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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अप्रैल 2014

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कीमती वक्‍त—उसका सही खर्च

कीमती वक्‍त—उसका सही खर्च

“काश! मेरे पास थोड़ा और समय होता।” कितनी बार आपने ये शब्द खुद से कहे होंगे? समय सबके लिए एक-बराबर है, फिर चाहे कोई ताकतवर हो या अमीर, कमज़ोर हो या गरीब, कोई भी समय बाँधकर नहीं रख सकता। समय किसी के लिए नहीं रुकता और न ही बीता समय कभी लौटकर आता है। समझदारी इसी में है कि हम बचे हुए समय का अच्छा इस्तेमाल करें। लेकिन कैसे? आइए ऐसे चार तरीकों पर गौर करें, जिनसे कई लोगों को समय का सही इस्तेमाल करने में मदद मिली है।

पहला तरीका: व्यवस्थित होइए

ज़रूरी चीज़ों को पहले कीजिए। बाइबल सलाह देती है, “ज़्यादा अहमियत रखनेवाली बातें” पहचानिए। (फिलिप्पियों 1:10) हालात ध्यान में रखकर एक सूची बनाइए, जिसमें आप अहमियत रखनेवाले या जल्द-से-जल्द निपटानेवाले या फिर दोनों तरह के काम लिख सकते हैं। मिसाल के लिए, शायद खाने की तैयार करना अहमियत रखता हो, लेकिन उतना भी ज़रूरी नहीं कि उसे तुरंत करना पड़े। या फिर जल्द-से-जल्द टी.वी. प्रोग्राम की शुरूआत देखना ज़रूरी लगे लेकिन वह अहमियत रखनेवाला काम न हो। *

पहले से सोचिए। बाइबल की किताब सभोपदेशक 10:10 कहती है: “यदि कुल्हाड़ा [बेधार, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन] हो और मनुष्य उसकी धार को पैनी न करे, तो अधिक बल लगाना पड़ेगा।” लेकिन आयत आगे कहती है: “सफल होने के लिये बुद्धि से लाभ होता है।” सबक क्या है? हमें अपने कुल्हाड़े की धार तेज़ करने की ज़रूरत है यानी पहले से योजना बनाने की ज़रूरत है ताकि हम समय का पूरा-पूरा इस्तेमाल कर सकें। आप गैर-ज़रूरी कामों को छोड़ सकते हैं या फिर उन्हें बाद में कर सकते हैं, जिससे समय और ताकत दोनों बेवजह खर्च न हो। अगर आपने कोई काम तय समय से पहले कर लिया है, तो क्या आप बचे हुए समय में लिस्ट के मुताबिक कोई दूसरा काम शुरू कर सकते हैं? अगर हम पहले से ही योजना बनाएँगे तो ज़्यादा काम निपटा पाएँगे। यह ऐसा होगा जैसे एक कुशल कारीगर काम शुरू करने से पहले अपने कुल्हाड़े की धार तेज़ करता है।

ज़िंदगी को सादा बनाइए। उन कामों से दूर रहिए जो गैर-ज़रूरी हैं या फिर जिनमें ज़्यादा समय खर्च होता है। अगर हम एक साथ बहुत-से काम करें और कई लोगों से मिलने का वादा भी कर लें, तो बेवजह हम बोझ तले दब जाएँगे और हमारी खुशी भी छिन जाएगी।

 दूसरा तरीका: समय चुरानेवाले कामों से दूर रहिए

कामों को टालना और फैसला न ले पाना। “यदि कोई व्यक्‍ति पूरी तरह से उत्तम मौसम का इंतज़ार करता रहता है तो वह अपने बीज बो ही नहीं सकता है और इसी तरह कोई व्यक्‍ति इस बात से डरता रहता है कि हर बादल बरसेगा ही तो वह अपनी फसल कभी नहीं काट सकेगा।” (सभोपदेशक 11:4, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन) सबक क्या है? कामों को टालने से न सिर्फ हमारा समय बरबाद होता है, बल्कि इसका असर हमारे काम पर भी पड़ता है। एक किसान, जो सही मौसम के इंतज़ार में रहता है, वह शायद कभी बीज न बो पाए, न ही फसल काट पाए। उसी तरह, ज़िंदगी में हमारे साथ कुछ भी घट सकता है, यह सोचकर हम फैसला लेने से कतराएँ या शायद हम इंतज़ार करें कि जब हमारे पास विषय से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी होगी, तभी हम फैसला लेंगे। इसमें कोई शक नहीं कि ज़रूरी फैसले लेने से पहले हमें खोजबीन और पूछताछ करनी चाहिए। नीतिवचन 14:15 कहता है, “चतुर मनुष्य समझ-बूझ कर कदम रखता है।” (अ न्यू हिंदी ट्रांस्लेशन) लेकिन इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता कि ऐसे बहुत-से फैसले हैं, जिनमें हमें कुछ-न-कुछ नफा-नुकसान उठाना ही पड़ता है।—सभोपदेशक 11:6.

