चुनौती

“मैं अपनी बड़ी बहन पर चिल्लायी और मैंने इतने ज़ोर से दरवाज़े को धक्का दिया कि उसके पीछे जो कील लगी थी, वह सीधे दीवार में घुस गयी। उस कील से जो छेद हुआ, वह मुझे बार-बार याद दिलाता था कि मैनें कितनी बचकानी हरकत की थी।”—डायना। *

“मैं अपने पापा पर चिल्लायी, ‘आप बहुत बुरे हो!’ और मैंने ज़ोर से दरवाज़ा बंद कर दिया। दरवाज़ा बंद होने से पहले मैंने देखा कि पापा को मेरी बात का कितना बुरा लगा और मैंने सोचा, काश! मैंने ऐसा नहीं बोला होता।”—लीना।

क्या आप भी डायना और लीना की तरह गुस्से से भड़क उठते हैं? अगर हाँ, तो इस लेख से आपको अपने गुस्से को काबू करने में मदद मिल सकती है।

आपको क्या मालूम होना चाहिए

गुस्से में आकर भड़क उठने से आपका नाम खराब हो सकता है। इक्कीस साल की भावना कहती है, “मैं सोचती थी कि मुझे गुस्सा आता है, तो मैं क्या करूँ? मैं तो ऐसी ही हूँ। लेकिन फिर मैंने देखा कि जब लोग अपना आपा खो बैठते हैं, तो दूसरे उन्हें किस नज़र से देखते हैं। फिर मुझे एहसास हुआ कि जब मैं दूसरों पर बरस पड़ती हूँ, तो लोग मेरे बारे में भी ऐसा ही सोचते होंगे।”

पवित्र किताब बाइबल में लिखा है, “जो झट क्रोध करे, वह मूढ़ता [या बेवकूफी] का काम भी करेगा।”—नीतिवचन 14:17.

जैसे लोग फूटते हुए ज्वालामुखी से दूर भागते हैं, वैसे ही लोग गुस्सा करनेवाले व्यक्‍ति से दूर भागते हैं

आपका गुस्सा लोगों को आपसे दूर कर सकता है। डैनियल, जो 18 साल का है, कहता है, “जब आप अपने गुस्से को काबू में नहीं रखते, तो आप दूसरों की नज़रों में गिर जाते हैं।” अठारह साल की ईशा का भी यही कहना है। वह कहती है, “गुस्सा दिखाने से लोग आपको पसंद नहीं करते, बल्कि आपसे डर जाते हैं।”

पवित्र शास्त्र में लिखा है, “क्रोधी मनुष्य का मित्र न होना, और झट क्रोध करनेवाले के संग न चलना।”—नीतिवचन 22:24.

आप सुधार कर सकते हैं। 15 साल की शैफाली कहती है, “यह बात हमेशा हमारे हाथ में नहीं होती कि हम किस हालात में कैसा महसूस करेंगे, लेकिन हाँ, उस हालत में आप क्या कहते हैं और कैसे कहते हैं, यह ज़रूर आपके हाथ में होता है। यह ज़रूरी नहीं कि आप गुस्से से भड़क उठें।”

पवित्र शास्त्र में लिखा है, “विलम्ब [या देर] से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है।”—नीतिवचन 16:32.

 आप क्या कर सकते हैं

एक लक्ष्य बनाइए। “मैं ऐसा ही हूँ” यह कहने के बजाय, एक समय तय कीजिए, जिसमें आप खुद में सुधार लाना चाहते हैं। आप चाहें तो इसके लिए 6 महीने का समय तय कर सकते हैं। उस दौरान अपनी तरक्की का रिकॉर्ड रखिए। जब कभी आप अपना आपा खो बैठते हैं, तब आप लिख सकते हैं: (1) क्या हुआ था, (2) आपने क्या कहा, या क्या किया, और (3) आप कैसे अच्छी तरह पेश आ सकते थे और क्यों। फिर अगली बार जब आपको किसी बात पर गुस्सा आए, तो आप भड़क उठने के बजाय, अच्छी तरह पेश आ सकते हैं, जैसा कि आपने सोचा था। इसे आज़माइए: जब भी आप अपने गुस्से पर काबू कर पाते हैं, तो इसे लिखिए! लिखिए कि गुस्से पर काबू पाने के बाद आपको कितना अच्छा लगा।—बाइबल सिद्धांत: कुलुस्सियों 3:8.

कुछ बोलने से पहले रुकिए। जब कोई व्यक्‍ति या कोई बात आपको गुस्सा दिलाती है, तो आपके दिमाग में जो सबसे पहले आता है, वह मत कहिए। इसके बजाय थोड़ा रुकिए और गहरी साँस लीजिए। पंद्रह साल का बंटी, कहता है कि “जब मैं गहरी साँस लेता हूँ, तो मुझे सोचने का समय मिलता है, ताकि मैं कुछ ऐसा न बोल दूँ या कर दूँ, जिसका मुझे बाद में अफसोस हो।”—बाइबल सिद्धांत: नीतिवचन 21:23.

मामले को दूसरों की नज़र से देखिए। हो सकता है कि आप इसलिए गुस्सा हो जाएँ, क्योंकि आप किसी बात के सिर्फ एक ही पहलू पर ध्यान दे रहे हैं, जिसका आप पर असर हुआ है। मामले के दूसरे पहलू पर भी गौर कीजिए। ज्योति नाम की लड़की कहती है कि “चाहे कोई कितनी भी बेरुखी से क्यों न पेश आए, मैं उनके साथ सब्र से पेश आने की कोशिश करती हूँ। क्योंकि मैं जानती हूँ कि उनके पास रुखाई से पेश आने की कोई-न-कोई वजह ज़रूर रही होगी।”—बाइबल सिद्धांत: नीतिवचन 19:11.

अगर बात झगड़े की तरफ बढ़ रही है, तो वहाँ से चले जाइए। पवित्र शास्त्र में लिखा है, “झगड़ा बढ़ने से पहले उसको छोड़ देना उचित है।” (नीतिवचन 17:14) इसका मतलब है कि जब हमें लगता है कि हालात बिगड़नेवाले हैं, तो कई बार वहाँ से चले जाना ही अच्छा होगा। फिर उस बारे में सोचते रहने के बजाय, जिससे कि आपका गुस्सा और भी बढ़े, बेहतर होगा कि आप खुद को किसी काम में लगाए रखें। दीपिका नाम की लड़की कहती है, “कसरत करने से मेरा गुस्सा ठंडा हो जाता है।”

माफ कर दीजिए। पवित्र शास्त्र में लिखा है कि जब आपको गुस्सा आए, तो “पाप मत करो; . . . मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो।” (भजन 4:4) इस बात से पता चलता है कि गुस्सा आना गलत नहीं है, लेकिन सवाल उठता है कि इसके बाद हम क्या करेंगे? राकेश नाम का एक लड़का कहता है कि “अगर कोई आपको गुस्सा दिलाए, और आप गुस्से से भड़क उठें, तो आप वही कर रहे होंगे, जो वह चाहता है। तो क्यों न आप समझदारी से काम लें और उन्हें माफ कर दें? अगर आप ऐसा करते हैं, तो आप अपने गुस्से को काबू में कर पाएँगे, बजाय इसके कि गुस्सा आपको अपने काबू में कर ले। ▪ (g15-E 01)

^ पैरा. 4 इस लेख में कुछ नाम बदल दिए गए हैं।