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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  जुलाई 2015

 बाइबल क्या कहती है?

खून-खराबा

खून-खराबा

इंसानों का इतिहास खून-खराबे से भरा है। क्या यह सब हमेशा तक ऐसे ही चलता रहेगा?

खून-खराबे के बारे में परमेश्वर का क्या नज़रिया है?

लोग क्या कहते हैं

बहुत-से लोगों का, यहाँ तक कि कुछ धार्मिक लोगों का भी मानना है कि अगर कोई आपको भड़काए, तो मार-पीट या खून-खराबा करना जायज़ है। और लाखों लोग टीवी कार्यक्रमों और फिल्मों में दिखाए जानेवाले खून-खराबे को मनोरंजन का नाम देते हैं।

बाइबल क्या कहती है

उत्तरी इराक में मोसुल शहर के पास कुछ खंडहर हैं, जहाँ एक ज़माने में अश्शूर साम्राज्य की राजधानी, नीनवे हुआ करती थी। जब नीनवे एक फलता-फूलता शहर था, तभी पवित्र शास्त्र में यह भविष्यवाणी की गयी थी कि परमेश्वर “नीनवे को उजाड़” देगा। (सपन्याह 2:13) उस शहर के बारे में परमेश्वर ने कहा कि “मैं . . . सब से तेरी हँसी कराऊँगा।” लेकिन उसने ऐसा क्यों कहा? क्योंकि नीनवे एक “हत्यारी नगरी” थी। (नहूम 1:1; 3:1, 6) पवित्र शास्त्र में लिखा है कि “यहोवा तो हत्यारे . . . मनुष्य से घृणा करता है।” (भजन 5:6) नीनवे के खंडहर इस बात का सबूत हैं कि परमेश्वर अपने वादे का पक्का है।

परमेश्वर और इंसान के सबसे बड़े दुश्मन, शैतान ने ही खून-खराबे की शुरूआत की थी। यीशु मसीह ने उसे “हत्यारा” कहा था। (यूहन्ना 8:44) और क्योंकि “सारी दुनिया शैतान के कब्ज़े में पड़ी हुई है,” इसलिए आज दुनिया-भर में लोग खून-खराबा पसंद करते हैं, और टीवी-फिल्मों में दिखाए जानेवाली मार-पीट के दीवाने हो गए हैं। (1 यूहन्ना 5:19) लेकिन अगर हम परमेश्वर को खुश करना चाहते हैं, तो यह बेहद ज़रूरी है कि हम खून-खराबे से नफरत करें और उन बातों से प्यार करें, जिनसे परमेश्वर प्यार करता है। * क्या ऐसा करना मुमकिन है?

‘यहोवा उन से जो उपद्रव से प्रीति रखते हैं घृणा करता है।’भजन 11:5.

क्या खून-खराबा करनेवाले लोग बदल सकते हैं?

लोग क्या कहते हैं

खून-खराबा करना इंसानों के स्वभाव में है, जो कभी नहीं बदल सकता।

बाइबल क्या कहती है

पवित्र शास्त्र हमें बढ़ावा देता है कि हम ऐसी बातों से दूर रहें, जैसे “क्रोध, गुस्सा, बुराई, गाली-गलौज और मुँह से अश्‍लील बातें कहना।” पवित्र शास्त्र में यह भी लिखा है, “पुरानी शख्सियत को उसकी आदतों समेत उतार फेंको और सही ज्ञान के ज़रिए वह नयी शख्सियत पहन लो।” (कुलुस्सियों 3:8-10) यह जानकर क्या आपको ऐसा लगता है कि परमेश्वर आपसे बहुत ज़्यादा की उम्मीद कर रहा है? नहीं, ऐसा नहीं है। सच तो यह है कि लोगों का स्वभाव बदल सकता है। * लेकिन कैसे?

