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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अंक 4 2016

 परिवार के लिए मदद | नौजवान

बदलते हालात का सामना कैसे करें?

बदलते हालात का सामना कैसे करें?

चुनौती

  • आपके पिताजी का तबादला हो गया है इसलिए आपके पूरे परिवार को कहीं और रहने के लिए जाना पड़ रहा है।

  • आपका प्यारा दोस्त कहीं और रहने के लिए जा रहा है।

  • आपके बड़े भाई या बहन की शादी हो रही है इसलिए अब वे अलग रहेंगे।

सोचिए अगर आपके साथ ऐसा हो, तो आप क्या करेंगे?

तूफान आने पर जो पेड़ झुक जाते हैं, वे टूटते नहीं। उसी तरह जब ज़िंदगी में तूफान जैसे हालात आते हैं, जिन पर हमारा कोई बस नहीं, तब अगर हम उन पेड़ों की तरह झुक जाएँ यानी हालात के मुताबिक खुद को ढाल लें, तो हम उनसे जूझ सकते हैं। हम यह कैसे कर सकते हैं? आइए पहले बदलते हालात के बारे में कुछ बातों पर ध्यान दें, जो हमें मालूम होनी चाहिए।

आपको क्या मालूम होना चाहिए?

हालात बदलते ही हैं। शास्त्र में इंसानों के बारे में एक बात लिखी है कि ‘सब संयोग के वश में है।’ (सभोपदेशक 9:11) आज नहीं तो कल, आपकी ज़िंदगी में कुछ बदलाव ज़रूर आएँगे। मगर सभी बदलाव बुरे नहीं होते। कुछ बदलाव शायद शुरू में अच्छे न लगें, पर आगे चलकर हमें उनसे फायदा होता है। एक बात सच है, वह यह कि ज़्यादातर लोगों को बदलाव पसंद नहीं होते, वे चाहते हैं कि उनकी ज़िंदगी में सबकुछ वैसा ही रहे। मगर जब उनकी ज़िंदगी में कोई बदलाव आता है, फिर चाहे वह अच्छा हो या बुरा, तो वे परेशान हो जाते हैं।

किशोर बच्चों के लिए बदलते हालात का सामना करना और भी मुश्किल होता है। अखिल * नाम का एक लड़का इसकी एक वजह बताता है। वह कहता है, “एक तो खुद आपके अंदर ही इतने बदलाव हो रहे हैं, ऊपर से और कुछ बदलाव हो जाएँ, तो परेशानी और बढ़ जाती है।”

इसकी एक और वजह है: घर के बड़ों के लिए हालात का बदलना कोई नयी बात नहीं है। जब भी ऐसा होता है, वे अपनी ज़िंदगी में हुए अनुभव से उसका सामना कर पाते हैं। लेकिन किशोर बच्चों की ज़िंदगी तो अभी शुरू ही हुई है, उन्हें इस तरह का कोई अनुभव नहीं होता।

आप हालात के मुताबिक खुद को ढालना सीख सकते हैं। कुछ किशोर बच्चों ने पहले ही हालात के मुताबिक खुद को ढालना सीखा है। ऐसे में जब कोई बदलाव आते हैं, तो वे आसानी से खुद को ढाल पाते हैं क्योंकि वे आनेवाली परेशानियों को पहले से ही भाँप लेते हैं और उस मुश्किल हालात में भी कुछ अच्छा ढूँढ़ लेते हैं। जिन बच्चों में ऐसी काबिलीयत होती है, वे परेशानी आने पर ड्रग्स या शराब लेना शुरू नहीं कर देते।

 आप क्या कर सकते हैं?

यह मान लीजिए कि हालात बदल गए हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आप ज़िंदगी अपने हिसाब से जीना चाहते हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं हो सकता। कभी-न-कभी दोस्तों की शादी हो जाएगी या वे कहीं और जाकर बस जाएँगे। आपके भाई-बहन बड़े होकर शायद कहीं और जाकर रहने लगें या फिर आपके परिवार को कहीं और जाकर बसना पड़े, जिस वजह से आपका शहर और दोस्त छूट जाएँ। नए हालात के बारे में सोचकर परेशान होने के बजाय अगर आप मान लें कि हालात बदल चुके हैं, तो आप आसानी से इनका सामना कर पाएँगे।—पवित्र शास्त्र से सलाह: सभोपदेशक 7:10.

आगे की ओर देखिए। बीती बातों के बारे में सोचना ऐसा है, मानो आप हाईवे पर गाड़ी चलाते वक्‍त सामने देखने के बजाय आईने में पीछे छूटी चीज़ें देख रहे हैं। कभी-कभी उस आईने में देखना अच्छा होता है, लेकिन गाड़ी चलाते वक्‍त ज़्यादातर आपको सामने देखना होता है। उसी तरह जब आपके हालात बदलते हैं, तो आगे की ओर देखिए। (नीतिवचन 4:25) जैसे, सोचिए कि आप अगले महीने या अगले 6 महीनों में क्या करेंगे?

अच्छी बातों पर मन लगाइए। लॉरा कहती है, “आप खुद को हालात के मुताबिक तभी ढाल पाएँगे, जब आप सही नज़रिया रखेंगे। हालात चाहे जैसे भी हों, उसमें अच्छी बात ढूँढ़िए।” क्या आप अपने नए हालात के बारे में एक अच्छी बात सोच सकते हैं?—पवित्र शास्त्र से सलाह: सभोपदेशक 6:9.

विनीता कहती है कि जब वह छोटी थी, तो उसके सारे दोस्त अलग-अलग जगह जाकर बस गए। वह कहती है, “मैं बहुत अकेला महसूस करती थी और सोचती थी कि काश सबकुछ पहले जैसा ही रहता। लेकिन अब मैं यह समझ पायी हूँ कि मैंने उन दिनों कुछ नया सीखा। मैं और समझदार बन गयी। मुझे एहसास हुआ कि बदलाव होना बहुत ज़रूरी है। मैं यह भी समझ पायी कि मेरे आस-पास ऐसे बहुत-से लोग हैं, जिनसे मैं दोस्ती कर सकती हूँ।”—पवित्र शास्त्र से सलाह: नीतिवचन 27:10.

बीती बातों के बारे में सोचना ऐसा है, मानो आप हाईवे पर गाड़ी चलाते वक्‍त आईने में पीछे छूटी चीज़ें देख रहे हैं

दूसरों के लिए कुछ कीजिए। शास्त्र में लिखा है, “हर एक सिर्फ अपने भले की फिक्र में न रहे, बल्कि दूसरे के भले की भी फिक्र करे।” (फिलिप्पियों 2:4) समस्या से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है दूसरों की मदद करना। सत्रह साल की अंजली कहती है, “जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मैंने देखा कि मैं जिस हालात से गुज़री थी, कुछ लोग वैसे ही हालात से या उससे भी बुरे हालात से गुज़र रहे हैं। उनकी मदद करके मुझे बहुत अच्छा लगता है।” ▪ (g16-E No. 4)

^ पैरा. 11 इस लेख में कुछ नाम बदल दिए गए हैं।