‘इस समय टीवी पर पौराणिक गाथाओं और भूत-चुड़ैल के साथ नागिनों का बोलबाला है।’—बीबीसी हिंदी।

खूबसूरत जादूगरनी, हर उम्र के तांत्रिक और सुंदर पिशाच (वैम्पायर) आजकल किताबों-पत्रिकाओं में, फिल्मों में और वीडियो गेम में बहुत आम किरदार हो गए हैं। लोग इस तरह का मनोरंजन क्यों इतना पसंद करते हैं? *

हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के मुताबिक एक सर्वे से पता चलता है कि भारत में 46 प्रतिशत लोग भूतों में विश्‍वास करते हैं। हाल ही में लिए गए एक और सर्वे से पता चलता है कि ऐसे लोगों की गिनती बढ़कर अब 56 प्रतिशत हो गयी है। समाज विज्ञान के प्रोफेसर क्लॉड फिशर का कहना है कि अमरीका में नौजवान ज़्यादा तांत्रिकों से पूछताछ करते हैं, भूतों पर विश्‍वास करते हैं और यह मानते हैं कि फलाँ जगह भूतों का डेरा है। असल में ऐसे नौजवानों की गिनती बड़ों से दुगनी है।

इन सब वजह से भूत-प्रेतोंवाली कहानियाँ बहुत सुनने को मिल रही हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल अखबार में बताया गया है कि पिछले दशक में डरावना मनोरंजन खूब दिखाया जाने लगा था, इसलिए आजकल भूत-प्रेतों की कहानियाँ फिर से मशहूर हो गयी हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक लोग मानते हैं कि भूत होते हैं और कई संस्कृतियों की किताबों-पत्रिकाओं में भूतों के किस्से भरे पड़े हैं। समाज विज्ञान के प्रोफेसर क्रिस्टेफर बेडर और प्रोफेसर कार्सन मेंगकन ने अमरीका में एक सर्वे लिया, जिससे पता चलता है कि अमरीका में 70 से 80 प्रतिशत लोग जादू-टोने या भूत-प्रेत जैसी बातों पर बहुत विश्‍वास करते हैं।

क्या भूत-प्रेत या जादू-टोने से जुड़ा मनोरंजन सिर्फ मनोरंजन है या इसमें कोई खतरा है?

^ पैरा. 4 एक शब्दकोश के मुताबिक अलौकिक शक्‍ति उसे कहते हैं, जिसे विज्ञान या प्राकृतिक नियमों के आधार पर नहीं समझा जा सकता।