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यहोवा के साक्षी

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सजग होइए‍!  |  जनवरी 2015

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मानसिक रोग—क्यों जानें इस बारे में?

मानसिक रोग—क्यों जानें इस बारे में?

क्लोडीआ नाम की स्त्री कहती है कि जब उसे पता चला कि उसे बायपोलर डिसऑर्डर और पोस्ट-ट्रौमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर नाम की मानसिक बीमारियाँ हैं, तो मानो उसमें जान ही नहीं रह गयी। उसे लगा कि इस तरह की बीमारी के बारे में सुनकर न जाने लोग उसके बारे में क्या सोचेंगे। इस दौर से गुज़रना उसके लिए बहुत मुश्किल था।

क्लोडीआ के पति मार्क का कहना है, ‘मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मेरी पत्नी को यह बीमारी है। मुझे यह सच्चाई कबूल करने में काफी वक्‍त लगा। फिर मुझे एहसास हुआ कि मेरी पत्नी को अब और भी ज़्यादा मेरे सहारे और मदद की ज़रूरत है।

अगर आपको पता चलता है कि आपको या आपके किसी अपने को मानसिक रोग है, तो ज़ाहिर है आपको बहुत दुख होगा। लेकिन शुक्र है कि इस रोग का भी इलाज है। आइए इस बीमारी के बारे में कुछ बातों पर गौर करें। इससे आपको पता चलेगा कि मानसिक रोग क्या है और इससे कैसे छुटकारा पाएँ।

 मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कुछ सच्चाइयाँ

‘पूरी दुनिया में हज़ारों-लाखों लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं। इसका असर उनके अज़ीज़ों पर भी पड़ता है। देखा गया है कि हर चौथे इंसान को कभी-न-कभी मानसिक रोग होता है। दुनिया-भर में इस रोग की सबसे बड़ी वजह है, निराशा। बायपोलर डिसऑर्डर और स्किड्ज़ोफ्रीनीया बहुत गंभीर और खतरनाक मानसिक बीमारियाँ हैं। हालाँकि इतनी भारी तादाद में लोग मानसिक रोग की गिरफ्त में आ रहे हैं, फिर भी लोग इसे छिपाए रखते हैं या इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इस बीमारी के शिकार लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता।’—विश्व स्वास्थ्य संगठन।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मानसिक रोग के शिकार बहुत-से लोग इलाज करवाने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनके बारे में न जाने क्या सोचेंगे।

देखा जाए तो ज़्यादातर मानसिक रोगों का इलाज किया जा सकता है। फिर भी मानसिक रोग से जुड़ी एक संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अमरीका में 8 से 15 की उम्र के जिन बच्चों को मानसिक रोग था, उनमें से करीब 50 प्रतिशत बच्चों का इलाज नहीं करवाया गया। और 15 से ऊपर की उम्र के करीब 60 प्रतिशत लोगों का इलाज नहीं हुआ।

 मानसिक रोग क्या है?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब एक व्यक्‍ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी हालत को मानसिक रोग कहते हैं। मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोज़मर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है।

किसी को मानसिक रोग होने का कारण यह नहीं कि उसमें कोई दोष है

मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्‍ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ये इस बात पर निर्भर करते हैं कि उसके हालात कैसे हैं और उसे कौन-सी मानसिक बीमारी है। कुछ लोगों में इसके लक्षण लंबे समय तक रहते हैं और साफ नज़र आते हैं, जबकि कुछ लोगों में शायद थोड़े समय के लिए हों और साफ नज़र न आएँ। मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुज़ुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, या चाहे वह किसी भी संस्कृति, जाति, धर्म, या तबके का हो। किसी को मानसिक रोग होने का कारण यह नहीं कि उसमें कोई दोष है। अगर मानसिक रोगी अच्छी तरह अपना इलाज करवाए, तो वह ठीक हो सकता है। वह एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी जी सकता है।

मानसिक रोग का इलाज करवाएँ

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ज़्यादातर मानसिक बीमारियाँ ठीक कर सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि सबसे पहले आप एक अच्छे और अनुभवी डॉक्टर से जाँच करवाएँ।