सिद्धता की उम्मीद करना। याकूब 3:17 कहता है: ‘जो बुद्धि स्वर्ग से [या परमेश्वर से] मिलती है, वह लिहाज़ दिखानेवाली होती है।’ खुद के लिए कुछ ऊँचे स्तर ठहराना अच्छी बात है। लेकिन कभी-कभी हम अपने स्तर इतने ऊँचे कर लेते हैं कि इनकी वजह से हमें निराशा और हार का सामना करना पड़ता है। मिसाल के लिए, एक व्यक्‍ति जो दूसरी भाषा सीख रहा है, उसे यह मानकर चलना चाहिए कि वह गलतियाँ करेगा और अपनी गलतियों से ही सीखेगा। वहीं, खुद से सिद्धता की उम्मीद रखनेवाला व्यक्‍ति शायद कभी न माने कि उससे कोई गलती हो सकती है। ऐसा रवैया उसकी तरक्की में बाधा डालता है। कितना अच्छा होगा अगर हम नम्रता दिखाते हुए खुद से उतनी ही उम्मीद करें जितनी हम कर सकते हैं। नीतिवचन 11:2 कहता है कि “नम्र लोगों में बुद्धि होती है।” जो व्यक्‍ति नम्र है और अपनी हदें पहचानता है वह खुद को ज़्यादा अहमियत नहीं देता और अकसर अपनी गलतियों पर हँस लेता है।

“असल में हम चीज़ों को पैसे से नहीं बल्कि समय से खरीदते हैं।”—लेखक और मनोवैज्ञानिक चालर्स स्पैत्ज़ैनो।

 तीसरा तरीका: संतुलन और सही नज़रिया रखिए

काम और मनोरंजन में संतुलन। ‘जो कुछ मुट्ठी भर तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट रहना अच्छा है बजाय इसके कि अधिकाधिक पाने की ललक में जूझते हुए वायु के पीछे दौड़ाते रहो।’ (सभोपदेशक 4:6, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन) एक व्यक्‍ति जिस पर काम का जुनून सवार रहता है, वह अपनी मेहनत के फल का मज़ा नहीं ले पाता। इस वजह से न उसके पास समय बचता है, न ही ताकत। वहीं दूसरी तरफ एक आलसी व्यक्‍ति, “मुट्ठी भर” आराम करने की वजह से अपना कीमती समय बरबाद कर देता है। बाइबल हमें काम के सिलसिले में संतुलित नज़रिया बनाए रखने का बढ़ावा देती है, मेहनत से काम करो और उसके फल का आनंद उठाओ। जब हम ऐसा करेंगे तो हमें वह खुशी मिलेगी जो “परमेश्वर का वरदान है।”—सभोपदेशक 5:19.

नींद में कटौती मत कीजिए। बाइबल का एक लेखक कहता है, “मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा।” (भजन 4:8) ज़्यादातर देखा गया है कि बड़ों को लगभग 8 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है, ताकि उन्हें शारीरिक, भावनात्मक और दिमागी तौर पर पूरी तरह आराम मिल सके। इसलिए कहा जा सकता है कि नींद, पूँजी का सही इस्तेमाल करने का एक तरीका है। यह हमें चीज़ों को याद रखने और सीखने की काबिलीयत बढ़ाने में मदद देती है। नींद में कटौती करने से हमारी सीखने की काबिलीयत कम हो सकती है, हमसे गलतियाँ हो सकती हैं, हममें चिढ़-चिढ़ापन आ सकता है, यहाँ तक कि हम दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं।

