जब कोई आपको देखकर मुसकराता है, तो आप क्या करते हैं? आप भी मुसकराते होंगे और आपको अच्छा भी लगता होगा। बेशक दूसरों के चेहरे पर प्यारी-सी मुसकान देखकर हमारा दिल खुश हो जाता है और चेहरा भी खिल उठता है, फिर चाहे सामनेवाला हमारा दोस्त हो या एक अजनबी। मागडालेना नाम की एक स्त्री ने कहा, ‘मेरे पति गेयॉर्ग की बहुत प्यारी-सी मुसकान थी। जब हम एक-दूसरे को देखते थे, तो मुझे सुकून-सा मिलता था और मेरी सारी चिंता दूर हो जाती थी।’

जब एक इंसान दिल से मुसकराता है, तो इससे पता चलता है कि वह खुश है और उसे अच्छा लग रहा है। इंटरनेट पर ऑब्ज़र्वर नाम की एक पत्रिका बताती है कि ‘ऐसा लगता है कि मुसकराना हमारे स्वभाव में ही है।’ उसी पत्रिका में यह भी बताया गया है कि नए जन्मे बच्चे भी हमारा चेहरा देखकर समझ जाते हैं कि हम खुश हैं या नाराज़। उसमें यह भी लिखा था, “लोग दूसरों की मुसकराहट देखकर न सिर्फ यह भाँप लेते हैं कि उन्हें कैसा लग रहा है, बल्कि उसी हिसाब से उनके साथ व्यवहार भी करते हैं।” *

अमरीका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में खोजकर्ताओं ने कुछ बुज़ुर्ग मरीज़ों पर अध्ययन किया। उन्होंने ध्यान दिया कि देखभाल करनेवालों के चेहरे के भाव का बुज़ुर्गों पर कैसा असर होता है। जब देखभाल करनेवालों के चेहरों से प्यार, परवाह और हमदर्दी झलकती थी, तो बुज़ुर्ग खुश रहते थे और उनकी तबियत थोड़ी अच्छी रहती थी। वहीं जब उनके चेहरों  पर रूखापन होता था, तो बुज़ुर्गों की तबियत बिगड़ जाती थी।

जब हम मुसकराते हैं, तो हमें भी फायदा होता है। देखा गया है कि इससे हमारी खुशी और आत्म-सम्मान बढ़ जाता है और तनाव कम हो जाता है। वहीं उदास रहने या गुस्सा होने का उलटा असर होता है।

मुसकान ने ‘मेरा हौसला बढ़ा दिया’

आइए मागडालेना पर फिर से ध्यान दें, जो यहोवा की साक्षी थी। यह बात उस समय की है, जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। उसने और उसके परिवार के लोगों ने नात्ज़ी हुकूमत का साथ देने से इनकार कर दिया, इसलिए उन्हें जर्मनी के रावन्सब्रूक यातना शिविर भेज दिया गया। मागडालेना ने कहा, “कभी-कभी पहरेदार हमें दूसरे कैदियों से बातचीत करने से रोकते थे। लेकिन वे हमें मुसकराने से नहीं रोक सकते थे। अपनी माँ और बहन को मुसकराते देख मेरा हौसला बढ़ जाता था और मेरा इरादा और भी मज़बूत हो जाता था।”

हो सकता है कि ज़िंदगी की चिंताओं की वजह से आपका मुसकराने का दिल न करता हो। मगर याद रखिए कि हमारी भावनाओं पर हमारी सोच का काफी असर होता है। (नीतिवचन 15:15; फिलिप्पियों 4:8, 9) फिर क्यों न अच्छी बातों के बारे में सोचें? ऐसा करना हमेशा आसान नहीं होता, फिर भी जितना हो सके उन बातों के बारे में सोचिए, जो मन को खुशी देती हैं। * कई लोग बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने से अच्छी बातों के बारे में सोच पाए हैं। (मत्ती 5:3; फिलिप्पियों 4:6, 7) दरअसल शब्द “आनंद” और “खुशी” और इसी से मिलते-जुलते दूसरे शब्द बाइबल में सैकड़ों बार आए हैं। क्यों न हर दिन बाइबल के एक-दो पेज पढ़ें? क्या पता आपके चेहरे की मुसकान और बढ़ जाए!

दूसरों के मुसकराने का इंतज़ार मत कीजिए, बल्कि खुद पहल कीजिए। एक प्यारी-सी मुसकान देकर किसी का दिन खुशहाल बनाइए। आपकी मुसकान परमेश्वर की तरफ से दिया एक खूबसूरत तोहफा है। तो मुसकराइए, इससे आपको और दूसरों को भी फायदा होगा।

^ पैरा. 3 पवित्र शास्त्र में कहा गया है कि परमेश्वर भी एक मायने में मुसकराता है। भजन 119:35, फुटनोट में लिखा है, “तू अपने सेवक को देखकर मुस्कुरा।” यहाँ मुसकराने का मतलब है, परमेश्वर की मंज़ूरी।

^ पैरा. 8 1 अगस्त, 2005 की प्रहरीदुर्ग में दिया लेख, “खुशी पाने में बाइबल आपकी मदद कर सकती है” पढ़िए।