इसके लिए पहला कदम है, परमेश्वर के बारे में सही ज्ञान लेना। (कुलुस्सियों 3:10) जब एक नेकदिल इंसान  परमेश्वर के गुणों और स्तरों के बारे में सीखता है, तो उसके दिल में परमेश्वर के लिए प्यार बढ़ता है और वह उसे खुश करना चाहता है।—1 यूहन्ना 5:3.

दूसरा कदम है, हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम किस तरह के लोगों के साथ मेल-जोल रखते हैं। पवित्र शास्त्र में लिखा है, “क्रोधी मनुष्य का मित्र न होना, और झट क्रोध करनेवाले के संग न चलना, कहीं ऐसा न हो कि तू उसकी चाल सीखे, और तेरा प्राण फन्दे में फँस जाए।”—नीतिवचन 22:24, 25.

तीसरा कदम है, समझ से काम लेना। एक इंसान का हिंसा की तरफ झुकाव दिखाता है कि वह खुद पर काबू नहीं रख पाता, जो कि कमज़ोरी की निशानी है। दूसरी तरफ, शांति कायम करनेवाला इंसान अपनी भावनाओं को काबू में रख सकता है, इसलिए वह सही मायनों में मज़बूत होता है। पवित्र शास्त्र में लिखा है, “जो क्रोध पर नियन्त्रण [या काबू] रखता है, वह ऐसे मनुष्य से उत्तम होता है जो पूरे नगर को जीत लेता है।”—नीतिवचन 16:32, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन।

“सब लोगों के साथ शांति बनाए रखने में लगे रहो।”इब्रानियों 12:14.

क्या खून-खराबा कभी खत्म होगा?

लोग क्या कहते हैं

इस धरती पर हमेशा से खून-खराबा होता आया है, और हमेशा होता रहेगा।

बाइबल क्या कहती है

पवित्र शास्त्र में लिखा है, “थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं . . . परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएँगे।” (भजन 37:10, 11) जी हाँ, शांति से प्यार करनेवालों और नम्र लोगों को बचाने के लिए परमेश्वर उन सभी लोगों का नाश कर देगा, जो हिंसा से प्यार करते हैं, ठीक जैसे उसने सदियों पहले नीनवे शहर में किया था। उसके बाद खून-खराबे का नामो-निशान मिट जाएगा और धरती पर हमेशा-हमेशा के लिए शांति बनी रहेगी।—भजन 72:7.

“जो कोमल स्वभाव के हैं . . . वे धरती के वारिस होंगे।”—मत्ती 5:5

इसलिए अभी वक्‍त है कि हम सबके साथ शांति बनाए रखें, ताकि परमेश्वर की मंज़ूरी हम पर हो। पवित्र शास्त्र में लिखा है, “यहोवा . . . तुम्हारे मामले में सब्र दिखाता है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि कोई भी नाश हो बल्कि यह कि सब को पश्‍चाताप का मौका मिले।”—2 पतरस 3:9. ▪ (g15-E 05)

“वे अपनी तलवारें पीटकर हल के फाल और अपने भालों को हँसिया बनाएँगे।”यशायाह 2:4.

^ पैरा. 7 यह सच है कि पुराने ज़माने में परमेश्वर ने अपने लोगों, यानी इसराएलियों को अपने देश की रक्षा करने के लिए लड़ाई करने की इजाज़त दी थी। (2 इतिहास 20:15, 17) लेकिन जब इसराएली परमेश्वर के वफादार नहीं रहे, तो वे उसके खास लोग नहीं रहे और परमेश्वर ने पूरी दुनिया में मसीहियों को अपने लोगों के तौर पर चुन लिया। इसके बाद उसने अपने लोगों को युद्ध में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं दी।

^ पैरा. 11 प्रहरीदुर्ग पत्रिका में “ज़िंदगी सँवार देती है बाइबल” नाम की श्रृंखला में ऐसे कुछ लोगों के उदाहरण दिए गए हैं।