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यहोवा के साक्षी

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सजग होइए‍!  |  अक्टूबर 2013

 परिवार के लिए मदद | शादी का बंधन

एक-दूसरे को कैसे माफ करें

एक-दूसरे को कैसे माफ करें

चुनौती

जब आप और आपके साथी में बहस होती है, तो आप अकसर पिछली बातों का चिट्ठा बीच में ले आते हैं। और उन बातों को तभी सुलझाने के बजाय, झगड़े के लिए एक और नयी वजह बना देते हैं। इस समस्या की वजह? आपमें से एक या दोनों, एक-दूसरे को माफ करना न जानते हों।

आप सीख सकते हैं। पहले ये जानिए कि एक-दूसरे को माफ करना, पति-पत्नी को क्यों मुश्किल हो सकता है।

ऐसा क्यों होता है

ताकत। कुछ पति और पत्नी एक-दूसरे को माफ करने से पीछे हटते हैं क्योंकि वे अपने साथी पर अधिकार जमाना चाहते हैं। और जब बहस छिड़ती है तो वे पिछली बातों को ज़रिया बनाकर, एक-दूसरे पर रोब जमाते हैं।

नाराज़गी पालना। पिछली गलतियों के ज़ख्म भरने में काफी वक्‍त लग सकता है। एक साथी शायद कहे, ‘मैं तुम्हें माफ करता हूँ।’ लेकिन हो सकता है, एक-दूसरे की बराबरी करने के लिए साथी अपने अंदर गुस्सा पाल ले।

निराशा। कुछ लोग शादी इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि शादी फूलों की सेज है। लेकिन जब कोई मतभेद होता है तो वे यह सोचकर हैरानी में पड़ जाते हैं कि उनका चुना हुआ आदर्श साथी, कैसे उनसे बिलकुल अलग नज़रिए से सोच सकता है। हो सकता है कि वे एक-दूसरे से ऐसी उम्मीदें रखें जिनका पूरा होना नामुमकिन है। ऐसे में वे एक-दूसरे को माफ करने के बजाए, गलतियाँ ही ढूँढ़ते रहेंगे।

गलतफहमी। बहुत-से जोड़े एक-दूसरे को माफ करने से पीछे हटते हैं क्योंकि वे माफ करने का गलत मतलब निकालते हैं। मिसाल के लिए:

अगर मैं माफ करता हूँ, तो मैं गलती को कम आँक रहा हूँ।

अगर मैं माफ करता हूँ, तो जो कुछ हुआ मुझे उसे भूलना होगा।

अगर मैं माफ करता हूँ, तो मैं और मुसीबतों को न्यौता दे रहा हूँ।

सच तो ये है कि माफ करने का मतलब, किसी बात को छोड़ देना या भूल जाना नहीं है। फिर भी माफ करना मुश्किल लग सकता है, खास तौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में।

 आप क्या कर सकते हैं

ये समझना कि माफी में क्या शामिल है। बाइबल में कई बार शब्द “माफी” का मतलब “छोड़ देना” भी है। लेकिन माफी का मतलब ये नहीं कि जो हो गया है उसे भूल जाएँ या जो गलत हुआ है उसे कम आँके। कभी-कभी आपको अपनी और शादी-शुदा रिश्ते की भलाई के लिए मामलों को छोड़ देना चाहिए।

माफ न करने के अंजाम पहचानना। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बदला लेने की भावना आपको बहुत-सी शारीरिक और मानसिक बीमारियों के खतरे में डाल सकती है, जैसे, निराशा और हाई ब्लड प्रेशर। उससे भी बढ़कर ये आपकी शादी-शुदा ज़िंदगी बरबाद कर सकती है। इसलिए बाइबल एक कारगर सलाह देती है कि “एक-दूसरे के साथ कृपा से पेश आओ और कोमल-करुणा दिखाते हुए एक-दूसरे को दिल से माफ करो।”—इफिसियों 4:32.

माफ करने के फायदे पहचानिए। माफ करने की भावना आपको और आपके साथी को एक-दूसरे के इरादे पर शक करने से रोकती है, बजाय इसके कि एक-दूसरे की गलतियों का हिसाब रखें। और यही भावना आगे चलकर, आपकी शादी-शुदा ज़िंदगी में एक-दूसरे से बदला लेने से रोकेगी और प्यार को बढ़ने देगी।—बाइबल सिद्धांत: कुलुस्सियों 3:13.

हकीकत पहचानिए। माफ करना तब आसान होता है जब पति या पत्नी एक-दूसरे को, वे जैसे हैं वैसे ही अपना लेते हैं, यानी उनकी असिद्धताओं के साथ। किताब फाइटिंग फॉर यॉर मैरिज़ कहती है, “जब आपको मनचाही चीज़ें नहीं मिलतीं, तब आपके पास जो चीज़ें हैं उनकी अहमियत आपकी नज़रों में कम हो जाती है।” यह किताब आगे बताती है कि “शादी-शुदा ज़िंदगी के इस मुकाम पर आप किन चीज़ों पर ध्यान देना चाहेंगे।” याद रखिए कोई भी सिद्ध नहीं है, आप भी नहीं।—बाइबल सिद्धांत: याकूब 3:2.

लिहाज़ दिखाइए। अगली बार जब आपका साथी आपसे कुछ ऐसा कहे, जिससे आपको बुरा लगे, खुद से पूछिए कि ‘क्या हालात सचमुच गंभीर हैं? क्या मुझे माफी की माँग करनी चाहिए या मैं इसे नज़रअंदाज़ कर सकता हूँ?’—बाइबल सिद्धांत: 1 पतरस 4:8.

ज़रूरत पड़ने पर बातचीत कीजिए। प्यार से बताइए कि किस बात ने आपको चोट पहुँचायी या क्यों आप ऐसा सोचते हैं। एक-दूसरे के इरादे पर शक मत कीजिए और न ही अड़ियल बनिए। ऐसा करने से आप अपने साथी को सफाई देने पर मजबूर कर रहे होंगे। इसके बजाए, अपने साथी को खुलकर बताइए कि उसकी कौन-सी बात आपको बुरी लगी है। ▪ (g13-E 09)