जाँच के बाद रोगी को फायदा तभी होगा जब वह सही इलाज करवाए। इसका मतलब, उसे अपनी बीमारी के बारे में दूसरों से बात करने में झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए। इलाज करवाने के लिए शायद रोगी को एक अच्छे डॉक्टर से बात करनी पड़े। डॉक्टर उसे उसकी बीमारी के बारे में अच्छी तरह समझा सकते हैं। साथ ही, वह उसे रोज़मर्रा की समस्याओं से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक सलाह दे सकता है और इस बात की अहमियत समझा सकता है कि क्यों इलाज बीच में न छोड़ें। डॉक्टर से सलाह-मशविरा करते वक्‍त अच्छा होगा अगर परिवार का कोई सदस्य या दोस्त साथ में हो, ताकि वह बीमार व्यक्‍ति को सहारा और दिलासा दे सके।

बहुत-से लोगों ने जब अपनी हालत के बारे में अच्छी तरह जाना और फिर डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक इलाज करवाया, तो उन्हें अपनी बीमारी से लड़ने में काफी मदद मिली। क्लोडीआ के पति मार्क का कहना है, “जब हमें पता चला कि मेरी पत्नी को एक तरह का मानसिक रोग है, तभी हमें मालूम हुआ कि यह बीमारी है क्या। इससे पहले हमें इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी। अब हमने सीख लिया है कि कोई परेशानी आने पर कैसे हम उससे निपट सकते हैं और हालात के मुताबिक कैसे खुद को ढाल सकते हैं। इस दौरान हमें भरोसेमंद डॉक्टरों और अपने परिवार और दोस्तों से भी काफी मदद मिली।”

सबसे पहले एक अच्छे और अनुभवी डॉक्टर से जाँच करवाएँ

क्लोडीआ भी ऐसा ही महसूस करती है। वह कहती है, “जब मुझे बीमारी का पता चला, तो मुझे ऐसा लगा  जैसे मुझे जेल हो गयी हो। लेकिन धीरे-धीरे हमने सीख लिया कि जिन परेशानियों से निकलना नामुमकिन लगता है, दरअसल उनसे निकला जा सकता है। हाँ, यह सच है कि मेरी बीमारी की वजह से हम दोनों को कुछ मुश्किलें झेलनी पड़ी हैं। मैं अपनी बीमारी से लड़ने के लिए अपने डॉक्टरों की हिदायतें मानती हूँ और लोगों से मेल-जोल रखती हूँ। और मैं बहुत ज़्यादा चिंता नहीं करती।”

पवित्र शास्त्र की मदद लीजिए

पवित्र शास्त्र बाइबल ऐसा नहीं कहती कि उपासना से जुड़े काम करने से हमारी सेहत की समस्याएँ सुलझ जाएँगी। फिर भी बाइबल जो सिखाती है, उससे दुनिया-भर में बहुत-से परिवारों को काफी दिलासा और हिम्मत मिली है। उदाहरण के लिए, बाइबल हमें यकीन दिलाती है कि हमारा बनानेवाला हमसे बहुत प्यार करता है। वह खासकर उन लोगों की बहुत परवाह करता है, जिनका ‘मन टूट गया है’ और जो मानो खुद को ‘पिसा हुआ’ महसूस करते हैं।—भजन 34:18.

बाइबल कोई ऐसी किताब नहीं जिसमें बीमारियों का इलाज बताया गया हो। लेकिन इसमें दी व्यावहारिक सलाह लागू करने से हम मायूसी या निराशा से उबर सकते हैं और तनाव-भरे हालात का सामना कर सकते हैं। बाइबल हमें भविष्य की एक सुनहरी आशा देती है जब किसी तरह की बीमारी या दर्द नहीं रहेगा। यह वादा करती है, “तब अंधों की आँखें खोली जाएँगी और बहिरों के कान भी खोले जाएँगे; तब लंगड़ा [हिरन] की सी चौकड़ियाँ भरेगा और गूँगे अपनी जीभ से जयजयकार करेंगे।”—यशायाह 35:5, 6. (g14-E 12)

^ पैरा. 30 सजग होइए! यह सिफारिश नहीं करती कि किस तरह का इलाज बेहतर है। यहोवा के साक्षियों को ध्यान रखना चाहिए कि वे जिस तरह का इलाज करवाते हैं, वह बाइबल के सिद्धांतों के खिलाफ न हो।

^ पैरा. 38 मई 2014 की सजग होइए! में लेख “तनाव कम करने के तरीके” भी देखिए (अँग्रेज़ी)।