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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अंक 1 2016

 परिवार के लिए मदद | बच्चों की परवरिश

बच्चों की तारीफ कैसे करें

बच्चों की तारीफ कैसे करें

चुनौती

कुछ लोगों का कहना है कि बच्चों की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है कि हमेशा बच्चों की तारीफ करते रहने से वे बिगड़ जाते हैं और उन्हें लगता है कि वे जो चाहें, वह कर सकते हैं।

इस बात का ध्यान रखने के साथ-साथ कि आप बच्चों की कितनी तारीफ करते हैं, आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आप किस बात के लिए बच्चों की तारीफ करते हैं। किस तरह की तारीफ आपके बच्चे को अपना हुनर निखारने का बढ़ावा देगी? किस तरह की तारीफ से आपके बच्चा ऐसा नहीं करेगा? आप अपने बच्चे की किस तरह तारीफ कर सकते हैं, जिससे उसका हौसला बढ़े?

आपको क्या पता होना चाहिए?

तारीफ करना हमेशा अच्छा नहीं होता। ज़रा इन बातों पर ध्यान दीजिए।

हद-से-ज़्यादा तारीफ करना अच्छा नहीं है। बच्चों में आत्म-विश्वास बढ़ाने के लिए कई बार माता-पिता तारीफों के पुल बाँध देते हैं। लेकिन इस बारे में डॉक्टर डेविड वॉल्श ने अपनी किताब * में लिखा कि बच्चे बहुत समझदार होते हैं, वे झट-से समझ जाते हैं कि आप यूँ ही उनकी तारीफ कर रहे हैं और वे जानते हैं कि उन्होंने इस तारीफ के लायक कोई काम नहीं किया है इसलिए वे आपकी बात को हलके में लेने लगते हैं।

हुनर के लिए तारीफ करना अच्छा है। मान लीजिए कि आपकी बेटी चित्र बनाने में बहुत माहिर है। आप ज़रूर उसकी इस काबिलीयत की तारीफ करना चाहेंगे, ताकि वह अपनी कला में निखार लाए। लेकिन इस तरह तारीफ करने से उसका नुकसान भी हो सकता है। अगर आप सिर्फ उसकी इस काबिलीयत की तारीफ करें, तो उसे लग सकता है कि उसे सिर्फ ऐसे हुनर बढ़ाने के लिए मेहनत करनी चाहिए, जिन्हें वह आसानी से हासिल कर सकती है। हो सकता है कि वह कुछ नया सीखने से पीछे हट जाए, क्योंकि उसे लग सकता है कि वह ऐसा नहीं कर पाएगी। वह शायद सोचे, ‘मुझमें ऐसा करने की काबिलीयत नहीं है, तो फिर मैं इस हुनर को बढ़ाने के लिए मेहनत क्यों करूँ?’

मेहनत के लिए तारीफ करना उससे भी अच्छा है। जब आप सिर्फ अपने बच्चों की काबिलीयतों की नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और लगन की तारीफ करते हैं, तो वे एक बहुत ही अहम बात सीखते हैं और वह है कि हुनर बढ़ाने के लिए सब्र से काम लेना और मेहनत करना। बच्चों की परवरिश करने पर लिखी गयी एक किताब बताती है कि जब बच्चे यह बात समझ जाते हैं, तो वे कामयाब होने के लिए मेहनत करते हैं। किताब में यह भी बताया है कि मेहनत करने के बाद चाहे वे कामयाब न भी हों, तब भी वे खुद को नाकाबिल नहीं समझते, बल्कि इससे कुछ-न-कुछ ज़रूर सीखते हैं।

 आप क्या कर सकते हैं?

बच्चे की मेहनत की तारीफ कीजिए, न कि सिर्फ उसके हुनर की। अपने बच्चे से यह कहने के बजाय “शाबाश! तुम कितना अच्छा चित्र बनाते हो!” आप कह सकते हैं, “तुमने कितनी मेहनत से यह चित्र बनाया है।” दोनों ही तरीकों से आप अपने बच्चे की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन पहले तरीके से बच्चे को ऐसा लग सकता है कि जो काबिलीयतें उसमें पैदाइशी हैं, वह बस उन्हीं में माहिर हो सकता है और किसी चीज़ में नहीं।

जब आप अपने बच्चे की मेहनत के लिए तारीफ करते हैं, तो आप अपने बच्चे को सिखाते हैं कि वह अपने हुनर में और भी निखार ला सकता है। फिर शायद आपका बच्चा बिना घबराए नयी चीज़ें सीखने के लिए तैयार हो जाए।—पवित्र शास्त्र से उसूल: नीतिवचन 14:23.

चूक जाने पर बच्चे की हिम्मत बढ़ाइए। कई बार हुनरमंद लोग भी गलतियाँ कर जाते हैं। हो सकता है उनसे बार-बार गलतियाँ हो जाएँ। (नीतिवचन 24:16) लेकिन जब ऐसा होता है, तो वे उसे सुधारते हैं और अपनी गलतियों से सीखते हैं, ताकि आइंदा वे यह गलती न करें। आप क्या कर सकते हैं, ताकि आपका बच्चा भी ऐसा ही करे?

आपके बच्चे ने जो मेहनत की है, उसकी तारीफ कीजिए। मान लीजिए कि आप अपनी बेटी से अकसर कहते हैं, “गणित के सवाल तो तुम चुटकियों में सुलझा लेती हो!” लेकिन फिर वह एक दिन गणित की परीक्षा में फेल हो जाती है। ऐसे में उसे लग सकता है कि वह अपना हुनर खो चुकी है, इसलिए अब मेहनत करने का कोई फायदा नहीं है।

लेकिन अगर आप अपनी बेटी की मेहनत की तारीफ करें, तो वह सब्र से काम ले पाएगी और फेल हो जाने पर ऐसा नहीं सोचेगी कि सबकुछ खत्म हो गया है। वह हिम्मत नहीं हारेगी और कोई दूसरा तरीका अपनाएगी या फिर पहले से ज़्यादा मेहनत करेगी।—पवित्र शास्त्र से उसूल: याकूब 3:2.

बच्चे को सुधारने के लिए समझाइए। अगर आप सही तरीके से अपने बच्चे को उसकी गलती के बारे में बताएँगे, तो वह हिम्मत नहीं हारेगा। इसके अलावा अगर आप समय-समय पर सही वजह से उसकी तारीफ करते रहें, तो मुमकिन है कि वह आपकी बात मानेगा और खुद में सुधार लाएगा। फिर जब वह अच्छा करेगा, तो सब खुश होंगे।—पवित्र शास्त्र से उसूल: नीतिवचन 21:5. ▪ (g15-E 11)

^ पैरा. 8 उनकी किताब का नाम है, ‘ना’: हर उम्र के बच्चों को क्यों सुनने की ज़रूरत है और माता-पिता यह कैसे कह सकते हैं (अंग्रेज़ी)।