनकार कर दिया। नूह के समय तक, यह धरती “उपद्रव से भर गई थी।” (उत्प. 6:11) क्या इसका मतलब यह था कि अब इस धरती पर यहोवा का कोई काबू नहीं था? बाइबल क्या कहती है?

8 नूह के वाकए पर गौर कीजिए। यहोवा ने उसे एक विशाल जहाज़ बनाने की बारीक-से-बारीक जानकारी दी, जिससे कि उसकी और उसके परिवार की जान बच सके। नूह को “नेकी के प्रचारक” के तौर पर नियुक्‍त करके परमेश्वर ने इंसानों के लिए भी प्यार दिखाया। (2 पत. 2:5) बेशक, नूह ने लोगों को आनेवाले विनाश के बारे में पहले से खबरदार किया और उनसे कहा कि वे पश्‍चाताप करें, लेकिन उन्होंने उसकी बात पर ज़रा भी कान नहीं दिया। कई सालों तक, नूह और उसका परिवार हिंसक और बहुत ही अनैतिक दुनिया में जीया। यहोवा ने एक प्यार करनेवाले पिता की तरह, उन आठ वफादार लोगों की हिफाज़त की और उनका मार्गदर्शन किया। बगावत करनेवाले इंसानों और दुष्ट स्वर्गदूतों पर जलप्रलय लाकर यहोवा ने साबित किया कि यह दुनिया अब भी उसके काबू में थी।—उत्प. 7:17-24.

यहोवा ने हमेशा से ही साबित किया है कि वह इस विश्व का राजा है (पैराग्राफ 6, 8, 10, 12, 17 देखिए)

जलप्रलय के बाद यहोवा की हुकूमत

9. जलप्रलय के बाद यहोवा ने इंसानों को क्या मौका दिया?

9 जलप्रलय के बाद जब नूह और उसके परिवार ने साफ धरती पर पहला कदम रखा और ताज़ी हवा ली, तो बेशक उनका दिल यहोवा की परवाह और हिफाज़त के लिए कदरदानी से भर गया होगा। नूह ने तुरंत यहोवा की उपासना करने के लिए एक वेदी बनायी और उसे बलिदान चढ़ाए। परमेश्वर ने नूह और उसके परिवार को आशीष दी और उन्हें यह हिदायत दी, “फूलो-फलो, और बढ़ो, और पृथ्वी में भर जाओ।” (उत्प. 8:20–9:1) एक बार फिर, इंसानों के आगे यह मौका था कि वे मिलकर यहोवा की उपासना करें और धरती को आबाद करें।

10. (क) जलप्रलय के बाद यहोवा के खिलाफ बगावत कहाँ और कैसे शुरू हुई? (ख) यहोवा ने क्या कदम उठाया ताकि वह पक्का कर सके कि उसकी मरज़ी पूरी हो?

10 जलप्रलय ने धरती को तो साफ कर दिया, मगर इंसान की असिद्धता को नहीं। उन्हें अब भी शैतान और बगावती दुष्ट स्वर्गदूतों के असर का सामना करना था। नतीजा, परमेश्वर की प्यार-भरी हुकूमत के खिलाफ बगावत करनेवालों को उभरते देर नहीं लगी। मिसाल के लिए, नूह का पर-पोता निम्रोद यहोवा के खिलाफ बगावत को एक नए मुकाम तक ले गया। वह “यहोवा की दृष्टि [“के विरोध,” एन. डब्ल्यू.] में पराक्रमी शिकार खेलनेवाला” था। उसने बड़े-बड़े नगर बनाए, जैसे बाबेल और खुद “शिनार देश” का राजा बन बैठा। (उत्प. 10:8-12) अब युग-युग का राजा यहोवा इस विद्रोही राजा के खिलाफ क्या कदम उठाता, जो परमेश्वर के इस मकसद का विरोध कर रहा था कि इंसान ‘पृथ्वी में भर जाएँ’? परमेश्वर ने लोगों की भाषा में गड़बड़ी कर दी, जिससे निम्रोद का साथ देनेवाले “सारी पृथ्वी पर” फैल गए। वे जहाँ-जहाँ गए, वहाँ अपनी झूठी उपासना और हुकूमत करने का इंसानी तरीका साथ ले गए।—उत्प. 11:1-9.

11. यहोवा ने अपने दोस्त अब्राहम को वफादारी कैसे दिखायी?