व्यवहारिक लक्ष्य रखिए। “आंखों से देख लेना मन के अभिलाषा करने से उत्तम है।” (सभोपदेशक 6:9, अ न्यू हिंदी ट्रांस्लेशन) इसका क्या मतलब है? एक बुद्धिमान व्यक्‍ति अपनी इच्छाओं को अपने जीवन पर हावी नहीं होने देता, खासकर उन इच्छाओं को जो कभी पूरी नहीं हो सकतीं। इसलिए वह लुभाए जानेवाले विज्ञापन या कर्ज़ के झाँसे में नहीं आता। इसके बजाय, वह उन चीज़ों में संतोष करना सीखता है जिन्हें वह हासिल कर सकता है, यानी ऐसी चीज़ें जो वह ‘[अपनी] आंखों से देखता’ है।

 चौथा तरीका: अच्छे सिद्धांतों से मार्गदर्शन पाइए

अपने सिद्धांतों की जाँच कीजिए। सिद्धांत आपको यह जाँचने में मदद देंगे कि कौन-सी बातें अच्छी, ज़रूरी और फायदेमंद हैं। मिसाल के लिए अगर हमारी ज़िंदगी एक तीर की तरह है, तो ये सिद्धांत उस तीर को सही दिशा में ले जाते हैं। अच्छे सिद्धांत ज़िंदगी में ज़रूरी चीज़ों को पहली जगह देने और समय का पूरा-पूरा फायदा उठाने में हमारी मदद करते हैं। ऐसे सिद्धांत हम कहाँ पा सकते हैं? कई लोग बाइबल की ओर ताकते हैं और इस बात को मानते हैं कि उसमें दी बुद्धि-भरी सलाह वाकई लाजवाब है!—नीतिवचन 2:6, 7.

प्यार के गुण को अहमियत दीजिए। कुलुस्सियों 3:14 कहता है, प्यार “पूरी तरह से एकता में जोड़नेवाला जोड़ है।” खासकर एक परिवार में बिना प्यार के न ही हम सच्ची खुशी पा सकते हैं, न ही जज़्बाती तौर पर सुरक्षित रह सकते हैं। जो लोग इस सलाह को अनसुना करते हैं, वे ज़िंदगी में धन-दौलत कमाने या करियर बनाने को ज़्यादा अहमियत देते हैं और इस तरह वे खुश रहने के बजाय दुखी हो जाते हैं। इसलिए बाइबल प्यार के गुण को बहुत अहमियत देती है और बार-बार इसका ज़िक्र करती है।—1 कुरिंथियों 13:1-3; 1 यूहन्ना 4:8.

आध्यात्मिक ज़रूरतें पूरी करने के लिए समय निकालिए। जैफ की मिसाल लीजिए, जिसके पास खुशहाल परिवार, पत्नी और दो बच्चे, अच्छे दोस्त, और बढ़िया नौकरी है। लेकिन फिर भी वह हर दिन, लोगों को तड़पता और मरता हुआ देखता था। इसलिए उसके मन में सवाल उठता कि “क्या ज़िंदगी का मकसद यही है?” एक दिन उसने यहोवा के साक्षियों के प्रकाशित कुछ बाइबल साहित्य पढ़े, जिनमें उसे अपने सवालों के तसल्ली-भरे जवाब मिले।

जैफ जो सीख रहा था उस बारे में, वह अपनी पत्नी और बच्चों को भी बताने लगा और वे भी दिलचस्पी लेने लगे। इस तरह उसके परिवार का आध्यात्मिक सफर शुरू हुआ, जिससे उनकी खुशी और बढ़ गयी और उन्हें अपना समय समझदारी से इस्तेमाल करने में मदद मिली। बाइबल पढ़ने से उन्हें हमेशा की ज़िंदगी की बेहतरीन आशा मिली, एक ऐसी दुनिया जहाँ मकसद भरी ज़िंदगी होगी और दुख-तकलीफें नहीं रहेंगी।—प्रकाशितवाक्य 21:3, 4.

जैफ की मिसाल हमें यीशु के कहे शब्द याद दिलाती है, “सुखी हैं वे जिनमें परमेश्वर से मार्गदर्शन पाने की भूख है।” (मत्ती 5:3) क्या आप अपनी आध्यात्मिक ज़रूरतें पूरी करने के लिए थोड़ा समय निकालते हैं? यकीन मानिए, यह एक ऐसी पूँजी है जो आपको ज़िंदगी का अच्छा इस्तेमाल करने की समझ देती है, न सिर्फ आज के लिए बल्कि पूरी ज़िंदगी के लिए। ▪ (g14-E 02)

^ पैरा. 5 अक्टूबर-दिसंबर 2009 की सजग होइए! में दिया लेख “वक्‍त का सही इस्तेमाल कैसे करूँ?” देखिए।