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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अक्टूबर 2015

 बाइबल क्या कहती है?

सबसे प्यार करना

सबसे प्यार करना

किसी और देश, जाति या भाषा के लोगों से प्यार करने और दूसरों की गलतियाँ माफ करने से आपस में शांति बनी रहती है। लेकिन क्या ऐसे प्यार की कोई हद है?

हम हर तरह के लोगों से प्यार कैसे कर सकते हैं?

हकीकत

आज दुनिया-भर में कई लोग जाति, देश या धर्म के आधार पर दूसरों से नफरत करते हैं। नफरत की यह आग सभी देशों में फैली हुई है।

बाइबल क्या कहती है

जब परमेश्वर का बेटा यीशु धरती पर था, तब भी हालात ऐसे ही थे। उस ज़माने में यहूदी और सामरी जाति के लोग एक-दूसरे से नफरत करते थे। (यूहन्ना 4:9) औरतों को नीची नज़र से देखा जाता था। यहूदी धर्म-गुरु आम लोगों से अपने आप को बहुत ऊँचा समझते थे। (यूहन्ना 7:49) लेकिन यीशु बिलकुल अलग था। उसके दुश्मनों ने उसके बारे में कहा, “यह आदमी पापियों को अपने पास आने देता है और उनके साथ खाता है।” (लूका 15:2) यीशु लोगों को सज़ा देने नहीं, बल्कि उन्हें परमेश्वर के बारे में बताने आया था। इसलिए वह सबके साथ अच्छे से पेश आता था, सब्र रखता था और किसी से नफरत नहीं करता था, क्योंकि उसके दिल में लोगों के लिए प्यार था।—यूहन्ना 3:17; 13:34.

यीशु सबसे प्यार करता था और वह लोगों को सज़ा देने नहीं, बल्कि उन्हें परमेश्वर के बारे में बताने आया था

और अगर हममें ऐसा ही प्यार होगा, तो हम भी लोगों की खामियों के बावजूद उनसे नफरत नहीं करेंगे। पवित्र शास्त्र में लिखा है, “अगर किसी के पास दूसरे के खिलाफ शिकायत की कोई वजह है, तो एक-दूसरे की सहते रहो और एक-दूसरे को दिल खोलकर माफ करो।”—कुलुस्सियों 3:13.

“सबसे बढ़कर, एक-दूसरे के लिए गहरा प्यार रखो, क्योंकि प्यार ढेर सारे पापों को ढक देता है।”1 पतरस 4:8.

 क्या हमारे प्यार की कोई हद होनी चाहिए?

हकीकत

सभी सरकारें चाहती हैं कि समाज में सबकुछ कायदे से हो, इसलिए वे लोगों के लिए कुछ हदें ठहराती हैं।

बाइबल क्या कहती है

प्यार “बदतमीज़ी से पेश नहीं आता।” (1 कुरिंथियों 13:5) हालाँकि यीशु सबसे प्यार करता था, लेकिन अगर लोग कपट करते थे या किसी और तरह के बुरे काम करते थे, तो वह उसे कभी बरदाश्त नहीं करता था। इसके बजाय वह सरेआम इस तरह के बुरे चालचलन को गलत ठहराता था। (मत्ती 23:13) एक बार उसने कहा “जो कोई बुराई करता है, वह [सच्चाई की] ज्योति से बैर रखता है।”—यूहन्ना 3:20.

यीशु के शिष्य, पौलुस ने लिखा, “बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।” (रोमियों 12:9) पौलुस ने खुद भी ऐसा ही किया। उदाहरण के लिए, एक बार यीशु की शिक्षाओं को माननेवाले यहूदियों ने उसके गैर-यहूदी शिष्यों से दूरियाँ बना लीं। तब पौलुस ने, जो खुद एक यहूदी था, उन्हें प्यार से लेकिन सख्ती से समझाया। (गलातियों 2:11-14) वह अच्छी तरह जानता था कि परमेश्वर “भेदभाव नहीं करता,” इसलिए वह कभी-भी अपने लोगों के बीच जाति-भेद बरदाश्त नहीं करेगा।—प्रेषितों 10:34.

यीशु के शिष्य होने के नाते, यहोवा के साक्षी बाइबल में बताए सही-गलत के स्तरों को मानते हैं। (यशायाह 33:22) इसलिए वे कभी-भी अपने बीच बुराई को बरदाश्त नहीं करते। जो लोग परमेश्वर के दिए स्तरों के हिसाब से नहीं चलते, वे यहोवा के साक्षी नहीं बने रह सकते। क्योंकि पवित्र शास्त्र में साफ-साफ बताया है कि “दुष्ट आदमी को अपने बीच से निकाल बाहर करो।”—1 कुरिंथियों 5:11-13.

“हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो।”भजन 97:10.

क्या परमेश्वर हमेशा के लिए बुराई को बरदाश्त करता रहेगा?

बहुत-से लोग मानते हैं

जब तक इस धरती पर इंसान है, बुराई तो रहेगी ही।

बाइबल क्या कहती है

पुराने ज़माने में हबक्कूक नाम के एक भविष्यवक्ता को उस वक्‍त दुनिया में हो रही बुराई की वजह से बहुत चिंता हो रही थी। उसने यहोवा परमेश्वर से प्रार्थना की, “क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे सामने लूट-पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वादविवाद बढ़ता जाता है।” (हबक्कूक 1:3) परमेश्वर ने उससे वादा किया कि वह बुरे लोगों से उनके कामों का हिसाब लेगा। परमेश्वर ने उसे इस बात का भी यकीन दिलाया कि उसने जो कहा है वह ‘निश्चय पूरा होगा और उस में देर न होगी।’—हबक्कूक 2:3.

लेकिन जब तक परमेश्वर ऐसा नहीं करता, बुरे काम करनेवालों के पास यह मौका है कि वे अपने बुरे कामों को छोड़ दें और खुद में सुधार लाएँ। यहोवा परमेश्वर कहता है, “क्या मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न होता हूँ? क्या मैं इससे प्रसन्न नहीं होता कि वह अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे?” (यहेजकेल 18:23) जो लोग बुरे काम छोड़ देते हैं और यहोवा के बताए रास्ते पर चलते हैं, वे इस बात का यकीन रख सकते हैं कि उनका भविष्य अच्छा होगा। पवित्र शास्त्र में बताया है कि परमेश्वर कहता है, “जो मेरी सुनेगा, वह निडर बसा रहेगा, और बेखटके सुख से रहेगा।”—नीतिवचन 1:33. ▪ (g15-E 08)

“थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं . . . परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएँगे।”भजन 37:10, 11.