11 हालाँकि जलप्रलय के बाद, कई लोग झूठे देवताओं की उपासना कर रहे थे, मगर कुछ ऐसे लोग भी थे, जो वफादारी से यहोवा की उपासना करने में लगे रहे। उनमें से एक था, अब्राहम। वह ऊर नाम के शहर में आराम की ज़िंदगी जी रहा था, मगर यहोवा की आज्ञा मानते हुए उसने वह शहर छोड़ दिया और कई सालों तक तंबुओं में रहा। (उत्प. 11:31; इब्रा. 11:8, 9) जब अब्राहम खानाबदोश की ज़िंदगी जी रहा था, तब उसने किसी इंसानी राजा या किसी शहरपनाह से मिलनेवाली हिफाज़त पर भरोसा नहीं किया।  इसके बजाए, उसकी और उसके परिवार की हिफाज़त यहोवा ने की। यहोवा जिस तरह एक पिता के जैसे हिफाज़त करता है, उस बारे में भजनहार ने लिखा: “परमेश्वर ने उस घराने को दूसरे लोगों से हानि नहीं पहुँचने दी। परमेश्वर ने राजाओं को सावधान किया कि वे उनको हानि न पहुँचाये।” (भज. 105:13, 14, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन) अपने दोस्त अब्राहम के लिए वफादारी दिखाते हुए यहोवा ने उससे वादा किया: “तेरे वंश में राजा उत्पन्न होंगे।”—उत्प. 17:6; याकू. 2:23.

12. (क) यहोवा ने कैसे ज़ाहिर किया कि उसके पास हुकूमत करने का मिस्रियों से कहीं ज़्यादा अधिकार था? (ख) इस पर इसराएलियों ने क्या किया और उन्हें कैसे फायदा हुआ?

12 परमेश्वर ने अब्राहम के बेटे इसहाक और पोते याकूब को एक बार फिर अपना वादा दोहराया कि वह उन्हें आशीष देगा और उनके वंशज राजा बनेंगे। (उत्प. 26:3-5; 35:11) लेकिन राजा बनने से पहले, याकूब के वंशज मिस्र में दास बने। क्या इसका यह मतलब था कि यहोवा अपना वादा पूरा नहीं करता, या उसने इंसानों पर हुकूमत करने के अपने अधिकार को त्याग दिया था? बिलकुल नहीं! अपने ठहराए वक्‍त पर, यहोवा ने यह ज़ाहिर किया कि वह कितना ताकतवर है और उसके पास हुकूमत करने का ज़िद्दी फिरौन से कहीं ज़्यादा अधिकार है। इसराएलियों ने यहोवा पर विश्वास किया और उसने लाल सागर के बीच से बड़े ही शानदार तरीके से उन्हें गुलामी से आज़ाद किया। इसमें कोई शक नहीं कि यहोवा अब भी इस पूरे जहान में परमप्रधान था और परवाह करनेवाले पिता के नाते, उसने अपनी असीम ताकत अपने लोगों की हिफाज़त करने के लिए इस्तेमाल की।—निर्गमन 14:13, 14 पढ़िए।

यहोवा इसराएल का राजा बनता है

13, 14. (क) इसराएलियों ने गीत में यहोवा के बारे में क्या ऐलान किया? (ख) परमेश्वर ने दाविद से क्या वादा किया?

13 यहोवा के ज़रिए हैरतअंगेज़ तरीके से छुड़ाए जाने के फौरन बाद, इसराएलियों ने विजय गीत गाकर यहोवा की महिमा की। यह गीत निर्गमन अध्याय 15 में दर्ज़ है, जिसकी आयत 18 कहती है: “यहोवा [“राजा के तौर पर,” एन.डब्ल्यू.] सदा सर्वदा राज्य करता रहेगा।” जी हाँ, यहोवा उस नए राष्ट्र का राजा बना। (व्यव. 33:5) लेकिन, लोग इस अदृश्य राजा से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए मिस्र छोड़ने के करीब 400 साल बाद, उन्होंने परमेश्वर से कहा कि वह उन्हें एक इंसानी राजा दे, ठीक जैसे झूठी उपासना करनेवाले उनके पड़ोसी देशों के थे। (1 शमू. 8:5) इसके बावजूद, यहोवा अब भी राजा था और यह बात इसराएल के दूसरे इंसानी राजा, दाविद की हुकूमत के दौरान साफ हो गयी।

14 दाविद करार का संदूक यरूशलेम ले आया। इस खुशी  के मौके पर लेवियों ने यहोवा की महिमा में एक गीत गाया, जिसमें ध्यान देनेवाली एक ज़रूरी बात थी, जो 1 इतिहास 16:31 में दर्ज़ है: “राष्ट्रों में ऐलान करो: ‘यहोवा राजा बना है!’” (एन.डब्ल्यू.) लेकिन कोई सोच सकता है, ‘यहोवा तो पहले से ही युग-युग का राजा है, तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि वह उस वक्‍त राजा बना?’ यहोवा तब राजा बनता है जब वह किसी ठहराए समय पर या किसी हालात से निपटने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करता है या किसी को अपना प्रतिनिधि नियुक्‍त करता है। यहोवा कैसे राजा बनता है यह समझना बहुत ज़रूरी है। दाविद की मौत से पहले, यहोवा ने उससे वादा किया कि उसका राज हमेशा तक कायम रहेगा: “मैं तेरे निज वंश को तेरे पीछे खड़ा करके उसके राज्य को स्थिर करूंगा।” (2 शमू. 7:12, 13) यह वादा तब पूरा हुआ जब 1,000 से ज़्यादा साल बाद दाविद का “वंश” आया। वह कौन था और वह कब राजा बना?

यहोवा एक नया राजा ठहराता है

15, 16. (क) भविष्य में होनेवाले राजा के तौर पर यीशु का अभिषेक कब किया गया? (ख) धरती पर रहते वक्‍त यीशु ने अपने राज की तैयारी करने के लिए क्या किया?

15 ईसवी सन्‌ 29 में, यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने यह प्रचार करना शुरू किया कि “स्वर्ग का राज पास आ गया [था]।” (मत्ती 3:2) जब यूहन्ना ने यीशु को बपतिस्मा दिया, तब यहोवा ने यीशु को मसीहा और भविष्य में होनेवाले परमेश्वर के राज के राजा के तौर पर अभिषेक किया। यहोवा ने यह कहकर यीशु के लिए पिता जैसा प्यार दिखाया: “यह मेरा प्यारा बेटा है। मैंने इसे मंज़ूर किया है।”—मत्ती 3:17.

16 धरती पर अपनी सेवा के दौरान, यीशु ने हमेशा अपने पिता की महिमा की। (यूह. 17:4) उसने परमेश्वर के राज का प्रचार करने के ज़रिए ऐसा किया। (लूका 4:43) उसने अपने चेलों को यह भी सिखाया कि वे उसके राज के आने के लिए प्रार्थना करें। (मत्ती 6:10) भविष्य में बननेवाले राजा की हैसियत से, यीशु अपने विरोधियों से कह सका: “परमेश्वर का राज तुम्हारे ही बीच है।” (लूका 17:21) बाद में, अपनी मौत से पहले की शाम, यीशु ने अपने प्रेषितों के साथ “राज के लिए करार” किया। इसका मतलब था कि उसके कुछ वफादार चेले, परमेश्वर के राज में उसके साथ मिलकर राज करते।—लूका 22:28-30 पढ़िए।

17. (क) पहली सदी में यीशु ने किस मायने में राज करना शुरू किया? (ख) मगर उसे किस बात का इंतज़ार करना था?

17 परमेश्वर के राज के राजा के तौर पर यीशु कब राज करना शुरू करता? वह अपने प्रेषितों के साथ करार करने के तुरंत बाद ऐसा नहीं कर सकता था। क्यों? क्योंकि उसकी अगली दोपहर, यीशु को मौत के घाट उतार दिया गया और उसके चेले तित्तर-बित्तर हो गए। (यूह. 16:32) लेकिन बीते ज़माने की तरह, दुनिया की बागडोर अब भी यहोवा के हाथ में थी। उसने यीशु को तीसरे दिन दोबारा जी उठाया और ईसवी सन्‌ 33 के पिन्तेकुस्त के दिन यीशु ने अपने अभिषिक्‍त भाइयों से बनी मसीही मंडली पर राज करना शुरू किया। (कुलु. 1:13) लेकिन वादा किए गए दाविद के “वंश,” यीशु को तब तक इंतज़ार करना था, जब तक कि उसे पूरी धरती पर राज करने का अधिकार नहीं दिया जाता। इसलिए यहोवा ने अपने बेटे से कहा: “तू मेरे दहिने हाथ बैठ, जब तक मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूं।”—भज. 110:1.

युग-युग के राजा की उपासना कीजिए

18, 19. (क) हमें क्या करने का बढ़ावा मिलता है? (ख) अगले लेख में हम किस बारे में सीखेंगे?

18 हज़ारों सालों से, स्वर्गदूतों और इंसानों ने यहोवा की हुकूमत के खिलाफ बगावत की है। लेकिन दुनिया की बागडोर हमेशा से ही यहोवा के हाथ में रही है। उसने कभी हुकूमत करने के अपने अधिकार को त्यागा नहीं है। प्यार करनेवाले पिता की तरह, उसने नूह, अब्राहम और दाविद जैसे अपने वफादार सेवकों की हिफाज़त की और उनके लिए परवाह दिखायी। क्या यह बात हमें नहीं उभारती कि हम अपने राजा की आज्ञा मानें और उसके और करीब आएँ?

19 पर हमारे मन में यह सवाल उठ सकता है: यहोवा आज हमारे दिनों में राजा कैसे बना है? हम यहोवा के राज की वफादार प्रजा और उसके विश्वव्यापी परिवार के सिद्ध बेटे कैसे बन सकते हैं? जब हम प्रार्थना करते हैं कि परमेश्वर का राज आए, तो इसका क्या मतलब है? अगले लेख में इन सवालों के जवाब दिए जाएँगे।